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संस्कृत शब्द उज्जायी का मतलब है "विजयी"। यह नाम दो शब्दों पर रखा गया है: "जी" और "उद्"। जी का मतलब है 'जीतना' या 'लड़ कर प्राप्त करना' और उद् का अर्थ है 'बंधन'। तो इसका मतलब उज्जायी प्राणायाम का मतलब वह प्राणायाम जो बंधन से स्वतंत्रता दिलाता है।

इस लेख में उज्जायी प्राणायाम के फायदों और उसे करने के तरीको के बारे में बताया है। साथ ही इस लेख में उज्जायी प्राणायाम के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। लेख के अंत में उज्जायी प्राणायाम से संबंधित एक वीडियो शेयर किया गया है।

(और पढ़ें - ध्यान के लाभ)

  1. उज्जायी प्राणायाम के फायदे - Ujjayi Pranayama ke fayde in Hindi
  2. उज्जायी प्राणायाम करने से पहले यह आसन करें - Ujjayi Pranayama karne se pahle ye aasan kare in Hindi
  3. उज्जायी प्राणायाम करने का तरीका - Ujjayi Pranayama karne ka tarika in Hindi
  4. उज्जायी प्राणायाम करने में क्या सावधानी बरती जाए - Ujjayi Pranayama me kya savdhani barte in Hindi
  5. उज्जायी प्राणायाम का वीडियो - Ujjayi Pranayama Video in Hindi

उज्जायी प्राणायाम के कुछ लाभ हैं यह

  1. उज्जायी प्राणायाम को शांति प्रदान करने वाले प्राणयामों में वर्गीकृत किया गया है। इस अभ्यास का उपयोग योग चिकित्सा में तंत्रिका तंत्र और मन को शांत करने के लिए किया जाता है। (और पढ़ें- मानसिक रोग को कैसे दूर करें)
  2. आत्मिक स्तर पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।
  3. यह अनिद्रा से छुटकारा पाने में मदद करता है; यह लाभ पाने के लिए सोने से पहले शवासन में इसका अभ्यास करें। (और पढ़ें - अनिद्रा के आयुर्वेदिक उपचार)
  4. बिना साँस रोके या बँध का इस्तेमाल किए बिना अगर यह प्राणायाम तो हृदय की गति को धीमा कर देता है और हाई बीपी से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी होता है।
  5. उज्जय द्रव-धारिता को कम करता है। यह शरीर के सातों धातुओं के विकारों को हटाता है: रक्त, हड्डी, मज्जा, वसा, वीर्य, त्वचा और मांस।

उज्जायी प्राणायाम को अपने आसन अभ्यास को समाप्त करने के बाद ही करें।

(और पढ़ें - योग क्या है)

उज्जायी प्राणायाम करने की विधि हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यान से पढ़ें।

  1. किसी भी आरामदायक आसान में बैठ जायें। पूरे शरीर को शिथिल कर लें।
  2. समान रूप से श्वास लें।
  3. थोड़ी देर बाद अपना ध्यान गले पर ले आयें।
  4. ऐसा अनुभव करें या कल्पना करें की श्वास गले से आ-जा रहा है।
  5. जब श्वास धीमा और गहरा हो जाए तो कंठ-द्वार को संकुचित करें। ऐसा करने पर आपके गले से साँस आने और जाने पर धीमी सी आवाज़ आनी चाहिए।
  6. अब साँस लंबी और गहरी होनी चाहिए।
  7. ऊपर बताए गये तरीके से बाएं, दाएं और दोनों नथ्नो के माध्यम से श्वास लेना एक भास्त्रिका प्राणायाम का पूरा चक्र होता है।
  8. ऐसा 10-20 मिनिट तक करें।
  9. अगर आपको ज़्यादा देर बैठने में परेशानी हो तो उज्जायी प्राणायाम लेटकर या कड़े हो कर भी कर सकते हैं।

(और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)

अगर आपको कोई हृदय रोग हो तो बिना साँस रोके या बँध का इस्तेमाल किए उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करें।

(और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत के लक्षण)

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