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अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हम तमाम प्रकार के आहारों का सेवन करते हैं। मांसपेशियों को मजबूत रखने और फिटनेस को लेकर सक्रिय लोगों के लिए ऐसे में आहार का चयन करना बहुत आवश्यक हो जाता है। उन्हें ऐसे आहारों की आवश्यकता होती है जो मजबूती देने के साथ शरीर को फिट बनाए रखें। आज हम आपको ऐसे ही एक सूप के बारे में बताएंगे जिसमें समाहित तमाम पोषक तत्व आपकी इस खोज पर पूर्णविराम लगा सकते हैं। जिस आहार का हम जिक्र कर रहे हैं वह है - पाया सूप।

पाया सूप मासांहारी पेय है। यह जानवरों की हड्डियों और संयोजी ऊतक से बनाया जाता है। फिटनेस के प्रति काफी ध्यान देने वाले युवाओं के बीच पाया सूप हाल के दिनों में काफी पसंदीदा पेय पदार्थ बन गया है। इस तरह के पेय पदार्थों का चलन प्रागैतिहासिक काल से होता आ रहा है, जहां शिकारी जानवरों के उन हिस्सों जिसे खाया नहीं जा सकता है, उसका पेय पदार्थ के रूप में सेवन करते थे। पशुओं की हड्डियों में भरपूर पौष्टिकता पाई जाती है, इसीलिए आमतौर पर सूप, सॉस बनाने के लिए इनका उपयोग किया जाता रहा है।

पाया सूप कई तरह की पौष्टिकता और स्वास्थोपयोगी गुणों से भरपूर होता है। पाया सूप का सेवन जोड़ों और पाचन तंत्र को मजबूती देने के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। कई जानवरों जैसे सूअर,भेड़, भैंस, बकरे और मुर्गे की पैर की हड्डियों से पाया सूप तैयार किया जाता है।

इस लेख में हम आपको पाया सूप बनाने की विधि और उसके फायदों के बारे में जानकारी देंगे।

  1. पाया सूप बनाने की विधि - Paya soup banane ki vidhi
  2. पोषक तत्वों से भरपूर है पाया सूप - Paya soup me hain kai sare nutrition
  3. पाचन तंत्र को मजबूती देता है पाया सूप - Digestive System ko theek karne me bhi madad kar sakta hai paya soup
  4. वजन कम करने की चाह रखने वालों को करना चाहिए पाया सूप का सेवन - Weight Loss me laabhkari hai paya soup
  5. जोड़ों को सेहतमंद बनाए रखने में सहायक है पाया सूप - Joint Health me labhkari hai paya soup

कई प्रकार के रोगों से ग्रसित लोगों को पाया सूप के सेवन की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं घर पर इसे आसानी से कैसे तैयार किया जा सकता है।

आवश्यक सामग्री

  • पानी करीब 4 लीटर
  • सेब का सिरका 2 बड़े चम्मच (करीब 30 मिली)
  • जानवरों की हड्डियां (लगभग 1-2 किग्रा)
  • नमक और काली मिर्च

बनाने की विधि

  • सबसे पहले सभी सामग्रियों को एक बड़े बर्तन में रखकर चूल्हे पर रख दें।
  • आंच को कम रखते हुए इसे 12 से 24 घंटे तक पकाने के लिए छोड़ दें।
  • यह जितना अधिक समय तक पकता रहेगा, स्वाद और पौष्टिकता में उतना ही बेहतर होगा।
  • सूप को ठंडा होने दें। इसके बाद इसे किसी बड़े बर्तन में छान कर अलग कर लें। उबालने के बाद शेष बचे अवशेषों को फेंक दें।

सूप को पौष्टिक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की हड्डियों जैसे मैरो बोन, ऑक्सटेल, खुर, आदि का प्रयोग करें। सिरका का उपयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हड्डियों से सभी पोषक तत्वों को बाहर निकाल कर पानी में घोलने का काम करता है। स्वाद बढ़ाने के लिए पाया सूप में सब्जियां, मसाले और कई प्रकार की जड़ी बूटियों का भी उपयोग कर सकते हैं। आमतौर पर पाया सूप में लहसुन, प्याज, अजवाइन, गाजर आदि को मिलाया जाता है।

हड्डियां स्वयं में विटामिन और कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इन सबके अलावा जब हम पाया सूप तैयार करते हैं तो उसमें हड्डियों में उपस्थित पोषक तत्वों के साथ संयोजी ऊतकों के गुण भी जुड़ जाते हैं। हड्डियों और ऊतकों में कोलेजन भी होता है। कुकिंग करने पर कोलेजन, जिलेटिन में बदल जाता है, जो शरीर को अमीनो एसिड प्रदान करता है। अमीनो एसिड, प्रोटीन का निर्माण करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाया सूप की पोषकता को बढ़ाने के लिए इसमें जानवरों के शरीर के विभिन्न हिस्सों की हड्डियों को शामिल किया जाना चाहिए।

अन्य दूसरे आ​हारों की अपेक्षा पाया सूप को असानी से पचाया भी जा सकता है। पाया सूप से निम्न प्रकार के पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।

  • आयरन
  • विटामिन ए और के
  • फैटी एसिड
  • सेलेनियम
  • जिंक
  • मैंगनीज

वैज्ञानिकों ने कई सारे शोध में पाया कि अगर इंसान का आंत्र पथ यानी इंटस्टाइनल ट्रैक्ट सही है तो शरीरिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा कम होता है। कई प्रकार से यह साबित हो चुका है कि पाया सूप न सिर्फ आसानी से पच जाता है साथ ही यह अन्य खाद्य पदार्थों को पचाने में भी सहायता करता है।

पाया सूप में पाया जाने वाला जिलेटिन स्वाभाविक रूप से तरल पदार्थ को आकर्षित करता है। इसके अलावा जिलेटिन में पाया जाने वाला ग्लूटामाइन नामक एमिनो एसिड, आंतों की दीवारों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है, जिससे पाचन में सुधार आता है। आंतों में होने वाली 'लीकी गट' नामक समस्या को भी यह आसानी से ठीक कर सकता है।

इतना ही नहीं जिन लोगों को लीकी गट और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए भी पाया सूप काफी लाभकारी हो सकता है।

पाया सूप में कैलोरी की मात्रा बहुत ही कम होती है फिर भी यह भूख को शांत करने वाला पेय है। कई अध्‍ययनों से स्पष्ट होता है कि नियमित रूप से पाया सूप का सेवन करने से चूंकि, कैलोरी कम मिलती है और भूख शांत होती है, ऐसे में समय के साथ वजन को घटाने में यह काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा पाया सूप में मौजूद जिलेटिन पेट के भरे होने का एहसास दिलाता है, ​जिससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा नहीं होती है।

एक अन्‍य अध्‍ययन में पाया गया कि डेयरी उत्‍पादों में पाए जाने वाले केसिन नामक प्रोटीन की तुलना में, जिलेटिन भूख को कम करने में अधिक प्रभावी होता है। 53 पुरुषों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि पाया सूप में पाए जाने वाला कोलेजन, मांसपेशियों को बढ़ाने और शरीर से फैट को कम करने में भी मदद करता है।

हड्डियों में पाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण प्रोटीन है कोलेजन। पाया सूप बनाने के लिए जब हड्डियों को पकाया जाता है तो कोलेजन, जिलेटिन नामक एक अन्य प्रोटीन को अलग करता है। जिलेटिन में महत्वपूर्ण अमीनो एसिड होते हैं जो जोड़ों के लिए काफी लाभकारी माने जाते हैं।

पाया सूप में ग्लूकोजामाइन और कॉन्ड्रोइटिन भी होते हैं। कई अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि ग्लूकोजामाइन और कॉन्ड्रोइटिन जोड़ों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम कर सकते हैं।

 

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