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फेमोरल हेड ओसेक्टोमी की सर्जरी में कूल्‍हों के जोड़ के एक हिस्‍से फेमुर (जांघ की हड्डी) के ऊपरी हिस्‍से को निकाला जाता है। आमतौर पर यह सर्जरी संक्रमणों और हिप ट्रांस्‍प्‍लांट सर्जरी करवाने के बाद आने वाली अन्‍य समस्‍याओं के इलाज की जाती है। ऑपरेशन से पहले मरीज को जनरल एनेस्‍थीसिया या एनेस्‍थीसिया दिया जाता है। इससे शरीर का निचला हिस्‍सा सुन्‍न पड़ जाता है।

सर्जरी के दौरान फेमुर के प्रभावित हिस्‍से काे काट या निकाल दिया जाता है और यहां बनी कैविटी को जांघ से निकाली गई मांसपेशियों से कवर कर दिया जाता है। फेमोरल हेड ओसेक्टोमी की वजह से ऑपरेशन की गई टांग की लंबाई कम हो सकती है।

ये सर्जरी करवाने पर मरीज को टांग की लंबाई में दिक्‍कत आ सकती है और उसे वॉकिंग एड (चलने में मदद करने वाले डिवाइस) पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

  1. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी क्या है - What is femoral head ostectomy in Hindi
  2. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी क्यों की जाती है - Why is femoral head ostectomy done in Hindi
  3. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी कब नहीं करवानी चाहिए - Who can and cannot get femoral head ostectomy in hindi?
  4. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी से पहले की तैयारी - Before femoral head ostectomy in Hindi
  5. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी कैसे की जाती है - How is femoral head ostectomy done in Hindi?
  6. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी के बाद देखभाल - How to care for yourself after femoral head ostectomy in hindi?
  7. फेमोरल हेड ओसेक्टोमी की जटिलताएं - What are the possible complications/risks of femoral head ostectomy in hindi?
फेमोरल हेड ओसेक्टोमी के डॉक्टर

फेमोरल हेड ओसेक्टोमी एक सर्जरी है जिसमें हिप जोड़ बनाने वाली फेमुर हड्डी के एक हिस्‍से को निकाल दिया जाता है। हिप जोड़ एक बॉल और सॉकेट ज्‍वाइंट की तरह होता है। फेमुर का ऊपरी हिस्‍सा बॉल पार्ट होता है जबकि सॉकेट पार्ट को एसिटाबुलम कहते हैं।

100 साल पहले 20वीं सदी के मध्‍य में पहली बार ये सर्जरी की गई थी। उस समय टीबी से हिप जोड़ और अन्‍य कूल्‍हों से संबंधित विकारों के इलाज में बहुत प्रभावशाली माना गया था।

हालांकि, ऑपरेशन के बाद प्रभावित टांग की लंबाई कम हो जाती है। ज्‍यादातर फेमोरल हेड ओसेक्टोमी की जगह हिप रिप्‍लेसमेंट ने ले ली है लेकिन फिर भी कुछ स्थितियों जैसे कि आर्टिफिशियल हिप इंप्‍लांट के बाद हिप ज्‍वाइंट इंफेक्‍शन के इलाज के लिए की जाती है।

टोटल हिप रिप्‍लेसमेंट सर्जरी के बाद और निम्‍न स्थितियों में इस सर्जरी की सलाह दी जाती है :

  • पेरी प्रोस्‍थेटिक इंफेक्‍शन : आर्टिफिशियल हिप इंप्‍लांट के आसपास इंफेक्‍शन की वजह से दर्द, सूजन या बुखार होना।
  • बार-बार खिसकना : इस स्थिति में फेमुर के बॉल वाला हिस्‍सा बार-बार सॉकेट वाले हिस्‍से के बाहर आता रहता है।
  • एसेप्टिक लूजनिंग : हड्डी और आर्टिफिशियल हिप इंप्‍लांट के बीच के जोड़ में ढ़ीलापन (कोई इंफेक्‍शन न होना) आने की वजह से दर्द और अक्षमता होना।

इलाज के अन्‍य विकल्‍पों के फेल होने के बाद फेमुर के ऊपरी हिस्‍से में फ्रैक्‍चर के उपचार के लिए।

निम्‍न स्थितियों में डॉक्‍टर यह सर्जरी नहीं करते हैं :

  • जिस इंफेक्‍शन का इलाज सर्जरी से न किया जा सकता हो।
  • कूल्‍हे के जोड़ को ढ़कने वाले नरम ऊतक और हड्डी मजबूत न हो।
  • किसी मौजूदा बीमारी की वजह से मरीज का सर्जरी के लिए फिट न होना।

सर्जरी से कुछ दिन पहले मरीज को अस्‍पताल बुलाया जाता है। डॉक्‍टर कुछ टेस्‍ट करवाते हैं जिसमें खून और यूरिन टेस्‍ट और प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट शामिल है। डॉक्‍टर मरीज की मेडिकल हिस्‍ट्री चेक करेंगे और निम्‍न सवाल पूछेंगे :

  • अगर कोई एलर्जी हो।
  • मरीज कोई दवा ले रहा है या नहीं जैसे कि जड़ी बूटी और डॉक्‍टर के पर्चे के बिना ली जाने वाली दवा।
  • खून पतला करने वाली दवाएं जैसे कि आइबूप्रोफेन, एस्प्रिन, वार्फरिन या क्लोपिडोग्रेल बंद करनी है।
  • सिगरेट पीते हैं, तो उसे छोड़ दें। इससे सर्जरी से जुड़ी जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है।
  • सर्जरी से पहले नहाना, नेल पॉलिश, मेकअप, कान और नाक की ज्‍वेलरी निकाली जाती है।
  • सर्जरी के आसपास के दिनों में फ्लू, जुकाम या बुखार तो नहीं रहा है। ऐसे में सर्जरी को टाला जा सकता है।
  • सर्जरी के बाद मरीज को घर ले जाने के लिए कोई दोस्‍त या परिवार का सदस्‍य होना चाहिए।
  • सर्जरी से एक रात पहले कुछ न खाने और पीने की सलाह दी जाती है।
  • सर्जरी के लिए मरीज की मंजूरी या अनुमति के तौर पर एक फॉर्म साइन करवाया जाता है।

मरीज के अस्‍पताल पहुंचने के बाद, उसे हॉस्‍पीटल गाउन पहनाई जाती है। हाथ या बांह की नस में सुईं लगाई जाती है जिससे सर्जरी के दौरान जरूरी तरल पदार्थ और दवाएं चढ़ाई जाती हैं। सर्जरी से पहले एक्‍स-रे या अन्‍य इमेजिंग टेस्‍ट किए जा सकते हैं जिससे कूल्‍हे के जोड़ को देखकर सर्जरी प्‍लान की जा सके।

आमतौर पर इस प्रक्रिया के लिए स्‍पाइनल एनेस्‍थीसिया (जिससे शरीर के निचले हिस्‍से को सुन्‍न कर दिया जाता है) या जरनल एनेस्‍थीसिया (मरीज को होश नहीं रहता) दिया जाता है। इसके बाद निम्‍न तरीके से सर्जरी की जाती है :

  • मरीज को ऑपरेशन टेबल पर सीधा या करवट लेकर लिटाया जाता है।
  • जांघ के एक तरफ की त्‍वचा पर कट लगाया जाता है।
  • फिर डॉक्‍टर फेमुर हड्डी तक पहुंचने के लिए स्किन के अंदर की मांसपेशियों और ऊतकों को एक तरफ या अलग करते हैं।
  • इसके बाद डॉक्‍टर विशेष सर्जरी वाले उपकरणों जैसे कि ऑसिलेटिंग सॉ (हड्डी और सख्‍त ऊतकों को काटने वाला उपकरण) और ऑस्‍टियोटोम (हड्डी काे काटने और तैयार करने वाला उपकरण) का इस्‍तेमाल करेंगे।
  • अब डॉक्‍टर फोरसेप्‍स से फेमुर के हिस्‍से को काटते हैं और उसे उठाकर हड्डी से जुड़े नरम ऊतकों और मांसपेशियों को कट करते हैं।
  • फिर डॉक्‍टर ज्‍वाइंट सॉकेट से जुड़े फेमुर के हिस्‍से को काट देते हैं। इसकी वजह जांघ वाले हिस्‍से से तैयार की गई मांसपेशियों को कैविटी की जगह भर दिया जाता है।
  • इसके बाद कैविटी की जगह रखी गई मांसपेशियों को बगल की मांसपेशियों और ऊतकों से जोड़ दिया जाता है और फिर टांके का उपयोग करके चीरा बंद कर दिया जाता है।
  • सर्जरी के बाद मरीज को उसके कमरे में शिफ्ट कर दिया जाता है और कुछ टेस्‍ट की मदद से पता लगाया जाता है कि सर्जरी सफल हुई है या नहीं। अगर जनरल एनेस्‍थीसिया देकर सर्जरी हुई है तो मरीज को होश आने के बाद थकान और बेसुध महसूस हो सकता है। इसके अलावा मरीज को गले में खराश, मुंह में सूखापन और बेचैनी जैसे दुष्‍प्रभाव महसूस हो सकते हैं।
  • ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद ये लक्षण खत्‍म हो जाते हैं। मरीज को सर्जरी के बाद अस्‍पताल में रहने के दौरान कुछ दवाएं दी जाती हैं जिसमें एंटीबायोटिक शामिल हैं। वहीं शरीर के सभी अंग किस तरह से काम कर रहे हैं, यह भी मॉनिटर किया जाता है।

सर्जरी के तीन हफ्ते बाद टांके खोले जाते हैं। चार हफ्ते बाद फिजिकल थेरेपिस्‍ट मरीज का चेकअप करेंगे और कुछ एक्‍सरसाइज की मदद से देखेंगे कि आप चल-फिर पा रहे हैं या नहीं। जब मरीज खुद व्‍हीलचेयर चलाने लग जाता है और ठीक से इधर-उधर घूम पाता है, तब उसे अस्‍पताल से छुट्टी दी जाती है।

सर्जरी के बाद देखभाल के लिए डॉक्‍टर कुछ निर्देश देते हैं। ज्‍यादातर मरीजों को फेमोरल हेड ओसेक्‍टोमी के बाद दर्द नहीं होता है। हालांकि, अगर किसी मरीज को दर्द हो रहा है, तो डॉक्‍टर कुछ दवाएं लिख सकते हैं।

फिजिकल थेरेपिस्‍ट वॉकिंग एड इस्‍तेमाल करने में मदद करेंगे क्‍योंकि ये सर्जरी के बाद जरूरी होते हैं।

डॉक्‍टर को कब दिखाएं?

अगर आपको सर्जरी के बाद इंफेक्‍शन के निम्‍न लक्षण दिख रहे हैं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें :

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • टांके वाली जगह से बदबू वाला स्राव होना।
  • ऑपरेशन वाली जगह पर दर्द, लालिमा और गर्म महसूस होना।

इस सर्जरी के बाद ऑपरेशन की गई टांग की लंबाई कम हो सकती है और कूल्‍हे में असंतुलन आ सकता है जिससे मरीज वॉकिंग एड पर बहुत निर्भर हो जाता है। इसके कारण मरीज का जीवन प्रभावित होता है।

सर्जरी के बाद मरीज को कुद जटिलताएं आ सकती हैं :

  • कूल्‍हे में इंफेक्‍शन।
  • टांग में खून के थक्‍के बनना।
  • घाव पर टांकों का खुलना।
  • एनेस्‍थ‍ीसिया का असर।
  • ऑपरेशन वाली जगह में कैंसर होना।
  • एम्‍पुटेशन (प्रभावित अंग निकालना) की जरूरत पड़ना।
  • ऑपरेशन वाली जगह पर बार-बार अल्‍सर होना।

फेमोरल हेड ओसेक्टोमी के बाद डॉक्‍टर के पास कब जाएं

अस्‍पताल से छुट्टी मिलने से पहले सर्जन और फिजिकल थेरेपिस्‍ट फॉलो-अप चेकअप करते हैं। सर्जरी के बाद हर रीज के लिए फॉलो-अप और थेरेपी अलग-अलग होती है।

नोट : ऊपर दी गई संपूर्ण जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह डॉक्‍टरी सलाह का विकल्‍प नहीं है।

Dr. Tushar Verma

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