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कुत्तों में वजन बढ़ना क्या है?

जब कुत्ते के शरीर में अतिरिक्त मात्रा में वसा (White adipose) ऊतक इकठ्ठा होने लगता है, तो ऐसी स्थिति को मेडिकल भाषा में "केनाइन ओबेसिटी" कहा जाता है। इस स्थिति को सामान्य तौर पर कुत्तों में मोटापा होना कहा जाता है। जब कुत्ते बहुत ही कम मात्रा में अपनी शारीरिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, तो उनके शरीर में मोटापा बढ़ने लगता है।

मोटापा कुत्ते के जीवनकाल से लगभग 2 साल कम कर देता है और साथ ही मोटापे के साथ जीने में उसे काफी दिक्कतें भी आती हैं।

  1. कुत्ते का वजन बढ़ने के लक्षण - Kutte me vajan badhna ke lakshan
  2. कुत्ते में वजन बढ़ने के कारण - Kutte me vajan badhna ke karan
  3. कुत्ते में मोटापे के लिए रोकथाम - Kutte me motape ke liye roktham
  4. कुत्ते में मोटापे का इलाज - Kutte me motape ka ilaj
  5. कुत्तों में मोटापे से जुड़े जोखिम - Kutte me motape se jude jokhim

कुत्तों में वजन बढ़ने के संकेत क्या हो सकते हैं?

कुत्ते में मोटापे के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • वजन बढ़ना
  • कमर के चारों ओर अतिरिक्त चर्बी दिखना
  • कुत्ते के पेट का आकार बढ़ना
  • चर्बी इतनी बढ़ जाना कि छूने पर पसलियां महसूस न होना 
  • कुत्ते को सारा दिन सुस्ती महसूस होना
  • सांस लेने में दिक्कत होना

कुत्तों में वजन बढ़ने की वजह क्या हो सकती है?

कुत्तों में मोटापा होने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में कुत्तों का वजन अधिक एनर्जी प्राप्त करने और उसकी तुलना में कम खर्च कर पाने के कारण होता है। सरल शब्दों में कहें तो अगर वे भोजन के माध्यम से इतनी कैलोरी ले रहे हैं जितनी वे इस्तेमाल नहीं कर पाते, तो उनके शरीर में चर्बी के रूप में कैलोरी जमा होने लग जाती है। इसके परिणामस्वरूप वे मोटापे का शिकार हो जाते हैं।

कुत्तों में मोटापा होने के निम्न कारण हैं:

  • उम्र 
    इंसानों की तरह कुत्ते भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ चलना-फिरना धीरे-धीरे कम कर देते हैं। यदि उनकी शारीरिक मेहनत के अनुसार उनके भोजन की मात्रा को नहीं रखा गया, तो वे प्राप्त की गई कैलोरी का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।
     
  • आनुवंशिक कारक 
    कुछ नस्ल जैसे टेरियर ब्रीड्स, स्पैनियल्स, डैशहंड्स, बीगल और लैब्राडोर रिट्रीवर्स में जेनेटिक रूप से मोटापे का खतरा अधिक होता है।
     
  • न्यूटेरिंग
    यह एक मेडिकल प्रक्रिया होती है, जिससे कुत्ते के प्रजनन अंगों के हटा कर उन्हें नपुंसक बना दिया जाता है। न्यूटेरिंग प्रक्रिया के बाद कुत्ते के सेक्स हार्मोन प्रभावित हो जाते हैं जिसकी वजह से उनका मेटाबॉलिज्म भी ठीक से काम नहीं कर पाता। इसके परिणामस्वरूप भी कुत्तों का वजन अधिक बढ़ जाता है।
     
  • दवाएं
    मिर्गी के इलाज में उपयोग की जाने वाली फेनोबार्बिटोन दवा का सेवन करने से कुत्तों में भोजन करने के बाद भी संतुष्टि का अनुभव नहीं होता है। उन्हें बार-बार खाने की इच्छा होती है, जो उनमें वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसके अलावा कुत्तों में ग्लूकोकोर्टिकोइड्स (स्टेरॉयड) का इस्तेमाल करने से उनके शरीर में असामान्य रूप से वसा जमा होने लगती है।
     
  • सुस्त मालिक
    मोटापे से ग्रस्त लोग अक्सर व्यायाम या सुबह के समय सैर करने से कतराते हैं, इसी वजह उनके कुत्तों को भी घूमने-फिरने का मौका कम मिल पाता है। यह भी कुत्तों में मोटापा होने का एक कारण हो सकता है।
     
  • पर्यावरण 
    कुत्तों के मालिक अक्सर अपने कुत्तों के बढ़ते वजन की पहचान नहीं कर पाते हैं। आमतौर पर कुत्ते के देखभालकर्ता बार-बार उसे खाने के लिए कुछ न कुछ देते रहते हैं, जिसकी वजह से मोटापा होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त यदि आप कुत्ते को घर के बाहर नहीं ले जाते हैं या वह शारीरिक गतिविधि में भाग नहीं लेता है, तो उसमें मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • हाइपोथायरायडिज्म
    इंसानों की तरह कुत्तों में भी हाइपोथायरायडिज्म की वजह से मोटापा हो सकता है। हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति तब होती है, जब थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायरॉयड हार्मोन नहीं बना पाती है।
     
  • इंसुलिनोमा
    इंसुलिनोमा अग्नाशय में विकसित होने वाला एक ट्यूमर है, जो कि शुगर के स्तर को प्रभावित करता है। इसकी वजह से कुत्तों के खून में शुगर का स्तर कम हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है।
     
  • कुशिंग रोग
    इस रोग की वजह से कुत्तों के शरीर में बहुत अधिक मात्रा में कोर्टिसोल हार्मोन बनने लगता है, जिसकी वजह से उनमें पोलिफेजिया (अत्यधिक भूख लगना) की समस्या होती है और यह मोटापे का कारण बनता है।

कुत्तों में वजन बढ़ने पर क्या करना चाहिए?

अक्सर यह देखा गया है कि लगभग 50 फीसदी कुत्तों में, वजन कम होने के बाद अक्सर  5 फीसदी बढ़ दोबारा से बढ़ जाता है, इस स्थिति को मेडिकल भाषा में "रिबाउंड फिनोमिनन" (Rebound phenomenon) कहा जाता है।

इसलिए आपके कुत्ते में मोटापे की समस्या ठीक होने के बाद भी उसे नियमित रूप से जांच के लिए पशु चिकित्सक के पास ले जाते रहना चाहिए। साथ ही साथ घर पर भी नियमित रूप से अपने कुत्ते के वजन की जांच करते रहना चाहिए, यदि आपको लगता है कुत्ते का वजन बढ़ रहा है, तो पशु चिकित्सक को इस बारे में बताएं। इसके अलावा कुत्तों में मोटापे की समस्या को कम करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • कुत्ते को रोजाना घुमाने-फिराने ले जाएं
  • उसे पर्याप्त पोषण दें
  • कुत्ते के बीसीएस स्कोर की जांच करें (इसके लिए आप पशु चिकित्सक की मदद ले सकते हैं)

कुत्तों में मोटापे का इलाज कैसे किया जा सकता है?

मोटापे के लिए उपचार में धीरे-धीरे वजन घटाना शामिल है। इसमें ध्यान रखा जाता है कि कुत्ता गतिविधियों में ज्यादा से ज्यादा शामिल रहे और कैलोरी का कम सेवन करे।

पशु चिकत्सक की सलाह के अनुसार कुत्ते के आहार पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके दौरान उसे प्रोटीन से भरपूर और कम वसा वाले आहार देने चाहिए, जिससे उसे पेट भरा हुआ लगेगा और बार-बार भूख नहीं महसूस होगी।

मोटापे से ग्रस्त कुत्तों को कैलोरी वाला खाना नहीं देना चाहिए और ना ही किसी थाली में बचा हुआ झूठा खाना खिलाना चाहिए। इंसानों द्वारा छोड़ा गया झूठा खाना जैसे चिकन या पिज्जा आदि कुत्तों के लिए उचित नहीं होता क्योंकि उसमें वसा व कैलोरी अधिक होती है और जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। इनकी जगह हरी बींस, गाजर, केला व अन्य सब्जियां अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

इस स्थिति में पशु चिकित्सक कुत्ते को विशेष खाना देने की सलाह भी दे सकते हैं। मार्केट में कुछ विशेष प्रकार के डिब्बाबंद फूड मौजूद हैं, जो कुत्तों में वजन घटाने और वजन को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी होते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर कुत्तों को घर का खाना देने से बिलकुल मना कर सकते हैं या फिर बहुत ही कम मात्रा में देने की सलाह देते हैं, क्योंकि घर पर बने भोजन में कुछ विशेष प्रकार के मिनरल व विटामिनों की कमी होती है। 

मोटापे से ग्रस्त कुत्ते को उचित आहार देना और उसे उचित शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना बहुत जरूरी है। प्रति दिन तीस मिनट चलना, घर के बाहर खेल-कूद करना और तैराकी करने से कुत्ते को उचित शारीरिक परिश्रम मिल सकता है।

कुत्तों में मोटापे के जुड़े खतरे क्या हो सकते हैं? 

मोटापा इंसानों और कुत्तों दोनों के स्वास्थ्य के लिए बुरा होता है। मोटापे के कारण कुत्तों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अध्ययनों से पता चला है कि दुबले कुत्ते मोटे कुत्तों की तुलना में औसतन 1.8 साल अधिक जीवित रह सकते हैं।

मोटे कुत्तों में डायबिटीज मेलिटस और हाइपोथायरायडिज्म जैसी बीमारी होने की अधिक संभावना रहती है।

कुत्तों में मोटापे की वजह से हड्डियों से जुड़ी बीमारी जैसे एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट हो सकती है। इस बीमारी को एसीएल इंजरी भी कहा जाता है, इसमें घुटने के जोड़ को स्थिर रखने वाले लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

मोटापे की वजह से कुत्ते के शरीर में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों की समस्या हो सकती है जैसे अस्थमा।

अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि मोटापे से ग्रस्त कुत्तों में ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल और इसोफेजियल कैंसर होने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।

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