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वायरल हेपेटाइटिस एक ऐसा इंफेक्शन है जो लिवर में सूजन और जलन उत्पन्न करके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हेपेटाइटिस बीमारी कई अलग-अलग वायरस के कारण होती है जिसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के मुताबिक, दुनियाभार में ऐसे लाखों लोग हैं जो हेपेटाइटिस बी या सी बीमारी के साथ जी रहे हैं- ये दोनों क्रॉनिक यानी दीर्घकालिक हेपेटाइटिस के सबसे सामान्य कारणों में से हैं।

बावजूद इसके, हेपेटाइटिस वायरस के संचरण (ट्रांसमिशन) को लेकर लोगों के मन में ऐसे कई मिथक हैं। वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे के मौके पर आइए हम आपको हेपेटाइटिस के बारे में फैली इनमें से सबसे कॉमन मिथकों की सच्चाई आपको बताते हैं:

(और पढ़ें: हेपेटाइटिस की आयुर्वेदिक दवा और इलाज)

मिथक1: हेपेटाइटिस के सभी वायरस एक जैसे होते हैं और एक ही तरह से फैलते हैं
हकीकत:
हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस अलग हैं और इनके संचरन यानी ट्रांसमिशन का तरीका भी अलग-अलग है। हेपेटाइटिस ए और ई वायरस खाना और पानी के संपर्क से फैलता है जो संक्रमित व्यक्ति द्वारा दूषित किया गया हो। हेपेटाइटिस ई वायरस अधपके मांस के जरिए भी फैलता है। हेपेटाइटिस बी, सी और डी वायरस के ट्रांसमिशन की बात करें तो यह ज्यादातर संक्रमित मरीज के खून के संपर्क में आने से फैलता है।

मिथक2: भारतीय वयस्कों में सबसे कॉमन है हेपेटाइटिस ए वायरस
हकीकत:
10 साल की उम्र तक आते-आते भारत के करीब 95 प्रतिशत बच्चे हेपेटाइटिस ए के लिए पॉजिटिव टेस्ट किए जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि भारत में स्वच्छता की स्थिति कितनी खराब है। भारतीय वयस्कों में पाया जाने वाला सबसे कॉमन हेपेटाइटिस इंफेक्शन हेपेटाइटिस ई है और इसका मुख्य कारण स्ट्रीट फूड का सेवन करना है।

(और पढ़ें : हेपेटाइटिस बी में परहेज, क्या खाएं क्या नहीं)

मिथक3: हेपेटाइटिस आनुवांशिक बीमारी है
हकीकत:
हेपेटाइटिस आनुवांशिक या वंशानुगत बीमारी नहीं है। हेपेटाइटिस बी संक्रमित मां से उसके बच्चे में जन्म के वक्त संचारित हो सकता है। हालांकि इस स्थिति से भी बचा जा सकता है अगर वायरस की स्थिति पता हो और बच्चे के जन्म से 12 घंटे पहले उसे इम्यूनोग्लोबुलिन (एंटीबॉडीज) दी जाए।

मिथक4: एक्यूट वायरल हेपेटाइटिस (एवीएच) के सभी मरीजों को पीलिया होता है
हकीकत:
पीलिया या जॉन्डिस की अनुपस्थिति मरीज में वायरल हेपेटाइटिस संक्रमण की संभावना से इंकार नहीं करती है। कभी-कभी किसी मरीज में केवल बुखार, उल्टी और भूख न लगना जैसे लक्षण ही दिखाई देते हैं।

मिथक5: सभी तरह के हेपेटाइटिस वायरस के खिलाफ वैक्सीन मौजूद है
हकीकत:
वैक्सीन सिर्फ हेपेटाइटिस ए और बी के लिए मौजूद है

(और पढ़ें : हेपेटाइटिस ए का टीका, खुराक और कीमत)

मिथक6: हेपेटाइटिस ए हो जाए तो व्यक्ति सभी तरह के हेपेटाइटिस के प्रति इम्यून हो जाता है
हकीकत:
अगर किसी मरीज को हेपेटाइटिस ए हो जाए तो वह सिर्फ हेपेटाइटिस ए के प्रति ही जीवनभर के लिए इम्यून हो जाता है। हालांकि उस व्यक्ति को अन्य प्रकार के हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है।

मिथक7: हेपेटाइटिस के मरीज को सिर्फ उबला हुआ भोजन ही खाना चाहिए
हकीकत:
हेपेटाइटिस के मरीज के लिए पोषण बेहद जरूरी है। हालांकि, आम धारणा के विपरीत, हेपेटाइटिस के मरीजों को जो कुछ भी वे चाहते हैं, खिलाया जा सकता है। लेकिन गन्ने का जूस, करेला, मूली और ग्लूकोज का घोल देने की सिफारिश नहीं की जाती है।

मिथक8: हेपेटाइटिस से संक्रमित होने पर स्तनपान कराना असुरक्षित है
हकीकत:
मां का ब्रेस्ट मिल्क किसी भी हेपेटाइटिस वायरस को नहीं फैला सकता और इसलिए, हेपेटाइटिस के दौरान स्तनपान कराना बिल्कुल सुरक्षित है।

(और पढ़ें : स्तनपान या बोतल से दूध पिलाना- क्या है बेहतर)

मिथक9: हेपेटाइटिस के मरीज में जब पीलिया ठीक हो जाता है तो वे अल्कोहल का सेवन कर सकते हैं
हकीकत:
हेपेटाइटिस ए और ई इंफेक्शन के बाद कम से कम 6 महीने तक अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि लिवर को पूरी तरह से रिकवर होने में कम से कम 6 महीने का वक्त लगता है। हालांकि वैसे लोग जिन्हें दीर्घकालिक हेपेटाइटिस बी या सी का संक्रमण हो जाए उन्हें जीवनभर अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए।

मिथक10: हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है
हकीकत:
हेपेटाइटिस के कुछ प्रकार ऐसे भी हैं जिनसे रिकवर होने के लिए किसी तरह के इलाज या हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती लेकिन कभी-कभी यह लिवर के क्षतिग्रस्त होने का भी कारण बन जाता है, ऐसे मामले में मरीज को आराम करना चाहिए और डॉक्टर से पूछकर उचित दवा का सेवन करना चाहिए और अल्कोहल के सेवन से बचना चाहिए। डॉक्टर ऐसे मरीजों को एंटीवायरल एजेंट्स प्रिस्क्राइब करते हैं।

आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि हेपेटाइटिस इंफेक्शन से बचने के लिए नियमित रूप से अपने हाथों की सफाई और टीकाकरण जैसी विभिन्न सावधानियों बरतें। हालांकि, बीमारी की रोकथाम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति को किस तरह का हेपेटाइटिस संक्रमण हुआ है।

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