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प्राणायाम विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों के लिए रोगियों को दिए गए सामान्य सुझाव है। लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि लोगों को योग गुरु के पास जाने और प्राणायाम सीखने का समय नहीं मिलता है। इस लिए हम यहाँ एक सरल प्राणायाम तकनीक बता रहे हैं जो आप स्वयं घर पर कर सकते हैं। किंतु याद रखें की यह केवल एक थोड़े समय के लिए इस्तेमाल करने के लिए सही रूप से प्राणायाम करने का विकल्प है। प्राणायाम का पूरा लाभ पाने के लिए किसी योग्य गुरु से प्राणायाम के विभिन्न प्रकार सीखें।

(और पढ़ेंप्राणायाम क्या है)

  1. प्राणायाम को सरल बनाने की आवश्यकता क्यों है?
  2. प्राणायाम के नियम
  3. सरल प्राणायाम कैसे करें या सरल प्राणायाम करने की विधि
  4. प्राणायाम करने में क्या सावधानी बरतनी चाहिए या प्राणायाम किसे नहीं करना चाहिए?

योग में उल्लेखित नियमित प्राणायाम पूरी तरह स्वस्थ लोगों के लिए हैं। इसमें योग की अनिवार्यताएं हैं - यम, नियम और आसन। इसका मतलब है, नियमित प्राणायाम को आहार और मन के प्रतिबंधों का पालन करने और आसन में उचित प्रशिक्षण पाने की आवश्यकता है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद कहते थे, "एक स्वस्थ शरीर एक स्वस्थ मन की पूर्वापेक्षा है"।   प्राणायाम के किसी भी प्रकार की विधि बिना किसी प्रशिक्षण के या शुरुआत में कई लोगों के लिए कठिन होती है। यदि प्राणायाम अपनी क्षमता से अधिक किया जाए तो वह चक्कर आने और साँस लेने में दिक्कत का कारण बन सकता है। 

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1. प्राणायाम कब करें या प्राणायाम करने का सही समय क्या है?

प्राणायाम सुबह के समय खाली पेट करें। प्राणायाम ताजा हवा और ऊर्जा से मन और शरीर को भरने का तरीका है। इसलिए, सुबह इसके लिए सही समय है। प्राणयम करने से पहले स्नान अवश्य करें। स्नान के बाद हम ताजा महसूस करते हैं तो यह प्राणायाम के लाभों को पूर्ण रूप से महसूस करने में करता है। ऐसा करने से आपके तन और मन में प्राण पूरी तरह से भर जाते हैं।

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2. प्राणायाम कहाँ करें या प्राणायाम करने का सही स्थान क्या है?

आप जहाँ प्राणायाम करें उस जगह में पर्याप्त हवा और प्रकाश होने चाहिए। ताज़ी हवा बहुत ही आवश्यक है, तो अगर किसी कमरे में प्राणायाम कर रहें हो तो खिड़कियां खुली रखें वरना अक्सर यह चक्कर आने का कारण बनता है। जगह शोर मुक्त होनी चाहिए ताकि आप अपने अभ्यास पर ध्यान दे सकें।

3. प्राणायाम करने के लिए कैसे बैठें?

फर्श पर चटाई या योगा मैट बिछा कर किसी भी ध्यान करने के आसान में बैठ जायें जैसे की पद्मासन, सुखासन, सिद्धासन या वज्रासन। अगर आपके में कोई भी समस्या हो या ज़मीन पर बैठने में परेशानी हो तो एक कुर्सी पर बैठ सकते हैं।

4. प्राणायाम करते समय आंखें खुली हों या बंद?

आखें बंद रखें। हो सके तो दृष्टि को नाक की नोक पर केंद्रित करें और फिर आखें बंद करें। अगर नाक की नोक पर दृष्टि केंद्रित करने या रखने में परेशानी हो तो ऐसा ना करें।

5. प्राणायाम करते समय क्या मानस्कीता होनी चाहिए?

मानसिक स्तिथि एकदम शांत होनी चाहिए। कोई जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। एकदम रिलैक्स रहें। कोई अतिरिक्त विचार नहीं आने चाहिए दिमाग़ में। यदि आपका बहुत ही विचलित हो, या यदि आप जल्दी में हैं, तो उस दिन के लिए प्राणायाम ना करें।

6. प्राणायाम की अवधि क्या होनी चाहिए?

शुरुआत में दो मिनट से अधिक ना करें। अभ्यास होने पर धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं।

7. क्या प्राणायाम रोजाना किया जाना चाहिए?

रोजाना इसे करना बेहतर होता है। अगर मन बहुत अधिक विचलित हो, या जब आपकी तबीयत ठीक ना हो तो प्राणायाम ना करें।

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  1. चुपचाप एक मिनट के लिए बैठें। सामान्य रूप से श्वास लें और छोड़ें। इस एक मिनट के दौरान, सोचें कि आप स्वस्थ होने और मजबूत बनने के लिए शरीर और मन में ऊर्जा प्राप्त करने जा रहे हैं। सोचें कि आप मन की सारी अशुद्धियों श्वास के माध्यम से बाहर निकालने वाले हैं और आप ऊर्जा और प्राण श्वास लेने के साथ प्राप्त करने वाले हैं। सोचें कि आप जो श्वास लेंगे, वह जीवन, ताकत, सकारात्मकवाद और ऊर्जा से बाहरी होगी। (और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत के लक्षण)
  2. आखें बंद कर लें, दृष्टि को नाक पर केंद्रित करें, पीठ सीधी रखें, और दिमाग़ को शांत करें।
  3. एक गहरी साँस लें, बहुत धीरे-धीरे से, जल्दबाज़ी ना करें। सोचें कि आप मान और शरीर में ऊर्जा और प्राण भर रहे हैं।
  4. धीमी गति से साँस छोड़ें। साँस छोड़ने की अवधि साँस लेने की अवधि के जितनी ही होनी चाहिए। सांस छोड़ते समय, सोचें कि आपके शरीर और दिमाग के सभी दोष बाहर निकाल रहे हैं।
  5. अपनी सुविधा के अनुसार 10-20 बार दोहराएं।
  1. यदि चक्कर आने लगे या साँस लेने में कठिनाई होने लगे, पसीना आशिक आने लगे, या अंशकार छाने की भावना महसूस होने लगे तो तुरंत प्राणायाम करना रोक दें। खुल्ली हवादार जगह पर जा कर बैठ जायें, और सामान्य रूप से साँस लें। प्राणायाम फिर से करने की कोशिश ना करें। (और पढ़ें - चक्कर आने के आयुर्वेदिक उपचार)
  2. यह गर्भवती महिला या 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  3. यह अस्थमा, या अन्य श्वसन समस्याओं वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  4. यह दिल की बीमारीकैंसर आदि जैसे गंभीर बीमारियों वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  5. एक योग्य योग गुरु के निरीक्षण में ही दुबारा प्राणायाम करें।

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