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  1. बाईपास सर्जरी क्या है?
  2. बाईपास सर्जरी की ज़रुरत कब होती है?
  3. बाईपास सर्जरी के लिए तैयारी
  4. बाईपास सर्जरी कैसे की जाती है?
  5. बाईपास सर्जरी के बाद देखभाल
  6. बाईपास सर्जरी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम
  7. बाईपास सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

बाईपास सर्जरी क्या है? - What is Heart Bypass Surgery in Hindi?

ह्रदय की बायपास (Bypass; उपमार्ग) सर्जरी तब की जाती है जब हृदय की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। पूरे शरीर से रक्त (जो ऑक्सीजन युक्त नहीं होता) प्राप्त करना ह्रदय का कार्य होता है। इस रक्त को फिर फेफड़ों में भेजा जाता है जहां यह ऑक्सीजन के साथ मिलता है। इसके बाद यह रक्त हृदय द्वारा सभी अंगों में पंप किया जाता है। यह शरीर के सभी कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। रक्त और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के बिना, शरीर का कोई अंग सामान्य रूप से कार्यवाही नहीं कर सकता। अगर दिल की मांसपेशियों में पर्याप्त रक्त आपूर्ति नहीं होती है, तो वे काम नहीं कर पाती जिससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं।

सर्जरी का मुख्य उद्देश्य रोगी के ही शरीर से ली गयी रक्त वाहिका, जिसे कृत्रिम रूप से ह्रदय से जोड़ा जाता है, के माध्यम से ह्रदय में रक्त की आपूर्ति करना है। इस प्रकार धमनी का क्षतिग्रस्त भाग 'बायपास' होता है और हृदय की मांसपेशियां सामान्य रूप से कार्य कर पाती हैं। 

बाईपास सर्जरी की ज़रुरत कब होती है? - When is Heart Bypass Surgery required in Hindi?

निम्न परेशानियों में ह्रदय की बायपास सर्जरी करने की आवश्यकता हो सकती है:

धमनीकाठिन्य (Arteriosclerosis)

विभिन्न कारणों से धमनियों की दीवारें मोती और कठोर हो सकती हैं। यह धमनीकाठिन्य के रूप में जाना जाता है। धमनी की दीवारों के अंदर प्लाक (कोलेस्ट्रॉल वसा, कैल्शियम और रक्त में अन्य पदार्थों के साथ मिलकर प्लाक का निर्माण कर सकते हैं) जमा हो सकते हैं। मोटी हुई दीवारें धमनियों के लुमेन को संकरा कर देती हैं। फलतः लुमेन पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाता है जो रक्त प्रवाह को रोक देता है। कोरोनरी धमनी की एक या सभी शाखाएं अवरुद्ध हो जाती हैं। रक्त में उच्च स्तर के कोलेस्ट्रॉल से यह स्थिति पैदा हो सकती है।

आवर्तक एनजाइना पेक्टोरिस (Recurrent Angina Pectoris)

एनजाइना (Angina) में छाती में अचानक दर्द महसूस होता है। यह हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन युक्त रक्त की पर्याप्त आपूर्ति की कमी के कारण होता है। दर्द अचानक हो सकता है और दाँत, जबड़े, हाथ, उंगलियों में महसूस किया जा सकता है। यह दिल की मांसपेशियों में बाधित रक्त आपूर्ति का लक्षण हो सकता है। यह कोरोनरी धमनी की क्षति का परिणाम हो सकता है।

साँस लेने में तकलीफ (Shortness Of Breath)

कोरोनरी धमनी की क्षति का एक अन्य संकेत हो सकता है- सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ होना। अगर हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त रक्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है, तो वे आसानी से कमज़ोर हो जाएंगी। मामूली शारीरिक गतिविधि से भी श्वास में कठिनाई हो सकती है। सांस लेने में तकलीफ की गंभीरता कोरोनरी धमनी की क्षति पर निर्भर करती है।

धमनीशोथ (Arteritis; धमनी की सूजन)

धमनीशोथ एक ऐसी स्थिति है जो मानव शरीर की किसी धमनी को प्रभावित कर सकती है। सूजन के कारण प्रभावित धमनी की दीवारें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस स्थिति से कोरोनरी धमनी प्रभावित हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप इसकी क्षति हो सकती है।

अन्य विधियों की विफलता (Failure Of Other Methods)

कोरोनरी धमनी के हर ब्लॉकेज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। कुछ समय, डॉक्टर मरीज को शारीरिक व्यायाम करने, आहार का पालन करने या दवाइयां लेने के लिए कह सकता है। थोड़े गंभीर मामलों में, एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता हो सकती है। यदि ये सभी विधियां विफल हो जाती हैं, तो सर्जरी की जा सकती है।

बाईपास सर्जरी के लिए तैयारी - Preparing for Heart Bypass Surgery in Hindi

ह्रदय शरीर का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग होता है। इसकी सुरगेरुय से पहले काफी तैयारी करने की आवश्यकता होती है। डॉक्टर्स की एक टीम बनाई जाती है जो इस सर्जरी की योजना बनाते हैं।  इस टीम में एक कार्डियोलॉजिस्ट (ह्रदय रोग विशेषज्ञ), कार्डियक सर्जन (ह्रदय की सर्जरी का विशेषज्ञ), सहायक चिकत्सक और नर्सें शामिल होती हैं जो सब इस क्षेत्र में अच्छे से प्रशिक्षित होते हैं।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. विशिष्ट टेस्ट (Specif Tests Before Surgery)
    ईसीजी के साथ ह्रदय की जांच करने के लिए एंजियोग्राम (Angiogram; वाहिकाचित्र) किया जाता है। कार्डियक कैथेटेराइज़ेशन (Cardiac Cathetarisation; किसी रक्‍त वाहिनी से गुजारते हुए एक छोटी प्‍लास्टिक नली को हृदय में पहुँचाना) जिससे डॉक्टर कोरोनरी धमनियों और उसकी शाखाओं को देख पाए।
  9. ग्राफ्ट का चयन (Selection Of Graft)
    ह्रदय की बायपास सर्जरी में रोगी के शरीर की कोई अन्य रक्त वाहिका को रक्त के व्यपवर्तन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है ताकि कोरोनरी धमनी का क्षतिग्रस्त भाग 'बायपास' हो सके। इस रक्त वाहिका, जिसका इस्तेमाल किया जाएगा, ग्राफ्ट कहते हैं। जिस वाहिका को ग्राफ्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाना है उसका चयन सर्जरी से पहले किया जायेगा। आम तौर पर पैर की नस का एक भाग या छाती की धमनी का एक भाग ग्राफ्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  10. ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Surgery)
    जिस जगह पर चीरा काटा जाना है उसकी त्वचा पर से सारे बाल हटाए (शेव) जायेंगे। फिर उस त्वचा को एंटी-सेप्टिक सोल्यूशन से साफ़ किया जायेगा। 

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

बाईपास सर्जरी कैसे की जाती है? - How is Heart Bypass Surgery done?

इस सर्जरी को बहुत सावधानी और सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए। इस सर्जरी को करने के कई तरीके हैं हालाँकि इन्हें करने के कुछ स्टेप्स समान ही होते हैं।

ओपन सर्जरी (Open Surgery)

सर्जन छाती की हड्डी के बिलकुल ऊपर छाती के बीच में एक चीरा काटता है। इसके बाद छाती की हड्डी (Sternum Bone) को हटा कर अलग कर दिया जाता है। सर्जन मरीज़ के शरीर से एक ग्राफ्ट (चुना हुआ) निकलता है जो क्षतिग्रस्त कोरोनरी धमनी को बायपास करने के लिए इस्तेमाल किया जायेगा। ग्राफ्ट को कोरोनरी धमनी से इस प्रकार सिला जाता है जिससे यह रक्त के अबाधित प्रवाह के लिए एक वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कर सके। धमनी का क्षतिग्रस्त हिस्सा अब रक्त को ह्रदय की मांसपेशियों तक पहुँचाने का कार्य नहीं करता। छाती की हड्डी को वापस उसकी वास्तविक जगह पर लगा दिया जाता है और चीरे को सिल दिया जाता है। यह बायपास सर्जरी का पारम्परिक तरीका है और इसे ओपन सर्जरी भी कहते हैं।

कम चीरकर या काटकर की जाने वाली बायपास ग्राफ्टिंग (Minimally Invasive Bypass Grafting)

यह प्रक्रिया छाती की हड्डी को न हटा कर भी की जा सकती है। इसे कम चीरकर या काटकर की जाने वाली बायपास ग्राफ्टिंग कहा जाता है। इसमें ओपन सर्जरी की तरह एक बड़े चीरे के बजाय कई छोटे चीरे काटे जाते हैं। छाती की हड्डी को हटाने की आवश्यकता नहीं होती। यह प्रभावपूर्ण तब ही की जा सकती है अगर सामने की कोरोनरी धमनी ब्लॉक हो। ज़्यादा ब्लॉकेज इस प्रक्रिया से नहीं ठीक की जा सकती। 

ऑफ-पंप कोरोनरी धमनी बायपास (Off-Pump Coronary Artery Bypass)

ह्रदय मानव शरीर में सभी अंगों और प्रणालियों को रक्त प्रदान करता है। यदि यह रुक जाए, तो तत्काल मृत्यु हो जाती है। हृदय बायपास सर्जरी के दौरान भी, इसके कार्य रोक नहीं सकते। इसलिए हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह मशीन बायपास के दौरान शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप करती है और शरीर के सभी अंगों से ऑक्सीजन रहित रक्त इकठ्ठा करती है। इस मशीन का उपयोग किये बिना इस सर्जरी को पूरा करने के लिए नयी तकनीकों का विकास किया जाए चुका है। सर्जरी के दौरान हृदय के सामान्य कार्य भी संरक्षित किये जाते हैं। इस प्रक्रिया को ऑफ-पंप कोरोनरी धमनी बायपास के रूप में जाना जाता है।

ऊपर बताए अनुसार थोड़ी भिन्नताओं के साथ, हृदय बायपास सर्जरी की जाती है। एक या एक से ज़्यादा कोरोनरी धमनी को ब्लॉक किया जा सकता है। कितनी धमनियों की ग्राफ्टिंग की जानी है इसके अनुसार 'बायपास ग्राफ्टिंग' के आगे उपसर्ग जोड़ दिए जाते हैं, जैसे डबल (दो धमनियां), ट्रिपल (तीन धमनियां)।

ह्रदय की बायपास सर्जरी में 3 से 6 घंटे लगते हैं। यह एक जटिल प्रक्रिया है। जितनी ज़्यादा धमनियों को ग्राफ्टिंग की ज़रुरत है, उतना ही ज़्यादा समय लग सकता है।

बाईपास सर्जरी के बाद देखभाल - What to do after Heart Bypass Surgery?

सफल बायपास सर्जरी का मतलन यह बिलकुल नहीं है की आपका उपचार समाप्त हो गया है। सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए उपयुक्त देखभाल किया जाना बहुत ज़रूरी है।

सर्जरी के तुरंत बाद
सर्जरी के बाद, मरीज़ को ICU में शिफ्ट किया जाता है। नब्ज पर लगातार निगरानी रखी जाती है। पोषण सम्बन्धी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक इंट्रावेनस (Intravenous; नसों में) नीडल डाली जाती है। इस नीडल को सर्जरी के पहले से ही डाल दिया जाता है। इसे सर्जरी के बाद कुछ समय तक लगाकर रखा जाता है। होश आने के बाद मरीज़ को छाती पर चीरे की जगह पर पीड़ा महसूस हो सकती है। मरीज़ को 1-2 दिनों के लिए ICU में ही रखा जायेगा। द्रव ह्रदय में संचित हो सकता है। इसको निकालने के लिए छाती के अंदर ट्यूब्स लगायी जाती हैं। इनको नियमित रूप से मॉनिटर किया जाता है और जब एक बार सारा द्रव निकल जाए इन्हें हटा दिया जाता है। मरीज़ को ऑब्जरवेशन में रखा जाता है और 4-5 दिनों में अस्पताल से छुट्टी दी जाती है।

ग्राफ्ट की जगह पर सूजन
जिस जगह से ग्राफ्ट लिया गया है वहां सूजन हो सकती है। ये 7-10 दिनों में ठीक हो जाएगी। अगर ग्राफ्ट पैरों की नसों से लिया गया है तो मरीज़ को इलास्टिक स्टॉकिंग्स पहननी चाहिए।

टाँके खुलना/ हटाना
चीरे की जगह पर लगाए गए टांकों की रोज़ाना जांच की जानी चाहिए। डॉक्टर ने टाँके खुलवाने के लिए जो निर्धारित किया है, उस दिन जाकर टाँके खुलवाएं।

शारीरिक गतिविधि
सर्जरी के दौरान मरीज़ की छाती की हड्डी को पंजर (Rib Cage; रिब केज) से हटाया जाता है। सर्जरी के बाद इसे पुन: संबंधित होने में कुछ हफ्ते लगते हैं। सर्जिकल चीरे के घाव भी भरने में समय लगते हैं। सर्जरी के बाद कुछ हफ़्तों तक ऐसा कोई कार्य न करें जिससे आपके ह्रदय की मांसपेशियों पर अत्यधिक बल पड़े। इसलिए इस सर्जरी बाद काम से काम एक महीने तक ऐसा कोई भी अत्यधिक शारीरिक गस्तिविधियाँ जैसे दौड़ना, ज़्यादा थकाने वाले व्यायाम, भरी वज़न उठाना, आदि न करें। उसके बाद चिकित्सक से बात करके हलके और काम थकाने वाले व्यायाम कर सकते हैं। (और पढ़ें – थकान के कारण)

आहार (Diet; डाइट)
डॉक्टर आपको डायटीशियन का सहयोग लेने के लिए कह सकते हैं। सर्जरी के बाद डाइट इस तरह से तैयार की जानी चाहिए कि कोलेस्ट्रॉल का दर नॉर्मल (सामान्य) रहे। अत्यधिक वसा युक्त भोजन का सेवन न करें। रक्तचाप की रेंज भी नॉर्मल (सामान्य) बनाये रखना ज़रूरी है। इसलिए डाइट में नमक और अचार की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए। वज़न का दर भी अनुकूल रहना चाहिए। ज़्यादा वज़न मरीज़ के ह्रदय पर ज़्यादा भार पड़ेगा। तला हुआ भोजन, चीज़, बटर, मिठाईयां, आदि न खाएं।

जीवन शैली संशोधन (Lifestyle Modification)
मरीज़ को ह्रदय की सर्जरी से पूरी तरह रिकवर होने में करीब 6-8 हफ्ते लग सकते हैं। इस अवधि के दौरान मरीज़ को ऊपर बताई गयी डाइट का पालन करना चाहिए। अत्यधिक श्रम वाले शारीरिक कार्य न करें लेकिन इसका अर्थ ये भी नहीं है कि आप कोई भी कार्य न करें। मरीज़ को घर में टहलना चाहिए। कुछ हफ़्तों के बाद घर के बाहर भी जा सकते हैं। हालांकि मरीज़ को जल्दी जल्दी नहीं चलना चाहिए। कम से कम चार हफ़्तों तक ड्राइविंग न करें। रिकवरी की अवधि के दौरान तम्बाकू, धूम्रपान और मदिरा का सेवन सख्त निषिद्ध है। इसके बाद भी धूम्रपान और मदिरा का सेवन न करें। 

बाईपास सर्जरी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम - Risks and Complications of Heart Bypass Surgery in Hindi

इस सर्जरी से जुड़े जोखिम और जटिलताएं निम्न लिखित हैं:

रक्तस्त्राव
ह्रदय की बायपास सर्जरी में रक्त वाहिकाओं को उनकी सामन्य स्थिति से बदला जाता है। इस वजह से सर्जरी के दौरान रक्तस्त्राव का जोखिम बढ़ जाता है। आपके ब्लड ग्रुप का रक्त इकठा करके रखा जाता है जिससे अत्यधिक रक्तस्त्राव होने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 

संक्रमण
ह्रदय के बायपास में किया जाने वाल चीरा बड़ा और गहरा होता है। ओपन हार्ट सर्जरी में वैक्षिक छिद्र (थोरेसिक कैविटी) में पूरी तरह अंदर जाया जाता है। इन कारकों की वजह से चीरे की जगह पर या उसके अंदर संक्रमण होने का जोखिम रहता है। इसके लिए सर्जरी से पहले और बाद एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं।

दर्द
संक्रमण की ही तरह, चीरे की जगह पर दर्द हो सकता है, जिसे दर्द निवारक दवा से ठीक किया जा सकता है। 

रक्त के थक्कों का गठन
रक्त के थक्के धमनियों को अवरुद्ध कर सकते हैं और ह्रदय, फेफड़े, या अन्य अंगों को क्षति पहुंचा सकते हैं। इनका इलाज करने के लिए Blood Thinners (रक्त को पतला करने वाली दवाएं) दी जा सकती हैं।

एम्बोलिस्म (Embolism)
एम्बोलिस्म वह स्थिति है जिसमें किसी अंग में रक्त प्रवाह कर रही धमनी पर अवरोध के कारण उस अंग में रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती या कम हो जाती है। अध्ययनों में पाया गया है कि हार्ट-लंग मशीन, जिसका उपयोग इस सर्जरी के दौरान किया जाता है, प्लाक को धमनी में विस्थापित करने की प्रवृत्ति रखती है। यह प्लाक कोलेस्ट्रॉल या कैल्शियम के बने होते हैं। ये रक्त प्रवाह में जाकर मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति को अवरुद्ध करके मस्तिष्क के एम्बोलिस्म का कारण बन सकते हैं। इससे स्मृति हानि हो सकती है और इससे आगे जाकर मस्तिष्क के कार्यों को करने में भी परेशानी हो सकती है। ऑफ-पंप कोरोनरी धमनी बायपास का उपयोग करके एम्बोलिस्म के जोखिम से बचा जा सकता है।  

ह्रदय की बायपास सर्जरी एक जीवनरक्षी प्रक्रिया है। जोखिमों के बावजूद भी यह ह्रदय में होने वाली ब्लॉकेज के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीक है। 

बाईपास सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है? - What is the recovery time for Heart Bypass Surgery?

इस सर्जरी के बाद हफ़्तों में आपको ठीक महसूस होने लगेगा हालाँकि पूर्ण रिकवरी का समय आपके द्वारा की गयी देखभाल पर ही निर्भर करता है। 

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