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तनाव की परेशानी आज ज़्यादातर लोगों को है। तनाव के कई कारण हो सकते हैं जैसे की काम, वित्तीय, व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंधी कारण। इस आम परेशानी से राहत पाने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है। हम यहाँ आपको कुछ ऐसे आसन बताएँगे जो आप रोज़ केवल 10 मिनिट भी करेंगे तो तनाव से आराम महसूस करेंगे।

  1. कैसे तनाव में लाभदायक है योग - How Does Yoga Help with Stress?
  2. बालासन है तनाव का इलाज - Balasana (Child's Pose) for Stress in Hindi
  3. मालासन है तनाव के लिए फायदेमंद - Malasana (Garland Pose) for Stress in Hindi
  4. उत्तानासन है तनाव में लाभदायक - Uttanasana (Standing Forward Bend) for Stress in Hindi
  5. हलासन करेगा तनाव के उपचार में सहायता - Halasana (Plow Pose) for Stress in Hindi
  6. सर्वांगासन करेगा तनाव की ट्रीटमेंट में फायदा - Sarvangasana (Shoulderstand) for Stress in Hindi
  7. शवासन करेगा तनाव की ट्रीटमेंट में फायदा - Shavasana (Corpse Pose) for Stress in Hindi
  8. भ्रामरी प्राणायाम करेगा तनाव की ट्रीटमेंट में फायदा - Bhramari Pranayama for Stress in Hindi
  9. तनाव और वात असंतुलन - Stress and Vaata Imbalance in hindi
  10. तनाव और श्वास - Yoga Breathing for Stress Relief in Hindi
  11. तनाव और प्रत्याहारा - Stress and Pratyahara in Hindi
  12. तनाव को दूर करने का उपाय है जानुशिरासन - Janushirasana good for stress reduction in hindi
  13. तनाव को दूर करने का तरीके है अधोमुख श्वान आसन - Adho mukha svanasana reduce stress in hindi
  14. तनाव कम करने का उपाय सेतुबंधासन - Setu Bandhasana reduce back pain in hindi
  15. तनाव से बचने का उपाय है बद्ध कोणासन - Baddha konasana good for stress in hindi
  16. तनाव से मुक्ति के उपाय है बालासन - Balasana for stress in hindi

शोध से दिखाया गया है कि योग कोर्टिसोल और एड्रेनलिन हॉर्मोन को कम करने में सक्षम है। और यह दोनो मुख्य तनाव हार्मोन हैं जिनकी वजह से आप तनाव महसूस करते हैं। परंतु एक या दो बार योग अभ्यास करना इन हॉर्मोन को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अधिकांश अध्ययन बताते हैं कि हार्मोनल सुधार के लिए प्रति दिन 30 से 60 मिनट, सप्ताह में 3 से 5 दिन नियमित अभ्यास करने से 3 से 6 महीने में आपको तनाव से ज़रूर राहत मिलेगी। हालांकि सभी योग शैलियाँ मदद कर सकती है, हठ योग, प्राणायाम (और पढ़ें: प्राणायाम क्या है और प्राणायाम के प्रकार और लाभ) और ध्यान ख़ास तौर से कारगर हैं।

बालासन में आपके संपूर्ण शरीर को आराम मिलता है। यह ना ही तनाव कम करता है बल्कि थकान मिटाने में भी मदद करता है। बालासन को 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: बालासन करने का तरीका और फायदे)

मालासन नीचे बैठ कर किए जाने वाले आसन में सबसे प्रमुख है। आयुर्वेद के अनुसार, मालासन आपके वात को संतुलित करता है जिस से आपका तनाव का स्तर कम हो जाता है। इस आसन को 1 मिनिट के लिए करें।

उत्तानासन से आपके सिर में रखतप्रवाह बढ़ता है और यह आपके मस्तिष्क को शांत करता है। इस आसन को 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: उत्तानासन करने का तरीका और फायदे)

हलासन तनाव के स्तर को कम करने के लिए ख़ास तौर से लाभदायक है। इस आसन से भी सिर में रखतप्रवाह बढ़ता है और यह आपके दिमाग़ को शांत करता है को भी; 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: हलासन करने का तरीका और फायदे)

सर्वांगासन में आपका शरीर औंधी स्तिति में होता है इस से आपके मस्तिष्क में खून का फ्लो बढ़ जाता है और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। इस आसन को भी 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: सर्वांगासन करने का तरीका और फायदे)

शवासन में आपका शरीर सबसे अधिक आराम की स्तिथि में होता है। इस से अधिक महत्वपूर्ण आसान कोई नहीं है तनाव के स्तर को कम करने के लिए। इस आसन को भी 5-10 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: शवासन करने का तरीका और फायदे)

भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से आप क्रोध, चिंता और निराशा से अवश्य राहत पाएँगे। इसे आप कहीं भी कर सकते हैं - चाहे घर या ही की किसी बाग़ीचे में। इस आसन को भी 5-10 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे

भ्रामरी प्राणायाम की प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएँ और जैसे अभ्यास बढ़ने लगे, इसे और ज़्यादा बार कर सकते हैं।

अधिक तनाव का वास्ता अक्सर आपके "वात" में असंतुलन से होता है। वात आपका "वायु तत्व" होता है। वात मन और शरीर में सभी संचलन को नियंत्रित करता है। यह रक्त प्रवाह, शरीर में सभी गंदगी के उन्मूलन, श्वास और मन में विचारों की आवाजाही नियंत्रित करता है। चूंकि पित्त और कफ वात के बिना नहीं चल सकते, वात को शरीर के तीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों में प्रमुख माना जाता है।

जब वात का स्तर ऊँचा होता है तब आमतौर से मन की दशा राजसिक हो जाती है और आपके विचार आस्थाई हो जाते हैं। वात असंतुलन के विशिष्ट लक्षण अधीरता, चिंता, अनिद्रा, और कब्ज हैं, जो सभी आमतौर से तनाव से जुड़े होते हैं। (और पढ़ें - अनिद्रा के आयुर्वेदिक उपचार)

अधिक वात की स्थिति में योग और श्वास अभ्यास ज़्यादा तीव्र या दमदार नहीं होना चाहिए (जैसे कि कपालभाती)। इस तरह के व्यायाम के बाद वात और ज़्यादा असंतुलित हो सकता है। चाहें आप कोई भी आसन का अभ्यास करें, अभ्यास के अंत में मन और शरीर को शांत करने वाले आसन करना आवश्यक है। अत्यधिक वात को कम करने के लिए आप इन आसनो को कर सकते हैं: मालासन जैसे बैठने वाले मुद्रा, ताड़ासन जैसे खड़े होने वाले मुद्रा जिनमे आपके दोनो पैर ज़मीन पर जमें हों, या की सर्वांगासन और सिरसासन जैसे आसन जिनमे आपका शरीर औंधी स्थिति में होता है।

योग के अलावा आयुर्वेद में भी अधिक वात को काबू करने के सुझाव हैं। जिन लोगों का वात अधिक है, उन्हे नींद और भोजन के एक नियमित समय पर करना चाहिए और जब भी संभव हो, गर्म, पौष्टिक, सात्विक भोजन करना चाहिए। मीठा, खट्टा, या नमकीन भोजन वात को कम करने में फायदेमंद माना जाता है। कैफीन (चाय व कॉफी), निकोटीन (सिगरेट), और अन्य उत्तेजक वात को बढ़ा सकते हैं। (और पढ़ें - आयुर्वेद के तीन दोष वात पित्त और कफ क्या हैं?)

प्राचीन योगियों की शायद सबसे महत्वपूर्ण खोज थी श्वास और मानसिक दशा का संबंध। योग में सदियों से यह ज्ञात है कि छोटी और तीव्र साँसों से विचलित मन का सीधा नाता है। प्रमाण के तौर पर सोचिए जब आप डरे या घबराए हुए होते हैं तब आपकी साँस तेज़ हो जाती है और वह ज़्यादा गहरी भी नहीं होती। अगर आप तनाव महसूस कर रहे हों तो अपने साँस लेने की गति को कम करें और हर साँस को गहरा बनायें।

अगर आप अपने मुँह की जगह केवल अपनी नाक से साँस लें तो कुछ हद तक ऐसा अपने आप होता है। पर अगर आपको इस तरह से श्वास का अभ्यास ना हो तो शुरू में आपको इस पर गौर देकर करना पड़े। उज्जयी श्वास, जिसमें मुखर तार संकुचित किए जाते हैं, में साँस लेने की गति अपने आप ही कम हो जाती है और साँस बहुत गहरी होती है। इसके अतिरिक्‍त उज्जयी श्वास में पैदा की गयी आवाज़ अपने आप में ध्यान पैदा करती है और मन को शांति देती है।

एक सरल तकनीक जो लगभग तत्काल ही तनाव से आराम दे सकती है वो है साँस छोड़ने को साँस लेने की अपेक्षा में लंबा करें। ऐसा करने से आपके तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) में तुरंत ही आपको आराम का एहसास होगा। शुरुआत में आप साँस छोड़ने की गति को साँस लेने की गति से आधा करने का अभ्यास करें। पर ध्यान रखिए की किसी भी स्थिति में आप साँस की कमी ना महसूस करें -- ऐसा होना विपरीत असर ला सकता है। जब आप इस शैली में निपुण हो जायें आप इसे कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं। शुरू में आप दो से पाँच मिनिट करने की कोशिश करें। जब आप की कुशलता बढ़ने लगे तब आप इसे और लंबे समय के लिए कर सकते हैं। (और पढ़ें - प्राणायाम क्या है और प्राणायाम के प्रकार और लाभ

प्रत्याहारा -- यानि बाहरी उत्तेजनाओं पे काबू पाना -- जो कि पतांजलि के अष्टांग योग का पाँचवा अंग है, तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। हमारा ऐसा मानना है कि आधुनिक तनाव का एक बड़ा कारण है लगातार बाहरी उत्तेजनाएँ जैसे की सोशल मीडीया, टैलिविज़न, स्मार्टफ़ोन इत्यादि। अगर आप इन पर काबू पा सकें या कम से कम इनकी मात्रा अपने जीवन में घटा सकें तो आपको तनाव से राहत मिल सकती है। अपने लिए रोज़ कुछ "शांत समय" अवश्य निकालें जब ऐसी कोई भी बाहरी उत्तेजनायें आप तक ना पहुँच सकें। खाना खाते समय टीवी ना देखें, थोड़ी देर फोन को बंद कर दें और केवल अपने साथ समय बितायें।

योग के बताए गये ज्ञान का इस्तेमाल करें: शवासन, प्राणायाम, और ध्यान करने से आपका मन स्थिर होगा और आप तनाव कम महसूस करेंगे। तनाव को कम करने के लिए दिमाग़ को सुन्न करने वाली दवाइयों की तरफ ना दौड़ें!

 

इन बातों का खास तौर से ध्यान रखें:

  1. याद रहे की योगाभ्यास से आराम निरंतर अभ्यास करने के बाद ही मिलता है और धीरे धीरे मिलता है।
  2. योगासन से जोड़ों का दर्द बढे नहीं, इसके लिए अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देने वाली वस्तुओं, तकियों व अन्य उपकरणों की सहायता जैसे ज़रूरी समझें वैसे लें।
  3. अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न दें। अगर दर्द बढ़ जाता है तो तुरंत योगाभ्यास बंद कर दें व चिकित्सक से परामर्श करें।
  4. यह ज़रूर पढ़ें: योग के नियम

जानुशिरासन आपके शरीर की तंग मांसपेशियों को खोलने के लिए बहुत अच्छा आसन है। कुछ सेकंड तक इस आसन को करने से आपके मन को खोलने और तनाव से दूर रखने में मदद मिलती है।

अधोमुख श्वान आसन - इस आसन में अपने शरीर को V-आकार की स्थिति में रखने से आपके आर्म्स और पेट को मजबूती मिलती है। इस आसन को करने से तनाव को दूर करने और अपने आपको अधिक सक्रिय महसूस करने में मदद मिलती है।

सेतुबंधासन आपके कंधों की परेशानी को कम करने में मदद करता है। यह आपके रीढ़ की हड्डियों को लचीला बनता और आपके पीठ और आर्म्स को मजबूत बनाने के साथ साथ छाती, गर्दन, और रीढ़ की हड्डी में खिचाव लता है और मस्तिष्क को शांत करने, तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में मदद करता है। (और पढ़ें – तनाव को दूर करने के लिए जूस)

बद्ध कोणासन को प्रतिदिन करने से पुरानी पीठ दर्द को कम करने में मदद मिलती है। यह आसन आपके कूल्हों को खोलने और पूरे दिन अपने काम के लिए डेस्क पर बैठने के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। यह बद्ध कोणासन हल्के अवसाद, चिंता और थकान को दूर करने में मदद करता है। (और पढ़ें – तनाव को करेगा दूर, कैलोरी को कम करेगा ज़रूर ये साम्बा डांस)

बालासन - इस आसन को करने से संपूर्ण शरीर में खिंचाव पैदा होता है जिसके कारण इस आसन को करने के बाद सम्पूर्ण शरीर में ताजगी का अहसास महसूस होगा। 


तनाव कम करने के लिए योगासन सम्बंधित चित्र

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