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छोटे बच्चों व नवजात शिशुओं में त्वचा संबंधी समस्याएं होने का खतरा काफी अधिक होता है, क्योंकि उनकी त्चचा बहुत कोमल संवेदनशील होती है। छोटे बच्चे के चेहरे पर दाने होना एक आम समस्या है। इस स्थिति में शिशु के चेहरे पर ऐसे दाने व चकत्ते बन जाते हैं, जो एक्जिमा के समान दिखाई देते हैं। शिशु के चेहरे पर दाने यानि बेबी एकने का इलाज संभव है और इससे होने वाले लक्षण भी आमतौर पर कुछ ही समय के लिए होते हैं।

(और पढ़ें - मुंहासे का इलाज)

  1. शिशु के चेहरे पर दाने क्या है - What is Baby Acne
  2. शिशु के चेहरे पर दाने के लक्षण - Baby Acne Symptoms in Hindi
  3. शिशु के चेहरे पर दाने के कारण - Baby Acne Causes in Hindi
  4. शिशु के चेहरे पर दाने होने से बचाव - Prevention of Baby Acne in Hindi
  5. शिशु के चेहरे पर दाने का परीक्षण - Diagnosis of Baby Acne in Hindi
  6. शिशु के चेहरे पर दाने का इलाज - Baby Acne Treatment in Hindi
  7. शिशु के चेहरे पर दाने होने की जटिलताएं - Baby Acne Complications in Hindi
  8. शिशु के चेहरे पर दाने के डॉक्टर

शिशु  के चेहरे पर दाने होना क्या है?

इस स्थिति को "नियोनेटल एकने" या "नियोनेटल सेफेलिक पस्ट्यूलोसिस" के नाम से भी जाना जाता है। यह एक आम समस्या है, जो हर पांच स्वस्थ शिशुओं में से एक या अधिक को हो जाती है। यह शिशु के दो हफ्ते की उम्र में विकसित होने लगते हैं, जिसमें शिशु के माथे, गालों, पलकों और ठोड़ी पर फुन्सी व दाने निकलने लग जाते हैं।

(और पढ़ें - चेहरा लाल होने के लक्षण)

बेबी एकने के क्या लक्षण होते हैं?

वयस्कों व किशोरों की तरह शिशु के चेहरे पर विकसित होने वाले दाने लाल फुन्सी की तरह दिखाई देते हैं। सफेद रंग के दाने या सफेद मुंह वाली फुन्सी भी विकसित हो सकती हैं और इनके आस-पास की त्वचा भी लाल हो सकती है।

शिशुओं के चेहरे पर कहीं भी दाने व फुन्सी विकसित हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये गाल पर देखे जाते हैं। कुछ शिशुओं को गर्दन पर और पीठ के ऊपरी भाग (गर्दन का पिछला हिस्सा) में भी फुन्सी व दाने हो सकते हैं।

यदि शिशु में चिड़चिड़ापन रहता है व वह बार-बार रोता है, तो स्थति और गंभीर हो सकती है। खुरदरे कपड़े का इस्तेमाल करना दानों की स्थिति को और खराब कर सकता है, साथ ही शिशु के मुंह से निकलने वाली लार व उल्टी शिशु के दानों में जाती रहती है और उसे ठीक नहीं होने देती।

बेबी एकने कई बार शिशु को जन्म से ही होते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में शिशु के जन्म लेने के 2 से 4 हफ्तों के बाद विकसित होते हैं। ये दाने आमतौर पर कुछ दिनों से हफ्तों तक रहते हैं, हालांकि कुछ गंभीर मामलों में ये महीनों तक भी रह सकते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

शिशु के चेहरे पर दाने निकलते ही उसे एक बार बच्चों के डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए, ताकि डॉक्टर स्थिति व उसकी गंभीरता का पता लगा सकें।

शिशु के चेहरे पर दाने क्यों होते हैं?

जिस प्रकार से वयस्कों और किशोरों के चेहरे पर होने वाले दाने व फुन्सियों के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है उसी प्रकार बेबी एकने होने के कारणों का पता लगाने के लिए अभी अध्ययन किए जा रहें हैं। कुछ अध्ययनकर्ताओं का मानना है, कि यह स्थिति शिशु के हार्मोन या गर्भावस्था के दौरान मां के हार्मोन में बदलाव के कारण होती है।

बेबी एकने से बचाव कैसे करें?

वैसे तो शिशु के चेहरे पर निकलने वाले दाने आमतौर पर अपने आप ही चले जाते हैं, हालांकि इस दौरान कुछ सामान्य तरीके अपना कर शिशु की त्वचा को स्वस्थ रखा जा सकता है:

  • अपने शिशु के चेहरे को साफ रखें:
    शिशु के चेहरे को गुनगुने पानी में धोएं, ऐसा आप शिशु को नहलाते समय भी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए सिर्फ सादा पानी ही लें या डॉक्टर के द्वारा बताई गई साबुन का इस्तेमाल करें। 
    शिशु की त्वचा पर किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले उसके बारे में डॉक्टर से पूछ लें। क्योंकि कुछ उत्पाद स्थिति को और अधिक बदतर बना सकते हैं।
     
  • अधिक कठोर व शक्तिशाली उत्पादों का इस्तेमाल न करें:
    रेटिनोइड्स, विटामिन ए या एरिथ्रोमाइसिन युक्त प्रोडक्ट का उपयोग आमतौर पर वयस्कों के लिए किया जाता है। इन उत्पादों को छोटे बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये अधिक शक्तिशाली होते हैं जो शिशु की त्वचा को प्रभावित कर सकते हैं।
    शिशु के लिए किसी प्रकार के साबुन या अन्य झागदार प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें केमिकल हो सकते हैं।
     
  • लोशन न लगाएं:
    लोशन शिशु के चेहरे की त्वचा को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे फुन्सी व दाने विकसित होने लग जाते हैं। यदि शिशु के चेहरे पर पहले से ही दाने हैं, तो स्थिति और बदतर हो सकती है।
     
  • रगड़ें नहीं:
    अक्सर शिशु को नहलाने के बाद उसकी त्वचा को तौलिए से रगड़ के साफ किया जाता है, ऐसा नहीं करना चाहिए। शिशु की त्वचा काफी संवेदनशील होती है और तौलिए की रगड़ से प्रभावित होकर इसमें दाने व फुन्सी पैदा हो सकती हैं।
     
  • दानों को दबाएं नहीं:
    यदि शिशु के चेहरे पर दाने निकलने लग गए हैं, तो उन्हें दबाने की कोशिश न करें। ऐसा करने से त्वचा और अधिक क्षतिग्रस्त होने लगती है और दाने अधिक निकलने लगते हैं।

बेबी एकने का परीक्षण कैसे किया जाता है?

शिशु के चेहरे पर होने वाले दानों के लिए कोई विशेष परीक्षण करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। डॉक्टर सामान्य तौर पर शिशु की त्वचा को देख कर ही इस स्थिति का पता लगा लेते हैं। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में स्थिति गंभीर होने पर कुछ प्रकार के स्किन टेस्ट करने पड़ सकते हैं।

शिशु के चेहरे पर दानों का इलाज कैसे किया जाता है?

ज्यादातर मामलों में छोटे बच्चों के चेहरे पर होने वाले दानों का इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, ये कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक होने लग जाते हैं। कुछ शिशुओं को ये दाने हफ्तों की बजाए महीनों तक भी रह सकते हैं। यदि ये दाने अपने आप ठीक ना हो पाएं, तो इन दानों का इलाज करने के लिए बच्चों के डॉक्टर कुछ प्रकार की क्रीम व अन्य मलम आदि दे सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे की त्वचा पर किसी भी प्रकार की क्रीम, मलम या फेस वॉश आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शिशुओं की त्वचा काफी संवेदनशील होती है और इन उत्पादों में मौजूद केमिकल व अन्य पदार्थ शिशुओं की कोमल त्वचा को प्रभावित कर सकते हैं।

जीवन शैली में बदलाव व प्राकृतिक उपचार

यदि आपके शिशु के चेहरे पर दाने हो गए हैं, तो ये टिप्स आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती हैं:

  • शिशु के चेहरे को साफ रखें और रोजाना गुनगुने पानी के साथ धोएं
  • सूती कपड़े के साथ बिने रगड़े उसके चेहरे को सुखाएं
  • दानों व फुन्सियों को फोड़ें या नोचे नहीं, ऐसा करने से खुजली व संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है
  • डॉक्टर से पूछे बिना शिशु के चेहरे पर किसी प्रकार का लोशन या तेल आदि ना लगाएं।

शिशु के चेहरे पर दाने होने से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

बेबी एकने आमतौर पर वैसे तो बिना किसी उपचार के कुछ हफ्तों के अंदर ही ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ मामलों में ये महीनों तक रहते हैं और इनमें खुजली भी होने लगती है, जिस कारण से शिशु का स्वभाव चिड़चिड़ा रहता है।

Dr. Abhishek Mishra

Dr. Abhishek Mishra

डर्माटोलॉजी

Dr. Sheilly Kapoor

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Dr. Ramanjit Singh

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