कोविड-19 बीमारी की वजह बना नया कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 हृदय को अलग-अलग प्रकार से क्षतिग्रस्त करता है। वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित उन लोगों के अनुभवों के आधार पर यह जानकारी दी है, जिन्हें इस बीमारी के चलते अलग-अलग हर्ट इंजरी का सामना करना पड़ा है। इनमें ब्लड क्लॉटिंग और कार्डियक अरेस्ट जैसी जानलेवा कंडीशन भी शामिल हैं। इन जानकारियों के आधार पर किए अध्ययन के हवाले से वैज्ञानिकों ने कहा है कि इससे इन जानलेवा कंडीशन्स के खतरे वाले कोरोना मरीजों की निगरानी करने में मदद मिल सकती है।

इस स्टडी को जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी नामक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक, हृदय से जुड़ी इन विषमताओं का अस्पताल में भर्ती होने वाले कोविड-19 मरीजों की मौत के हाई रिस्क से संबंध है। अध्ययन में शामिल माउंट सिनाई अस्पताल (अमेरिका) के शोधकर्ताओं ने कहा है कि इन तथ्यों के सामने आने के बाद डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नए कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में कार्डियक इंजरी किस प्रकार होती है, इनका तुरंत आइडेंटिफिकेशन कैसै किया जाए और भावी इलाज से जुड़ी गाइडेंस किस तरह बनाई जाएं।

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अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इकोकार्डियोग्राम इंस्ट्रमेंट की मदद से कोविड-19 के मरीजों में कार्डियक स्कैन संबंधी विषमताओं के मिश्रण के साथ प्रोटीन ट्रोपोनिन के लेवल का पता किया। हृदय की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने पर इस प्रोटीन को रिलीज करती हैं। इस बारे में माउंट सिनाई अस्पताल के डॉक्टर और अध्ययन के लेखक जेनेरो गियुस्तिनो कहते हैं, 'यह उन प्राथमिक अध्ययनों में से एक है, जिनमें अस्पताल में भर्ती कोविड-19 मरीजों का इकोकार्डियोग्राफिक और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफिक डेटा और उनकी मायोकार्डियल इंजरी की जानकारी मुहैया कराए गए हैं। हमने पाया है कि कोविड-19 के जिन मरीजों की ट्रांसथॉरैकिक इकोकार्डियोग्राफी हुई थी, उनमें से दो-तिहाई के हृदय में अलग-अलग प्रकार की ढांचागत विषमताएं पाई गई हैं।'

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च से मई महीने के बीच माउंट सिनाई और इटली के दो अस्पतालों में कोविड-19 के 305 वयस्क मरीजों की हार्ट स्कैनिंग का आंकलन किया था। इन मरीजों की औसत उम्र 63 वर्ष थी, जिनमें से 67.2 प्रतिशत पुरुष थे। शोधकर्ताओं को पता चला है कि इन 305 मरीजों में से 190 में हार्ट डैमेज के सबूत मिले हैं। इनमें से 118 मरीजों के हृदय को अस्पताल में भर्ती होते समय क्षति हुई थी। बाकी 72 मरीजों में कार्डियक इंजरी अस्पताल में रहने के दौरान डेवलेप हुई। वैज्ञानिकों ने नोटिस किया है कि मायोकार्डियल इंजरी वाले मरीजों की हृदय जांच में विषमताएं ज्यादा होती हैं। उन्होंने बताया कि हार्ट इंजरी के अलग-अलग प्रकार के लक्षणों वाले कुछ कोविड मरीजों में ये विषमताएं विविध प्रकार की थीं।

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अध्ययन के मुताबिक, 26.3 प्रतिशत मरीजों के हृदय के दाएं वेंट्रीकल चेंबर में खराबी आ गई थी। वहीं, 23.7 प्रतिशत मरीजों के बाएं वेंट्रीक्यूलर वॉल में विषमताएं देखी गई हैं। इन दोनों कंडीशन का संबंध हार्ट अटैक से बताया जाता है। इसके अलावा, 18.4 प्रतिशत मरीजों की हृदय संबंधी विषमताएं उसमें पैदा हुई इन्फ्लेमेशन और क्षति से जुड़ी हो सकती हैं। इतना ही नहीं, 13.2 प्रतिशत मरीजों में ग्रेड 2 और ग्रेड 3 लेवल के डायस्टॉलिक डिसफंक्शन का भी पता चला है। बाकी 7.2 प्रतिशथ मरीजों के हृदय के आसपास अतिरिक्त तरल पदार्थ की मौजूदगी पाई गई है, जिससे हृदय असामान्य रूप से पंपिंग करने लगता है।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19: हृदय को कई प्रकार से क्षतिग्रस्त करता है कोरोना वायरस, वैज्ञानिकों ने अलग-अलग हार्ट इंजरी का पता लगाने का दावा किया है

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