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अब जब आपका नवजात शिशु 3 सप्ताह का हो गया है तो वह थोड़े बेहतर तरीके से और देर तक दूध पीने की कोशिश करेगा और रोजाना करीब 17 से 18 घंटे की नींद लेगा। साथ ही इस दौरान वह अपने सिर को भी उठाने का प्रयास करेगा और एक तरफ से दूसरी तरफ देखना शुरू कर देगा। दूसरे हफ्ते के अंत तक आते-आते बच्चे की गर्भनाल सूखकर प्राकृतिक रूप से अपने आप ही गिर जाती है। लेकिन अगर यह अब तक न गिरी हो तो उसे जबरन हटाने का प्रयास न करें।

इसका मतलब है कि तीसरे हफ्ते से आपका बच्चा पूरी तरह से नियमित स्नान के लिए तैयार है। हालांकि कुछ बच्चों को पानी में जाकर गीला होना और नहाना बिलकुल पसंद नहीं होता और नहाने के दौरान वह काफी रोते भी हैं। लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं इन सारी समस्याओं को दूर करने का तरीका होता है। 3 सप्ताह का बच्चा अब भी 30 सेंटीमीटर से ज्यादा दूर की चीजें देख नहीं पाता। लेकिन जब आप बच्चे के पास बैठकर हंसेंगी, अलग-अलग हाव-भाव चेहरे पर लाकर बच्चे से बातें करेंगी तो ये सब देखकर बच्चा काफी खुश नजर आएगा।

(और पढ़ें: नहाने के समय बच्चे का रोना- कारण और उपाय)

चूंकि अब आपका बच्चा 3 सप्ताह का हो गया है तो जाहिर सी बात है आपके मन में भी बच्चे के विकास को लेकर कई तरह के सवाल होंगे। ऐसे में इस आर्टिकल के जरिए हमने बच्चे के जन्म के बाद तीसरे सप्ताह से जुड़े कुछ कॉमन सवालों के जवाब देने की कोशिश की है। आगे पढ़ें और जानें कॉलिक यानी उदरशूल से पीड़ित नवजात शिशु के बारे में, 3 सप्ताह का बच्चा कितना दूध पीता है, बच्चे को नहलाना कैसे है, बच्चे की पॉटी से जुड़े सवाल आदि।

  1. मेरा 3 सप्ताह का शिशु बहुत ज्यादा रोता है, इसकी वजह क्या है? - mera baby bahut rota hai kya karu?
  2. मेरे 3 सप्ताह के बच्चे को नहाना पसंद नहीं, क्या करूं? - mere shishu ko nahana pasand nhi?
  3. क्या बच्चे को हर दिन नहलाना जरूरी है? - navjat shishu ko har din nahlana jaruri hai kya?
  4. अक्सर अपने बच्चे के साथ-साथ मैं भी सो जाती हूं, इस आदत को कैसे बदलूं? - bacche ke sath mai bhi so jati hoon, kya karoon?
  5. क्या बच्चे को अपने हाथों में सुलाना ठीक है? - shishu ko apne arms me sulana thik hai kya?
  6. क्या 3 सप्ताह के बच्चे को चुसनी (पैसिफायर) दे सकते हैं? - kya 3 week ke shishu ko chusni de sakte hain?
  7. 3 सप्ताह का बच्चा कितनी फीड लेता है? - 3 week ka shishu kitna feed leta hai?
  8. क्या 3 सप्ताह का बच्चा हर दिन पॉटी करता है? - kya 3 week ka baby har din potty karta hai?
  9. बच्चे को सुलाने या शांत करने के लिए क्या उसे हिलाना सही है? - kya baby ko hilana chahiye?
  10. क्या बच्चे को नहलाते वक्त बेबी प्रॉडक्ट्स इस्तेमाल करना चाहिए? - baby products use karna sahi hai kya?
  11. जन्म के तीसरे हफ्ते में कैसे हो रहा है आपके शिशु का विकास, इससे जुड़े सभी सवाल और उनके जवाब के डॉक्टर

अगर आपका शिशु बिना किसी वजह के ज्यादातर दिनों में 3 घंटा या इससे ज्यादा समय तक रोता रहता है और वह भी खासकर शाम के समय तो इसका मतलब है कि आपके बच्चे को कॉलिक यानी उदरशूल (पेट में दर्द) की समस्या है। किसी बच्चे को कॉलिकी बेबी तब कहा जाता है जब वह बाकी पैमानों के आधार पर तो स्वस्थ रहता है, अच्छे से दूध पीता है, सूसू-पॉटी भी नहीं करने के बावजूद हफ्ते में 3 दिन या ज्यादा समय तक रोजाना 3 घंटे तक रोता रहता है और ऐसा करीब 3 सप्ताह तक होता है।

(और पढ़ें: जन्म के 24 घंटे में क्यों रोता है नवजात शिशु)

ऐसे बच्चे को संभालना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि कॉलिक की समस्या आमतौर पर जब बच्चा 3 महीने का होता है तब तक खुद ब खुद ठीक हो जाती है। इस दौरान कुछ चीजें हैं जिनके जरिए आप बच्चे के रोने के कुछ कम करने की कोशिश कर सकते हैं:

  • बच्चे को शांत करने और आराम दिलाने के लिए शाम के समय बच्चे को हल्का मसाज दें या गुनगुने पानी से नहलाएं।
  • अगर आप बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं और बच्चे के पेट में गैस की समस्या हो रही है तो आपको अपनी डायट और खानपान में बदलावे् करने की जरूरत है।
  • दूसरों की बात सुनकर बच्चे को ग्राइप वाटर न दें क्योंकि इससे बच्चे को फायदा नहीं नुकसान ही होगा।

परेशान होने की जरूरत नहीं ज्यादातर बच्चों को अपनी स्किन पर ठंडा हवा महसूस करना अच्छा नहीं लगता। आप चाहें तो इन स्टेप्स को फॉलो कर अपने बच्चे के लिए बाथटाइम यानी नहाने के समय को मस्ती से भरपूर बना सकती हैं:

  • नहाने के लिए बच्चे के कपड़े उतारने से पहले ही उसकी सभी चीजों की तैयारी करके रखें। इसके लिए गर्म रूम में नहाने की व्यवस्था करें, जरूरी नहीं कि आप बच्चे को बाथरूम में ही नहलाएं। पानी को कम से कम 37-38 डिग्री तक गर्म करें, बच्चे का तौलिया और कपड़े पहले ही निकाल कर रखें।
  • बच्चे के बाथटब में करीब 2 इंच तक पानी भरें। बच्चे के बाथटब में अपनी कोहनी डालकर चेक कर लें कि पानी का तापमान सही है या नहीं। उसके बाद बच्चे को बाथटब में डालें और वह भी पहले उसका पैर और उसके बाद बाकी शरीर।
  • अपने एक हाथ से बच्चे के सिर, गर्दन और पीठ को सपोर्ट दें और दूसरे हाथ से बच्चे के शरीर पर पानी डालकर उसे नहलाएं।
  • नहाने के समय को जितना संभव हो छोटा रखें। अगर बच्चे को पानी से डर लग रहा हो तो उसके ऊपर पानी के छींटे न डालें और बच्चे के सामने नल न खोलें जिससे पानी की तेज आवाज आती हो।
  • बाथटब से बाहर निकालते ही बच्चे को किसी सॉफ्ट तौलिए में अच्छी तरह से लपेट लें।
  • नहलाने के दौरान बच्चे को 1 सेकंड के लिए भी अकेला न छोड़ें।

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3 सप्ताह का बच्चा आमतौर पर इतना ज्यादा गंदा नहीं होता। इसलिए आप चाहें तो बच्चे को सप्ताह में 2 से 3 बार नहला सकती हैं। अगर आप नियमित रूप से बच्चे का डायपर बदल रही हैं और इस दौरान उसकी अच्छे से सफाई कर रही हैं या दूध पिलाने के दौरान अगर बच्चा कोई दूध मुंह से निकाल रहा है तो उसकी भी अच्छे से सफाई कर रही हैं तो आप बच्चे को हफ्ते में एक बार भी नहला सकती हैं।

बच्चे को अपने साथ अपने बेड पर सुलाना या फिर ड्रॉइंग रूम के सोफा पर बच्चे के साथ सो जाने को ही को-स्लीपिंग कहते हैं। इस आदत का सबसे बड़ा खतरा है बच्चे का दब जाना जिससे सडेन इंफेंट डेथ सिंड्रोम यानी आकस्मिक नवजात मृत्यु सिंड्रोम (sids) का खतरा रहता है। इसलिए आपका चिंतित होना जायज है।

अगर आपको लग रहा है कि बच्चे को सुलाने के दौरान आप अपनी आंखें खुली नहीं रख पा रही हैं खासकर ब्रेस्टफीडिंग के दौरान तो परेशान न हों। याद रखें कि इस दौरान आपके शरीर में भी कई तरह के बदलाव आए हैं। बच्चे के जन्म का तीसरा हफ्ता आते-आते करीब 80 प्रतिशत नई मांएं भी बेबी ब्लूज से गुजरती हैं। इसलिए परेशान होने की बजाए अपने जीवनसाथी, पार्टनर या परिवार के सदस्यों से मदद लें।

  • जब आप बच्चे को दूध पिला रही हों तो उन्हें अपने पास बिठाकर रखें। अक्सर मांएं और बच्चा, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सो जाते हैं लेकिन यह खतरनाक हो सकता है। बच्चे को दूध पिलाने के बाद डकार दिलवाना न भूलें। अगर बच्चा दूध पीते-पीते सो गया हो तब भी उसे डकार दिलवाने के बाद ही सुलाएं।
  • जब आप बहुत ज्यादा थक गई हों और आराम की जरूरत महसूस हो रही हो तो मदद मांगें। आप चाहें तो बच्चे से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां जैसे बच्चे को तेल लगाना, नहलाना, इन्हें आप ऐसे लोगों को दे सकती हैं जिनपर आप पूरा भरोसा करती हों जैसे- आपके जीवनसाथी या बच्चे की दादी-नानी आदि।
  • बच्चे को अपने साथ अपने बिस्तर पर सुलाने की बजाए बच्चे का पालना, झूला या बिस्तर अपने ही कमरे में अपने बिस्तर के बिलकुल बगल में लगाएं ताकि आप बच्चे को वहीं पर आसानी से सुला पाएं।
  • आप चाहें तो बच्चे को दूध पिलाने के लिए बिस्तर पर बैठने की बजाए किसी सीधी कुर्सी पर बैठकर पिला सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप कंफर्टेबल पोजिशन में होती हैं तो आपको ज्यादा नींद आती है

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जब बच्चा बहुत छोटा होता है तो अक्सर ऐसा होता है कि वह आपके हाथों में ही सो जाता है लेकिन अच्छी प्रैक्टिस यही होगी कि जब बच्चा नींद में होने लगे, ऊंघाई लेने लगे तो आप बच्चे को उसके बिस्तर में डाल दें। ऐसा करने से बच्चा खुद-ब-खुद नींद लेना और सोना सीख जाएगा। साथ ही अगर बीच रात में उसकी नींद खुलती भी है तो वह दोबारा खुद से नींद लेना सीख लेगा। एक्सपर्ट्स भी यही कहते हैं कि 2 हफ्ते के बाद बच्चे के लिए एक बेडटाइम रूटीन बनाएं और उसे हर दिन फॉलो करें।

(और पढ़ें: शिशु को सुलाने के टिप्स ताकि वह रातभर पूरी नींद ले सके)

जब आपका बच्चा 3 से 4 सप्ताह का हो जाए उसके बाद ही आपको उसे चुसनी (पैसिफायर) देना चाहिए। बच्चे को चुसनी देने के फायदे भी हैं और नुकसान भी। फायदों की बात करें तो, चुसनी देने से बच्चे को आराम मिलता है और वह शांत हो जाता है। शोध में यह बात भी सामने आयी है कि चुसनी के इस्तेमाल से बच्चों में SIDS (आकस्मिक नवजात मृत्यु सिंड्रोम) का खतरा कम हो जाता है। नुकसान की बात करें तो चुसनी के इस्तेमाल से कुछ बच्चों में ब्रेस्टफीडिंग करना कम हो जाता है और कुछ बच्चों में कान में इंफेक्शन का भी खतरा रहता है।

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अगर आप किसी भी कारण से कुछ दिनों बाद ब्रेस्टफीडिंग रोकने के बारे में सोच रही हैं तो आप अपने 3 सप्ताह के शिशु को बॉटल की आदत लगाना शुरू कर सकती हैं। अगर संभव तो ब्रेस्टफीडिंग अचानक बंद करने की बजाए धीरे-धीरे कम करें। याद रखें कि ब्रेस्टफीडिंग का सबसे बड़ा फायदा ये है कि मां का दूध पीते वक्त बच्चे को मां के साथ नजदीकी और सुरक्षा महसूस होती है।

अगर आप बच्चे को अपना दूध पिला रही हैं तो बच्चे को उसकी मांग के हिसाब से ब्रेस्टफीडिंग करवाएं। 3 सप्ताह आते-आते आपका बच्चा कुछ ज्यादा देर तक दूध पीना शुरू कर देगा। साथ ही आपके ब्रेस्ट में भी हाइन्डमिल्क बनना शुरू हो जाएगा जो फैट से भरपूर होता है और आपके बच्चे के विकास में उछाल लाने में मदद करता है। ध्यान रखें कि दूध पीने के दौरान आपका शिशु एक ब्रेस्ट को पूरी तरह से खाली करने के बाद ही दूसरे ब्रेस्ट से दूध पिए।

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अगर आप ब्रेस्ट मिल्क को पंप करने के निकालती हैं तो दूध को किसी ठंडी जगह पर अच्छे से स्टोर करके रखें और ब्रेस्टमिल्क को दोबारा रीयूज न करें। अगर आप बच्चे को सिर्फ डिब्बे वाला फॉर्मूला मिल्क पिलाती हैं तो आपको बच्चे के शरीर के वजन के हिसाब से 2.5 आउंस दूध पर पाउंड देना चाहिए। रोजाना बच्चे को करीब 32 आउंस दूध पिलाएं या फिर बच्चे की जरूरत के हिसाब से उसे दूध पिलाएं। हर बार दूध पिलाने के बाद बच्चे के मुंह को साफ करना न भूलें।

जब तक नवजात शिशु 6 सप्ताह का न हो जाए तब तक वह रोजाना कम से कम 3 बार पॉटी करता है। हालांकि यह सभी बच्चों के लिए एक जैसा नहीं होता। आमतौर पर मां का दूध पीने वाले बच्चों की पॉटी सॉफ्ट और पीले रंग की होती है और बॉटल का फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चों की पॉटी भूरे रंग की होती है।

(और पढ़ें: सेहत का हाल बताती है नवजात शिशु की पॉटी)

इसमें कोई शक नहीं कि बच्चों को मूवमेंट यानी गतिविधि अच्छी लगती है। आप चाहें तो बच्चे को हिला सकते हैं या कपड़े में बांधकर रख सकते हैं जैसा भी बच्चे को पसंद हो। लेकिन जहां तक संभव हो सभी मूवमेंट्स को बिस्तर पर ही करें ताकि भविष्य में आपको किसी तरह की दिक्कत न हो।

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एक्सपर्ट्स की मानें तो बेबी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करना सही नहीं है इसलिए आप इसे यूज ना ही करें तो बेहतर होगा। लेकिन अगर आप फिर भी इस्तेमाल करना चाहते हों तो बेहद सौम्य बेबी सोप यूज कर सकते हैं। साथ ही बच्चे के नहाने के पानी में थोड़ा ऑलिव ऑइल छिड़क सकते हैं। इससे बच्चे की स्किन में नमी बनी रहेगी। वयस्कों के नहाने के प्रॉडक्ट्स बच्चों के लिए भूल से भी यूज न करें।

Dr. Yeeshu Singh Sudan

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पीडियाट्रिक

Dr. Veena Raghunathan

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पीडियाट्रिक

Dr. Sunit Chandra Singhi

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