पृथ्वी वर्धक मुद्रा को लोकप्रिय 'पृथ्वी मुद्रा' के नाम से भी जाना जाता है। यह मुद्रा शरीर में पृथ्वी तत्व को बढ़ाती है। इस योग मुद्रा के दौरान, आपके शरीर से अग्नि के तत्व कम होने लगते हैं। इसलिए इसे 'अग्नि शामक मुद्रा' भी कहा जाता है। (और पढ़ें - अग्नि मुद्रा)
इस लेख में पृथ्वी मुद्रा करने के फायदों और उसे करने के तरीको के बारे में बताया है। साथ ही इस लेख में पृथ्वी मुद्रा करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। लेख के अंत में पृथ्वी मुद्रा से संबंधित एक वीडियो शेयर किया गया है।
(और पढ़ें - वायु मुद्रा के लाभ)
- पृथ्वी मुद्रा के फायदे - Prithvi Mudra ke fayde in Hindi
- पृथ्वी मुद्रा करने का तरीका - Prithvi Mudra karne ka tarika in Hindi
- पृथ्वी मुद्रा का आसान रूपांतर - Prithvi Mudra ke rupantar in Hindi
- पृथ्वी मुद्रा का वीडियो - Prithvi Mudra Video in Hindi
पृथ्वी मुद्रा के फायदे - Prithvi Mudra ke fayde in Hindi
वायु मुद्रा के लाभ कुछ इस प्रकार हैं –
- इस मुद्रा को करने से पुरानी चक्कर की समस्या, कमज़ोरी महसूस होना आदि जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। (और पढ़ें - चक्कर रोकने के उपाय)
- यह मुद्रा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। (और पढ़ें - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीके)
- वजन को नियंत्रित करती है। (और पढ़ें - वजन घटाने के उपाय)
- रूखी त्वचा और फटी त्वचा का इलाज करती है। (और पढ़ें - रूखी त्वचा के लिए घरेलू उपाय)
- बालों का झड़ना और सफेद बालों की समस्या को दूर करती है। (और पढ़ें - बालों का झड़ना रोकने के उपाय)
- यह मुद्रा बुखार और पीलिया रोग को कम करती है।
(और पढ़ें - पीलिया के घरेलू उपाय)
पृथ्वी मुद्रा करने का तरीका - Prithvi Mudra karne ka tarika in Hindi
वायु मुद्रा को करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से बता रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें –
- सबसे पहले आरामदायक कपड़े पहन लें।
- फिर आराम से किसी सुखद जगह पर बैठ जाएं।
- अब अपने शरीर को आराम की अवस्था में ले जाएं।
- फिर अपनी दोनों हाथों की अनामिका उंगली को अंगूठे के आधार पर रखें।
- अब ध्यान लगाने की कोशिश करें।
- इस मुद्रा को रोजाना 30 से 45 मिनट तक करें।
(और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)
पृथ्वी मुद्रा का आसान रूपांतर - Prithvi Mudra ke rupantar in Hindi
जब आपको इस मुद्रा को करने से सभी लाभ प्राप्त हो जाएं, तो फिर इस मुद्रा को करना बंद कर दें। क्योंकि, कुछ समय बाद यह मुद्रा शरीर में तंत्रिकाओं के अनियंत्रण का कारण बन सकती है।
(और पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)



