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ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम (बीएचएस) या ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी हृदय से संबंधित एक अस्थायी स्थिति है जो कि तनाव, किसी बीमारी, सर्जरी और कुछ गंभीर मामलों में किसी बड़ी खुशखबरी के मिलने पर हो सकती है। इससे जुड़े शोधों में पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को बीएचएस का खतरा अधिक रहता है। इस सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति को हार्ट अटैक की तरह अचानक से सीने में दर्द उठता है। इसी वजह से, कभी-कभी ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को हार्ट अटैक समझ लिया जाता है।

हालांकि, हार्ट अटैक के विपरीत बीएचएस में कुछ समय के लिए हृदय के एक छोटे हिस्से के खून पंप करने के कार्य में बाधा आती है, जबकि हृदय के बाकी कार्य सामान्य रूप से सुचारु रहते हैं। अमूमन देखा गया है कि ज्यादातर लोग बीएचएस से जल्दी रिकवर कर लेते हैं।

बीएचएस के लक्षण 

बीएचएस के लक्षणों में सीने में दर्द व सांस लेने में तकलीफ होना शामिल है लेकिन इन लक्षणों को ठीक किया जा सकता है। आमतौर पर यह स्थिति हफ्तों या कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाती है। यहां तक कि बीएचएस से ग्रस्त व्यक्ति जल्दी रिकवर कर लेते हैं, इसकी वजह से मृत्यु होने के मामले बहुत ही कम सामने आते हैं लेकिन इसमें हार्ट फेल होने का खतरा 20 फीसदी रहता है। इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं एवं शरीर के बाकी हिस्सों में खून पंप करने की क्षमता खो सकती हैं।

अच्छी या बुरी खबर से हो सकता है बीएचएस 

बीएचएस की समस्या निम्न स्थितियों में पैदा होती है:

किसी प्रियजन की मृत्यु की खबर या अन्य कोई दुखद समाचार (जैसे अचानक से कैंसर होने का पता चलना), बहस, घरेलू हिंसा, अचानक से बीपी कम होना, गहरा सदमा या ऐसा कुछ होना जिसके कारण व्यक्ति अत्यधिक तनाव में आ जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन परिस्थितियों में स्ट्रेस हार्मोन का बढ़ना रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है।

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चूंकि, इसके लक्षण हार्ट अटैक से मिलते-जुलते होते हैं इसलिए अक्सर लोग ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को हार्ट अटैक समझ बैठते हैं। हालांकि, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में धमनियों में अवरोध आने का कोई प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।
एक हृदय रोग विशेषज्ञ और एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर में चिकित्सीय एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हार्मनी रेनॉल्ड्स के अनुसार, शारीरिक तनाव जैसे मैराथन में दौड़ना या फिर भावनात्मक तनाव जैसे कोई बुरी खबर मिलना, इस सिंड्रोम का कारण बन सकते हैं।

कौन होता है ज्यादा प्रभावित

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम की संभावना अधिक होती है, विशेषकर ऐसी महिलाएं जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है। इस उम्र में महिलाओं में एस्ट्रोजन (महिलाओं में सेक्स हार्मोन) का स्तर कम होने लगता है इसलिए इसे महिलाओं में ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का कारण माना जा सकता है लेकिन इस बात पर डॉक्टर सहमत नहीं हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कुछ लोगों को यह सिंड्रोम जीन के कारण भी हो सकता है।

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इसमें कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन फिर भी जो लोग ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में दिल को लगने वाले पहले झटके को झेल जाते हैं, उन्हें ठीक होने में 4 से 8 सप्ताह का समय लगता है।

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