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2025 में लोग सेक्स पर बात करने में पहले से कहीं ज्यादा खुले हैं। आप इसे रिश्तों में, सोशल मीडिया पर और यहां तक कि स्कूलों में भी देख सकते हैं। लेकिन ओरल सेक्स आज भी ऐसा विषय है, जिस पर बहुत से लोग सही महसूस नहीं करते हैं। यह नॉर्मल है, लेकिन अब भी लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इसमें सच में क्या शामिल है, यह कितना सेफ है, और क्या इसे एंजॉय करना ठीक है। इसी वजह से हमें इस बारे में साफ-साफ बात करनी चाहिए।

बहुत से लोग मानते हैं कि ओरल सेक्स पूरी तरह सेफ है, लेकिन यह सच नहीं है। गोनोरिया, हर्पीस, क्लैमाइडिया और सिफलिस जैसी इन्फेक्शन ओरल कॉन्टैक्ट से भी फैल सकते हैं, भले ही लक्षण न दिखें। सबसे बड़ा खतरा एचपीवी (HPV) से है, जो आसानी से फैलता है और कभी-कभी मुँह या गले के कैंसर तक का कारण बन सकता है। व्यक्ति को खुद कुछ महसूस न हो, फिर भी वह इसे दूसरों तक पहुँचा सकता है।

अब हमारे पास खुद को सुरक्षित रखने के बेहतर तरीके हैं। एचपीवी वैक्सीन उन वायरस टाइप्स से बचाती है जो गंभीर समस्याएँ पैदा करते हैं और यह 45 साल तक की उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध है। PrEP एक रोज़ाना ली जाने वाली गोली है जो एचआईवी से बचाव करती है। ये साधन अब आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें सही ढंग से इस्तेमाल करने के लिए सही जानकारी ज़रूरी है।

आजकल लोग सेक्सुअल एक्टिविटी को लेकर भी अलग सोचने लगे हैं। कम्फर्ट और कम्युनिकेशन मायने रखते हैं। कुछ लोग ओरल सेक्स का आनंद लेते हैं, कुछ नहीं, और यह बिल्कुल ठीक है। सबसे ज़रूरी है ईमानदारी, सम्मान और वही चुनना जिसमें आप अच्छा महसूस करें। 

इस आर्टिकल के लिए जरिये आप जानेंगे ओरल सेक्स के बारें में पूरी जानकारी चलिए शुरू करते हैं - 

 (और पढ़ें - लुब्रिकेंट को इस्तेमाल)

  1. ओरल सेक्स क्या है?
  2. लोग इसे क्यों चुनते हैं या क्यों बचते हैं?
  3. ओरल सेक्स कैसे करें
  4. ओरल सेक्स से STI का खतरा
  5. ओरल सेक्स के फायदे
  6. सुरक्षित ओरल सेक्स के तरीके
  7. STI टेस्टिंग और स्क्रीनिंग
  8. सहमति, बातचीत और सांस्कृतिक नज़रिया
  9. सुरक्षित ओरल सेक्स के लिए आधुनिक उपकरण
  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  11. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

ओरल सेक्स का मतलब है मुँह, होंठ या जीभ का इस्तेमाल करके पार्टनर के प्राइवेट पार्ट्स को छूना और उत्तेजित करना है। कुछ लोग इसे लंबे समय तक पार्टनर के साथ रेगुलर रूप से करते हैं, कुछ सिर्फ इच्छा के कारण ट्राई करते हैं, और कुछ के लिए यह उनकी सेक्सुअल ज़िंदगी का हिस्सा ही नहीं होता है।

कई लोगों के लिए ओरल सेक्स फोरप्ले का हिस्सा है या भरोसा और जुड़ाव बनाने का तरीका है। यह युवाओं में भी आम है, जो वैजाइनल या एनल सेक्स से बचना चाहते हैं। कुछ कपल इसे अपनी इम्पोर्टेन्ट यौन एक्टिविटी के रूप में अपनाते हैं। यह सिर्फ किसी एक तरह के रिश्ते तक लिमिटेड नहीं है, चाहे समलैंगिक रिश्ते हों, अलग लिंग वाले रिश्ते हों, शादीशुदा हों या कैज़ुअल पार्टनर हर कोई इसे अपने हिसाब और तरिके से अपनाता है।

अक्सर इस्तेमाल होने वाले शब्द:

  • फेलेशियो : पेनिस की ओरल स्टिम्युलेशन
  • कनिलिंगस : वल्वा और क्लिटोरिस की ओरल स्टिमुलेशन
  • एनिलिंगस : गुदा या एनल एरिया की ओरल स्टिम्युलेशन

ये बस लेबल हैं। लोग क्या करते हैं और क्या एंजॉय करते हैं, यह व्यक्ति-व्यक्ति पर डिपेंड करता है। कुछ लोग देना पसंद करते हैं, कुछ पाना, और कुछ बिल्कुल भी इसमें शामिल नहीं होना चाहते हैं। 

आज लोग ज्यादा समझते हैं कि सेक्स का कोई फिक्स नियम नहीं है। ओरल सेक्स “परफॉर्मेंस” या प्रेशर की चीज़ नहीं है। यह आपके सुख, देखभाल, पास आने का ज़रिया हो सकता है, या फिर कपल इसे न करने का ऑप्शन भी ले सकते हैं। 

(और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स कैसे करें)

साथ ही, ओरल सेक्स सिर्फ फिजिकल तक नहीं है। इसमें आपके इमोशंस, ट्रस्ट और सहमति शामिल हैं। जैसे किसी भी यौन एक्टिविटी में, इसमें भी दोनों की इच्छा ज़रूरी है, न कि गिल्ट या दबाव में किया गया काम लगे।

बहुत से लोग बड़े होते समय ओरल सेक्स के बारे में मिले-जुले बातें सुनते हैं। कोई कहता है यह गंदा है, गलत है या असली सेक्स ही नहीं है। वहीं, कुछ को ऑनलाइन इसका असली रूप दिखाया जाता है। इससे लोग कन्फ्यूज या अनकंफर्टेबल हो सकते हैं। लेकिन सच्चाई सीधी है:

  • सवाल करना ठीक है
  • समय लेना ठीक है
  • हाँ या ना कहना आपके अपने ऊपर निर्भर होना चाहिए

आज ओरल सेक्स लोगों के जुड़ने, भरोसा बनाने और एक-दूसरे की परवाह करने का तरीका भी हो सकता है। आप इसमें सही हैं, इंट्रेस्टेड हैं या बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं रखते है, यह आपका निर्णय है। इसमें कोई जल्दी नहीं है और कोई रूल्स नहीं है। बस इतना ध्यान रखें कि जो भी ऑप्शन लिया है, वह आपके लिए सही हो।

(और पढ़ें - गर्भ रोकने के उपाय)

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लोग अलग-अलग कारणों से ओरल सेक्स एक्सप्लोर करते हैं। कई लोगों के लिए यह सिर्फ अच्छा महसूस करने और अपने पार्टनर को अच्छा महसूस कराने का ज़रिया होता है। यह प्यार दिखाने, ट्रस्ट बनाने या गहरा जुड़ाव बनाने का तरीका हो सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें देने या पाने से आने वाली नज़दीकी पसंद है। दूसरों को यह अच्छा लगता है कि यह उन्हें पार्टनर के शरीर को धीरे और पर्सनल तरीके से एक्सप्लोर करने का मौका देता है। लंबे रिश्तों में यह फिर से नज़दीकी या चिंगारी लाने में मदद कर सकता है।

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लोग क्यों पसंद करते हैं?

ओरल सेक्स पार्टनर के साथ प्यार जताने, जुड़ने और ट्रस्ट बढ़ाने का तरीका हो सकता है। कुछ लोग कहते हैं कि इससे वे इमोशनल रूप से ज्यादा करीब महसूस करते हैं, वहीं कुछ सिर्फ फिजिकल आनंद के लिए इसे पसंद करते हैं। यह स्लो, फोकस्ड और पर्सनल हो सकता है, जिससे कपल एक-दूसरे के शरीर को बेहतर समझ पाते हैं।

कुछ लोग इसको अलग कारण से भी पसंद कर सकतें हैं। इसमें प्रेग्नेंसी का रिस्क नहीं होता, इसलिए कुछ लोग इसे “सेफर ऑप्शन” मानते हैं। युवा कपल या वे लोग जो पेनिट्रेटिव सेक्स के लिए तैयार नहीं हैं, उनके लिए यह सेक्स करने का एक तरीका हो सकता है। कुछ इसे फोरप्ले के रूप में भी पसंद करते हैं ताकि वे आगे की एक्टिविटी से पहले ज्यादा आसान हो सकें।

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लोग क्यों बचते हैं?

हर किसी को ओरल सेक्स अच्छा लगे, ऐसा ज़रूरी नहीं है और यह बिल्कुल नॉर्मल है। एक सर्वे में किसी ने कहा, “जब मुझे अपने शरीर की स्मेल की चिंता होती है, तो मैं पल का मजा नहीं ले पाती।” यह इमोशंस आम है और इस पर बात करना ठीक है। कई लोग यह भी सोचते हैं कि वे इसे “सही तरीके” से नहीं कर पाएंगे, या यह सोचकर ही अजीब महसूस करते हैं। ये झिझक पिछली अनुभवों, कम सेक्स एजुकेशन या सांस्कृतिक मान्यताओं से आ सकती हैं, जिनमें ओरल सेक्स को टैबू माना जाता है।

कुछ लोगों के लिए यह गहरी इमोशनल वजह से भी हो सकता है। अगर किसी ने कभी नेगेटिव या ट्रॉमैटिक अनुभव झेला हो, तो उनके लिए इसमें इजी होना मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि वे “टूटे” हैं बस उन्हें समझ, समय और सेफ माहौल की ज़रूरत है। 

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जब दबाव बीच में आ जाए

कभी-कभी लोग इसे इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें करना चाहिए, जबकि वे पूरी तरह सहज नहीं होते। यह दबाव पार्टनर, दोस्तों या ऑनलाइन चीज़ों से आ सकता है। लेकिन यौन अनुभव कभी भी टेस्ट या उम्मीद की तरह नहीं होना चाहिए। अगर कोई सिर्फ गिल्ट या खोने के डर से हाँ कहे, तो उसमें असली जुड़ाव नहीं रह जाता है। इसलिए बातचीत बहुत ज़रूरी है।

कम्फर्ट कम्युनिकेशन से आता है

सबसे ज़्यादा मददगार यही है कि आप खुलकर बात करें। यह कहना बिल्कुल ठीक है “मैं नर्वस हूँ” या “मैं एक्साइटेड हूँ लेकिन नहीं जानता कहाँ से शुरू करूँ।” आपको एक्सपर्ट होने की ज़रूरत नहीं है, न ही आपके पार्टनर को। सबसे ज़रूरी है कि दोनों को सुना जाए, सम्मान दिया जाए और वे सुरक्षित महसूस करें।

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यह भी जरूरी है कि आप अपना मन बदल सकें। एक बार की “हाँ” हमेशा की “हाँ” नहीं होती है। सहमति एक बार की एग्रीमेंट नहीं है यह साफ, लगातार और बिना दबाव के होनी चाहिए।

यह हमेशा व्यक्तिगत चुनाव है

ओरल सेक्स कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो हर किसी को करनी ही चाहिए। कुछ लोग इसे बहुत पसंद करते हैं। कुछ कभी दिलचस्पी नहीं लेते है। सबसे ज़रूरी यह है कि आपका डिसीजन आपके अपने कम्फर्ट और समय पर बेस्ड हो। आप सवाल पूछने, समय लेने या बिना कारण बताए “ना” कहने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। यही असली सहमति और सम्मान है।

पुरुष पार्टनर पर ओरल सेक्स

पुरुष पार्टनर पर ओरल सेक्स तब किया जा सकता है जब लिंग खड़ा हो या न हो। शुरुआत हल्के फोरप्ले से करें, जैसे हाथों या होंठों से छूना, ताकि आपके पार्टनर की उत्तेजना बढ़े। अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि कितनी गहराई तक जाना है, तो इस समय आपका हाथ गाइड की तरह काम कर सकता है। धीरे-धीरे आगे बढ़ें, रिलैक्स रहें और अपने पार्टनर के इशारों पर ध्यान दें।

लिंग का वीर्य मुंह में लेना पूरी तरह आपकी पर्सनल चॉइस है। ये कोई ज़रूरी नहीं है। सेफ ओरल सेक्स के लिए फ्लेवर्ड कंडोम का इस्तेमाल करना बेहतर है। इससे यौन संक्रमण (STI) का खतरा कम होता है और अनुभव भी आरामदायक रहता है।
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महिला पार्टनर पर ओरल सेक्स

महिला पार्टनर पर ओरल सेक्स करने से पहले फोरप्ले में समय दें। किस करना, छूना और इमोशनल कंफर्ट बनाना ज़रूरी है। क्लिटोरिस सबसे सेंसेटिव हिस्सा होता है, जिसमें हज़ारों नर्व एंडिंग्स होती हैं। नरम और धीरे-धीरे जीभ का इस्तेमाल करें और उनसे पूछें कि उन्हें क्या अच्छा लग रहा है। अच्छी बातचीत क्लिटोरल स्टिमुलेशन को और मज़ेदार बनाती है।
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ओरल-एनल सेक्स कैसे करें

ओरल-एनल सेक्स कई स्वस्थ यौन संबंधों का हिस्सा है। इसमें साफ-सफाई सबसे जरूरी है और शुरू करने से पहले उस हिस्से को साफ ज़रूर करें। पहले गुदा और जननांग के बीच के हिस्से को हल्के से छुएं और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ें। ध्यान रखें, गुदा से योनि की ओर न जाएं, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा होता है।
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ओरल सेक्स अक्सर संभोग से ज्यादा सेफ माना जाता है, लेकिन इसमें भी इन्फेक्शन फैल सकता है खासकर तब जब प्रोटेक्शन न हो या किसी के मुंह में कट, छाले या खराब सफाई हो।

मुंह से फैलने वाले संक्रमण

गोनोरिया, क्लैमाइडिया, सिफलिस, हर्पीस, हेपेटाइटिस और HPV जैसे इन्फेक्शन ओरल सेक्स से फैल सकते हैं। ये गले, मुंह, जननांग या गुदा तक को इफ़ेक्ट कर सकते हैं। अक्सर लोग इन्फेक्टेड होते हुए भी नहीं जानते क्योंकि कई बीमारियों, जैसे क्लैमाइडिया या HPV, में लक्षण नहीं दिखते हैं।
(और पढ़ें - लिंग को लंबा करने के तरीका)

HPV और गले का कैंसर

आजकल HPV बड़ा चिंता का विषय है। HPV के कुछ प्रकार गले और मुंह के कैंसर से जुड़े पाए गए हैं। जितने ज़्यादा ओरल सेक्स पार्टनर होंगे, खतरा उतना बढ़ता है। सिर्फ़ एक पार्टनर भी इस खतरे को दोगुना कर सकता है, उन लोगों की तुलना में जिन्होंने कभी ओरल सेक्स नहीं किया है।

छुपे संक्रमण और लंबे समय के असर

गले में क्लैमाइडिया या गोनोरिया होने पर अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखता है, लेकिन ये फैलते रहते हैं और सूजन या नुकसान कर सकते हैं। ये HIV संक्रमण का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।

जोखिम कब बढ़ता है

संक्रमण का खतरा ज़्यादा होता है अगर—

  • कई पार्टनर हों
  • मुंह की सफाई खराब हो
  • मुंह में छाले या कट हों
  • सेक्स से ठीक पहले ब्रश या फ्लॉस किया हो
  • मुंह के छोटे-छोटे जख्म संक्रमण को शरीर में आसानी से प्रवेश करने देते हैं।

(और पढ़ें - पहली बार सेक्स)

इलाज न करने के नुकसान

गोनोरिया और क्लैमाइडिया धीरे-धीरे टिश्यू को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर इलाज न किया जाए, तो ये बांझपन का कारण बन सकते हैं या दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। समय पर टेस्ट और इलाज से इसे रोका जा सकता है।

HIV का खतरा

ओरल सेक्स से HIV फैलने का खतरा बहुत कम होता है, लेकिन पूरी तरह पॉसिबल नहीं है। रिसर्च के मुताबिक, ओरल सेक्स रिसीव करने वाले को HIV होने का खतरा लगभग 1 में से 2500 बार होता है। अगर HIV पॉज़िटिव पार्टनर इलाज पर है और उसका वायरल लोड अनडिटेक्टेबल है, तो संक्रमण का खतरा लगभग जीरो हो जाता है।

प्रोटेक्शन क्यों ज़रूरी है

पुरुष पर ओरल सेक्स के लिए कंडोम और महिला या एनल ओरल सेक्स के लिए डेंटल डैम का इस्तेमाल इन्फेक्शन के खतरे को घटाता है। फ्लेवर्ड बैरियर इसे और कम्फर्टेबल बनाते हैं। याद रखें, थूक ल्यूब्रिकेंट नहीं है और इसमें भी थोड़ा रिस्क हो सकता है।

नियमित टेस्टिंग क्यों ज़रूरी है

ज्यादातर ओरल STIs बिना लक्षण के होते हैं, इसलिए नियमित जांच बहुत जरूरी है, खासकर अगर आपके कई या नए पार्टनर हों। हर 3 महीने में टेस्ट कराना बेहतर है। ये न सिर्फ़ सेहत की सुरक्षा करता है, बल्कि रिश्तों में भरोसा भी बढ़ाता है।

HIV का असली खतरा समझें

कई लोग सोचते हैं  "क्या HIV सच में ओरल सेक्स से फैल सकता है?" सच ये है कि ये बहुत कम होता है, लेकिन खतरा पूरी तरह जीरो भी नहीं है। अगर मुंह में छोटे कट, मसूड़ों से खून, छाले हों या पार्टनर का वीर्य मुंह में आए तो रिस्क बढ़ जाता है।

अनुमान बताते हैं कि ओरल सेक्स रिसीव करने से HIV इन्फेक्शन की संभावना करीब 0.04% यानी 1 में से 2500 बार है, और ओरल सेक्स देने से रिस्क लगभग 0.005% है। यानी बहुत कम होता है।
(और पढ़ें - सेक्स पोजीशन)

खतरा कब बढ़ता है

  • कट, छाले या मसूड़ों से खून
  • हाल ही में ब्रश/फ्लॉस करने से मुंह में चोट
  • पहले से STI होना
  • मुंह में वीर्य आना
  • पार्टनर का HIV स्टेटस न पता होना

कुछ इन्फेक्शन, जैसे हर्पीस या गोनोरिया, HIV के खतरे को और आसान बना देते हैं, अगर कोई लक्षण न हो।

सबसे जरूरी बात: अगर HIV पॉज़िटिव इंसान इलाज पर है और उसका वायरल लोड अनडिटेक्टेबल है, तो HIV फैलने का रिस्क लगभग शून्य हो जाता है।

ओरल सेक्स पार्टनर्स के बीच जुड़ाव और नज़दीकी बढ़ाने का एक खूबसूरत और अच्छा तरीका हो सकता है। इसमें अक्सर गहरा इमोशनल कनेक्शन महसूस होता है, जब एक पार्टनर पूरी तरह दूसरे की खुशी और सुख पर ध्यान देता है।

कई लोगों के लिए ये संभोग की तुलना में कम प्रेशर वाला लगता है। इसमें हमेशा उतनी उम्मीदें या दबाव नहीं होता और ये ज़्यादा खेल-खेल में और आराम से किया जा सकता है। ओरल सेक्स देने या पाने का अनुभव एक खास नज़दीकी का एहसास दिलाता है।

(और पढ़ें: फिंगरिंग के बारे में जानकारी)

लोग अक्सर ओरल सेक्स से मिलने वाले शारीरिक और मानसिक फायदों के बारे में बताते हैं, जैसे:

  • अपने पार्टनर के साथ ज़्यादा जुड़ाव महसूस करना
  • सेक्स के बाद तनाव और चिंता में कमी
  • यौन संतुष्टि के बाद बेहतर नींद आना
  • सुख के हार्मोन की वजह से मूड बेहतर होना
  • बिना बोले स्पर्श से विश्वास और आराम बढ़ना
  • लंबे रिश्तों में नयापन और उत्साह बनाए रखना
  • आराम से और बिना दबाव के ऑर्गैज़्म पाना आसान होना
  • बिना पेनिट्रेटिव सेक्स के भी अंतरंगता का अनुभव करना

कुछ रिसर्च ये भी बताती हैं कि नियमित इजेकुलेशन से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि ये रिसर्च अभी पूरी तरह पक्की नहीं है, लेकिन इससे ये समझ आता है कि कुछ लोग ओरल सेक्स को हेल्थ और वेलनेस से जुड़ा मानते हैं। लेकिन ये ज़रूरी है कि केवल इसी वजह से कोई भी इंसान ओरल सेक्स करने का दबाव महसूस न करे, अगर वो कम्फर्ट न हो।

साथ ही, हर कोई ओरल सेक्स पसंद नहीं करता और ये भी बिल्कुल ठीक है। कुछ लोग इस दौरान अच्छा, अनसेफ या अलग-थलग महसूस कर सकते हैं। इसकी वजह उनके पुराने अनुभव, सांस्कृतिक मान्यताएं, या बस व्यक्तिगत पसंद हो सकती है। किसी को सफाई को लेकर चिंता होती है, किसी को परफॉर्मेंस को लेकर, और कुछ को इसमें मज़ा ही नहीं आता। ये सब मान्य कारण हैं।

(और पढ़ें: सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाएं)

ओरल सेक्स कई मायनों में दूसरे यौन संबंधों की तुलना में ज़्यादा सेफ माना जाता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसमें कोई रिस्क नहीं है। एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा ओरल सेक्स में बहुत कम होता है, लेकिन कई यौन संचारित संक्रमण अब भी मुँह और जननांगों के ज़रिए फैल सकते हैं। अच्छी बात ये है कि कुछ आसान सावधानियाँ अपनाकर इसे काफी सुरक्षित बनाया जा सकता है।

  • पुरुष पर ओरल सेक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल संक्रमण के रिस्क को कम करता है। फ्लेवर्ड कंडोम भी मिलते हैं, ताकि अनुभव बेहतर रहे।
  • महिला पर ओरल सेक्स या ओरल-एनल कॉन्टैक्ट (anal) के लिए डेंटल डैम (लेटनुमा पतली शीट) इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ये एक सुरक्षात्मक परत बनाता है लेकिन स्पर्श का एहसास कम नहीं करता।

(और पढ़ें: ज्यादा सेक्स करना फायदेमंद है?)

ध्यान रहे, ओरल सेक्स से ठीक पहले दाँत ब्रश या फ्लॉस करना सही नहीं है। ऐसा करने से मसूड़ों में छोटे कट बन सकते हैं, जिनसे संक्रमण शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकता है। इसके बजाय माउथवॉश से कुल्ला करना या मिंट लेना बेहतर है।

इसके अलावा, अगर आपका या आपके पार्टनर का एक से अधिक पार्टनर है, नया रिलेशनशिप है या लंबे समय से टेस्ट नहीं कराया है, तो नियमित STI टेस्टिंग बेहद ज़रूरी है। कुछ संक्रमण जैसे गोनोरिया या क्लैमाइडिया गले में रह सकते हैं और कोई लक्षण भी न दिखाएं। समय-समय पर टेस्ट कराने से आपको जानकारी रहती है और आप अनजाने में किसी और को संक्रमण नहीं फैलाते।

(और पढ़ें: लम्बे समय तक सेक्स करने की दवा)

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • पुरुषों पर ओरल सेक्स के लिए कंडोम और महिलाओं/एनल के लिए डेंटल डैम इस्तेमाल करें
  • अगर किसी पार्टनर के मुँह या जननांग पर घाव या संक्रमण है तो ओरल सेक्स न करें
  • ओरल सेक्स से पहले ब्रश न करें, सिर्फ कुल्ला करें
  • नियमित टेस्ट कराएं और पार्टनर से खुलकर बात करें

सुरक्षा माहौल खराब नहीं करती, बल्कि जब दोनों पार्टनर सुरक्षित महसूस करते हैं तो अनुभव और ज़्यादा अच्छा और रिलैक्सिंग बन जाता है।

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ओरल सेक्स के दौरान यौन स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित STI टेस्टिंग बेहद ज़रूरी है। कई संक्रमण मुँह, गले या जननांगों से फैल सकते हैं लेकिन उनके कोई लक्षण नज़र नहीं आते। यानी व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकता है लेकिन फिर भी अपने पार्टनर को संक्रमण दे सकता है। टेस्टिंग इन संक्रमणों को जल्दी पकड़ लेती है और उनका इलाज आसान हो जाता है।

(और पढ़ें: सेक्स टाइम बढ़ाने वाले कंडोम)

बिना लक्षण वाले ओरल इन्फेक्शन

गोनोरिया, क्लैमाइडिया और हर्पीज़ जैसे संक्रमण गले और मुँह को प्रभावित कर सकते हैं। ये अक्सर बिना लक्षण (asymptomatic) रहते हैं। यानी गले में खराश, दाने या जलन जैसी समस्या नज़र नहीं आती, लेकिन संक्रमण फिर भी फैल सकता है। अगर इलाज न हो, तो ये संक्रमण गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं या एचआईवी जैसी बीमारियों को फैलने में आसान बना सकते हैं।

टेस्टिंग कब करानी चाहिए?

ये आपके यौन जीवन और रिस्क पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर:

  • जिनके कई पार्टनर हों, उन्हें हर 3–6 महीने में टेस्ट कराना चाहिए
  • नए रिश्ते में हों तो शारीरिक संबंध से पहले टेस्ट ज़रूर कराएं
  • लंबे समय से एक ही पार्टनर हों तो साल में एक बार टेस्ट पर्याप्त हो सकता है। 
  • अगर कभी बिना प्रोटेक्शन सेक्स हुआ हो तो जल्द से जल्द टेस्ट कराएं
  • अगर कोई लक्षण दिखें तो तुरंत टेस्ट कराएं

टेस्टिंग के तरीके

ज्यादातर STI टेस्ट आसान और बिना दर्द के होते हैं, जैसे:

  • गले के स्वाब टेस्ट
  • मूत्र (यूरीन) सैंपल
  • रक्त (ब्लड) टेस्ट — HIV, हेपेटाइटिस और सिफलिस के लिए
  • जननांग या एनल  स्वाब

आजकल कई जगह घर पर टेस्ट किट भी मिलते हैं। रिज़ल्ट आमतौर पर कुछ दिनों में मिल जाते हैं।

बातचीत और ईमानदारी

टेस्टिंग तब और आसान हो जाती है जब पार्टनर आपस में खुलकर बात करें। पिछले टेस्ट रिज़ल्ट, हाल के पार्टनर या साथ में टेस्ट कराने की प्लानिंग — ये सब रिश्ते में सुरक्षा और विश्वास बढ़ाते हैं।

टेस्ट सिर्फ एक मेडिकल चेक-अप नहीं है, बल्कि अपने और अपने पार्टनर के प्रति केयर और रिस्पॉन्सिबिलिटी दिखाने का तरीका है।

(और पढ़ें: फोरप्ले: फायदे, महत्व)

आज के समय में कंसेंट (सहमति) का मतलब सिर्फ "हाँ" या "ना" कहना नहीं है। इसका मतलब है कि दोनों लोग खुद को सुरक्षित, सुना और सम्मानित महसूस करें। ये एक बार पूछने की बात नहीं, बल्कि हर पल चलने वाली प्रक्रिया है।

अगर कोई व्यक्ति असमंजस में है, दबाव में है या तैयार नहीं है, तो उसे सहमति नहीं माना जाता। असली मायने में सहमति वही है जब दोनों लोग सहज और भावनात्मक रूप से तैयार हों।

भावनात्मक सुरक्षा और विश्वास

ओरल सेक्स बहुत पर्सनल और इमोशनल अनुभव हो सकता है। इसलिए खुलकर और ईमानदारी से बात करना ज़रूरी है। "क्या ये ठीक है?" या "तुम्हें ये अच्छा लग रहा है?" जैसे छोटे-छोटे सवाल बहुत फर्क डाल सकते हैं। बॉडी लैंग्वेज पर भी ध्यान देना ज़रूरी है — चुप्पी या असहजता "हाँ" नहीं होती।

अलग-अलग संस्कृतियों की सोच

ओरल सेक्स को लेकर समाज में अलग-अलग नज़रिए हैं। कहीं इसे सामान्य माना जाता है, तो कहीं अभी भी टैबू (वर्जित) समझा जाता है। लेकिन जैसे-जैसे सेक्स एजुकेशन और बातचीत बढ़ रही है, सोच बदल रही है। फिर भी, हर किसी की सहजता और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का सम्मान करना ज़रूरी है।

लैंग्वेज और आइडेंटिटी

हर इंसान का अनुभव उसकी पहचान से जुड़ा होता है — चाहे वो सिसजेंडर हो, ट्रांस हो, नॉन-बाइनरी हो, स्ट्रेट हो या क्वियर। इसलिए भाषा मायने रखती है। किसी के प्रोनाउन पूछना या ये जानना कि वे अपने शरीर को कैसे छूना पसंद करते हैं, विश्वास और सुरक्षा बढ़ाता है।

(और पढ़ें - योनि में कसाव के उपाय)

सहमति हमेशा ज़रूरी

लंबे रिश्तों में भी सहमति बार-बार ज़रूरी होती है। जो पिछले महीने अच्छा लगा, वो आज सही न लगे। इसलिए बीच-बीच में पूछते रहना ज़रूरी है। इससे रिश्ता मज़बूत रहता है और गलतफहमियों से बचाव होता है।

शुरुआती शिक्षा और आत्मविश्वास

आजकल युवा पीढ़ी को स्कूल और सोशल मीडिया से ही कंसेंट के बारे में सिखाया जा रहा है। उन्हें ये समझाया जाता है कि "ना" कहना बिल्कुल ठीक है और जब भी असहज लग रहा हो तो रुक जाना चाहिए।

सम्मान और ईमानदारी से रिश्ते और अंतरंगता ज़्यादा गहरे और सुकून देने वाले बनते हैं।

(और पढ़ें - महिलाएं सेक्स में पुरुषों से क्या चाहती हैं)

आजकल लोग खुलकर यौन स्वास्थ्य के बारे में बात कर रहे हैं, और अब ये जागरूकता बढ़ रही है कि ओरल सेक्स पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं है। भले ही इसमें एचआईवी का खतरा योनि या गुदा सेक्स की तुलना में कम हो, लेकिन हर्पीज़, गोनोरिया, सिफलिस और एचपीवी जैसे संक्रमण अब भी ओरल सेक्स से फैल सकते हैं।

अच्छी बात ये है कि अब हमारे पास ज़्यादा प्रोटेक्टिव टूल्स हैं जो सुरक्षा भी देते हैं और आनंद को भी कम नहीं करते।

HPV वैक्सीन से सुरक्षा

HPV वैक्सीन एक बड़ा कदम है। इसे सबसे पहले गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब विशेषज्ञ जानते हैं कि यह अन्य कैंसर से भी सुरक्षा देती है—जैसे मुंह और गले का कैंसर। यही वजह है कि यह वैक्सीन सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए फायदेमंद है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति यौन सक्रिय होने से पहले इसे लगवा ले।

फिर भी, 20s, 30s और यहां तक कि शुरुआती 40s की उम्र वाले लोग भी इससे लाभ उठा सकते हैं, उनके स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। जितने ज्यादा लोग वैक्सीन लगवाएंगे, HPV फैलने का खतरा उतना ही कम होगा।
(और पढ़ें - सेक्स करने में दर्द)

HIV रिस्क के लिए PrEP और PEP

PrEP एक रोज़ाना ली जाने वाली दवा है जो HIV होने की संभावना को बहुत कम कर देती है। इसे आमतौर पर वे लोग लेते हैं जिनका रिस्क ज्यादा होता है, जैसे कई पार्टनर वाले लोग या ऐसे रिश्ते में रह रहे लोग जिनका साथी HIV पॉज़िटिव है। नियमित रूप से लेने पर PrEP HIV ट्रांसमिशन को लगभग नामुमकिन बना देती है—even अगर कुछ एक्सपोज़र हो जाए।

PEP थोड़ा अलग तरह से काम करती है। इसे एक्सपोज़र के बाद (72 घंटे के भीतर) लिया जाता है और यह वायरस को शरीर में फैलने से रोकने में मदद करती है। ये टूल सिर्फ संभोग (intercourse) के लिए नहीं हैं—ये उन लोगों को भी सुकून देते हैं जिन्हें ओरल सेक्स से जुड़ा रिस्क लगता है।

आसान बैरियर जो अब भी काम आते हैं

कंडोम और डेंटल डैम्स ओरल सेक्स के दौरान संक्रमण से बचाव का आसान और असरदार तरीका हैं। कुछ तो फ्लेवर्ड वर्ज़न में भी आते हैं ताकि अनुभव और अच्छा हो सके। ये बैरियर सीधे त्वचा और तरल पदार्थों के संपर्क को कम कर देते हैं, जिससे वायरस और बैक्टीरिया फैलने की संभावना घट जाती है।

एक छोटी-सी टिप: ओरल सेक्स से ठीक पहले ब्रश या फ्लॉस न करें। ऐसा करने से मसूड़ों में छोटे कट हो सकते हैं जिनसे कीटाणु अंदर चले जाते हैं। इसके बजाय माउथवॉश से कुल्ला करना बेहतर है।

अच्छी सफाई और ईमानदार बातचीत

सुरक्षित रहना सिर्फ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं है—यह आपसी देखभाल से जुड़ा है। सेक्स से पहले और बाद में हाथ और जननांग धोएं। अपने पार्टनर से टेस्टिंग, लक्षण या हाल की किसी एक्सपोज़र के बारे में खुलकर बात करें। अगर आप नए या एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ हैं तो नियमित रूप से टेस्ट करवाएं।

ये आदतें न सिर्फ सुरक्षा देती हैं बल्कि भरोसा भी बढ़ाती हैं और दोनों को स्वस्थ रखती हैं।
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हेल्थ सर्विसेज़ भी आगे बढ़ रही हैं

आजकल कई हेल्थ प्रोग्राम्स सुरक्षित रहने को आसान बना रहे हैं। आप HPV वैक्सीन, कंडोम और यहां तक कि घर पर ही इस्तेमाल होने वाले STI टेस्ट किट्स क्लिनिक या ऑनलाइन से ले सकते हैं। साथ ही, अब ज्यादा साफ, बिना जजमेंट वाली जानकारी मिल रही है, जिससे लोग अपनी सुविधा और मूल्यों के हिसाब से फैसले ले सकते हैं।

सावधानी बरतना मूड खराब नहीं करता। बल्कि यह आत्मविश्वास, आराम और गहरा रिश्ता बनाने में मदद करता है। जब सुरक्षा पहले से ही प्लान का हिस्सा हो, तो दोनों लोग ज्यादा रिलैक्स होकर इंजॉय कर सकते हैं।
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क्या ओरल सेक्स से प्रेग्नेंसी हो सकती है?

नहीं। प्रेग्नेंसी तब होती है जब शुक्राणु अंडाणु तक पहुंचकर उसे फर्टिलाइज़ कर दे। चूंकि ओरल सेक्स में मुंह शामिल होता है, प्रजनन तंत्र नहीं, इसलिए इससे गर्भवती होने का कोई खतरा नहीं है। बस साफ-सफाई का ध्यान रखें और यह कोशिश करें कि मुंह से फ्लुइड्स हाथ या उंगलियों के जरिए जननांग तक न जाएं।

क्या ओरल सेक्स एब्सटिनेंस माना जाता है?

एब्सटिनेंस का मतलब है किसी भी तरह की यौन गतिविधि न करना। कुछ लोग मानते हैं कि ओरल सेक्स “काउंट” नहीं होता, लेकिन मेडिकल और इमोशनल रूप से यह भी एक तरह की यौन अंतरंगता है। इसमें भी स्वास्थ्य और भावनात्मक जोखिम हो सकते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्य, व्यक्तिगत या धार्मिक कारणों से एब्सटिनेंस चुनता है, तो ओरल सेक्स आमतौर पर उस परिभाषा में शामिल नहीं होता।

क्या ओरल सेक्स करने के बाद भी मैं वर्जिन रहूंगी/रहूंगा?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप “वर्जिनिटी” को कैसे परिभाषित करते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि वर्जिनिटी सिर्फ योनि संभोग से खत्म होती है, जबकि कुछ लोग सोचते हैं कि कोई भी यौन गतिविधि—जैसे ओरल या एनल सेक्स—यौन सक्रिय होने की शुरुआत है। इसका कोई यूनिवर्सल नियम नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपनी अनुभवों को कैसे परिभाषित करते हैं और उनका आपके लिए क्या मतलब है।

अगर मेरा पार्टनर HIV पॉज़िटिव है लेकिन अनडिटेक्टेबल है तो?

आज के इलाज से HIV पॉज़िटिव व्यक्ति, अगर वह नियमित रूप से एंटीरेट्रोवायरल दवाएं ले और उसका वायरल लोड अनडिटेक्टेबल हो, तो अपने पार्टनर को वायरस नहीं फैला सकता— सेक्स के दौरान भी। वैसे भी, ओरल सेक्स में HIV ट्रांसमिशन का खतरा बहुत कम होता है, लेकिन जब वायरल लोड अनडिटेक्टेबल हो तो यह जोखिम लगभग शून्य हो जाता है।

क्या ओरल सेक्स स्वस्थ रिश्ते का हिस्सा हो सकता है?

हाँ। जब इसे सुरक्षित और आपसी सहमति से किया जाए तो ओरल सेक्स कई रिश्तों का स्वस्थ हिस्सा हो सकता है। यह नज़दीकी, भरोसा और सुख बढ़ा सकता है। जैसे हर यौन गतिविधि में होता है, वैसे ही इसमें भी जरूरी है कि दोनों पार्टनर्स को सम्मान मिले, जानकारी हो और वे अपनी सहूलियत खुलकर व्यक्त कर सकें।

ओरल सेक्स अलग-अलग लोगों के लिए अलग मायने रखता है। किसी के लिए यह जुड़ाव और नज़दीकी का तरीका है, तो किसी के लिए यह असहज या नापसंद हो सकता है। दोनों ही ठीक हैं। सबसे जरूरी है कि आप खुद को सुरक्षित, सम्मानित और नियंत्रण में महसूस करें।

2025 में हमारे पास पहले से ज्यादा टूल्स और जानकारी है जिससे ओरल सेक्स सुरक्षित और आरामदायक बन सकता है। हालांकि इसमें कुछ और यौन गतिविधियों की तुलना में रिस्क कम है, लेकिन फिर भी हर्पीज़, गोनोरिया, HPV और क्लैमाइडिया जैसे इंफेक्शन ओरल कॉन्टैक्ट से फैल सकते हैं। लेकिन कुछ आसान कदम—जैसे प्रोटेक्शन का इस्तेमाल, नियमित टेस्टिंग और खुली बातचीत—से इन खतरों को कम किया जा सकता है।

ये सिर्फ संक्रमण से बचाव की बात नहीं है। भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। सुना और सम्मानित महसूस करना शारीरिक आराम जितना ही महत्वपूर्ण है। चाहे नया रिश्ता हो या पुराना, सहमति (consent) कभी मानकर नहीं चलनी चाहिए—यह हर इंटरैक्शन का हिस्सा होना चाहिए।

HPV वैक्सीन, PrEP और आसान STI टेस्टिंग जैसे टूल्स सिर्फ इमरजेंसी के लिए नहीं हैं—ये स्वस्थ रूटीन का हिस्सा हैं। जितना हम सुरक्षा और ईमानदार बातचीत को नॉर्मल मानेंगे, उतना ही intimacy बिना तनाव के आसान होगी।

चाहे आपको ओरल सेक्स पसंद हो, इसको लेकर असमंजस हो, या आप अभी समझ ही रहे हों—कोई दबाव नहीं है। आराम से सोचें, सवाल पूछें और अपने पार्टनर से बात करें। सबसे अच्छे अनुभव सिर्फ टेक्नीक से नहीं आते, बल्कि तब आते हैं जब आप सुरक्षित, देखे गए और जुड़े हुए महसूस करते हैं।

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Dr. Hakeem Basit khan

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संदर्भ

  1. National Health Service [Internet]. UK; What is oral sex?
  2. Planned Parenthood. All About Sex. Planned Parenthood Federation of America
  3. Planned Parenthood. All About Sex. Planned Parenthood Federation of America
  4. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Oral sex
  5. Obria. Oral Sex – What You Should Know. Medical Clinic; Formally Informed choices medical clinics
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