कुछ स्वास्थ्य समस्याएं पूरी तरह से अप्रत्याशित होती हैं, जो आपको प्रभावित करने से पहले कोई संकेत नहीं देतीं। आजकल जीवनशैली इतनी व्यस्त हो गई है, तो कोई भी व्यक्ति मानसिक व वित्तीय रूप से बीमारियों से निपटने के लिए तैयार नहीं है। इसी स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है हेल्थ इन्शुरन्स, जो मेडिकल इमरजेंसी में आपको वित्तीय मदद देता है। यदि कोई गंभीर रूप से बीमार है तो उसे कई दिनों तक अस्पताल में रखा जाता है, जिस प्रोसेस को हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है। अधिकतर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां हॉस्पिटलाइजेशन पर मेडिकल कवरेज देती हैं।

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वैसे तो हॉस्पिटलाइजेशन प्रोसेस को विभिन्न प्रकारों में बांटा गया है, लेकिन इसके प्रमुख दो प्रकार हैं जिन्हें प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन और इमर्जेंसी हॉस्पिटलाइजेशन के नाम से जाना जाता है। प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन वह है, जिसमें आप अपनी या डॉक्टर की इच्छा के अनुसार समय का चुनाव करके अस्पताल में भर्ती होते हैं, जबकि इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन वह है जिसमें किसी गंभीर रोग या दुर्घटना के कारण अचानक से अस्पताल में भर्ती होना पड़े। इस लेख में हम जानेंगे कि हेल्थ इन्शुरन्स में प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन क्या है, तो चलिए आगे बढ़ते हैं -

  1. प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन क्या है - What is Planned Hospitalization in Hindi
  2. क्या हेल्थ इन्शुरन्स में प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन को कवर किया जाता है - Is Planned Hospitalization covered in health insurance in Hindi
  3. प्लान हॉस्पिटलाइजेशन के लिए क्लेम कैसे प्राप्त करें - How to get claim for Plan Hospitalization in Hindi

प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन के मामलों में आप डॉक्टर के साथ बात करके एक निश्चित तारीख निर्धारित करते हैं, जिस दिन आपको अस्पताल में एडमिट होना है। सरल भाषा में कहें तो जब किसी बीमारी या सर्जरी आदि के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले आपके पास पर्याप्त समय हो अर्थात् आपको जल्द से जल्द अस्पताल में एडमिट होने की जरूरत न हो। उदाहरण के तौर पर यदि आपको हर्निया है, जिससे अभी तक आपको दर्द नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपको एक निश्चित समय के भीतर (जैसे कि कुछ हफ्ते) सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस प्रकार अस्पताल में एडमिट होने से पहले आपके पास पर्याप्त समय है, जिसे प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है।

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यदि आप किसी बीमारी या सर्जरी के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की योजना बना रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि हॉस्पिटलाइजेशन को आपके हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में कवर किया जा रहा है या नहीं। वैसे इस बारे में पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है, क्योंकि हर बीमाकर्ता कंपनी के अपने अलग प्लान होते हैं। अगर देखा जाए तो अधिकतर स्वास्थ्य बीमा प्रदाता कंपनियां प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन को कवर करती हैं। लेकिन, यह प्रमुख रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस बीमारी के लिए एडमिट हो रहे हैं।

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यदि आप किसी ऐसी मेडिकल समस्या के लिए अस्पताल में एडमिट होने की योजना बना रहे हैं, जिन्हें आपके हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में कवर नहीं किया जा रहा है तो फिर प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन का मेडिकल खर्च आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर अधिकतर बीमाकर्ता कंपनियां पहले से मौजूद बीमारियां व कॉस्मेटिक सर्जरी आदि को अपने प्लान में कवर नहीं करती हैं और इनसे संबंधित प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन को भी कवरेज नहीं दी जाती है।

इसके विपरीत यदि आपको कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या हो गई है, जिसे आपके स्वास्थ्य बीमा प्लान में कवर किया जा रहा है, तो आप प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन पर कवरेज प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही कुछ कंपनियां अपने नेटवर्क के अस्पताल में ही आपको प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन पर कवरेज प्रदान करती हैं और यदि आप नेटवर्क से बाहर के अस्पताल में एडमिट होते हैं तो मेडिकल खर्च आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है।

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जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन में कवरेज सिर्फ तब ही मिल पाती है, जब मेडिकल समस्या प्लान में शामिल हो। इसके बाद अब आपको जानना चाहिए कि यदि बीमाकर्ता कंपनी आपको कवरेज दे रही है, तो उसको क्लेम करने का प्रोसेस क्या है। नीचे कुछ पॉइंट्स के माध्यम से बताया गया है कि प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन से पहले क्या करना चाहिए -

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  • सबसे पहले अपने सभी बीमा दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें या कस्टमर केयर नंबर पर बात करके बीमाकर्ता कंपनी के नेटवर्क के अस्पतालों का पता लगाएं।
  • जब आप अपनी सुविधा के अनुसार नेटवर्क अस्पताल चुन लेते हैं, तो आपको एक प्री-ऑथोराइजेशन फॉर्म भरना होता है। इस फॉर्म को आप अस्पताल के टीपीए डेस्क से प्राप्त कर सकते हैं या फिर आप टीपीए वेबसाइट से डाउनलोड भी कर सकते हैं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि प्री-ऑथोराइजेशन फॉर्म का पहला पेज आपके द्वारा भरा जाना है, जबकि दूसरा डॉक्टर के लिए होता है।
  • बीमा के सभी दस्तावेजों को संभाल कर रखें, बल्कि उनकी कॉपी बनवा लें ताकि एक किसी कारणवश गुम हो जाने पर आपको परेशानी न हो। क्लेम रिकवेस्ट डालते समय आपको सभी दस्तावेज बीमाकर्ता कंपनी को दिखाने पड़ जाते हैं। साथ ही क्लेम रिकवेस्ट फॉर्म भरते समय भी ध्यान रखें और कोशिश करें कि कोई गलती न हो।
  • इसके बाद फॉर्म को टीपीए के पास भेज दिया जाता है, जहां पर उसे स्वीकृति या अस्वीकृति मिलती है।
  • यदि आपकी एप्लीकेशन स्वीकार हो जाती है, तो टीपीए ऑथोराइजेशन लेटर को आपके द्वारा चुने गए अस्पताल में भेज देता है। इस लेटर में स्वीकृत राशि का विवरण होता है, जिसे आपके इलाज के लिए दिया जाना है।

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