हर स्वास्थ्य बीमा प्रदाता कंपनी अपना हेल्थ इन्शुरन्स प्लान बनाती है, यह प्लान काफी उलझन भरे हो सकते हैं और उन्हें समझना भी काफी कठिन हो सकता है। हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने वाले अधिकतर लोग प्लान के बारे में जानने में भी अधिक रुचि नहीं रखते हैं। उन्हें बस इसी बात से मतलब होता है कि बीमा कंपनी कितनी राशि मेडिकल कवरेज के रूप में दे सकती है। हालांकि, ऐसा संभव नहीं होता है क्योंकि बीमा कंपनियां हर मेडिकल बिल पर कवरेज नहीं दे सकती हैं। ऐसी बहुत सी मेडिकल समस्याएं हैं, जिन्हें हेल्थ इन्शुरन्स प्लान की एक्सक्लूजन लिस्ट में डाला जाता है, जिसका मतलब है कि उन पर होने वाले खर्च पर बीमाकर्ता कंपनी कवरेज नहीं देगी।

इतना ही नहीं, कई बार स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिसमें कई बार आपको उन मेडिकल समस्याओं पर भी क्लेम नहीं मिल पाता है जो आपके हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में शामिल हैं। इस लेख में हम इसी बारे में बात करने वाले हैं कि ऐसी कौनी सी स्थितियां हैं जिनमें बीमाकर्ता कंपनी आपकी क्लेम रिकवेस्ट को रिजेक्ट कर सकती हैं और ऐसा क्यों होता है? चलिए नीचे का आर्टिकल में इस बारे में जानते हैं -

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  1. हेल्थ इन्शुरन्स में क्लेम रिकवेस्ट कैंसल होने का क्या कारण है? - What are the reasons for cancellation of claim request in health insurance in Hindi
  2. यदि कंपनी हेल्थ इन्शुरन्स क्लेम रिकवेस्ट रिजेक्ट करे तो क्या करना चाहिए - What to do if claim request is rejected in health insurance in Hindi
  3. क्लेम रिजेक्ट होने की रोकथाम कैसे करें - How to prevent claim rejection in health insurance in Hindi

हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदकर अधिकतर लोग खुद को वित्तीय रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं। हालांकि, कई बार ऐसा भी हो जाता है कि आपको मेडिकल इमरजेंसी हो जाए और कंपनी आपको क्लेम देने से मना कर दे। ऐसा होने पर आपके लिए परेशान कर देने वाली स्थिति खड़ी हो सकती है। इसलिए आपके लिए यह जानना जरूरी है कि ऐसी कौन सी स्थितियां हैं, जिसमें बीमाकर्ता कंपनी आपको क्लेम देने से मना कर सकती है -

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  • वेटिंग पीरियड -
    अधिकतर बीमाकर्ता कंपनियां हेल्थ इन्शुरन्स प्लान देते समय शुरुआत में प्रतीक्षा अवधि देती है, जिसमें एक निश्चित समय तक किसी भी मेडिकल इमरजेंसी पर कवरेज नहीं दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि आपने हाल ही में कोई हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदा है और आप अभी वेटिंग पीरियड में हैं। ऐसे में यदि वेटिंग पीरियड के भीतर ही आपको कोई मेडिकल इमरजेंसी हो जाती है और आप बीमाकर्ता कंपनी में क्लेम रिकवेस्ट डालते हैं तो आपकी रिकवेस्ट को रिजेक्ट कर दिया जाता है। हालांकि, एक्सीडेंट के मामले में कंपनी क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती है।
     
  • को-पेमेंट -
    यह क्लेम राशि का कुछ प्रतिशत हिस्सा होता है, जिसे आपको क्लेम मिलने से पहले ही अस्पताल में भरना होता है और इसके बाद बीमाकर्ता कंपनी बाकी की राशि का भुगतान करती है। आपकी उम्र के अनुसार को-पेमेंट अधिक हो सकता है। यदि आप को-पेमेंट नहीं देते हैं, तो आपकी क्लेम रिकवेस्ट को रिजेक्ट किया जा सकता है।

इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनके कारण कंपनी क्लेम राशि देने से मना कर सकती है, जैसे सब लिमिट, बीमाकर्ता कंपनी को पर्याप्त जानकारी न दे पाना, दस्तावेज गुम हो जाना, पहले से मौजूद बीमारियां और बीमाकर्ता कंपनी को समय पर सूचित न कर पाना आदि। कई बार इन स्थितियों के बारे में हमें पता नहीं होता है, इसलिए जरूरी है कि कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदने से पहले उसके सभी दस्तावेजों को अच्छे से पढ़ व समझ लें और कंपनी से संपर्क करें।

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अब आप क्लेम रिकवेस्ट रिजेक्ट होने का कारण तो जान ही चुके हैं, लेकिन इसके बाद प्रश्न आता है कि यदि क्लेम की रिकवेस्ट रिजेक्ट हो जाए तो क्या किया जाना चाहिए? वैसे तो हर बीमाकर्ता कंपनी अपने ग्राहक को वित्तीय रूप से ज्यादा से ज्यादा मदद करने का भरोसा दिलाती है, लेकिन बुरा समय बता कर नहीं आता। इसलिए यह जानना जरूरी है कि यदि किसी स्थिति में आपकी क्लेम रिकवेस्ट एक्सेप्ट न हो तो आपके पास क्या विकल्प बचता है? चलिए जानते हैं -

  • टीपीए से मदद लें -
    यदि क्लेम रिजेक्शन, फॉर्म ठीक से न भरने के कारण हुआ है, तो आप फॉर्म को ठीक करवाने के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर या टीपीए की मदद ले सकते हैं।
     
  • अस्पताल से संपर्क करें -
    यदि आपका क्लेम अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया है और डॉक्टर के अनुसार आपको उपचार की जरूरत है। ऐसे में आप अस्पताल में बात करके बीमाकर्ता कंपनी में एक विशेष पत्र भेजने को कह सकते हैं, जिसमें डॉक्टर द्वारा पुष्टि की गई होती है कि आपको इलाज की जरूरत है। हालांकि, सुनिश्चित कर लें कि पत्र में वही जानकारी डाली गई है, जो आपने अपनी क्लेम रिकवेस्ट फॉर्म में डाली थी। उस पत्र की एक कॉपी अपने पास भी रखें। (और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में फ्री-लुक पीरियड क्या होता है)
     
  • क्लेम की अपील करें -
    यदि बीमाकर्ता कंपनी बिना कोई कारण बताए क्लेम रिकवेस्ट को रिजेक्ट कर देती है, तो आप क्लेम स्वीकार करने की अपील कर सकते हैं। यदि कंपनी अपना निर्णय बदलने से इंकार कर देती है, तो भी आपको अपील करने का अधिकार है।
    अफॉर्डेबल केयर एक्ट (ACA) आपको अपील करने का अधिकार देता है। इसके बाद भी यदि वे आपके क्लेम को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप इंडिपेंडेंट एक्सटर्नल अपील कर सकते हैं। यदि आपको किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में मेडिकल कवरेज चाहिए, तो ऐसे में आप अपील की जल्द से जल्द समीक्षा करने का अनुरोध भी कर सकते हैं।
     
  • वकील से संपर्क करें -
    यदि आप सभी विकल्प अपना कर देख चुके हैं, जिसके बाद भी बीमा कंपनी क्लेम देने से मना कर रही है तो आप किसी वकील से बात कर सकते हैं। वकील स्थिति की समीक्षा करके आपके लिए उचित अगले कदम की तैयारी करेंगे और आपकी तरफ से बीमा कंपनी से बात करेंगे। वकील कानूनी रूप से सभी बातें कंपनी के सामने रखते हैं, जिसके बाद आपको भाग-दौड़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
    सरल भाषा में कहें तो यदि आपकी अपील भी स्वीकार नहीं हो पाई है, तो वकील आपके उचित दस्तावेज और अपील पत्र तैयार करेगा और आगे की प्रोसेस में भी आपकी मदद करेगा।

जाहिर है कि अपनी तरफ से की गई छोटी सी चूक के कारण भी आपको मेडिकल इमरजेंसी के समय एक बड़ी हानि का सामना करना पड़ सकता है। मेडिकल इमरजेंसी ऐसा समय है, जिसमें वित्तीय रूप से थोड़ा सा भी कमजोर पड़ना मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है। इसलिए आपको क्लेम करते समय सभी फॉर्म सही जानकारी के साथ भरने की सलाह दी जाती है।

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मेडिकल इमरजेंसी के समय बीमाकर्ता से वित्तीय मदद न मिल पाने से एक चिंताजनक स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, यदि आप पर्याप्त जानकारी रखते हैं और सभी दस्तावेजी कार्य ध्यानपूर्वक करते हैं, तो क्लेम रिजेक्शन जैसी स्थितियां होने का खतरा बहुत ही कम रहता है। इसके अलावा कुछ अन्य बातें भी हैं, जिनका ध्यान रखकर भविष्य में क्लेम रिजेक्शन की आशंका को कम किया जा सकता है -

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  • हेल्थ इन्शुरन्स से जुड़े सभी दस्तावेजों की कम से कम तीन कॉपियां बनाकर रखें, ताकि कागज खोने की स्थिति में आपको परेशानी का सामना न करना पड़े।
  • बीमित व्यक्ति को मेडिकल इमरजेंसी से जुड़े सभी कागज व अन्य रिकॉर्ड टीपीए के पास भेज देने चाहिए।
  • इन्शुरन्स के कागजों पर अपने हस्ताक्षर करने से पहले उन्हें अच्छे से पढ़ लें, ताकि आप किसी भी प्रकार के एक्सक्लूजन, डिडक्टिबल व क्लेम प्रोसेस के बारे में जान सकें।
  • यदि कोई इमरजेंसी मामला नहीं है, तो यह सुनिश्चित करें कि आप अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से कम से कम दो दिन पहले ही बीमाकर्ता कंपनी में क्लेम रिकवेस्ट डालकर प्री-ऑथराइजेशन हासिल कर लें। 
  • क्लेम फॉर्म को सबमिट करने से पहले उसे अच्छे से पढ़ लें, ताकि कोई भी जानकारी उसमें अधूरी न रहे। एक से अधिक फॉर्म अपने पास रखें, ताकि यदि फॉर्म भरते समय कोई गलती हो जाती है तो आप दूसरी कॉपी का इस्तेमाल कर सकें।
  • अस्पताल में भर्ती होने के बाद अस्पताल से मिलने वाले सभी कागजों को संभालकर रखें जैसे डॉक्टर का पर्चा, दवाओं के बिल, टेस्ट की रिपोर्ट व अन्य सभी डिटेल पेपर। यदि क्लेम रिजेक्शन होता है, तो इनकी फिर से आवश्यकता पड़ सकती है।

उपरोक्त लेख से यह स्पष्ट होता है कि क्लेम अनुरोध रिजेक्ट होने के बाद आपको काफी परेशानी हो सकती है। स्थितियों को देखते हुए आपको सलाह दी जाती है कि कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने से पहले कंपनी व प्लान दोनों के बारे में अच्छे से जान लें। myUpchar बीमा प्लस एक विशेष हेल्थ इन्शुरन्स प्लान है, जिसे आजकल बढ़ी बीमारियों और महंगाई को देखते हुए तैयार किया गया है। यदि आप myUpchar बीमा प्लस खरीदते हैं, तो उसमें मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के मेडिकल खर्च पर भी कवरेज दी जाती है। इतना ही नहीं आपको एम्बुलेंस, आईसीयू और रूम रेंट कैपिंग जैसे खर्चों पर भी कवरेज दी जाती है। यही नहीं बीमा प्लस में आपको 24x7 टेली ओपीडी कवरेज भी मिलती है।

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