बच्चा अपनी बातें कई तरह की भावनाओं के साथ बताता है और उन्हीं में से एक है गुस्सा. बच्चों में गुस्सा आना सामान्य है. गुस्सा करके बच्चा बताता है कि काम उसके अनुसार हो रहा है या नहीं. दरअसल, बच्चों का गुस्सा करना कुछ हद तक सही है, लेकिन अगर बच्चे का गुस्सा आक्रामक हो जाए , तो ये चिंता की बात हो सकती है. जैसे बच्चे‍ गेम्स खेलते हुए झगड़ पड़े, कोई फन एक्टिविटी करते हुए गुस्सा करने लगे. हर समय गुस्सा करने से बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर असर पड़ता है. ऐसे में बच्चों को गुस्सा आने पर उन्हें दूसरी एक्टिविटी में व्यक्त करना जरूरी है.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि बच्चों को गुस्सा क्यों आता है और उसके गुस्से को कैसे कम किया जा सकता है -

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  1. बच्चों को गुस्सा आने का कारण
  2. बच्चों का गुस्सा कम करने के उपाय
  3. सारांश
  4. बच्चों को गुस्सा क्यों आता है? के डॉक्टर

कई कारण हैं, जिनकी वजह से बच्चा ज्यादा गुस्सा करता है. इसके पीछे घर का खराब माहौल मुख्य कारण हो सकता है. इसके अलावा, अगर बच्चा अपना होमवर्क नहीं कर पा रहा या उसे फ्रेंडशिप प्रॉब्लम्स हैं, तो वो अपनी भावना को गुस्से के जरिए बाहर निकालता है. आइए, बच्चों को गुस्सा आने का कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

  1. बच्चे के अनुसार माहौल न हो
  2. कोई काम करने में परेशानी आने पर
  3. झुंझलाहट होने पर
  4. अच्छे दोस्त न होने पर
  5. परिवार भी जिम्मेदार
  6. मानसिक समस्या होने पर
  7. अन्य कारण

बच्चे के अनुसार माहौल न हो

अक्सर बच्चे को ज्यादा गुस्सा तब आ सकता है, जब चीजें उसके मुताबिक न हों. बच्चे को महसूस हो कि उसके साथ गलत हो रहा है. कई बार ठीक से बात को न कह पाने के कारण भी बच्चे गुस्सा करते हैं. सबसे खराब स्थिति तब हो सकती है, जब बच्चे को किसी बात के लिए दोषी ठहराया जाए, जबकि उसकी गलती न हो.

कोई काम करने में परेशानी आने पर

कई बार बच्चे उस समय भी गुस्सा करते हैं जब उन्हें अपना होमवर्क समझ नहीं आता या वो एग्जाम की तैयार और स्कूल वर्क करने में परेशानी महसूस कर रहे हों. कई बार कोई गेम खेलने के दौरान हारने पर या कोई लेवल कंप्लीट न करने पर भी बच्चों को गुस्सा आ सकता है.

झुंझलाहट होने पर

कई बार ऐसा होता है, जब बच्चे उन्हें दिया गया कोई टारगेट पूरा नहीं कर पाते हैं. ऐसे में बच्चे झुंझलाहट में आकर अपना गुस्सा गुस्सा बाहर निकालते हैं.

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अच्छे दोस्त न होने पर

कई बार देखा गया है कि बच्चों के अच्छे फ्रेंड्स नहीं होते या फ्रेंड सर्कल में उनकी बुलिंग होती है. बुलिंग होने पर या बच्चे का नाम गलत तरह से पुकारने पर या किसी अन्य तरीके से तंग करने पर बच्चे गुस्सा करने लगते हैं.

परिवार भी जिम्मेदार

कई बार पेरेंट्स बच्चों के लिए ऐसे रूल्स बना देते हैं, जिसे बच्चे ठीक नहीं समझते हैं. ऐसे में वो गुस्‍सा करने लगते हैं. दूसरी ओर कई बच्चे घर में होने वाले लड़ाई-झगड़े को देखकर भी गुस्सा करना सीख जाते हैं. इसके अलावा, पेरेंट्स और फैमिली मेंबर्स का बच्चे के साथ व्यवहार भी बच्चे में गुस्से का कारण बन सकता है.

मानसिक समस्या होने पर

मेंटल हेल्थ इश्यूज भी बच्चे के गुस्से का कारण हो सकते हैं. कुछ बच्चों में डिप्रेशनएंग्जाइटी, ओपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (ओडीडी) व हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर होने पर इमोशंस कंट्रोल करना मुश्किल होता है. नतीजन वे काफी स्ट्रेस और डर में जीने लगते हैं और इस कारण गुस्सा करने लगते हैं.

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अन्य कारण

कई बार बच्चों को बेवजह गुस्सा आने का कारण कोई ट्रॉमा, एक्सीडेंट, पेरेंट्स का अलग होना या घर में बच्चे को प्यार न मिलना हो सकता है. इसके अलावा थकान, बीमारी, भूख, हार्मोंस में बदलाव (प्यूबर्टी चेंजेस), जेनेटिक, माहौल अचानक बदलने, लाइफ में बड़ा बदलाव आने या दूसरे लोअर टॉलरेंस होने पर भी बच्चों को गुस्सा आ सकता है.

बच्चों को गुस्सा कई बातों पर आ सकता है, लेकिन आप बच्चे को क्वालिटी टाइम देकर या गुस्से का कारण जानकर गुस्से को कम करने में मदद कर सकते हैं. आइए, विस्तार से जानें, बच्चों के गुस्से को कम करने के उपायों के बारे में -

  1. कारण जानने की कोशिश करें
  2. एंगर बस्‍टर ट्रिक्‍स
  3. पॉजिटिव रहें
  4. बिहेवियर रिवार्ड दें
  5. डॉक्टर से मिलें

कारण जानने की कोशिश करें

यदि आपके बच्चे को गुस्सा आ रहा है, तो ये जानने का प्रयास करें कि आखिर गुस्सा क्यों आ रहा है. यदि बच्चा आपसे बात नहीं करना चाहता, तो बच्चे की बात उससे करवाएं, जिस पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करता है. इससे बच्चे की परेशानी जानने का मौका मिलेगा और उसी दौरान बच्चे को समझा सकते हैं कि वो गुस्सा करने के बजाय अपनी प्रॉब्लम को कैसे हल कर सकता है.

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एंगर बस्‍टर ट्रिक्‍स

बच्चों के गुस्से को कम करने के लिए कुछ ट्रिक्स को फॉलो किया जा सकता है, जैसे -

  • बच्चे को गुस्सा आए, तो उसके साथ 10 तक काउंट करें. अगर बच्चा बड़ा है, तो बच्चे को गुस्सा आने पर 10 दिन गिनती करने की प्रैक्टिस करवाएं.
  • बच्चें को धीरे और गहरी सांस लेने के लिए कहें.
  • बच्चें को अकेले में जाने के लिए कहें, जहां बच्चा खुद को शांत कर सके.
  • बच्चों को अधिक गुस्सा आने पर जंपिंग जैक्स, रनिंग, शॉर्ट वॉक, साइकिलिंग या अन्य कोई एक्सरसाइज करवाएं.
  • बच्चे को तब तक गले लगाएं रखें, जब तक कि उसका गुस्सा शांत न हो जाए.
  • गुस्सा किस वजह से आया है, उसको नाम दें और उस पर बच्चे के साथ मिलकर ड्राइंग करें.
  • बच्चे को म्यूजिक सुनने के साथ ही गाना गाने के लिए कहें.
  • घर के आसपास तेजी से पांच राउंड मारने के लिए कहें.
  • कुछ एक्टिविटी करें, जैसे - बच्चे को बाइक राइड, वीडियो गेम, स्केटिंग या बास्केटबॉल जैसे गेम्स खिला सकते हैं.
  • गार्डन में जाकर बच्चे से घास तुड़वाएं. बच्चा गुस्से में घास तोड़ेगा कुछ देर में ही उसका गुस्सा शांत हो जाएगा.
  • बच्चे को कोई भी ऐसा गेम, शोज, बुक या फिल्में न दिखाएं या पढ़ाएं, जिसमें हिंसक चीजें हों.

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पॉजिटिव रहें

बच्चे को गुस्सा आने पर आप शांत और पॉजिटिव रहें और आप हंसी-मजाक वाला माहौल बनाने का प्रयास करें. बच्चे को गुस्सा आने पर डिस्ट्रैक्ट करने की कोशिश करें और बच्चे से आई कॉन्टेक्ट करते हुए प्यार से बात करें.

बिहेवियर रिवार्ड दें

बच्चे को शांत करने के लिए रिवार्ड रूल्‍स बनाएं. बच्चे को बताएं कि किन बातों पर गुस्सा करने से उसके रिवार्ड प्वॉटइंट्स माइनस होंगे और कैसे अच्छा बिहेव करने पर उसके प्वॉइंट्स प्‍लस होंगे. इससे बच्चे को गुस्सा कम करने और जल्दी शांत करने में मदद मिल सकती है.

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डॉक्टर से मिलें

जब ऐसा लगे कि बच्चे का गुस्सा दूसरों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें. कई बार बच्चों के लक्षणों के हिसाब से उन्हें मेंटल हेल्थ सर्विस भी दी जाती हैं.

बच्चों को गुस्सा किसी भी बात पर आ सकता है, लेकिन आमतौर पर घर का माहौल या बच्चे की इच्छा पूरी न हो, तो वे गुस्सा कर सकते हैं. कुछ मामलों में मेंटल डिसऑर्डर होने पर भी बच्चे गुस्सा करने लगते हैं. यदि बच्चे के गुस्से को कंट्रोल करना चा‍हते हैं, तो बच्चे के एंगर मैनेजमेंट के लिए योजनाएं बनानी चाहिए और इसके लिए तैयार रहना चाहिए, जैसे - बच्चे से बात करना, दूसरी एक्टिविटीज में इन्वॉल्व करना या गुस्से का कारण जानकर उसे सॉल्व करना इत्यादि. जब बच्चे‍ का गुस्सा आक्रामक या दूसरों को नुकसान पहुंचाने लगे, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए.

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