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वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो उन मरीजों की सांस लेने में मदद करती है, जो स्वयं किसी कारण से सांस नहीं ले पाते हैं। इसके कई अन्य नाम भी हैं जैसे - ब्रीथिंग मशीन या रेस्पिरेटर या मैकेनिकल वेंटिलेटर इत्यादि।

अधिकांश रोगियों को गंभीर बीमारी के कारण वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है, इनकी अस्पताल के आईसीयू में देखभाल की जाती हैं। जिन लोगों को लंबे समय तक वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है उनकी देखभाल अस्पताल की नियमित यूनिट, पुनर्वास सुविधा या घर पर की जा सकती है।

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इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि वेंटिलेटर क्या है, आईसीयू में वेंटीलेटर के कितने प्रकार होते हैं, वेंटिलेटर कैसे काम करता है और वेंटीलेटर पर होने से जुड़े रिस्क क्या-क्या है? इसके साथ ही आईसीयू में वेंटीलेटर पर आने वाले खर्च के बारे में भी बताया गया है।

  1. वेंटिलेटर क्या है - Ventilator kya hai in hindi
  2. आईसीयू में वेंटीलेटर के प्रकार - Types of Ventilator in hindi
  3. वेंटिलेटर कैसे काम करता है - Ventilator kaise kaam karta hai in hindi
  4. वेंटीलेटर पर होने से जुड़े रिस्क - Risks of being on a Ventilator in hindi
  5. आईसीयू वेंटीलेटर कीमत - Ventilator price in india in hindi

वेंटिलेटर एक मशीन है जो रोगी को सांस लेने में मदद करती है। इसके लिए मुंह, नाक या गले में एक छोटे से कट के माध्यम से एक ट्यूब श्वास नली में डाली जाती है। इसे मैकेनिकल वेंटिलेशन भी कहा जाता है। यह एक जीवन सहायता उपचार है। मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरुरत तब पड़ती है जब कोई रोगी प्राकृतिक तरीके से अपने आप सांस लेने में सक्षम नहीं होता है।

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इन मशीनों का उपयोग मुख्य रूप से अस्पतालों में किया जाता है। वेंटिलेटर मशीन निम्नलिखित कार्य करती है -

  • फेफड़ों में ऑक्सीजन भेजती है।
  • शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड निकालती है। (कार्बन डाइऑक्साइड एक अपशिष्ट गैस है जो विषाक्त हो सकती है)
  • लोगों को आसानी से सांस लेने में मदद करती है।
  • उन लोगों के लिए सांस लेना संभव बनाती जिन्होंने खुद से सांस लेने की क्षमता खो दी है।
  • एक वेंटिलेटर अक्सर कुछ समय के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे सर्जरी के दौरान जब आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया गया हो। (और पढ़े - सर्जरी से पहले की तैयारी)

एनेस्थीसिया के असर को प्रेरित करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं सामान्य श्वास को बाधित कर सकती हैं। एक वेंटिलेटर यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि आप सर्जरी के दौरान सांस लेना जारी रखें।

वेंटिलेटर का प्रयोग गंभीर फेफड़ों की बीमारी या अन्य सांस की परेशानियों के लिए भी किया जा सकता है जो सामान्य तरीके से श्वास लेने की क्षमता को प्रभावित करती है।

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कुछ लोगों को लंबे समय तक या अपने पूरे शेष जीवन के लिए वेंटिलेटर का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है। इन मामलों में, मशीनों का इस्तेमाल अस्पताल के बाहर-लंबी अवधि की देखभाल सुविधाओं में या घर पर किया जा सकता है।

वेंटिलेटर किसी से किसी प्रकार की बीमारी का इलाज नहीं किया जाता है बल्कि इसका उपयोग केवल रोगी को सांस लेने में सहायता के लिए किया जाता है।

किसी भी प्रकार के मानक नामकरण के अभाव में विभिन्न वेंटिलेटर निर्माताओं के अनुसार हर मोड के अलग-अलग नाम हो सकते हैं इसके कारण आईसीयू वेंटिलेटर बहुत भ्रमित कर सकते हैं।

वेंटिलेटर के दो प्रमुख प्रकार होते हैं जो निम्नलिखित हैं -

  1. नेगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर (एक्स्ट्राथोरैसिक) -
    नेगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर रोगी की छाती पर लगाया जाता है। इस फाॅर्स या दबाव के कारण छाती उठती और फैलती है। इस प्रकार के वेंटिलेटर के उदाहरणों में शामिल हैं आयरन लंग (बॉडी टैंक) और चेस्ट कुइरास (Chest Cuirass)।
     
  2. पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर (इंट्रा-पल्मोनरी प्रेशर) -
    इस में वेंटिलेटर एक सकारात्मक दबाव बनाता है जो हवा को मरीज के फेफड़ों में धक्का देता है और इंट्रा-पल्मोनरी प्रेशर या दबाव बढ़ता है। तीन प्रकार के पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर हैं -
  • वॉल्यूम साइकिल्ड - पहले से निर्धारित की गयी मात्रा या वॉल्यूम वितरित होने तक वायुमार्ग पर दबाव बना रहता है। अधिकांश रोगियों के लिए इस प्रकार के वेंटिलेटर का उपयोग किया जा सकता है।
  • प्रेशर साइकिल्ड - ये वेंटिलेटर आमतौर पर न्यूमेटिकली पावर्ड (50 पीएसआई) होते हैं और इसमें दबाव सीमा पहले से निर्धारित होती है वहाँ तक पहुंचने तक श्वास नली पर सकारात्मक दबाव डालते रहते हैं।
  • टाइम साइकिल्ड - इस प्रकार के वेंटिलेटर में समय पहले से निर्धारित किया जाता है उस समय तक पहुंचने तक ये वेंटिलेटर सकारात्मक दबाव लगाते रहते हैं। आम तौर पर शिशु के वेंटिलेशन के लिए इनका उपयोग किया जाता है। (और पढ़े - नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें)

वेंटिलेटर एक ट्यूब के माध्यम से रोगी से जुड़ा होता है। यह ट्यूब रोगी के मुंह या नाक या गले में श्वास नली में रखी जाती है। जब स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता ईटी ट्यूब को व्यक्ति के वायुमार्ग या श्वास नली में रखता है, इसे इंट्यूबेशन कहा जाता है।

आमतौर पर, श्वास ट्यूब को रोगी के नाक या मुंह के माध्यम से ही विंडपाइप या श्वास नली में डाल दिया जाता है। ट्यूब उसके बाद रोगी के गले में आगे खिसकाई जाती है। जिसे एंडोट्राचेल या ईटी ट्यूब कहा जाता है।

कभी-कभी सांस लेने वाली ट्यूब को शल्य चिकित्सा या सर्जरी द्वारा गले में छेद के माध्यम से रखा जाता है जिसे ट्रेकियोस्टोमी कहा जाता है। छेद में रखी ट्यूब को कभी-कभी "ट्रेच" ट्यूब कहा जाता है।

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किसी आपात स्थिति में, आपको नींद के लिए और श्वास ट्यूब को आपके विंडपाइप में डालने से होने वाले दर्द को कम करने के लिए दवा दी जाती है। यदि आपातकालीन स्थिति नहीं है, तो यह प्रक्रिया एनेस्थीसिया का उपयोग कर ऑपरेटिंग रूम में की जाती है। ट्रेच ट्यूब जब तक आवश्यक हो तब तक रहने में सक्षम है।

दोनों प्रकार की श्वास ट्यूब आपके वॉकल कॉर्ड से गुज़रते हैं और बात करने की आपकी क्षमता को प्रभावित करते हैं। कभी-कभी रोगी बोलने वाले वाल्व नामक एक विशेष एडप्टर का उपयोग करके ट्रैच ट्यूब गले में होने पर भी बात कर सकता है।

अधिकांश बार, एंडोट्राचेल ट्यूबों का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो कम अवधि के लिए वेंटिलेटर पर होते हैं। इस ट्यूब का लाभ यह है कि इसे सर्जरी के बिना रोगी के विंडपाइप में रखा जा सकता है।

ट्रैच ट्यूबों का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जिन्हें लंबी अवधि के लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। जो रोगी जाग रहे हैं उनके लिए, यह ट्यूब एंडोट्राचेल ट्यूब की तुलना में अधिक आरामदायक है। कुछ स्थितियों में तो, एक व्यक्ति जिसको ट्रेच ट्यूब लगी हुई है, वह बात करने में भी सक्षम हो सकता है।

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वेंटिलेटर आमतौर पर दर्द का कारण नहीं बनते हैं। रोगी के विंडपाइप में श्वास ट्यूब कुछ असुविधा का कारण बन सकती है। यह बात करने और खाने की आपकी क्षमता को भी प्रभावित करती है।

भोजन के बजाय, स्वास्थ्य देखभाल करने वाली टीम रोगी को नस में डाली गई ट्यूब के माध्यम से पोषक तत्व दे सकती है। यदि रोगी लंबे समय तक एक वेंटिलेटर पर हैं, तो उसे संभवतः नासोगौस्ट्रिक ट्यूब या फीडिंग ट्यूब के माध्यम से भोजन दिया जाता है। ट्यूब रोगी की नाक या मुंह से या सर्जरी से बने छेद के माध्यम से सीधे उसके पेट या छोटी आंत में जाती है।

एक वेंटिलेटर रोगी की गतिविधि को बहुत सीमित कर देता है। रोगी अपने बिस्तर पर या कुर्सी पर बैठने में सक्षम हो सकता है, लेकिन आप आमतौर पर ज्यादा घूम नहीं सकता है।

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किसी व्यक्ति के वेंटिलेटर पर होने के सबसे गंभीर और सामान्य जोखिमों में से एक निमोनिया है। रोगी के वायुमार्ग में रखी श्वास ट्यूब के माध्यम से बैक्टीरिया उसके फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं। नतीजतन, ऐसे रोगी में वेंटिलेटर से जुड़ा निमोनिया या वेंटिलेटर-एसोसिएटेड निमोनिया (वीएपी) नामक बीमारी विकसित हो सकती है।

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श्वास ट्यूब रोगी के लिए खाँसना भी मुश्किल बनाती है। खांसी फेफड़ों में फंसे कणों से हमारे वायुमार्ग को साफ़ करने में मदद करती है अगर ये कण साफ नहीं हो तो ये संक्रमण कर सकते हैं। वीएपी, वेंटिलेटर का उपयोग करने वाले लोगों के लिए एक प्रमुख चिंता है क्योंकि वे अक्सर पहले से ही बहुत बीमार होते हैं।

निमोनिया उनकी अन्य बीमारी का इलाज करना कठिन बना सकता है। वीएपी का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। यदि वीएपी वाले बैक्टीरिया मानक उपचार के प्रतिरोधी हैं, तो रोगी को विशेष एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता हो सकती है।

वेंटिलेटर पर होने का एक और जोखिम साइनस संक्रमण है। इस प्रकार का संक्रमण उन लोगों में अधिक आम है जिनको एंडोट्राचेल ट्यूब लगायी जाती है। साइनस संक्रमण का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाता है।

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वेंटिलेटर का एक अन्य जोखिम फेफड़ों की क्षति है, जो अधिक दबाव या फेफड़ों के फेल होने के कारण होता है। न्यूमोथोरैक्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों से हवा फेफड़ों और छाती के बीच की जगह में रिसती है। यह दर्द और श्वास न आने का कारण बन सकता है और इससे एक या दोनों फेफड़ों को नुकसान हो सकता है।

कुछ रोगी काफी लंबे समय तक एक मैकेनिकल वेंटिलेटर पर हो सकते हैं और इससे छुटकारा कठिन हो सकता है। दुर्भाग्य से, मैकेनिकल वेंटिलेटर कुछ रोगियों के लिए मरने की प्रक्रिया को लंबा कर सकता है।

वेंटिलेटर का उपयोग लंबे समय तक करने से रोगी को रक्त के थक्के जमने और गंभीर त्वचा के संक्रमण का भी जोखिम हो सकता है। ये समस्याएं उन लोगों में होती हैं जिनको कुछ बीमारियां होती हैं और जो बिस्तर या व्हीलचेयर तक ही सीमित रहते हैं तथा लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना पड़ता है।

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अस्पताल के प्रकार के आधार पर, एक मरीज को वेंटिलेटर पर रखने की प्रति दिन की लागत 4,000 से 10,000 रुपये के बीच हो सकती है। आईसीयू, दवा और अन्य शुल्क नहीं जोड़े गए हैं। ये लागत अधिकांश मध्यम श्रेणी के परिवारों की पहुंच से बाहर होती है।

यदि चिकित्सा खर्चों का विचार आपको बहुत झटके देता है, तो भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक स्वदेशी आईसीयू वेंटिलेटर मशीन आपके इस बोझ को कम कर सकती है। डीआरडीओ के विशेषज्ञों, निमहंस विशेषज्ञों और प्रिकोल मेडिकल सिस्टम्स लिमिटेड के विनिर्माण विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से यह वेंटिलेटर विकसित किया है, जो विदेश से आयातित वेंटिलेटर की सभी सुविधाओं को कम लागत पर प्रदान कर सकता है।

यह एक मध्यम स्तर का वेंटिलेटर है जिसकी कीमत लगभग 4.75 लाख रुपये है, जबकि आयातित मध्यम स्तर के वेंटिलेटर में लगभग 7 लाख रुपये खर्च होते हैं। उच्च स्तर के आयातित वेंटिलेटर की लागत लगभग 12 लाख रुपये है।

स्वदेशी वेंटिलेटर के विकसित हो जाने से हमको कई लाभ हो सकते हैं अब स्पेयर पार्ट्स, सर्विस, विस्तृत सेवा नेटवर्क की त्वरित उपलब्धता और स्पेयर पार्ट्स को बदलना भी आसान हो सकता है।

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