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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इंसानों और जानवरों पर इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरणों को दवा की श्रेणी में रखने का फैसला किया है। मंगलवार को इस संबंध में सूचना जारी की गई। खबरों के मुताबिक चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय की तरफ से जारी की गई सूचना के मुताबिक आगामी एक अप्रैल से ये उपकरण 'दवा' कहलाएंगे।

केंद्र सरकार के मंत्रालय द्वारा जारी की गई सूची में सभी महत्वपूर्ण मेडिकल उपकरणों को दवा का नाम दिए जाने की बात कही गई है। इनमें सीटी स्कैन, एमआरआई, डेफिब्रिलेटर, डायलिसिस, पीईटी, एक्स-रे और बोन मैरो सेल सेपरेटर (अस्थि मज्जा सेल विभाजक) से जुड़े उपकरण शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो सरकार के इस फैसले के बाद विदेशों से खरीदे जाने वाले और भारत में ही बेचे जाने वाले चिकित्सा उपकरणों, दोनों को बाजार में लाने से पहले विशेष सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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अब जवाबदेह होंगी उपकरण निर्माता कंपनियां
एक अप्रैल से लागू होने वाले इस नियम के मुताबिक, सभी चिकित्सा उपकरणों की खरीद, उनके निर्माण और बिक्री को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रमाणित कराने की आवश्यकता होगी। इतना ही नहीं, उपकरण निर्माताओं को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से लाइसेंस भी लेना होगा। इस बारे में सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह नियम चिकित्सा उपकरण बनाने वाली कंपनियों को उनके उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए जवाबदेह बनाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, 'औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940' की धारा तीन के खंड (बी) के उपखंड (चार) के तहत सभी तरह के चिकित्सा उपकरणों को औषधि (ड्रग्स) माना जाएगा। जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय में केवल 23 मेडिकल डिवाइस ही इस कानून के तहत आती हैं, लेकिन एक अप्रैल के बाद इसमें सभी चिकित्सा उपरकरण शामिल हो जाएंगे।

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इस संस्था ने दिया था सुझाव
सरकार के इस फैसले के पीछे एक संस्था का हाथ बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रग्स और चिकित्सा उपकरणों से संबंधित तकनीकी मुद्दों पर भारत की सर्वोच्च सलाहकार संस्था 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' (डीटीएबी) ने अप्रैल 2019 में इस बारे में सिफारिश की थी। बोर्ड ने सरकार को सुझाव दिया था कि सभी चिकित्सा उपकरणों को संबंधित कानून के तहत दवाओं के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए। अब करीब एक साल बाद सरकार ने इन सिफारिशों को मानते हुए चिकित्सा उपकरणों को औषधि घोषित किया है।

सटीक जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद बढ़ेगी
सरकार के इस कदम को लेकर myUpchar से जुड़ीं डॉक्टर फतमा परवीन ने कहा कि इस फैसले से डॉक्टर और मरीज दोनों को फायदा होगा। उनका कहना है कि मशीनों के जरिये अब सटीक नतीजे मिलने की पूरी संभावना होगी। अभी तक केवल दवा जांच के दायरे में आती है जिन्हें तमाम प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद बाजार में उतारा जाता हैं। लेकिन अब उपकरणों को भी इसी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।

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चिकित्सा उपकरणों को जांच के दायरे में लाने की जरूरत क्यों?
इस सवाल पर डॉक्टर फतमा बताती हैं कि शरीर और स्वास्थ्य की जांच करने वाली कुछ मशीनों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते रहे हैं। मसलन, ब्लड शुगर की जांच करने वाला उपकरण कई बार गलत नतीजे दिखा देता है। इससे मरीज की चिंता बढ़ जाती है जो उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। लेकिन सरकार के इस कदम के बाद मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता में सुधार होगा। इससे उपकरणों के जरिये मिलने वाले परिणामों से इलाज की प्रक्रिया को सही दिशा में ले जाने में मदद मिलेगी।

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