परिचय:

जब हमारे शरीर को गर्मी लगती है, तो इसकी प्रतिक्रिया के रूप में शरीर से पसीना आने लगता है। पसीना न आने की समस्या को अंग्रेजी में “अनहाइड्रोसिस” (Anhidrosis) कहा जाता है। यह समस्या बहुत ही कम मामलों होती है, इसमें पसीने की ग्रंथियां पसीना बनाना कम कर देती हैं या पूरी तरह से बंद कर देती हैं। इसके कारण पूरे शरीर से या फिर शरीर के किसी छोटे हिस्से से पसीना आना बंद हो जाता है। पसीने ना आने से त्वचा संबंधी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जैसे त्वचा में गंभीर रूप से जलन, इन्फेक्शन, सूजन, लालिमा और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं होना। 

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पसीना ना आने से कई लक्षण होने लगते हैं, जैसे चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना व गर्मी लगना और कम पसीना आना या बिलकुल बंद हो जाना। 

इस स्थिति का पता लगाना कठिन हो सकता है। पसीना ना आने का पता लगाने के लिए कुछ प्रकार के टेस्ट भी किए जाते हैं, जैसे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का एमआरआई टेस्ट करना, आयोडीन स्टार्च टेस्ट और पसीने की ग्रंथियों की जांच करने के लिए स्किन बायोप्सी टेस्ट भी किया जाता है। पसीना ना आना एक ऐसा विकार है जिसकी रोकथाम नहीं की जा सकती लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर शरीर का तापमान बढ़ने से रोकथाम की जा सकती है। 

यदि आपको पसीना ना आने की समस्या है, तो धूप व गर्मी में बाहर निकलने की कम से कम कोशिश करें, हल्के रंगों के व ढीले ढाले कपड़े पहनें। इसका इलाज उस स्थिति के अनुसार किया जाता है, जिसके कारण आपको पसीना ना आने की समस्या हो रही है। इलाज के दौरान पसीना कम करने वाली स्थितियों से बचना जिनके कारण गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं। 

यदि आपके डॉक्टर को कोई ऐसी अंदरुनी बीमारी मिल जाती है, जो पसीना ना आने का कारण बन रही है, तो शायद इस समस्या का इलाज हो सकता है। शरीर में सामान्य रूप से पसीना ना आने से शरीर का तापमान गंभीर रूप से बढ़ जाता है, जिससे जीवन के लिए घातक स्थिति पैदा हो जाती है। शरीर का तापमान गंभीर रूप से बढ़ने से “हीट स्ट्रोक” हो जाता है, जिसे आम भाषा में “लू लगना” कहा जाता है।

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  1. पसीना न आना क्या है - What is Lack of sweat in Hindi
  2. पसीना न आना के लक्षण - Lack of sweat Symptoms in Hindi
  3. पसीना न आना के कारण व जोखिम कारक - Lack of sweat Causes & Risk Factors in Hindi
  4. पसीना न आना से बचाव - Prevention of Lack of sweat in Hindi
  5. पसीना न आना का परीक्षण - Diagnosis of Lack of sweat in Hindi
  6. पसीना न आना का इलाज - Lack of sweat Treatment in Hindi
  7. पसीना न आना की जटिलताएं - Lack of sweat Complications in Hindi

पसीना ना आना क्या है?

इस स्थिति को अनहाइड्रोसिस भी कहा जाता है, जिसमें मरीज के शरीर में सामान्य रूप से पसीना नहीं आ पाता। जब आपके शरीर से सामान्य रूप से पसीना नहीं आता, उस समय आपका शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता। ऐसी स्थिति में हीट स्ट्रोक हो जाता है, जो जीवन के लिए घातक हो सकता है।

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पसीना न आने के लक्षण क्या हैं?

पसीना न आने से निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं:

  • पसीना कम आना या पूरी तरह से बंद हो जाना
  • शरीर अधिक गर्म महसूस होना
  • मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी (और पढ़ें - मांसपेशियों में कमजोरी का इलाज)
  • किसी विशेष स्थिति में कम पसीना आना, जबकि उस दौरान अन्य लोगों को खूब पसीना आ रहा हो
  • चक्कर आना 
  • त्वचा लाल दिखाई देना (और पढ़ - चेहरा लाल होने का कारण)
  • यदि पसीना आना थोड़ा बहुत कम हुआ है, तो उसका पता तब तक नहीं लग पाता जब तक आप कोई कठोर व्यायाम नहीं करते। क्योंकि जब जोरदार व्यायाम करने पर भी शरीर से पूरी तरह से पसीना ना निकले तो इस स्थिति को अनहाइड्रोसिस कहा जाता है। 
  • शरीर के किसी क्षेत्र में अधिक पसीना आना भी एक प्रकार से अनहाइड्रोसिस का संकेत हो सकता है। क्योंकि ऐसा हो सकता है कि शरीर के किसी हिस्से में अधिक पसीना आने से दूसरे हिस्से में पसीना आना कम या बंद हो जाता है।

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि गर्मी के समय में या किसी कठोर व्यायाम करने के दौरान भी आपको पसीना नहीं आ रहा तो इस बारे में डॉक्टर को दिखा लें। यदि आपको लगता है कि आपके शरीर में सामान्य से कम पसीना आता हैं, तो भी एक बार डॉक्टर के पास जाकर इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। 

यदि आप में लू लगने के लक्षण या संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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पसीना ना आने का कारण क्या हैं?

पसीना कम आने या ना आने के निम्न कारण हो सकते हैं:

  • त्वचा जलना
  • शरीर में पानी की कमी होना 
  • नसों संबंधी विकार जैसे गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (Guillain-Barre syndrome)
  • त्वचा संबंधी रोग या त्वचा पर स्कार (खरोंच जैसे निशान) बनने के कारण पसीने की ग्रंथियां बंद होना
  • कुछ प्रकार के अनुवांशिक विकार, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है लेकिन कुछ लोग पसीने की ग्रंथियों के बिना ही जन्म लेते हैं। 
  • ब्रेन ट्यूमर होना
  • सिस्टमिक स्क्लेरोसिस (यह लंबे समय तक रहने वाली समस्या होती है, जिसमें मांसपेशियां व ऊतक कठोर हो जाते हैं।) (और पढ़ें - मल्टीपल स्क्लेरोसिस का इलाज)
  • सिस्टमिक लुपस एरिथेमेटोस (यह सूजन व जलन संबंधी एक रोग है, यह तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के स्वस्थ ऊतकों पर हमला करके उन्हें नष्ट करने लग जाती है।)
  • शोग्रेन्स सिन्ड्रोम (Sjögren's syndrome; यह प्रतिरक्षा प्रणाली का एक विकार होता है जिसमें आंखों, मुंह और त्वचा में सूखापन आ जाता है) (और पढ़ें - मुंह सूखने का इलाज)
  • जन्म से मिलने वाले (जन्मजात) विकार जैसे एक्टोडर्मल डिप्लेसिया
  • नसों संबंधी कुछ समस्याएं (न्यूरोपैथी)
  • पसीने की ग्रंथियों पर चोट लगना
  • कुछ प्रकार की दवाएं लेना, विशेष रूप से मानसिक विकारों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एंटीसायकोटिक दवाएं लेना। ये दवाएं पसीने की ग्रंथियों के सामान्य कार्य को प्रभावित कर सकती हैं। 

पसीना ना आने का खतरा कब बढ़ता है?

निम्न परिस्थितियों में कम पसीना आने लग सकता है या पसीना आना पूरी तरह से बंद भी हो सकता है:

  • अधिक उम्र होना, बुढ़ापे में कम पसीना आने जैसी समस्याएं होने लग सकती है।
  • डायबिटीज, इसके कारण भी कई बार पसीने की ग्रंथियां अनियमित रूप से काम करने लग जाती हैं। (और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)
  • त्वचा के रोग, सोरायसिस और त्वचा पर होने वाले कुछ प्रकार के चकत्ते पसीने की ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं और जिससे पसीना आना बंद या कम हो जाता है। (और पढ़ें - सोरायसिस के घरेलू उपाय)
  • त्वचा पर स्कार होना, त्वचा पर खरोंच जैसे निशान बनने के कारण पसीने की ग्रंथियां पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाती, जिस कारण से पसीना ना आने का खतरा बढ़ जाता है। 

अनहाइड्रोसिस से बचाव कैसे करें?

पसीना कम आने की समस्या से बचाव करना हर बार संभव नहीं होता, लेकिन गर्मी से होने वाली समस्याओं का बचाव किया जा सकता है। 

  • गर्मी से बचे रहने के लिए, निम्न तरीके अपनाएं:
    • यदि आपको कुछ काम के लिए घर से बाहर निकलना है, तो ठंडे समय में ही घर से बाहर निकलने की कोशिश करें जैसे सुबह या शाम। 
    • खूब मात्रा में पानी व अन्य तरल पेय पदार्थ पिएं।
    • धीरे-धीरे चलें और कोई कठोर मेहनत का काम ना करें।
    • ठंडे वातावरण में रहने की कोशिश करें।
    • गर्मी से होने वाले रोगों के लक्षणों व संकेतों की पहचान करें और उनका इलाज करने के तरीके सीखें। (और पढ़ें - मानसून में होने वाली बीमारियां)
    • मौसम के तापमान का ध्यान रखें।
    • गर्मी के समय में खुले और हल्के रंगों वाले कपड़े पहनें।
    • गर्मी के दिनों में घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें और घर के अंदर के वातावरण को ठंडा रखें।
    • खुद को ठंडा रखने के लिए स्प्रे वाली बोतल में ठंडा पानी डालकर उसका उपयोग करें। जब पानी की ठंडी फुहार आपके शरीर पर पड़ेंगी तो आपको ठंडा महसूस होगा। 
    • अपनी गतिविधियों का ध्यान रखें, ताकि आप किसी भी गतिविधि को सामान्य से अधिक ना करें। 

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पसीना न आने की जांच कैसे करें?

डॉक्टर आपके लक्षण व संकेतों की जांच करके, आपकी पिछली मेडिकल जानकारी के बारे में जानकर और आपका शारीरिक परीक्षण करके पसीना ना आने की समस्या का पता लगाते हैं। इसके अलावा स्थिति का परीक्षण करने के लिए कुछ प्रकार के मेडिकल टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे:

  • स्वैट टेस्ट (पसीने की जांच):
    इस टेस्ट प्रक्रिया को थर्मोरेगुलेटरी स्वैट टेस्ट (Thermoregulatory sweat test) भी कहा जाता है। इस टेस्ट के दौरान आपके शरीर पर एक विशेष प्रकार के पाउडर की परत चढ़ाई जाती है, इस दौरान आपके शरीर के जिस हिस्से से भी पसीना निकलता है वहीं से पाउडर का रंग बदलने लग जाता है। उसके बाद आपको ऐसे कमरे में ले जाया जाता है, जिसका तापमान अधिक होता है वहां पर ज्यादातर लोगों को पसीना आ जाता है। इसमें पूरे शरीर का टेस्ट एक ही बार में किया जाता है और डिजिटल फोटो की मदद से टेस्ट के रिजल्ट की रिपोर्ट बनाई जाती है। 
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  • सिलास्टिक स्वैट इम्प्रिमेंट टेस्ट (Silastic sweat imprint test):
    इस टेस्ट की मदद से शरीर में पसीने की कुल मात्रा की जांच की जाती है।
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  • स्किन बायोप्सी:
    पसीना ना आने की जांच करने के लिए कुछ मामलों में डॉक्टर को बायोप्सी सेंपल लेने की आवश्यकता पड़ती है। इस टेस्ट में त्वचा की कोशिकाओं से सेंपल निकाला जाता है और कई बार पसीने की ग्रंथि को भी निकाला जाता है और इस सेंपल पर टेस्ट किए जाते हैं।
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  • एक्सोन रिफ्लेक्स टेस्ट (Axon reflex test):
    इस टेस्ट के दौरान छोटे-छोटे इलेक्ट्रोड्स (शरीर पर चिपकाए जाने वाले इलेक्ट्रिक उपकरण) की मदद से पसीने की ग्रंथियों को उत्तेजित किया जाता है। उसके बाद जितना पसीना निकलता है, उसकी मात्रा की जांच की जाती है। 

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पसीना न आने का इलाज कैसे करें?

जिन लोगों के शरीर के कुछ छोटे हिस्सों में पसीना नहीं आ रहा, शायद उनको इलाज करवाने की आवश्यकता भी ना पड़े। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनके शरीर के बाकी हिस्से खूब पसीना निकालकर उसकी कमी को पूरा कर देते हैं और शरीर को ठंडा रखते हैं। लेकिन जिन लोगों के शरीर के किसी बड़े हिस्से या फिर पूरे शरीर में ही पसीना नहीं आता उनकी इस समस्या का पता लगाना और फिर उसका इलाज करना बहुत जरूरी होता है। 

  • दिन में जिस समय में अधिक गर्मी और धूप होती है, उस समय अपने घर के परदे आदि लगा कर रखें। रात के समय अपने घर के दोनों तरफ एक-एक खिड़की खुली रखें ताकि ताजी हवा घर के अंदर से गुजरती रहे। 
  • दिन में जिस समय गर्मी अधिक हो उस समय घर के अंदर ही रहें और घर के अंदर एयर कंडीशनर, एयर कूलर या फिर कम से कम एक पंखा चला कर रखें। (और पढ़ें - गर्मियों में क्या खाना चाहिए)
  • अल्कोहल (शराब आदि) और कैफीन (चाय-कॉफी आदि) वाले पेय पदार्थ ना पिएं। इन पदार्थों से शरीर अधिक मात्रा में तरल पदार्थ निकालने लग जाता है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है और गर्मी संबंधी बीमारियां होने लगती हैं।  (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)
  • गर्मियों में गर्म लू चलने के दिनों में पर्याप्त मात्रा में स्पोर्ट्स ड्रिंक और फलों से रस पिएं, यह शरीर में नमक और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स की सही मात्रा को बनाए रखने का सबसे सुरक्षित और आसान तरीका है। (और पढ़ें - इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण)
  • यदि किसी प्रकार की दवा लेने के कारण पसीना आना बंद या कम हो गया है, तो उन दवाओं में बदलाव किया जाता है या उसे बंद किया जाता है। (और पढ़ें - दवा की जानकारी)
  • यदि किसी प्रकार की दवा लेने के कारण आपको पसीना न आने की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर आपकी दवाओं को बदल सकते हैं या उस दवा की खुराक को कम करने का सुझाव दे सकते हैं। हालांकि हर बार दवाओं में किसी प्रकार का बदलाव करना संभव भी नहीं होता और कई बार कुछ बदलाव करने से भी स्थिति में कुछ सुधार नहीं आता। 
  • यदि पसीने की नलिकाओं (Sweat ducts) के किसी कारण से बंद होने से पसीना नहीं आ रहा है, तो किसी एक्सफोलिएंट (Exfoliant) का उपयोग करके त्वचा को साफ किया जा सकता है। एक्सफोलिएंट कॉस्मेटिक प्रोडक्ट होते हैं, जो त्वचा से नष्ट हुई कोशिकाओं (Dead cells) को बाहर निकाल देते हैं।
  • अपने पेशाब के रंग का ध्यान रखें, क्योंकि पेशाब का रंग गहरा होना शरीर में पानी की कमी का संकेत देता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर अपने पेशाब का रंग हल्का बनाए रखें।
  • जब आप पसीना न आने के कारण होने वाली हीट स्ट्रोक से ठीक हो जाते हैं, तो अगले एक हफ्ते तक आप तापमान के प्रति अतिसंवेदनशील रह सकते हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह लिए बिना किसी प्रकार एक्सरसाइज या अधिक मेहनत वाली गतिविधि शुरु ना करें। 

पसीना ना आने से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

यदि शरीर से पसीना आना पूरी तरह से बंद हो गया है, तो इसके कारण गर्मी से संबंधित कई गंभीर रोग हो जाते हैं, जिनमें ये शामिल हैं:

  • दर्दनाक ऐंठन होना और पीठ, पेट, टांग और बाजू की मांसपेशियों में लंबे समय तक ऐंठन रहना (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द का इलाज)
  • गर्मी निकलना - यह गर्मी के मौसम में कठोर मेहनत वाला काम करने से होता है, इसमें कमजोरी, जी मिचलाना और दिल की धड़कनें बढ़ना आदि जैसे संकेत व लक्षण देखे जा सकते हैं। (और पढ़ें - दिल की धड़कन बढ़ने का इलाज)
  • लू लगना - यह अत्यधिक भयानक स्थिति होती है। इसमें शरीर का तापमान 104 डिग्री या उससे भी ऊपर हो जाता है। इसके कारण मरीज को उलझन सी महसूस होना और ठीक से होश ना रहने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि गंभीर रूप से लू लगी है, तो संभावित रूप से मरीज कोमा में भी जा सकता है और यहां तक उसकी मृत्यु भी हो सकती है। 

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