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ह्यूस्टन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध के मुताबिक जो बच्चे पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं या जिनकी नींद बाधित होती रहती है, उनको बाद में डिप्रेशन और चिंता जैसे विकार होने की संभावना होती है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि आयुर्वेद इस तथ्य को सदियों पहले ही बता चुका है। बड़े जीवन शैली में बदलाव और कुछ टिप्स का पालन करके बेहतर नींद प्राप्त सकते हैं। लेकिन बच्चों के लिए सोने की आदतों और जीवन शैली को बदलना बहुत मुश्किल होता है। तो आइए जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार बच्चो की नींद को सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए -

  1. बच्चो में अच्छी नींद का उपाय है सोने का निश्चित समय - Fix Baby's Sleep Schedule in Hindi
  2. बच्चो में अनिद्रा का उपचार है कमरे में कम रोशनी - Make a Room Dark for Sleeping in Hindi
  3. बच्चों में नींद के लिए टीवी को कहें ना - No TV and Mobile Before Sleep in Hindi
  4. बच्चों की नींद का टोटका है बिस्तर के हल्के रंग - Best Color Sheets for a Good Night Sleep in Hindi
  5. बच्चों को सुलाने का तरीका है टेडी बियर - Teddy Bear for Sleeping in Hindi
  6. बच्चे अच्छी नींद के लिए खेलें आउटडोर गेम्स - Outdoor Games for Sleeping in Hindi
  7. एडजस्ट नैप फॉर स्लीप इन चिल्ड्रन - Adjust Naps for Sleep in Hindi
  8. बच्चों में नींद के लिए मेडिसिन है तेल मालिश - Oil Massage Before Sleep in Hindi
  9. बच्चों में अच्छी नींद के लिए ज़रूरी है लाइट डिनर - Avoid Heavy Dinner for Sleeping in Hindi
  10. अच्छी नींद के लिए बच्चे खाएँ मीठा - Eating Sweet Food Before Bed in Hindi
  11. बच्चों की नींद के लिए फल सब्जियां है ज़रूरी - Fruits and Vegetables Good for Sleep in Hindi
  12. सोने से पहले बच्चे करें जंक फुड से दूरी - Avoid Junk Food Before Bed in Hindi
  13. बच्चों को सोने से पहले सुनाएँ अच्छी कहानियां - Bedtime Stories for Sleep in Hindi
  14. आयुर्वेदिक उपचार दिलाएँ बच्चो में अनिद्रा से छुटकारा - Ayurvedic Treatment for Sleep in Hindi

हर दिन रात में अपने बच्चे को एक ही समय सोने की आदत डालें, इससे बच्चे को अपने बायोलॉजिकल क्लॉक को एक नियमित पैटर्न में समायोजित करने में मदद मिलती है।

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डार्क रूम का अर्थ है पर्याप्त मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव। जिसका मतलब है बेहतर नींद। जिस रूम में आपका बच्चा सोता है उस रूम में रोशनी को धीमा या कम रखें।

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सोने के कम से कम एक घंटे पहले टीवी या फ़ोन का उपयोग न करने दें। उज्ज्वल स्क्रीन से आँखों को दर्द पहुँचता है और शायद टीवी या फोन आपके बच्चे के दिमाग को भी चोट पहुंचा सकते हैं। 

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सुनिश्चित करें कि बिस्तर की चादर, कवर और तकिए हल्के रंग में हैं। हल्का नीला, हल्का बैंगनी या जो कुछ भी आपके दिमाग को शांत करता है उस रंग का उपयोग करें।

टेडी बियर या बग बनी या जो भी आपके बच्चे का पसंदीदा खिलौना है, यदि बच्चा खिलौने के साथ सोता है, तो इससे बच्चे का मन शांत रहता है और बच्चा खुश रहता है।

बाहर खेले जाने वाले खेल बच्चे को थकान, मजबूत शरीर बनाने के लिए, प्रतिरक्षा में सुधार लाने और बेहतर नींद के लिए आवश्यक होते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों के लिए दिन की नींद की सलाह दी जाती है। यह नियम विशेष रूप से गर्मी के दौरान लागू होता है, जब एनर्जी ड्रेन अधिक होती है। झपकी 45 मिनट से 1 घंटे तक सीमित रखना सुनिश्चित करें। इससे रात में सोते समय नींद प्रभावित नहीं होंगी।

मालिश के लिए सही तेल के बारे में अपने आयुर्वेद चिकित्सक से बात करें। आमतौर पर ये तेल नींद को प्रेरित करने के लिए उपयोगी होते हैं। ब्राह्मी तेल, बालास्वागंधादि तेल, आँवला हेयर आयल, क्षीरबाला तेल इत्यादि।

रात में, सोने से एक घंटे पहले, तेल के कुछ बूंदों को सिर, माथे, पैर और पलकों पर सिर्फ एक बूंद डालकर मालिश करें। इससे आँखों को भारी और थकान महसूस होगी। हालांकि, पलकों पर तेल लगाने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। उपरोक्त विधि के साथ, आप दिन के समय सिर धोने से 1 घंटे पहले भी तेल का उपयोग कर सकते हैं।

क्षीरबाला तैलम , महामशा तैलम, बालास्वागंधादि तैलम , महा नारायण तेल, धन्वंतराम तैलम इत्यादि जैसे तेलों से सप्ताह में कम से कम एक बार बॉडी मसाज करना बहुत उपयोगी होता है।
यह दोनों शरीर और मन को आराम देती है, दर्द से राहत देती है और यदि आप अपने बच्चे की मालिश कर रहे हैं, तो यह आप दोनों के बीच संबंध सुधारता है!

चूंकि रात को ऊर्जा की आवश्यकता बहुत कम होती है, इसलिए रात को भारी खाने से बचना ही बेहतर है। लाइट डिनर आपके पेट और शरीर को एक हल्का अनुभव देता है और प्राकृतिक नींद को प्रेरित करता है।

यह नियम विशेष रूप से तब लागू होता है जब बच्चे में नींद की समस्याएं होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह सीधे कफ दोष से संबंधित है। मिठाई और तेल पदार्थों कफ दोष को बढ़ाता है, इसलिए इससे सोने में सहायता मिलती है।

उसी तर्क के साथ, अतिरिक्त मसालेदार भोजन कफ को कम करते हैं। इस प्रकार, इससे नींद का समय कम हो सकता है। इसलिए मसालेदार भोजन को कम करने पर विचार करें।

अलग अलग प्रकार के फल और सब्जियां सभी आवश्यक विटामिन, खनिज, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आदि शरीर को पोषण देने के लिए जरूरी होते हैं। एक अच्छी तरह से पोषित शरीर तेज और सक्रिय मस्तिष्क को जन्म देता है।

पिज्जा, बर्गर, सोडा, कोका कोला, पेप्सी, मिरिंडा आदि, खासकर रात में इनके सेवन से बचें।

रात को अपने बच्चे को अच्छी अच्छी कहानियां सुनाएँ। लेकिन किसी वायलेंट स्टोरी की बजाए अच्छे मोरल और हैप्पी एंडिंग वाली स्टोरी सुनाएँ।

अगर बच्चे को कम नींद आ रही है तो अभियंगा - (शिला अभियंगा मसाज का एक प्रकार) उपचार बहुत उपयोगी हैं। किसी भी दवाई की कोशिश करने से पहले, इन उपचारों की कोशिश की जानी चाहिए। ये शरीर पर अनावश्यक दवा के भार से बचाने में मदद करते हैं।

उपरोक्त सभी उपायों के साथ, अगर अभी भी नींद की समस्या है, तो दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। कृपया ध्यान दें कि बच्चे को कोई भी दवा देने से पहले आयुर्वेद के डॉक्टर के साथ परामर्श आवश्यक है।

नींद के लिए नियमित रूप से कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग किया जाता है -

  • स्वर्ण बिंदु प्राशन: बच्चों की प्रतिरक्षा और मानसिक शक्ति में सुधार करने का एक प्राकृतिक मार्ग।
  • ब्राह्मी घृता - यह हर्बल घी भी एक मस्तिष्क टॉनिक के रूप में बहुत ही अच्छा मन जाता है।
  • अरविन्दासव - पाचन और चयापचय की समस्याओं को ठीक करने में मदद करती है। अप्रत्‍यक्ष रूप से नींद में सुधार करने में मदद करता है।
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