कोरोना महामारी के चलते जब सारे बिजनेस ठप्प पड़ गए थे, तो देश की जीडीपी लगभग 24 प्रतिशत तक गिर गई थी। कुछ शोधों के अनुसार दुनिया के सभी देशों की तुलना में भारत की जीडीपी सबसे अधिक प्रभावित हुई थी। इसी बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया ब्रीफिंग में इसे “एक्ट ऑफ गॉड” बता दिया था। जिसके बाद यह शब्द काफी चर्चित व भी हुआ था। कुछ लोगों ने इस पर सवाल भी खड़े किए थे।

इससे पहले जिन लोगों को एक्ट ऑफ गॉड के बारे में पता नहीं था, उन्होंने भी इस बारे में जानकारी लेना शुरू कर दिया था। यदि आप एक बीमाधारक हैं, तो आपको इस शब्द के बारे में जानकारी होगी। हालांकि, यदि आपको इसके बारे में जानकारी नहीं है और आप एक बीमाधारक हैं या फिर बीमा खरीदने की सोच रहे हैं तो यह जानना काफी जरूरी हो सकता है। इस लेख में हम एक्ट ऑफ गॉड क्या है और हेल्थ इन्शुरन्स से इसका क्या संबंध है आदि के बारे में आपको जानकारी देने की कोशिश करेंगे।

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  1. हेल्थ इन्शुरन्स में एक्ट ऑफ गॉड क्या है - What is Act of God in Health Insurance in Hindi
  2. एक्ट ऑफ गॉड में कौन सी घटनाएं शामिल हैं - What events are involved in Act of God in Hindi
  3. हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी एक्ट ऑफ गॉड के तहत किन घटनाओं पर कवरेज देती है - What events does the health insurance company cover under the Act of God in Hindi
  4. क्या सभी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान एक्ट ऑफ गॉड को कवर करते हैं - Do all health insurance plans cover Act of God in Hindi
  5. एक्ट ऑफ गॉड से संबंधित किन बातों का ध्यान रखना चाहिए - What are the things to be kept in mind regarding the Act of God in Hindi
  6. एक्ट ऑफ गॉड में क्लेम प्रोसेस क्या है - What is the claim process under the Act of God in Hindi

एक हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में एक्ट ऑफ गॉड वह घटना है, जो मानव नियंत्रण के बाहर होती है। उदाहरण के लिए प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप या बाढ़ आना, जिसमें एक से अधिक लोग एक साथ प्रभावित हो जाते हैं। हालांकि, वैसे तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां एक्ट ऑफ गॉड में सिर्फ प्राकृतिक घटनाओं को ही शामिल करती हैं जैसे बाढ़ व भूकंप आदि, लेकिन हर कंपनी के अनुसार उसके इन्शुरन्स प्लान भी अलग हो सकते हैं।

स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में एक्ट ऑफ गॉड किसी धर्म या जाति से संबंधित नहीं है। स्वास्थ्य बीमा कंपनियां इसकी मदद से सिर्फ उन अप्रत्याशित घटनाओं को दर्शाने की कोशिश करती हैं, जिन्हें मानव नियंत्रित नहीं कर सकता है। चलिए एक उदाहरण के रूप में इसे समझने की कोशिश करते हैं, यदि एक बीमाधारक किसी बाढ़, भूकंप या तूफान आदि की चपेट में आकर शारीरिक रूप से क्षतिग्रस्त होता है, तो उसे एक्ट ऑफ गॉड की श्रेणी में रखा जाता है। इन वजहों से आपके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुप्रभाव के लिए कवरेज दी जाती है या नहीं यह आपके प्लान व बीमा कंपनी पर निर्भर करता है।

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जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि एक्ट ऑफ गॉड में आमतौर पर प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं, जिनको रोकना या लाना मानव के बस में नहीं होता है। नीचे कुछ घटनाओं की लिस्ट दी गई है, जिन्हें एक्ट ऑफ गॉड में शामिल किया जाता है -

  • बाढ़
  • भूकंप
  • तूफान
  • बिजली कड़कना
  • सुनामी
  • जंगल की आग

स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के संदर्भ में एक्ट ऑफ गॉड बीमा कंपनियों के दस्तावेजों का ही एक हिस्सा है, जिसके अनुसार कंपनी यह तय करती है कि बीमाधारक को क्लेम राशि दी जा सकती है या नहीं। सरल शब्दों में यदि एक पॉलिसीधारक किसी भी नेचुरल डिजास्टर की चपेट में आकर शारीरिक रूप से प्रभावित होता है, तो बीमा कंपनी उसे एक्ट ऑफ गॉड की श्रेणी में रखती है।

जब कोई व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा खरीदता है, तो बीमा के दस्तावेजों में इन सभी चीजों का उल्लेख किया जाता है। एक्ट ऑफ गॉड की तरह एक्सक्लूजन व इंक्लूजन आदि के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है।

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सभी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियों के प्लान व प्रोसेस अलग-अलग होती हैं। हालांकि, जो कंपनी अपने हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में एक्ट ऑफ गॉड पर कवरेज देती हैं, उसमें भी निर्भर करता है कि मरीज किस घटना की चपेट में आया है। नीचे कुछ घटनाओं के बारे में बताया गया है और साथ ही स्वास्थ्य बीमा कंपनियां उन पर किस प्रकार कवरेज देती हैं।

चलिए एक उदाहरण के रूप में इसे समझने की कोशिश करते हैं कि किसी क्षेत्र में बाढ़ आती है और उसकी चपेट में कुछ लोग आ गए हैं। यदि बाढ़ की चपेट में आने वाले लोगों में हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदा हुआ है, तो कंपनी उनके स्वास्थ्य पर होने वाले मेडिकल खर्च पर कवरेज देती है। ठीक इसी प्रकार अन्य नेचुरल डिजास्टर में होता है, जिनकी चपेट में आने वाले बीमाधारकों को स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च बीमा कंपनी द्वारा उठाया जाता है।

यह कहना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि भारत में बहुत सारी बीमा कंपनियां हैं जिनके हेल्थ इन्शुरन्स प्लान अलग-अलग हैं। बीमाकर्ता कंपनियां व्यक्ति के स्वास्थ्य, जीवनशैली व अन्य कई चीजों की जांच करके उसे स्वास्थ्य बीमा योजना प्रदान करती हैं। इस योजना में क्या शामिल किया गया है और क्या नहीं यह सब उसकी स्थिति पर ही निर्भर करता है। इसलिए पॉलिसी में एक्ट ऑफ गॉड के नियमों को स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए, ताकि बीमाधारक को बाद में किसी आकस्मिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह भी संभव हो सकता है कि कंपनी किसी विशेष शारीरिक समस्या पर कवरेज न दे और एक्ट ऑफ गॉड में वही समस्या होने पर आपको कवरेज न मिल पाए। चलिए इसे एक उदाहरण के रूप में समझने की कोशिश करते हैं -

मानकर चलिए एक बीमा कंपनी एक्ट ऑफ गॉड पर कवरेज देती है, लेकिन उसमें डे केयर ट्रीटमेंट पर कवरेज नहीं मिल रही है। ऐसे में यदि किसी नेचुरल डिजास्टर के कारण आपको कोई सामान्य चोट लगती है, जिसका इलाज एक दिन के भीतर ही हो जाता है तो उसे डे केयर की श्रेणी में रखा जाता है और उस पर आपको क्लेम नहीं मिल पाता है।

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जैसा कि आप जानते हैं लापरवाही का नतीजा नुकसान होता है। यदि आप कोई हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इसके लिए काफी सोचने व समझने की जरूरत है। ऐसा इसलिए ताकि आप अपने व परिवार के लिए एक उचित प्लान खरीद सकें और अपना पैसा व्यर्थ न करें। एक्ट ऑफ गॉड भी उसी का ही एक हिस्सा है, स्वास्थ्य बीमा खरीदने से पहले इसके बारे में भी पढ़ लेना जरूरी है। यदि आप पर्याप्त जानकारी ले लेते हैं, तो कोई भी मेडिकल इमरजेंसी होने पर आप खुद यह समझ जाएंगे कि इसे हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में कवर किया जा सकता है या नहीं।

एक्ट ऑफ गॉड की सही जानकारी न होने पर क्या नतीजा हो सकता है, यह आप 2012 में आई बॉलीवुड फिल्म “ओह माय गॉड” से भी समझ सकते हैं। इस फिल्म में जब भूकंप के कारण कान्जी (परेश रावल) की दुकान गिर जाती है, तो वह क्लेम के लिए इन्शुरन्स कंपनी में जाता है। वहां पर उसे पता चलता है कि भूकंप एक एक्ट ऑफ गॉड है, जिस पर उनकी कंपनी क्लेम राशि नहीं देती है। इस सीन के दौरान इन्शुरन्स कंपनी का अधिकारी कान्जीलाल को कहता है कि “आप कितने लापरवाह हैं, जो आपने हस्ताक्षर करने से पहले टर्म एंड कंडीशन्स को पढ़ा नहीं”। इस प्रकार आप इस फिल्म को एक उदाहरण के तौर पर लेकर यह समझ सकते हैं कि कोई भी इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदते समय उसके बारे में अच्छे से पढ़ लेना जरूरी है। हालांकि, फिल्म में इन्शुरन्स का मामला दुकान यानी संपत्ति से जुड़ा था, लेकिन आपको ध्यान रखना चाहिए कि आपकी सबसे बड़ी संपत्ति आपकी सेहत ही है। 

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कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यदि आपकी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी एक्ट ऑफ गॉड के अंतर्गत होने वाली क्षति पर कवरेज देती है, तो उसकी क्लेम प्रोसेस अपेक्षाकृत आसान होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ नेचुरल डिजास्टर के अंतर्गत आपको दस्तावेजों पर विशेष छूट दी जाती है, अर्थात् आपको क्लेम रिकवेस्ट करते समय सभी कागज दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ऐसी स्थिति में कंपनी कई बार क्लेम देने के बाद ही वेरिफाई करती है। हालांकि, ऐसा कंपनी के मानदंडों पर निर्भर करता है।

ऐसी स्थितियों में पॉलिसीधारक को सिर्फ बीमाकर्ता को हुई स्वास्थ्य क्षति की सूचना बीमाकर्ता कंपनी को देनी होती है, जिसके बाद कंपनी तीव्रता से क्लेम प्रोसेस शुरू कर देती है। इसके अलावा जैसा कि एक्ट ऑफ गॉड में कई बार एक से अधिक बीमाधारक प्रभावित होते हैं, इसलिए बीमा कंपनियां जल्द से जल्द नुकसान की जानकारी लेने और क्लेम प्रोसेस को तेज करने के लिए एक से अधिक अधिकारियों को इस काम पर लगा देती हैं।

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