भ्रामरी प्राणायाम का नाम भ्रामरी नामक मधुमक्खी पर रखा गया है क्योंकि इस प्राणायाम में साँस छोड़ने की आवाज़ ऐसी लगती है जैसे कि मधुमक्खी की ध्वनि हो। यह प्राणायाम व्यक्ति के मन को शांत करने में अती सक्षम है। भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से आप क्रोध, चिंता और निराशा से अवश्य राहत पाएँगे। इसे आप कहीं भी कर सकते हैं -- चाहे घर या ऑफिस या की किसी बाग़ीचे में।

आगे इस लेख में जानिए कि भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें, लाभ और इस आसन को करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। साथ ही इस लेख में हमने भ्रामरी प्राणायाम का विडियो भी दिया गया है।

  1. भ्रामरी प्राणायाम के फायदे - Bhramari Pranayama ke fayde
  2. भ्रामरी प्राणायाम करने से पहले यह आसन करें - Bhramari Pranayama karne se pehle aasan kare
  3. भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका - Bhramari Pranayama karne ka tarika
  4. भ्रामरी प्राणायाम करने में क्या सावधानी बरती जाए - Bhramari Pranayama karne me kya savdhani barti jaye
  5. भ्रामरी प्राणायाम का वीडियो - Bhramari Pranayama ka video

भ्रामरी प्राणायाम के कुछ लाभ हैं यह:

  1. भ्रामरी प्राणायाम आपको चिंता और क्रोध से मुक्त करता है। अगर आपको हाइपरटेंशन की शिकायत हो तो यह प्राणायाम अवश्य करें।
  2. गर्मी और सिर दर्द से राहत पाने में मदद करता है भ्रामरी प्राणायाम। (और पढ़ें - सिर दर्द के लिए घरेलू उपचार)
  3. माइग्रेन और हाई बीपी के लिए चिकित्सिए है।
  4. इस प्राणायाम निरंतर करने से आपकी बुद्धि तेज़ होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

(और पढ़ें - ध्यान लगाने के नियम)

myUpchar के डॉक्टरों ने अपने कई वर्षों की शोध के बाद आयुर्वेद की 100% असली और शुद्ध जड़ी-बूटियों का उपयोग करके myUpchar Ayurveda Urjas Energy & Power Capsule बनाया है। इस आयुर्वेदिक दवा को हमारे डॉक्टरों ने कई लाख लोगों को शारीरिक व यौन कमजोरी और थकान जैसी समस्या के लिए सुझाया है, जिससे उनको अच्छे प्रभाव देखने को मिले हैं।
Power capsule for men
₹719  ₹799  10% छूट
खरीदें

भ्रामरी प्राणायाम को अपने आसन अभ्यास को समाप्त करने के बाद ही करें।

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यान से पढ़ें।

  1. किसी भी शांत वातावरण में बैठ जाएँ। ध्यान करने के किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठें।
  2. आखें बंद कर लें और कुछ समय के लिए पूरे शरीर को शिथिल कर लें।
  3. पुर अभ्यास के दौरान होठों को हल्के से बंद रखें और दाँतों की पंक्तियों को थोड़ा अलग रखें। ऐसा करने से ध्वनि ज़्यादा साफ सुनाई देती है।
  4. तर्जनी या मध्यमा ऊँगली से कानों को बंद कर लें।
  5. यदि नादानुसंधान के आसान का प्रयोग कर रहे हों, तो कानों को अंगूठे से बंद करें और बाकी चारों उंगलियों को सिर पर रखें।
  6. एक लंबी गहरी श्वास अंदर ले और फिर श्वास छोड़ते हुए धीरे से उपास्थि (Cartilage) को दबाएँ।
  7. आप चाहें तो उपास्थि (Cartilage) को दबा कर रख सकते हैं या फिर उसे छोड़ दें और फिर दुबारा श्वास छोड़ते हुए दबायें। यह प्रक्रिया करते समय मधुमख्खी जैसी भिनभिनाने की आवाज़ निकालें।
  8. ध्वनि ऊँची रखना अधिक लाभदायक है। अगर आपके लिए यह मुमकिन ना हो तो ध्वनि नीची भी रख सकते हैं।
  9. इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएँ।
  1. भ्रामरी प्राणायाम कोई भी कर सकता है लेकिन बेहतर यही होगा अगर आपक इसे किसी अच्छे गुरु के निर्देशन में शुरू करें।
  2. यह प्राणायाम खाली पेट करें।
Shilajit
₹799  ₹1299  38% छूट
खरीदें

भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि आप इस वीडियो में बाबा रामदेव से सीख सकते हैं:

ऐप पर पढ़ें