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अच्छा सेक्स इस बात पर नहीं है कि आप कितनी बार करते हैं या कितनी देर तक करते हैं, बल्कि इस पर है कि आप दोनों उसे कितना महसूस और एंजॉय करते हैं। आपके लिए सही पोज़िशन वही है जो उस वक्त आप दोनों को आराम और मज़ा दे, ना कि सिर्फ़ वो जो आपने कहीं पढ़ी, देखी या सुनी हो। जब दोनों के बीच आराम और एक-दूसरे पर भरोसा होता है, तो रिश्ता और नज़दीकी अपने आप गहरी और सुकून देने वाली हो जाती है। सेक्स को कभी भी सिर्फ़ "परफॉर्म करने" वाली चीज़ मत समझो क्योकि, ये तो दो लोगों का साथ में बिताया गया अच्छा और जुड़ाव भरा समय है, जहाँ असली बात है, उस पल में जीना और खुलकर बात करना, ना कि सिर्फ़ तकनीक या पोज़िशन पर ही ध्यान रखना नहीं होता है।

(और पढ़े - सेक्स के विभिन्न प्रकार)

  1. पोज़िशनस की साइंस – आनंद के पीछे की असली कहानी
  2. पसंद और अनुमति - सुरक्षित और सुखद बनाने की बातचीत
  3. फेमस सेक्स पोज़िशन
  4. क्यों पोज़िशन मायने रखती हैं
  5. हेल्थ फैक्टर्स और सावधानियां
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  7. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

हर पोज़िशन हमारे शरीर में आनंद महसूस करने का तरीका बदल सकती है। रिसर्च में, जहाँ अल्ट्रासाउंड से देखा गया, कि कुछ पोज़िशन (खासकर वो जिसमें पार्टनर आमने-सामने हों और पेल्विक हिस्से का सही एंगल और सपोर्ट हो) से क्लिटोरिस में खून का बहाव और नर्व्स की उत्तेजना बढ़ जाती है। इससे आनंद ज़्यादा गहरा महसूस होता है। जो पोज़िशन ग्रेविटी की ताकत को धक्का देने की मूवमेंट के साथ मिलाती हैं, वो अक्सर ज़्यादा तेज़ और मज़बूत ऑर्गैज़्म देती हैं।

साथ ही, स्टडीज़ ने ये भी दिखाया है कि अगर आप हफ़्ते में 1–2 बार सेक्स करते हैं, तो इससे इम्यून सिस्टम मज़बूत हो सकता है और आपके शरीर का तनाव कम करने वाला हार्मोन भी घट सकता है।

अगर आप कोई नई पोज़िशन ट्राय करना चाहते हैं, तो सबसे पहले पार्टनर से बात करके फिर शुरुआत करें। जैसे पूछ आप सकते हैं, “क्या तुम कुछ नया आज़माना चाहोगे?” या “क्या ये तुम्हें अच्छा लग रहा है?” उनकी बात ध्यान से सुनें, उनकी सीमाओं का सम्मान करें और जैसे-जैसे आगे बढ़ें, बातचीत करते रहें। याद रखें, सहमति सिर्फ़ एक बार पूछकर खत्म नहीं हो जाती है, ये तो पूरी एक्सपीरियंस के दौरान चलने वाली बात है, ताकि दोनों को आराम और अच्छा लगे।

 (और पढ़ें: महिला उत्तेजना के चरण और बढ़ाने के टिप्स)

सबसे ज्यादा फेमस और पसंद की जाने वाली सेक्स पोजीशन निम्न है :  

मिशनरी सेक्स पोज़िशन

मिशनरी सबसे आम और क्लासिक सेक्स पोज़िशन में से एक है, खासकर उन कपल्स के बीच जो नज़दीकी चाहते हैं। यह फेस-टू-फेस इंटिमेसी, आसानी से किसिंग और इमोशनल कनेक्शन देती है। यह पोज़ शारीरिक सुख और भावनात्मक जुड़ाव का संतुलित मिश्रण देती है, जिससे यह कई लोगों की पसंदीदा होती है। यह शुरुआती लोगों और आसान पोज़िशन पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन है।
इसे करने के लिए, एक पार्टनर पीठ के बल लेटता है और दूसरा ऊपर, उसकी ओर मुख करके लेटता है। रिसीव करने वाला पार्टनर बटक्स के नीचे तकिया रख सकता है ताकि कोण बदल जाए और आराम बढ़े। मूवमेंट, गहराई और रिदम को एडजस्ट करने के लिए दोनों को बातचीत करनी चाहिए।

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काउगर्ल और रिवर्स काउगर्ल सेक्स पोज़िशन

काउगर्ल और रिवर्स काउगर्ल पोज़िशन में ऊपर वाला पार्टनर (जो रिसीव कर रहा है) पूरी तरह कंट्रोल में होता है। वो तय करता है कि मूवमेंट का रिदम कैसा होगा, एंगल कैसे रहेगा और कितनी गहराई होगी। यही वजह है कि ये पोज़िशन मज़ेदार और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जाती है। पुरानी काउगर्ल में ऊपर वाला पार्टनर नीचे लेटे पार्टनर की तरफ़ मुंह करके बैठता है, जिससे आंखों में आंखें डालकर देखना और इमोशनल कनेक्शन बनाना आसान होता है। वहीं, रिवर्स काउगर्ल में ऊपर वाला पार्टनर पीठ करके बैठता है, जिससे दोनों को एक नया नज़ारा और अलग अनुभव मिलता है। इसे करने के लिए, नीचे वाला पार्टनर पीठ के बल लेट जाता है और ऊपर वाला उसके बटक्स पर बैठता है। ऊपर वाला पार्टनर अपने हिसाब से हिलता है या हल्के-हल्के ऊपर-नीचे बाउंस करता है ताकि मूवमेंट कंट्रोल में रहे। संतुलन बनाए रखने के लिए हाथों को नीचे वाले पार्टनर की छाती या जांघों पर टिकाना अच्छा रहता है। अगर घुटनों के नीचे तकिया रख लिया जाए या स्क्वाटिंग पोज़िशन अपनाई जाए, तो और भी आराम और कंट्रोल मिल सकता है।

 (और पढ़ें: यौन उत्तेजना क्या है, लक्षण और चरण)

डॉगी स्टाइल सेक्स पोज़िशन

डॉगी स्टाइल एक ऐसी पोज़िशन है जिसमें पार्टनर पीछे से एंट्री करता है। इसमें पैठ गहरी होती है और शारीरिक उत्तेजना भी ज़्यादा महसूस हो सकती है। इसे कई लोग थोड़ा वाइल्ड और इंटेंस मानते हैं, इसलिए ये उन कपल्स को ज़्यादा पसंद आती है जिन्हें मज़बूत और पास का शारीरिक कनेक्शन अच्छा लगता है। शरीर की बनावट के हिसाब से, ये पोज़िशन प्रोस्टेट या जी-स्पॉट को भी अच्छी तरह उत्तेजित कर सकती है। इसे करने के लिए, जो रिसीव कर रहा है वो नरम सतह पर हाथ और घुटनों के बल आ जाता है। दूसरा पार्टनर पीछे से, घुटनों के बल बैठकर या खड़े होकर, प्रवेश करता है। आराम और सहारा देने के लिए हाथों या घुटनों के नीचे कुशन रखना अच्छा रहता है। इसे धीरे-धीरे करें, पर्याप्त ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल करें और कमर  का एंगल ऐसे एडजस्ट करें कि दोनों को आराम और सुरक्षा महसूस हो।

फेस-टू-फेस सेक्स पोज़िशन

फेस-टू-फेस पोज़िशन में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं, जिससे इमोशनल जुड़ाव और मूवमेंट का तालमेल बेहतर हो जाता है। इस पोज़ में आंखों में आंखें डालकर देखना, किस करना और धीमी, सोच-समझकर की गई मूवमेंट से गहरा कनेक्शन महसूस होता है।

इसे करने के लिए, दोनों पार्टनर आमने-सामने बैठ सकते हैं, या तो पैर मोड़कर या एक-दूसरे की गोद में बैठते हुए। दोनों घुटनों के बल सीधे खड़े होकर भी आमने-सामने आ सकते हैं और एक-दूसरे को थाम सकते हैं। बैलेंस और सपोर्ट के लिए पार्टनर को बाहों में कसकर पकड़ना अच्छा रहता है। अगर पीठ या घुटनों के नीचे कुशन रख लें, तो पोज़िशन और भी आरामदायक हो जाती है।

फ्रॉम बिहाइंड सेक्स पोज़िशन

ये डॉगी स्टाइल तरह की पोज़िशन है, जिसमें एंगल थोड़ा बदल जाता है। इसमें मूवमेंट का रिदम और इंटेंसिटी आप दोनों की पसंद के हिसाब से बहुत नरम से लेकर तेज़ तक हो सकती है। ये पोज़िशन गहराई से महसूस होने वाले आनंद के लिए अच्छी मानी जाती है।

इसे करने के लिए, जो पार्टनर रिसीव कर रहा है, वो घुटनों के बल खड़ा हो सकता है या थोड़ा आगे झुक सकता है। दूसरा पार्टनर पीछे से एंट्री करता है। इसे दीवार के सहारे, सोफ़ा पर, या बेड के किनारे भी किया जा सकता है। अगर आप घुटनों को ज़्यादा मोड़ लें या बटक्स की ऊँचाई बदल दें, तो एंगल और इंटेंसिटी दोनों बदल सकते हैं, जिससे अनुभव अलग महसूस होता है।

(और पढ़ें: महिला हार्मोन और महिलाओं के स्वास्थ्य में उनकी भूमिका)

स्टैंडिंग सेक्स पोज़िशन

स्टैंडिंग पोज़िशन रोमांचक और एनर्जी से भरी होती है। इसमें बैलेंस और तालमेल की वजह से अलग ही थ्रिल आता है, लेकिन इसके लिए अच्छे मसल कंट्रोल की ज़रूरत होती है।

इसे करने के लिए, दोनों पार्टनर आमने-सामने करीब खड़े होते हैं। एक पार्टनर अपना पैर उठा सकता है या जो रिसीव कर रहा है वो दीवार का सहारा लेकर थोड़ा झुक सकता है। बैलेंस बनाए रखने के लिए किसी मज़बूत फर्नीचर का सहारा लें या एक-दूसरे को कसकर पकड़ें। ज़रूरत के हिसाब से सपोर्ट और पोज़िशन एडजस्ट करें।
(और पढ़ें: सेक्स क्यों ज़रूरी है?)

सिटिंग सेक्स पोज़िशन

सिटिंग पोज़िशन फेस-टू-फेस नज़दीकी, धीमी मूवमेंट और गहरे जुड़ाव के लिए बहुत अच्छी होती है। ये आरामदायक होती है और इसमें किस करना, आंखों में आंखें डालना और ऊपरी हिस्से को छूना आसान रहता है। इसे करने के लिए, एक पार्टनर कुर्सी, सोफ़ा या बेड पर बैठ जाता है और दूसरा उसके ऊपर बैठता है, चाहे आगे की तरफ़ मुंह करके या पीछे की तरफ़। दोनों एक-दूसरे को थाम सकते हैं ताकि बैलेंस बना रहे। पैरों को ज़मीन पर टिकाकर पोज़िशन को स्थिर और आरामदायक रखा जा सकता है।

नीलिंग सेक्स पोज़िशन

नीलिंग पोज़ सिटिंग और स्टैंडिंग के बीच का विकल्प देती है। यह गहरी पैठ देती है और जॉइंट या बैक पेन वाले लोगों के लिए आरामदायक हो सकती है।
इसे करने के लिए, दोनों पार्टनर घुटनों के बल बैठते हैं, या तो फेस-टू-फेस या रियर-एंट्री। घुटनों के नीचे मुलायम सतह रखने से आराम बढ़ता है। मूवमेंट स्लो रखें और दोनों के लिए सही आराम और आनंद ढूंढें।
(और पढ़ें: महिलाओं में सेक्स ड्राइव )

लाइंग डाउन सेक्स पोज़िशन

ये पोज़िशन सबसे आरामदायक होती है, खासकर तब जब दोनों में से किसी के पास ज़्यादा ताकत या ऊर्जा न हो। ये धीमे और नज़दीकी पलों के लिए बिल्कुल परफ़ेक्ट है, और तकियों की मदद से इसे आसानी से बदला जा सकता है।

इसे करने के लिए, दोनों पार्टनर लेट जाते हैं, या तो साथ-साथ या एक ऊपर और दूसरा नीचे। इसमें मूवमेंट कम होता है, जिससे दोनों पास रहकर किस कर सकते हैं, बातें कर सकते हैं और एक-दूसरे का साथ महसूस कर सकते हैं। अगर बटक्स के नीचे तकिया रख लिया जाए, तो पोज़िशन और भी आरामदायक हो जाती है और गहराई भी बढ़ जाती है।

स्पूनिंग (साइडवेज़ सेक्स पोज़िशन)

स्पूनिंग एक नरम और सुकून देने वाली पोज़िशन है, जो दोनों के बीच इमोशनल जुड़ाव और शारीरिक आराम बढ़ाती है। इसे करने के लिए, दोनों पार्टनर साइड में लेटते हैं, जिसमें देने वाला पार्टनर पीछे की तरफ़ होता है। पीछे वाला पार्टनर धीरे-धीरे प्रवेश करता है और पूरे समय पास बना रहता है। चाहें तो एक-दूसरे को बाहों में बांध सकते हैं और बटक्स का एंगल ऐसे एडजस्ट कर सकते हैं कि दोनों को ज़्यादा आराम और आनंद मिले।

राइट-एंगल सेक्स पोजीशन

ये पोज़िशन थोड़ी मज़ेदार, फ्लर्टी और रिश्ते में पावर का खेल बदलने के लिए बेहतरीन है। ये काउगर्ल पोज़िशन का एक नया अंदाज़ है, जिसमें सिडक्शनऔर विज़ुअल प्ले पर ज़्यादा ध्यान होता है। इसे करने के लिए, एक पार्टनर मज़बूत कुर्सी पर बैठता है और दूसरा उसके बटक्स पर आकर बैठता है, चाहे सामने की तरफ़ मुंह करके या पीछे की तरफ़। मूवमेंट धीमा और थोड़ा टीज़िंग वाला हो सकता है, जिसमें हल्के बॉडी रोल्स और धीमी घुमावदार मूवमेंट शामिल हों। बैलेंस बनाए रखने के लिए पैरों को किसी मज़बूत और स्थिर सतह पर टिकाना अच्छा रहता है।

द ब्रिज सेक्स पोज़िशन

ब्रिज पोज़िशन उन लोगों के लिए बढ़िया है जो थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी और गहरी पैठ का मज़ा लेना चाहते हैं। इसे करने के लिए, एक पार्टनर पीठ के बल लेट जाता है और अपने बटक्स को ऊपर उठाता है, जैसे ब्रिज बनाते हैं (पैर ज़मीन पर टिके और घुटने मुड़े हुए हों)। दूसरा पार्टनर सामने से, घुटनों के बल बैठकर या खड़े होकर, प्रवेश करता है। ये पोज़िशन ऐसा एंगल देती है जिससे जी-स्पॉट या प्रोस्टेट को बेहतर तरीके से उत्तेजित किया जा सकता है। अगर बटक्स को लंबे समय तक ऊपर रखना मुश्किल लगे, तो घुटनों के नीचे तकिया रख लें या पार्टनर का सहारा लें ताकि पोज़ ज़्यादा आरामदायक हो जाए।

(और पढ़े-पेनिस का नार्मल साइज कितना होता है?)

द लोटस सेक्स पोज़िशन

लोटस पोज़िशन बहुत गहरी और ध्यान से की जाने वाली होती है, जो दिल और शरीर दोनों को सटिस्फैक्शन देती है। ये धीमे सेक्स और प्यार भरे पलों के लिए बहुत अच्छी होती है। इसे करने के लिए, एक पार्टनर पैरों को क्रॉस करके बैठ जाता है और दूसरा उनकी गोद में बैठता है, अपने पैरों को उनके कमर के चारों तरफ लपेटते हुए। दोनों एक-दूसरे को मजबूती से पकड़ते हैं और धीरे-धीरे हिलते हैं। इस पोज़ में आंखों में आंखें डालकर देखना, किस करना और गहरा जुड़ाव महसूस करना आसान होता है।

ब्लो जॉब

लिंग पर ओरल सेक्स बहुत आनंददायक और करीब से जुड़ने वाला तरीका है। इसमें शरीर के अंदर प्रवेश की ज़रूरत नहीं होती, फिर भी मज़ा मिलता है और उत्तेजना को आप आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। इसे करने के लिए, जो व्यक्ति इसे रिसीव कर रहा है, वो लेट सकता है, बैठ सकता है या खड़ा हो सकता है। देने वाला पार्टनर घुटनों के बल बैठकर या आराम से कहीं लेटकर ये कर सकता है। मुँह के साथ-साथ हाथों का भी इस्तेमाल करें, बीच-बीच में थोड़ा आराम लें और अगर दोनों को अच्छा लगे तो आंखों में आंखें डालकर या बात करके कनेक्शन बनाएं।

कनिलिंगस पोजीशन

यह ओरल सेक्स का एक रूप है जो क्लिटोरिस, लैबिया और योनि को उत्तेजित करता है। यह बिना प्रवेश के बहुत अच्छा और असरदार है। इसे करने के लिए, जो रिसीव कर रहा है वो थोड़ा पैर फैलाकर पीठ के बल लेटा रहता है। देने वाला पार्टनर घुटनों के बल बैठ सकता है या सामने की तरफ़ लेटा हो सकता है। हाथों से धीरे-धीरे लैबिया (योनि के बाहरी हिस्से) को फैलाते हुए, मुँह की गति को धीरे और बराबर रखें। पार्टनर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें और उसी हिसाब से अपनी गति और दबाव बदलते रहें।

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गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित सेक्स पोजीशन्स

इस दौरान आराम और सुरक्षा सबसे ज़रूरी होती है। पेट पर दबाव न डालने वाले पोजीशन्स चुनें, जो गर्भवती साथी को सही और सुरक्षित रखे। स्पूनिंग, काउगर्ल या तकिये के सहारे मिशनरी अच्छे विकल्प हैं। डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें। कुशन का इस्तेमाल करें और जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़े, पोजीशन्स बदलते रहे।

कम आम या एडवेंचरस पोज़िशन

जैसे लोटस पोज़ जिसमें दोनों पार्टनर पैर क्रॉस करके बैठते हैं, या पाइल्ड्राइवर जिसमें एक पार्टनर दूसरे के कंधों पर अपने बटक्स को उठाता है। ये पोज़ ज़्यादा एक्सपेरिमेंट करने वाले होते हैं और इनमें शरीर का लचीलापन भी चाहिए होता है।

इन्हें तभी ट्राय करें जब दोनों पार्टनर दिल से तैयार हों और शरीर से बिलकुल सही महसूस कर रहे हों। बहुत सारे तकियों (कुशन) का इस्तेमाल करें ताकि आराम बना रहे और पूरी प्रक्रिया के दौरान एक-दूसरे से बात करते रहें ताकि सुरक्षा बनी रहे।

 (और पढ़ें: ओरल सेक्स का पूरा गाइड)

हर इंसान का शरीर अलग होता है। और अलग-अलग पोज़िशन से ये तय होता है कि कौन-कौन सी नसें, मांसपेशियां और इंटिमेट हिस्से ज्यादा उत्तेजित होंगे। सिर्फ़ शरीर का सुख ही नहीं, पोज़िशन आपके दिमाग और दिल पर भी असर डालती हैं। कुछ पोज़िशन आपको ज़्यादा पावरफुल या कंट्रोल में महसूस कराती हैं, जबकि कुछ आपको ज़्यादा सुरक्षित और गहरे जुड़े हुए महसूस कराती हैं। यानी पोज़िशन का असर केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और इमोशनली भी होता है।

(और पढ़े -सेक्स से कैसे तनाव कम होता है?)

अगर आप दर्द से जूझ रहे हैं, किसी चोट से ठीक हो रहे हैं, चलने-फिरने में दिक्कत है, या आपको एंडोमेट्रियोसिस जैसी कोई बीमारी है, तो आपको ऐसी पोज़िशन चुननी चाहिए जो आरामदायक हों और शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें। रिसर्च के मुताबिक़, स्पूनिंग, पार्टनर ऊपर वाला पोज़ या साइड-लेटिंग जैसी नरम और कोमल पोज़िशन दर्द कम करने में मददगार होती हैं। अगर आपको हार्ट डिज़ीज़ या हाई ब्लड प्रेशर जैसी कोई बीमारी है और आपको यकीन नहीं कि सेक्स करना सुरक्षित है या नहीं, तो हमेशा डॉक्टर से सलाह लें। रिसर्च बताती है कि सेक्स हल्के व्यायाम जैसा हो सकता है, लेकिन हर किसी के लिए नहीं भी होता तो इसकी सलाह लेना बेहतर होता है। 

(और पढ़े -सेक्स से पहले क्या खाएं व क्या नहीं?)

आपके सवालों के जवाब यहाँ पाए। 

कौन सी सेक्स पोज़िशन सबसे ज़्यादा आनंद देती है?

यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। जिन पोज़ में क्लिटोरल या जी-स्पॉट/प्रोस्टेट उत्तेजना आसानी से हो, वे अक्सर ज़्यादा आनंददायक मानी जाती हैं।

नए लोग कौन सी पोज़ से शुरुआत करें?

मिशनरी, स्पूनिंग और सिटिंग पोज़ शुरुआती लोगों के लिए सबसे आसान और आरामदायक होती हैं।

अगर सेक्स के दौरान दर्द हो तो क्या करें?

तुरंत रुकें, पोज़िशन बदलें या अधिक ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल करें। अगर दर्द जारी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लें।

क्या पोज़िशन बदलने से रिश्ते में नयापन आता है?

हाँ, नई पोज़िशन ट्राय करने से उत्साह, खोज और जुड़ाव बढ़ सकता है, लेकिन केवल तब, जब दोनों पार्टनर सहज हों।

मुझे सेक्स संबंधी गतिविधि के बारे में डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

अगर सेक्स के दौरान लगातार दर्द हो, रक्तस्राव हो, भावनात्मक परेशानी हो, या किसी मेडिकल समस्या के कारण चिंता हो रही हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर या सेक्सुअल हेल्थ एक्सपर्ट से संपर्क करें।

सेक्स पोज़िशन कोई प्रतियोगिता नहीं हैं,ये अलग-अलग शरीर और मूड के लिए अलग-अलग रास्ते हैं। सबसे अच्छी पोज़ वही होती है जिसमें आप दोनों आराम, भरोसा और आनंद महसूस करें।
याद रखें: बातचीत, इजाजत और प्रयोग ही आपको पता लगाने में मदद करेंगे कि आपके लिए क्या सबसे अच्छा काम करता है।

Dr. Hakeem Basit khan

Dr. Hakeem Basit khan

सेक्सोलोजी
15 वर्षों का अनुभव

Dr. Zeeshan Khan

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