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  1. एंजियोप्लास्टी सर्जरी क्या होती है? - Angioplasty kya hai in hindi?
  2. एंजियोप्लास्टी क्यों की जाती है? - Angioplasty operation kab kiya jata hai?
  3. एंजियोप्लास्टी होने से पहले की तैयारी - Angioplasty ki taiyari
  4. एंजियोप्लास्टी कैसे किया जाता है? - Angioplasty kaise hota hai?
  5. एंजियोप्लास्टी के बाद देखभाल - Angioplasty hone ke baad dekhbhal
  6. एंजियोप्लास्टी के बाद सावधानियां - Angioplasty hone ke baad savdhaniya
  7. एंजियोप्लास्टी की जटिलताएं - Angioplasty me jatiltaye

कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (Coronary Angioplasty) या परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (Percutaneous Coronary Intervention) का उपयोग हृदय की ब्लॉक्ड धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है। दिल का दौरा पड़ने पर, आदर्श रूप से पहले 1 से 1.5 घंटों के अंदर रोगी की एंजियोप्लास्टी की जानी चाहिए। यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस समय सीमा के बाद, हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाओं को अपरिवर्तनीय रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। एंजियोप्लास्टी के इस प्रकार को प्राथमिक एंजियोप्लास्टी (Primary Angioplasty) के रूप में जाना जाता है। ऐसी स्थितियों में जहां एंजियोप्लास्टी संभव नहीं है, वहां इंट्रावेनस क्लॉट बस्टर (Intravenous Clot Buster) को विकल्प के रूप में दिया जाता है। हालांकि क्लॉट बस्टर का प्रयोग करना एक आसान विकल्प है, लेकिन यह एंजियोप्लास्टी से कम प्रभावी है।

एंजियोप्लास्टी सर्जरी अवरुद्ध धमनियों के लक्षणों को ठीक करने में मदद करती है। इन लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द शामिल है। यह दिल का दौरा पड़ने पर यह अवरुद्ध धमनी को जल्दी से खोलने के लिए उपयोगी है। यह हृदय को हुई क्षति को कम करने में मदद करती है। यह कोरोनरी धमनियों से प्लाक (Plaque) को साफ करने में भी मददगार है। एंजियोप्लास्टी सर्जरी इसलिए फायदेमंद है क्योंकि इसमें बड़ी सर्जरी की आवश्यकता के बिना ही धमनी को सामान्य आकार में वापस लाया जा सकता है।

दिल का दौरा पड़ने पर, स्टेंटिंग के साथ या स्टेंटिंग के बिना, आपातकालीन एंजियोप्लास्टी को सामान्य रूप से उपचार के पहले विकल्प के रूप में किया जाता है। निम्न स्थितियों में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता होती है:

  1. बार बार होने वाला गंभीर एनजाइना (Angina) जिसमें दवाओं के प्रभाव न हो पा रहा हो 
  2. दिल की मांसपेशियों का आइस्किमिया (Ischemia)
  3. संकीर्ण या अवरुद्ध धमनी

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

एंजियोप्लास्टी कैथीटेराइजेशन प्रयोगशाला (Cathetarization Laboratory) में की जाती है। इसमें हाथ या पैर की धमनी में पहले से डाली गई म्यान (Sheath) के माध्यम से कैथेटर डाला जाता है। कोरोनरी धमनियों को और अच्छे से देखने के लिए, रोगियों को इंजेक्शन से एक रेडियो-अपारदर्शी डाई (Radio-Opaque Dye) दी जाती है। हृदय के विभिन्न भागों से रक्तचाप दर्ज किया जाता है। वाल्वों की कार्यप्रणाली की जांच भी की जाती है। विशिष्ट कैमरों का उपयोग करते हुए, प्रक्रिया के दौरान हृदय की छवियों को कैप्चर किया जा सकता है। एक बैलून कैथेटर को रुकावट के स्थान पर रखा जाता है और धीरे-धीरे फैटी प्लाक की स्‍फीति के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह हृदय की मांसपेशियों को आसानी से रक्त प्रवाहित करने में मदद करता है।
रुकावट स्थल में कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist; ह्रदय रोग विशेषज्ञ) द्वारा स्टेंट निवेशन (Stent Insertion) और गुब्बारे की मदद से उसी का विस्तार करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। स्टेंट धमनी के माध्यम से रक्त प्रवाह के लिए बेहतर माध्यम प्रदान करता है। यह लम्बे समय तक बेहतर परिणाम देता है।

जिन मरीज़ों के साथ दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक (Stroke) का जोखिम रहता है उनके लिए सर्जन ह्रदय की बायपास सर्जरी के बजाय एंजियोप्लास्टी का चुनाव करता है। मरीज़ की स्थिति के अनुसार, एंजियोप्लास्टी का प्रकार चुना जाता है। एंजियोप्लास्टी के मुख्य प्रकार निम्न हैं:

  1. बैलून एंजियोप्लास्टी (Balloon Angioplasty)
  2. लेज़र एंजियोप्लास्टी (Laser Angioplasty)
  3. अथेरेक्टॉमी (Atherectomy)

बैलून एंजियोप्लास्टी (Balloon Angioplasty)

बैलून एंजियोप्लास्टी आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला एंजियोप्लास्टी का प्रकार है। इसमें कैथेटर नामक एक पतली और लंबी ट्यूब को बांह या जांघ में एक छोटा चीरा काटकर अवरुद्ध धमनी में डाला जाता है। एक्स-रे की सहायता से, कैथेटर को रक्त वाहिकाओं के माध्यम से आसानी से धमनी में डाला जाता है। संकुचित धमनी में प्रवेश करने पर, कैथेटर टिप से जुड़े बैलून (गुब्बारा) को फुलाया जाता है। फूला हुआ बैलून प्लाक को दबाता है और चपटा कर देता है जिससे धमनी चौड़ी हो जाती है। एक बार धमनी साफ़ हो जाए, रक्त प्रवाह वापस ठीक हो जाता है।

बैलून लगाने के बाद, रोगी द्वारा छाती में परेशानी का अनुभव करना सामान्य है। आमतौर पर बैलून एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट्स का इस्तेमाल होता है। ये धातु से बने छोटे उपकरण हैं जो एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद कैथेटर की मदद से रखे जा सकते हैं। यह उपचार के तहत धमनी के संकुचन को रोकने के लिए धमनी के अंदर रहता है। 

ज्यादातर बैलून एंजियोप्लास्टी स्टेंट निवेशन वाले मरीजों में लाभकारी होता है। कभी-कभी स्टेंट निवेशन के परिणामस्वरूप कमजोर दिल वाले मरीज़ों में रक्त के थक्के विकसित हो सकते हैं।

लेज़र एंजियोप्लास्टी (Laser Angioplasty)

लेज़र एंजियोप्लास्टी में, कैथेटर का प्रयोग किया जाता है लेकिन बैलून की जगह लेज़र का उपयोग किया जाता है। लेज़र को फिर प्लाक तक लेकर जाय जाता है और ब्लॉकेज वेपराइज़ (भाप बन जाना) हो जाता है। बैलून और लेज़र एंजियोप्लास्टी का प्रयोग एक के बाद एक किया जाना आम है। बैलून का प्रयोग सख्त प्लाक को हटाने के लिए और बचे हुए प्लाक को हटाने के लिए लेज़र का प्रयोग किया जाता है। दोनों प्रक्रियाओं के बिच का अंतर कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा तय किया जाता है। लाज़र एंजियोप्लास्टी का उपयोग अन्य एंजियोप्लास्टी तकनीकों के मुकाबले बहुत कम होता है। 

अथेरेक्टॉमी (Atherectomy)

इसका उपयोग तब किया जाता हिअ जब बैलून और लेज़र एंजियोप्लास्टी से भी सख्त प्लाक को न हटाया जा सके। प्लाक को सर्जिकल ब्लेड की मदद से पूरी तरह काट दिया जाता है। ब्लेड से प्रभावित धमनी की दीवारों से हटाने में मदद करता है।

  1. रोटेशनल अथेरेक्टॉमी (Rotational Atherectomy): इसमें डाइमंड-टिप वाले तेज़ गति के ड्रिल की मदद से प्लाक को हटाया जाता है। बहुत ही सख्त प्लाक को इस से निकाला जाता है।
  2. एक्सट्रैक्शन अथेरेक्टॉमी (Extraction Atherectomy): इसमें धमनी के अनादरा की दीवारों से प्लाक हटाने के लिए एक छोटा रोटेटिंग ब्लेड (फ़ूड प्रोसेसर के कटर के समान) का प्रयोग होता है। 
  3. डायरेक्शनल अथेरेक्टॉमी (Directional Atherectomy): इसमें प्लाक को हटाने के लिए बैलून और शेविंग ब्लेड का प्रयोग किया जाता है।

एंजियोप्लास्टी में ज़्यादा समय नहीं लगता। इसमें लगभग एक घंटा लगता है। लेकिन एंजियोप्लास्टी के बाद, अतिरिक्त 12-16 घंटे लगते हैं रिकवरी में।

गौर आपातकालीन एंजियोप्लास्टी में मरीज़ को उसकी स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अस्पताल में रखा जाता है। आम तौर पर, मरीज़ एक हफ्ते बाद अपनी दिनचर्या में लौट सकए हैं। दिल का दौरा पड़ने पर एंजियोप्लास्टी करने पर, अस्पताल में रहने की अवधि और रिकवरी की अवधि बढ़ सकती है। 

दवाओं का प्रयोग

एंजियोप्लास्टी के बाद रोगियों को दवाओं के बारे में सर्जन की सलाह का पालन करना बहुत आवश्यक है। अधिकांश समय, एंजियोप्लास्टी रोगियों को सर्जरी के बाद अनिश्चितकाल के लिए एस्पिरिन (Aspirin) लेने की जरूरत होती है। स्टेंट प्लेसमेंट के साथ मरीजों को Blood Thinners (रक्त को पतला करने वाली दवाओं) की आवश्यकता होगी। ऐसी स्थितियों में एक वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए क्लोपिडोग्रेल (Clopidogrel) दी जाती है। 

एंजियोप्लास्टी के बाद ह्रदय का स्वास्थ्य बनाये रखना बहुत जरूरी है। इस सर्जरी के बाद:

  1. धूम्रपान का सेवन न करें। 
  2. कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखें। 
  3. स्वस्थ वजन बनाए रखें। 
  4. नियमित व्यायाम करें। 

जिन स्थितियों में एंजियोप्लास्टी वांछित परिणाम नहीं दे पाती, वहां हृदय की क्षति को रोकने के लिए बायपास सर्जरी की जाती है।

घर पहुँचने के बाद, मरीज़ों को अत्यधिक द्रव का सेवन करना चाहिए जिससे शरीर से कंट्रास्ट डाई निकल जाए। थकाने वाले व्यायाम न करें और भारी वजन न उठायें। अन्य गतविधियां अपने सर्जन के कहे अनुसार करें। सर्जरी के बाद, कैथेटर निशेचन की जगह पर दर्द या परेशानी या सूजन या रक्तस्त्राव होने पर, बुखार, स्त्राव जैसे संक्रमण के लक्षण, तापमान में अस्थिरता, थकान या कमज़ोरी, छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ होने पर अपने डॉक्टर को बताएं।

निम्न कारकों की वजह से एंजियोप्लास्टी से होने वाले जोखिम बढ़ सकते हैं:

  1. मरीज़ की उम्र- वृद्धावस्था में जोखिम ज़्यादा होते हैं। 
  2. उपचार प्रक्रिया का प्रकार: आपातकालीन प्रक्रिया ज़्यादा जोखिमों से भरी होती है क्योंकि इसमें सर्जरी की योजना बनाए का समय नहीं मिलता। 
  3. गुर्दे का कोई विकार: कंट्रास्ट एजेंट के प्रयोग के कारण गुर्दे को क्षति हो सकती है।
  4. ह्रदय की लय की असामन्यता: एंजियोप्लास्टी के दौरान, ह्रदय की गति बढ़ या घाट सकती है। हृदय की समस्याएं आम तौर पर काम समय ही रहती हैं और इनसे बचने के लिए अस्थायी पेसमेकर निशेचन या दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। 

जटिलताएं

  1. कैथेटर निशेचन के स्थान पर चोट या रक्तस्त्राव। 
  2. म्यान निशेचन की जगह पर क्षति। 
  3. कोरोनरी धमनी को एंजियोप्लास्टी के दौरान क्षति पहुँच सकती है जिसके उपचार के लिए आपातकालीन बायपास सर्जरी करनी पड़ सकती है। 
  4. प्रक्रिया में प्रयोग किये गए कंट्रास्ट एजेंट के प्रति एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इससे बचने के लिए मरीज़ को द्रव पदार्थों का सेवन करना चाहिए। 
  5. अत्यधिक रक्तस्त्राव हो सकता है। 
  6. दुर्लभ स्थिति में मरीज़ को एंजियोप्लास्टी के दौरान दिल का दौरा पड़ सकता है या स्ट्रोक होने का खतरा हो सकता है। स्ट्रोक के जोखिम से बचने के लिए का प्रयोग किया जा सकता है। (और पढ़ें – दिल का दौरा के लक्षण)
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References

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