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नवजात शिशु अपनी किसी भी जरूरत के लिए रोना शुरू कर देते हैं। मां शिशु के रोते ही पहचान जाती है कि उसको भूख लगी है या उसको सोना है। शिशु का रोना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही तरह से खाने और पूरी नींद लेने के बाद भी आपके शिशु का लगातार रोना चिंता का विषय हो सकता है। इस तरह का व्यवहार किसी अन्य तरह की परेशानी जैसे कोलिक या दांत निकलने का भी संकेत हो सकता है।

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इस तरह की समस्या तीन सप्ताह से लेकर तीन माह तक के शिशु को हो सकती है। अधिकतर माता-पिता शिशु के पेट में समस्या का कारण कोलिक और गैस को ही मानते हैं। शिशु की इस परेशानी के उपाय में माता-पिता कई वर्षों से ग्राइप वाटर का ही प्रयोग करते आए हैं। लेकिन कई लोगों को यह मालूम ही नहीं होता कि ग्राइप वाटर होता क्या है? इसके अलावा कई माता-पिता के मन में यह भी सवाल आता है कि क्या ग्राइप वाटर के इस्तेमाल से होने शिशु को फायदा होगा।

आप सभी लोगों की इस परेशानी को दूर करने के लिए इस लेख में आपको ग्राइप वाटर के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही इसमें आपको ग्राइप वाटर क्या है और कैसे बनता है, ग्राइप वाटर के फायदे, ग्राइप वाटर शिशु को कैसे दें, ग्राइप वाटर कब देना चाहिए और ग्राइप वाटर के नुकसान के बारे में भी विस्तार से बताया गया है।

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  1. ग्राइप वाटर क्या है - Gripe water kya hai
  2. ग्राइप वाटर के फायदे और क्यों इस्तेमाल करें - Gripe water ke fayde
  3. ग्राइप वाटर कब देना चाहिए - Gripe water kab dena chahiye
  4. ग्राइप वाटर शिशु को कैसे दें - Gripe water shishu ko kaise de
  5. ग्राइप वाटर के नुकसान - Gripe water ke nuksan
  6. ग्राइप वाटर के विकल्प - Gripe water ke vikalp
  7. ग्राइप वाटर के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

शिशु में कोलिक लक्षणों को दूर करने के लिए कई तरह के प्रोडक्ट (उत्पाद) बाजार में मिलते हैं। माता-पिता इन उत्पादों में मौजूद सामग्री के प्रति चिंतित होना स्वाभाविक है। शिशु के कोलिक और गैस की समस्या में आप सुरक्षित तरीके को ही अपनाना पसंद करते हैं। 

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शिशु के पेट फूलने, कोलिक, अपच, हिचकी आने और दांत निकलने में होने वाले दर्द को कम करने के लिए ग्राइप वाटर का इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में ग्राइप वाटर की विभिन्न किस्में उपलब्ध हैं, और उनमें विभिन्न जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है। लेकिन अधिकतर ग्राइप वाटर में निम्न जड़ी बुटियों का उपयोग किया जाता है।

बाजार में मिलने वाले ग्राइप वाटर का उपयोग करने से पहले माता-पिता को इसमें मौजूद निम्न तरह की सामग्रियों को भी जांचना बेहद आवश्यक है। आपको कुछ सामग्रियों से बचना चाहिए जैसे सुक्रोज, डेयरी उत्पाद, ​शराब और लस युक्त खाद्य पदार्थ जैसे गेहूं

डेयरी उत्पाद और गेहूं शिशु के पेट को खराब करने का कारण हो सकते हैं। इसके अलावा सुक्रोज शिशु के दांतों में सड़न और शराब शिशु के विकास में समस्या उत्पन्न करने का कारण बन सकते हैं।

ग्राइप वाटर को सप्लीमेंट के रूप में जाना जाता है, इसको दवा मानना गलत है। कई विदेशी खाद्य और औषधि संगठन इसको प्रमाणित नहीं करते हैं।

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ग्राइप वाटर को इस्तेमाल करने के कई फायदे होते हैं। इससे होने वाले फायदों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

  • ग्राइप वाटर को शिशुओं में कोलिक, पाचन संबंधी परेशानियों और हिचकी की समस्या को ठीक करने के लिए उपयोग किया जाता है। (और पढ़ें - बार बार हिचकी आने पर क्या करें)
     
  • दांत निकलते समय भी शिशु बेहद परेशान रहते हैं और ज्यादा रोते हैं। इस दौरान होने वाली परेशानी से राहत देने के लिए भी शिशु को ग्राइप वाटर दिया जाता है। (और पढ़ें - बच्चे के दाँत निकलते समय होने वाले दर्द का घरेलू इलाज)
     
  • इतना ही नहीं जिन शिशुओं को पेट फूलने और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी समस्याएं जैसे एसिडिटी होती हैं उनको भी ग्राइप वाटर दिया जाता है। (और पढ़ें - एसिडिटी के घरेलू उपाय)
     
  • कई बार ज्यादा रोने की वजह से भी शिशु के पेट में अधिक हवा चली जाती है, जो बाद में उनके पेट फूलने का कारण बनती है। ऐसे में ग्राइप वाटर शिशु को पेट फूलने से राहत प्रदान करता है। (और पढ़ें - नवजात शिशु को कफ होने पर क्या करें)
     
  • एसिड रिफ्लक्स, अपच या पेट फूलने के कारण जब डायाफ्राम में किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो इससे शिशु को हिचकियां आने लगती है और वह काफी परेशान हो जाता है। ऐसे में ग्राइप वाटर डायफ्राम को शांत करता है और हिचकी में शिशु को राहत प्रदान करता है।

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ग्राइप वाटर को बनाने वाली कंपनियां कहती हैं कि इसको दो सप्ताह से अधिक आयु के शिशु को दिया जा सकता है। लेकिन, इसको एक माह से कम आयु के शिशु को देने के सलाह नहीं दी जाती हैं, क्योंकि इतनी कम आयु में शिशु का पाचन तंत्र सही तरह से विकसित नहीं हो पाता है और वह बेहद ही संवेदनशील होता है। जो लोग छह माह तक शिशु को मां का दूध और पाउडर वाले दूध (बच्चों को दिए जाना वाला) के अलावा अन्य किसी चीज को न देने की सलाह देते हैं, वह भी ग्राइप वाटर शिशु को देना उचित नहीं मानते हैं।

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जब शिशु में कोलिक, अपच और पेट फूलने आदि के लक्षणों में किसी भी अन्य तरह से राहत न प्रदान की जा सके तब शिशु को ग्राइप वाटर दिया जा सकता है। शिशु का पेट खाली होने पर आप उसे ग्राइप वाटर न दें, क्योंकि ग्राइप वाटर में मौजूद आल्कलाइन (क्षारीय) सोडियम बाईकर्बोनेट से शिशु के पेट की संवेदनशील परत पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। शिशु को ग्राइप वाटर देने से पहले आपको अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। 

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शिशु को ग्राइप वाटर देने से पहले इसे अपने डॉक्टर से चेक करवा लें। इसके साथ ही माता-पिता को स्वयं ग्राइप वाटर की बोतल पर लिखें सभी निर्देशों को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए। इसके निर्देशों में शिशु को ग्राइप वाटर देने की मात्रा के बारे में पूरी जानकारी दी गई होती है।

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शिशु के दूध पीने या खाने के करीब दस मिनट बाद आप उसे ग्राइप वाटर दे सकती हैं। इसको ड्रोपर या किसी चम्मच की सहायता से शिशु को दिया जा सकता है। इसका स्वाद अधिकांश शिशु को पंसद आता है और वह इसे पीने में किसी भी तरह की कोई आनाकानी नहीं करते हैं। आमतौर पर शिशु को दिन में एक बार ही ग्राइप वाटर दिया जाता है, लेकिन शिशु को ग्राइप वाटर देने की सही मात्रा डॉक्टर ही बताते हैं, इसीलिए डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही शिशु को ग्राइप वाटर देना चाहिए।

क्या ग्राइप वाटर को पाउडर वाले दूध के साथ दिया जा सकता है?

कई माता-पिता अपने शिशु को दिए जाने वाले पाउडर के दूध को तैयार करते समय उसमें ग्राइप वाटर को मिलाते हैं। लेकिन आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि पाउडर वाले दूध के साथ किसी भी मात्रा में ग्राइप वाटर मिलाना शिशु के लिए सही नहीं माना जाता है।

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ग्राइप वाटर को बनाने वाली कंपनियां भी इसके साथ पाउडर वाले दूध को न मिलाने की सलाह देती हैं, क्योंकि इससे गंभीर कैमिकल रिएक्शन होने की संभावनाएं होती हैं।

इसके अलावा शिशु के पाउडर वाले दूध के साथ ग्राइप वाटर मिलाने से, उनको दिये जाने वाले दूध का स्वाद बदल जाता है और ऐसा करने से आपका शिशु हर बार खाने के लिए इसी मिक्सर की मांग कर सकता है।

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ग्राइप वाटर आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, लेकिन शिशु को देते समय आपको इससे होने वाली संभावित एलर्जी के संकेतों पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इससे होने वाली एलर्जी के संकेत भिन्न हो सकते हैं। ग्राइप वाटर देने के बाद शिशु के शरीर में निम्न तरह के लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

कई बार आपके शिशु को ग्राइप वाटर के किसी निश्चित उत्पाद से एलर्जी हो सकती है। ऐसा उस उत्पाद में मौजूद सामग्रियों के कारण भी हो सकता है। अगर ऐसा हो तो आपको एलर्जी वाले ग्राइप वाटर को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और शिशु के शरीर में किसी भी तरह के एलर्जी के संकेत दिखाई देने पर तुरंत अपने डॉक्टर से इस विषय में बात करनी चाहिए।

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विशेषज्ञ शिशु को ग्राइप वाटर देना सही नहीं मानते हैं। इसकी जगह विशेषज्ञ शिशु को आराम देने वाले अन्य विकल्पों को अपनाने की सलाह देते हैं। ग्राइप वाटर के विकल्पों को नीचे बताया गया है:

  • शिशु को शरीर को सही तरह से ढककर रखना। (और पढ़ें - बच्चों में भूख ना लगने का आयुर्वेदिक समाधान)
  • शिशु को गैस होने पर अपने हाथों को हल्के हाथों से उसके पेट पर गोलकार करते हुए रगड़े। इससे गैस बाहर आने में मदद मिलती है।
  • शिशु का ध्यान पेट दर्द से हटाकर कहीं ओर लगाएं। (और पढ़ें - नवजात शिशु के पेट दर्द का इलाज)
  • स्तनपान कराने वाली मां को अपने आहार में इस तरह के खाद्य पदार्थों जैसे – मसालेदार भोजन, डेयरी उत्पाद और अन्य सब्जियों को शामिल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु के पेट में गैस बनती है। (और पढ़ें - बच्चे की मालिश कैसे करें)
  • अगर आप शिशु को पाउडर वाला दूध दे रहीं हैं तो उसको अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही बदलें।  
  • अगर शिशु को ज्यादा परेशानी हो रही हो तो उसको अपनी पीठ के सहारे गोद में ले लें और उसकी पीठ को हल्के हाथों से थपथपाएं, इससे शिशु को आसानी से डकार आ जाएगी और उसे राहत मिलेगी। (और पढ़ें - खट्टी डकार का इलाज)

अगर शिशु को कोलिक की समस्या हो तो ऐसे में माता-पिता को ज्यादा घबराना नहीं चाहिए। आमतौर पर शिशु के 3 से 4 माह का होते ही कोलिक की समस्या अपने आप ही ठीक हो जाती है।

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