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धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। अगर यह गर्मी यूं ही लगातार बढ़ती रही तो आने वाली शताब्दी यानी साल 2100 में गर्मी के कारण 120 करोड़ लोग मानसिक तनाव (स्ट्रेस) के चरम स्तर पर होंगे। शोधकर्ताओं ने अनुमान के तहत बताया है कि इस संभावित भावी स्थिति के लिए ग्रीनहाउस गैस जिम्मेदार हो सकती हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी पत्रिका ‘जर्नल एनवायरन्मेंटल रिसर्च लेटर’ की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान से हीट स्ट्रेस का जोखिम बढ़ रहा है, जो मानव स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक गर्मी के साथ तनाव पर किए गए अधिकांश अध्ययनों में एक्सट्रीम हीट (अत्यधिक गर्मी) पर तो फोकस किया गया था, लेकिन नमी के बढ़ने के साथ उमस (आर्द्रता) की भूमिका पर ध्यान नहीं दिया गया।

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गर्मी के साथ ह्यूमिडिटी पर फोकस की जरूरत
यही वजह है कि वैज्ञानिक अब ह्यूमिडिटी के असर को लेकर भी गंभीरता दिखाने की बात कर रहे हैं। रटगर्स यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ लेखक रॉबर्ट ई कोप्प का कहना है, ‘जब हम एक गर्म ग्रह के जोखिमों को देखते हैं, तो हमें गर्मी और आर्द्रता पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होती है, खासकर जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक और जानलेवा हो सकते हैं।’

वहीं, एक अन्य शोधकर्ता डाएवी ली का कहना है, ‘ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है कि लोगों को लगातार और तेजी से गर्मी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर अगर अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क की बात करें तो, यहां एक सामान्य वर्ष में पहले से ही गर्म दिनों की संख्या में 11 गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है। 19वीं शताब्दी के अंत तक ऐसी स्थिति नहीं थी।’

गंभीर हो सकते हैं परिणाम
शोधकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता का वार्षिक जोखिम वर्तमान में लगभग 50 करोड़ लोगों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, आने वाले समय में धरती अगर डेढ़ डिग्री सेल्सियस से दो डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म होती है तो लगभग 80 करोड़ लोग हीट स्ट्रेस से बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने अनुमान जताया है कि पृथ्वी के तीन डिग्री सेल्सियस तक गर्म होने पर एक अरब से ज्यादा लोगों हीट स्ट्रेस से प्रभावित हो सकते हैं, जो कि एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। उनके मुताबिक, 19वीं शताब्दी के बाद से धरती पहले ही 1.2 डिग्री सेल्सियस गर्म हो चुकी है।

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क्या है हीट स्ट्रेस?
गर्मी में पसीना आने के बाद शरीर का पूरी तरह से ठंडा होने में असर्मथता महसूस करना हीट स्ट्रेस है। इस स्थिति में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और इस तरह बढ़ा हुआ तापमान मस्तिष्क और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। हीट स्ट्रेस, गर्मी से होने वाली थकावट और गर्म तापमान के चलते शरीर में होने वाली ऐंठन जैसे लक्षण पैदा करता है। यह हीट स्ट्रेस की सबसे सामान्य स्थितियां है।

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