आजकल सबके लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदना जितना जरूरी हो गया है उतना ही जरूरी हेल्थ इन्शुरन्स व उसके फीचर के बारे में जानना है। यदि आप कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने जा रहे हैं, तो सबसे पहले उसके इन्क्लूजन, एक्सक्लूजन और अन्य सभी फीचर जान लें। ऐसा करना बहुत जरूरी है क्योंकि फीचर जितने ज्यादा होंगे प्रीमियम भी उतना ही बढ़ जाता है, जो आपको अपनी जेब से भरना पड़ता है। सरल भाषा में कहा जाए तो आपको सिर्फ उन फीचर के लिए प्रीमियम भरना चाहिए, जिनकी आपको जरूरत है। हालांकि, कुछ ऐसे फीचर भी हैं जिनके बारे में लोगों को बहुत ही कम पड़ता होता है। इनमें से एक है सुब्रोगेशन।

सुब्रोगेशन का हिन्दी में मतलब प्रत्यावर्तन होता है बीमा में इस शब्द का इस्तेमाल एक अधिकार के रूप में करती है, जिसकी मदद से वह क्षति का कारण बनने वाले तीसरे व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स के मामलों में इसकी परिभाषा थोड़ी बदल जाती है, जिसके बारे में आपको इस लेख में बताया गया है। इसके साथ-साथ इस आर्टिकल में आप यह भी जान पाएंगे कि सुब्रोगेशन कैसे काम करता है।

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  1. ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में सुब्रोगेशन क्या है
  2. सुब्रोगेशन के कितने प्रकार हैं
  3. ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में सुब्रोगेशन का उद्देश्य क्या है
  4. सुब्रोगेशन में बीमित व्यक्ति को क्या अधिकार मिलते हैं

सुब्रोगेशन एक कानूनी अधिकार है, जिसे बीमित व्यक्ति द्वारा बीमाकर्ता कंपनी को दिया जाता है। इस अधिकार की मदद से बीमाकर्ता कंपनी उस तीसरे व्यक्ति (या कंपनी/संस्था) से कानूनी रूप से क्लेम मांगती है, जो क्षति का कारण बना है। हालांकि, समूह स्वास्थ्य बीमा की स्थितियों में सुब्रोगेशन थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। इसमें कंपनी की पॉलिसी के अनुसार पहले बीमित व्यक्ति को क्लेम के रूप में राशि दे दी जाती है और उसके स्वस्थ होने के बाद बीमारी या चोट आदि के बारे में पूछताछ की जाती है।

यदि बीमित व्यक्ति के अनुसार उसे हुई मेडिकल समस्या किसी तीसरे व्यक्ति के कारण हुई है, तो बीमित व्यक्ति की सहमति के अनुसार तीसरे व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। सीधे शब्दों में कहें तो ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में सुब्रोगेशन एक ऐसा विचार या संकल्पना के रूप में काम करता है, जिसकी मदद से बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति की सहमति से मेडिकल क्षति का कारण बनने वाले तीसरे व्यक्ति से पैसे लेती है या फिर कानूनी कार्रवाई करती है।

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सुब्रोगेशन मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, जो निम्न हैं -

  • इक्वेटेबल सुब्रोगेशन -
    यह इन्शुरन्स पॉलिसियों के सबसे मुख्य हिस्सों में से एक है, जिसमें बीमा कंपनी उस व्यक्ति से पैसे वसूल करती है, जिसके कारण बीमाधारक को नुकसान हुआ है। हालांकि, किसी भी प्राकृतिक आपदा या महामारी जैसी स्थितियों में सुब्रोगेशन काम नहीं करता है, क्योंकि इन स्थितियों को “एक ऑफ गॉड” की श्रेणी में रखा जाता है।
     
  • कॉन्ट्रैक्चुअल सुब्रोगेशन -
    इसे कॉन्वेंशनल सुब्रोगेशन के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें थर्ड पार्टी पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए बीमाकर्ता कंपनी को बीमाधारक व्यक्ति की जगह पर खड़ा होना पड़ता है। ऐसे में कई बार बीमित व्यक्ति यह जारी नहीं रखना चाहता है और इन्शुरन्स कंपनी थर्ड पार्टी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकती है।
     
  • स्टैचूटरी सुब्रोगेशन -
    यह इक्वेटेबल और कॉन्ट्रैक्चुअल सुब्रोगेशन से अलग है, क्योंकि इसमें बीमाकर्ता कंपनी को उसके द्वारा भुगतान की गई क्लेम राशि नहीं मिलती है। इस स्थिति में बीमित व्यक्ति और थर्ड पार्टी कंपनी को शामिल किए बिना ही आपस में समझौता करके क्षतिपूर्ति कर लेते हैं। यह प्रक्रिया काफी सीधी और सरल होती है और इसमें बीमा कंपनी की कोई भूमिका नहीं होती है।

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सुब्रोगेशन मुख्य रूप से बीमाकर्ता कंपनी के लिए काम करता है। इसकी मदद से बीमा कंपनी मेडिकल खर्च पर दिए गए उस क्लेम के पैसे वापस प्राप्त करती है, जो मेडिकल क्षति किसी तीसरे व्यक्ति के कारण हुई है। कंपनी द्वारा बीमित व्यक्ति को दिया गया क्लेम कंपनी तीसरे व्यक्ति से वसूलती है। यदि सरल भाषा में कहें तो सुब्रोगेशन का मुख्य उद्देश्य थर्ड पार्टी की गलती के कारण हुई मेडिकल क्षति पर कवरेज के रूप में किए गए भुगतान या क्लेम की राशि की प्रतिपूर्ति करना है।

एक उदाहरण के रूप में भी ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में सुब्रोगेशन के उद्देश्य को समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी अन्य व्यक्ति की गलती के कारण आपको चोट लग जाती है, तो इस दौरान कंपनी मेडिकल इलाज के लिए क्लेम के रूप में राशि दे देती है। इसके बाद उस व्यक्ति से कानूनी रूप से पैसे वसूल किए जाते हैं, जिसकी गलती के कारण आपको चोट लगी थी। सुब्रोगेशन में आमतौर पर सड़क दुर्घटना के मामले अधिक देखे जाते हैं।

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कोई मेडिकल समस्या होने पर जब इन्शुरन्स कंपनी बीमित व्यक्ति को क्लेम राशि का भुगतान कर देती है। ऐसा होने के बाद बीमित व्यक्ति तीसरे व्यक्ति से क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने या उसके लिए कानूनी कार्रवाई करने के सारे अधिकार छोड़ देता है। हालांकि, इन्शुरन्स कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति के लिए दी गई क्लेम राशि तीसरे व्यक्ति से प्राप्त करने लिए कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

सुब्रोगेशन एक्ट के अनुसार बीमा कंपनी तीसरे व्यक्ति से सिर्फ इतनी ही राशि प्राप्त कर सकती है, जितने का उसने क्लेम राशि के रूप में भुगतान किया है। हालांकि, यदि बीमा कंपनी थर्ड पार्टी से क्लेम राशि से भी ज्यादा पैसे प्राप्त करती है, तो ऊपर की राशि उसे पॉलिसीधारक को ही देनी पड़ती है। वहीं अगर थर्ड पार्टी से प्राप्त हुए पैसे क्लेम राशि से भी कम है, तो बीमा कंपनी बाकी की राशि बीमाधारक व्यक्ति से प्राप्त नहीं कर सकती है।

सीधे शब्दों में कहें तो यदि थर्ड पार्टी के कारण किसी बीमाधारक को स्वास्थ्य संबंधी क्षति हुई है, तो भी उसे अपनी जेब से भुगतान करने की जरूरत नहीं हैं। वहीं अगर थर्ड पार्टी क्लेम राशि से भी ज्यादा पैसों का भुगतान करती है, तो बाकी की राशि भी पॉलिसीधारक को ही मिलती है।

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