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  1. पेसमेकर सर्जरी क्या होता है? - Pacemaker Surgery kya hai in hindi?
  2. पेसमेकर सर्जरी क्यों की जाती है? - pacemaker kab lagaya jata hai
  3. पेसमेकर ऑपरेशन से पहले की तैयारी - Pacemaker Surgery ki taiyari
  4. पेसमेकर का ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - pacemaker surgery kaise hoti hai?
  5. पेसमेकर सर्जरी के बाद देखभाल - Pacemaker Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. पेसमेकर सर्जरी के बाद सावधानियां - Pacemaker Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. पेसमेकर सर्जरी की जटिलताएं - Pacemaker Surgery me jatiltaye

पेसमेकर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे एक निश्चित तरीके से दिल की धड़कन बनाने के लिए प्रोग्राम किया गया है। जब साइनस नोड (Sinus Node), जो कि मानव शरीर का प्राकृतिक पेसमेकर है, अच्छी तरह से काम नहीं करता, हृदय की लय बाधित हो जाती है। ऐसे में पेसमेकर इम्प्लांट की ज़रुरत पड़ती है। 

हृदय की असामान्य लय एक प्रत्यारोपित पेसमेकर की मदद से नियंत्रित की जाती है। जिन लोगों की ह्रदय की गति धीमी हो जाती है, उनके लिए यह एक विश्वसनीय विकल्प है। पेसमेकर एक छोटा समकोण (रेक्टेंगुलर) उपकरण होता है जिसमें कुछ विद्युत-रोधित (Insulated) तारें और एक बैटरी और सर्किट होता है जो ह्रदय तक जा रहे विद्युत संकेतों (Electrical Signals) को नियंत्रित करता है।  

पेसमेकर कई प्रकार के होते हैं। उनका कार्य भी उनके प्रकार के अनुसार अलग होता है। सिंगल कक्ष पेसमेकर (Single Chamber Pacemaker) में तार या लीड होते हैं जो कि नाड़ी जनरेटर (Pulse Generator) से दाएं वेंट्रिकल, जो हृदय के निचले दायें कक्ष (Chamber) में स्थित होता है, के लिए विद्युत् पल्स (Electrical Pulse) प्रसारित करता है। इसी तरह, एक ड्यूल-कक्ष पेसमेकर (Dual-Chamber Pacemaker) में, लीडस् जनरेटर से दाएं वेंट्रिकल और दाएं एट्रियम में पल्स को संचारित करता है। अन्य प्रकार है- बाइवेन्ट्रिकुलर पेसमेकर (Biventricular Pacemaker), जो जनरेटर से पल्सेस को एट्रियम और 2 वेंट्रिकल्स में प्रसारित करता है। पेसमेकरों को स्थायी रूप से या अस्थायी रूप से प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

आपको कई वजहों के कारण डॉक्टर द्वारा पेसमेकर का प्रयोग करने के लिए निर्धारित किया जा सकता है। 

हार्ट ब्लॉक (Heart Block): हार्ट ब्लॉक या तो लोगों में जन्म से होता है या फिर तब होता है अगर दिल के दौरे में ह्रदय को कोई क्षति हो जाए। पेसमेकर इम्प्लांट आमतौर पर तब किया जाता है जब हार्ट ब्लॉक के लक्षण असहनीय हो जाते हैं।

लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (Long QT Syndrome): जब व्यायाम या तनाव के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया के रूप में दिल की धड़कन प्रभावित हो, तब उसे लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम कहते हैं। पेसमेकर या डीफिब्रिलेटर (Defibrillator) इम्प्लांट हृदय की असामान्य लय को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

सिक साइनस सिंड्रोम (Sick Sinus Syndrome): इसे टैकी-ब्रैडी सिंड्रोम (Tachy-Brady Syndrome) के रूप में भी जाना जाता है। इसमें थकावट, सांस फूलना, एनजाइना (Angina), ह्रदय में घबराहट (Palpitations) आदि होता है। इस विकार में साइनस नोड प्रभावित होता है और खराब कार्य कर करता है। एक स्थायी पेसमेकर इम्प्लांट दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है।

हार्ट अटैक (Heart Attack): कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologists; हृदय रोग विशेषज्ञ) आम तौर पर ऐसे मरीज़ों, जिन्हे हाल ही में दिल का दौरा पड़ा हो, को अस्थायी पेसमेकर लगाने के लिए कह सकते हैं। (और पढ़ें – दिल का दौरा के लक्षण)

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (Congestive Heart Failure): जब ह्रदय की पंप करने की क्षमता कम हो जाती है, इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहा जाता है। पेसमेकर के प्रत्यारोपण के माध्यम से इस स्थिति को ठीक किया जा सकता है। (और पढ़ें – दिल की विफलता का कारण)

कार्डिएक अरेस्ट (Cardiac Arrest): इस स्थिति में हृदत का इलेक्ट्रिक सिस्टम में समस्या हो जाती है। पेसमेकर इम्प्लांट ऐसी घटनाओं में किया जाता है जब ह्रदय का धड़कना बंद हो जाता है। इस तरह पेसमेकर इम्प्लांट एक जीवनरक्षी प्रक्रिया है।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. सर्जरी से पहले किये जाने वाले विशिष्ट परीक्षण (Specific Tests Before Surgery)
    सर्जरी से पहले मरीज़ को कई विशिष्ट परीक्षण करवाने होते हैं: इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram; ह्रदय की मांसपेशियों का आकार और मोटाई जानने हेतु और सेंसर लगाकर ह्रदय की इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स के प्रति अनुक्रिया जान्ने हेतु), होल्टर मॉनिटरिंग (Holter Monitoring; यह सर्जरी से एक दिन पहले दिल की धड़कन और पैटर्न को मैप करता है) और स्ट्रेस टेस्ट (Stress Test; जब आप ट्रेडमिल पर चलते हैं, तब यह टेस्ट कार्डियोलॉजिस्ट को आपके बदलते हृदय दर को देखने में मदद करता है)।
  9. हार्ट वाल्व रोग (Heart Valve Disease)
    यदि आपको हार्ट वाल्व रोग है तो अपने डॉक्टर को ज़रूर सूचित करें। डॉक्टर को इसके हिसाब से आपको दवा देनी होगी।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

जैसे ही एनेस्थीसिया अपना काम करना शुरू करदे उसके बाद डॉक्टर एक नीडल का उपयोग करके पेसमेकर की तारों को नसों में डालते/ सिलते हैं जिससे उसे ह्रदय में रखा जा सके। तारों को सही मार्गदर्शन देने के लिए एक्स-रे मशीन का प्रयोग किया जाता है। एक बार तारें सही जगह लग जाएँ फिर छाती या पेट में एक छोटा चीरा काटा जाता है।

चीरा काटने के बाद, एक प्लास्टिक ट्यूब की मदद से लेड वायर को रक्त वाहिका और फिर ह्रदय में डाला जाता है। लेड वायर एक बार ह्रदय में चली जाए, फिर उसका टेस्ट किया जाता है। उसके बाद पेसमेकर को चीरे से आपकी त्वचा के अंदर लगाया जाता है। जब पेसमेकर सही जगह लग जाता है, फिर डॉक्टर उसकी कार्यवाही की जांच करने के लिए उसको टेस्ट करते हैं। चीरे को सिल दिया जाता है। 

सर्जरी के बाद आपको एक रात अस्पताल में ही बितानी होगी जिससे डॉक्टर पेसमेकर की कार्यवाही की जांच करते रहें। आप होश आने पर तरल पदार्थ और भोजन का सेवन कर सकते हैं। एक बार आपका पल्स रेट और ह्रदय का दर स्थिर हो जाए, आपको अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। निर्धारित आराम करने के बाद, मरीज़ अपनी आम दिनचर्या और जीवनशैली में लौट सकते हैं। 

पेसमेकर सर्जरी के बाद निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें 

  1. इस सर्जरी के बाद मरीज़ को शारीरिक रूप से सक्रीय रहना चाहिए।
  2. चक्कर आना, मतली, ज़्यादा पसीना आना, छाती में दर्द और इम्प्लांट के निवेशन की जगह से रक्तस्त्राव या अन्य किसी प्रकार का स्त्राव होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
  3. नियमित रूप से अपने कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist; हृदय रोग विशेषज्ञ) से चेक-अप करवाएं और पेसमेकर की कार्यवाही की जांच करवाएं।
  4. हीट थेरेपी का उपयोग न करें, इससे इम्प्लांट के आसपास की त्वचा पर बर्न्स हो सकते हैं।
  5. अगर आप यात्रा (ट्रेवल) कर रहे हैं, तो ध्यान दें कि मेटल डिटेक्टर सीधा आपके इम्प्लांट की जगह के ऊपर नहीं  लगाया जाए। अपने साथ पेसमेकर पहचान पत्र (Pacemaker Identification Card) रखें क्योंकि ऐसा हो सकता है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा प्रणाली में इसके डिटेक्ट होने पर साईरन बज जाएँ।
  6. बांह को ज़्यादा न हिलाएं। इम्प्लांट के बाद 6-8 हफ़्तों तक ज़्यादा भार न उठायें क्योंकि इससे पेसमेकर की तारें बाहर निकल सकती हैं।

एक पेसमेकर की बैटरी 5 से 15 साल के बीच चल सकती है। 

पेसमेकर का ऑपरेशन करवाने के बाद निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं:

सूजन और रक्त के थक्कों का गठन: 
इम्प्लांट के आसपास के क्षेत्रों की नसों में रक्त के थक्के बन जाना संभव है। बांह में सूजन भी हो सकती है। हालांकि ये सूजन कुछ दिनों में ठीक भी हो जायेगी। 

रक्तस्त्राव: 
उपकरण को लगाने की जगह पर रक्तस्त्राव हो सकता है। 

रक्त वाहिका को क्षति: 
सर्जरी के दौरान पेसमेकर इम्प्लांट के आसपास की रक्त वाहिका को क्षति पहुँच सकती है।

सांस लेने में कठिनाई: 
अगर सर्जरी के दौरान, हवा फेफड़े के बाहर के क्षेत्र में फंस जाए तो इससे फेफड़े पंक्चर हो जाते हैं। ये एक बहुत ही सूक्ष्म जोखिम है।

दिल में छेद: 
यह एक बहुत दुर्लभ जोखिम है लेकिन यह एक बहुत गंभीर जोखिम है। सर्जन की लापरवाही की वजह से हृदय में एक छेद हो सकता है। इससे छाती में दर्द और ह्रदय में तीव्रसम्पीड़न (दबाव) (Cardiac Tamponade, Compression Of The Heart) हो सकता है। किसी दुर्लभ स्थिति में, व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। 

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