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हेपेटाइटिस क्या है?

हेपेटाइटिस एक ऐसा रोग है, जिसमें लिवर में सूजन व लालिमा आ जाती है, इस रोग को सामान्य भाषा में लिवर में सूजन भी कहा जाता है। लिवर शरीर में सबसे बड़े आकार का अंग होता है। यह भोजन पचाने, ऊर्जा को एकत्रित करने और विषाक्त पदार्थों को शरीर के बाहर निकालने में मदद करता है।

कई प्रकार के रोग व अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे दवाएं, शराब, केमिकल व अन्य स्व - प्रतिरक्षित रोग आदि, लिवर में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं । हेपेटाइटिस से ग्रस्त कुछ लोगों में किसी प्रकार के लक्षण विकसित नहीं होते और कुछ लोगों को बुखार, मतली और उल्टी, पेट में दर्द और त्वचा व आंखों का रंग पीला पड़ जाना आदि जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। यदि हेपेटाइटिस लंबे समय तक रहता है, इससे लिवर मे स्कार ऊतक पैदा होना, लिवर का काम करना बंद कर देना या लिवर कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं।

इस रोग का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों की जांच करते हैं, आपसे आपकी पुरानी मेडिकल स्थिति के बारे में पूछते हैं और आपके खून की जांच करते हैं। परीक्षण के दौरान सीरम बिलीरुबिन टेस्ट, लिवर बायोप्सी (लिवर के मांस से छोटा सा टुकड़ा सेंपल के लिए निकालना) और अल्ट्रासाउंड करने की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

शराब छोड़कर एवं सुरक्षित सेक्स के तरीके अपना कर तथा यात्रा के दौरान नियमित रूप हाथ धो कर हेपेटाइटिस से बचाव किया जा सकता है। इसके साथ ही समय पर टीकाकरण किया जाना भी बेहद जरूरी है।

इलाज के प्रकार का चयन आपके हेपेटाइटिस रोग के प्रकार के अनुसार किया जाता है। हेपेटाइटिस के उपचार के दौरान मरीज़ को खूब आराम करने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने और अच्छा पोषण प्राप्त करने की सलाह दी जाती है। हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C का इलाज एंटीवायरल दवाओं के साथ किया जाता है। 

(और पढ़ें - लिवर रोग के लक्षण)

  1. हेपेटाइटिस क्या है - What is Hepatitis in Hindi
  2. हेपेटाइटिस के प्रकार - Types of Hepatitis in Hindi
  3. लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) के लक्षण - Hepatitis Symptoms in Hindi
  4. हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) के कारण - Hepatitis Causes & Risks Factors in Hindi
  5. हेपेटाइटिस से बचाव - Prevention of Hepatitis in Hindi
  6. हेपेटाइटिस का परीक्षण - Diagnosis of Hepatitis in Hindi
  7. हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) का इलाज - Hepatitis Treatment in Hindi
  8. हेपेटाइटिस की जटिलताएं - Hepatitis Complications in Hindi
  9. हेपेटाइटिस की दवा - Medicines for Hepatitis in Hindi
  10. हेपेटाइटिस की दवा - OTC Medicines for Hepatitis in Hindi
  11. हेपेटाइटिस के डॉक्टर

हेपेटाइटिस क्या है - What is Hepatitis in Hindi

लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) क्या है?

लिवर में सूजन, जलन और लालिमा पैदा करने वाली स्थिति को हेपेटाइटिस कहा जाता है। हेपेटाइटिस आमतौर पर लिवर में संक्रमण के परिणामस्वरूप या फिर अत्यधिक मात्रा में शराब पीने के कारण होता है।

(और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)

हेपेटाइटिस के प्रकार - Types of Hepatitis in Hindi

हेपेटाइटिस कितने प्रकार का होता है?

हेपेटाइटिस के कई प्रकार होते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं 

हेपेटाइटिस ए, बी और सी इनमें से सबसे आम प्रकार के होते हैं।

लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) के लक्षण - Hepatitis Symptoms in Hindi

हेपेटाइटिस होने पर कौन से लक्षण होने लगते हैं?

हेपेटाइटिस चाहे किसी भी कारण से हुआ हो उससे विकसित होने वाले लक्षण व संकेत एक जैसे ही होते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस के लक्षण हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं और समय के साथ-साथ बदल भी सकते हैं। इस रोग में होने वाले कुछ सबसे सामान्य लक्षण और संकेत निम्न हो सकते हैं:

क्रोनिक (दीर्घकालिक) हेपेटाइटिस में अक्सर तब तक किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते जब तक मरीज का लिवर पूरी तरह से काम करना बंद नहीं कर देता। इस स्थिति को लिवर खराब होना (Liver failure) भी कहा जाता है। 

यदि हेपेटाइटिस गंभीर रूप से हो जाता है तो इससे पेट में द्रव जमा होने लगता है और मानसिक रूप से भ्रम होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। (और पढ़ें - लिवर रोग के लक्षण)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • अत्यधिक खुजली होना
  • पेट के आस-पास के क्षेत्र में दर्द, सूजन या पेट में फुलाव महसूस होना (और पढ़ें - पेट में सूजन के लक्षण)
  • मूड में बदलाव होना या उलझन महसूस होना
  • उल्टी के साथ खून आना (और पढ़ें - खून की उल्टी कब होती है)
  • मल में खून आना या गहरे रंग का मल आना

हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) के कारण - Hepatitis Causes & Risks Factors in Hindi

लिवर में सूजन क्यों होती है?

  • संक्रामक कारण: वायरल हेपेटाइटिस - 
    • सीधे हेपेटाइटिस पर हमला करने वाले कुछ प्रकार के वायरस जिनको हेपेटाइटिस वायरस कहा जाता है।
    • हेपेटाइटिस ए फैलाने वाला वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के मल में पाया जाता है यह स्वस्थ व्यक्तियों में दूषित पानी पीने या दूषित भोजन खाने से फैलता है। कुछ प्रकार के असुरक्षित सेक्स के तरीके भी हेपेटाइटिस ए का कारण बन सकते हैं। (और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स कैसे करे)
    • हेपेटाइटिस बी फैलाने वाले वायरस आमतौर पर संक्रमित खून, वीर्य व अन्य शारीरिक द्रवों के संपर्क में आने से फैलते हैं। हेपेटाइटिस बी के वायरस से संक्रमित मां से जन्म लेने वाले शिशु को भी यह संक्रमण अपनी चपेट में ले लेता है। इसके अलावा यदि परिवार का कोई सदस्य हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित है, तो उनसे भी छोटे शिशुओं में हेपेटाइटिस बी फैल सकता है। इसके अलावा दूषित खून या खून के तत्व (प्लेटलेट्स आदि) चढ़ाने से, दूषित इंजेक्शन सुई या नशीली दवाओं के इंजेक्शन लगाने के कारण भी हेपेटाइटिस बी वायरस फैल जाता है। 
    • हेपेटाइटिस सी वायरस ज्यादातर संक्रमित खून के संपर्क में आने से फैलता है। दूषित खून या खून के तत्व चढ़ाने या किसी रोग का इलाज करने के दौरान इंजेक्शन की दूषित सुई लगाने या नशीले पदार्थों के इंजेक्शन लगाने के कारण भी हेपेटाइटिस सी वायरस फैल जाता है। शारीरिक संबंध बनाने के दौरान भी हेपेटाइटिस सी वायरस फैलना संभव है, हालांकि इसकी संभावनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं। 
    • हेपेटाइटिस डी वायरस का संक्रमण उन्हीं लोगों को होता है, जो हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित होते हैं। हेपेटाइटिस बी और डी वायरस के दोहरे संक्रमण के कारण यह एक गंभीर स्थिति बन जाती है, जिसके परिणाम काफी बदतर होते हैं। 
    • हेपेटाइटिस ई वायरस ज्यादातर दूषित पानी व भोजन खाने से फैलता है। 
       
  • गैर संक्रामक कारण (Non infective causes):
    • शराब व अन्य विषाक्त पदार्थ - 
      अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है और उसमें सूजन तथा लालिमा आ जाती है। इस स्थिति को कभी-कभी अल्कोहलिक हेपेटाइटिस  के नाम से भी जाना जाता है। अल्कोहल आपके शरीर की कोशिकाओं को सीधे क्षति पंहुचाती है। हेपेटाइटिस पैदा करने वाले कुछ विषाक्त कारण जैसे किसी दवा को अधिक मात्रा में लेना या किसी जहरीले पदार्थ के संपर्क में आना आदि। (और पढ़ें - शराब की लत के लक्षण)
    • स्व-प्रतिरक्षित रोग (Autoimmune system response) - 
      कुछ मामलों में प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर को एक हानिकारक वस्तु समझने लग जाती है और उसपर हमला करना शुरू कर देती है। इससे लिवर में लगातार सूजन और जलन बनी रहती है, जो कुछ लोगों में हल्की तो कुछ में गंभीर होती है जिसके परिणामस्वरूप लिवर के कार्यों में गड़बड़ होने लगती है। (और पढ़ें - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ)
  • अन्य कारण - 

हेपेटाइटिस का खतरा कब बढ़ जाता है? 

  • ब्लड बैंक, डायलिसिस क्लिनिक और पैथोलोजी लेबोरेटरी में काम करने वाले डॉक्टर, डेन्टिस्ट, नर्स व अन्य स्टाफ और साथ ही साथ मरीजों में भी हेपेटाइटिस विकसित होने के काफी जोखिम होते हैं, क्योंकि उनमें दूषित खून के संपर्क में आने की संभावना ज्यादा होती है।
  • नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोग जो एक दूसरे के साथ इंजेक्शन की सुई शेयर कर लेते हैं, उनमें हेपेटाइटिस ए और सी विकसित होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। इसके अलावा जो लोग किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं उनमें भी हेपेटाइटिस होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
  • नाक या कान छिदवाने या फिर टैटू बनवाने से भी हेपेटाइटिस के जोखिम अत्यधिक बढ़ जाते हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल की गई सुई पूरी तरह से रोगाणुरहित नहीं होती है। 
  • जिन लोगों के एक से अधिक यौन साथी हैं। (और पढ़ें - सेक्स पावर कैसे बढ़ाएं)
  • जो लोग इंजेक्शन के द्वारा ड्रग्स लेते हैं।
  • प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन चिकित्सा में काम करने वाले, अस्पताल में काम करने वाले, दांतों के डॉक्टर और पुलिस कर्मचारियों आदि कि लिए हेपेटाइटिस वायरस के संपर्क में आने को जोखिम अधिक होते हैं। 
  • किडनी के रोग जिनमें हीमोडायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है।
  • अलग-अलग जगह से खून या खून के अन्य तत्व चढ़ाना।
(और पढ़ें - खून की जांच)

हेपेटाइटिस से बचाव - Prevention of Hepatitis in Hindi

हेपेटाइटिस की रोकथाम कैसे करें?

  • जिन लोगों में हेपेटाइटिस ए और बी विकसित होने के अधिक जोखिम हैं, उनके लिए हेपेटाइटिस का टीकाकरण उपलब्ध है। अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य विभागों में काम करने वाले लोगों में हेपेटाइटिस विकसित होने के अधिक जोखिम होते हैं।
  • बाहरी खाना ना खाएं (जैसे स्ट्रीट फूड और जंक फूड आदि)
  • टॉयलेट का इस्तेमाल करने के बाद अपने हाथ अच्छे से धोने चाहिए। 
  • यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति या उसके खून, मल या फिर अन्य शारीरिक द्रव के संपर्क में आते हैं तो आपको अपने हाथों को अच्छे से धो लेना चाहिए। 
  • दूषित या अशुद्ध भोजन व पानी आदि नहीं पीना चाहिए
  • अधपका मीट, मछली व डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • अपनी सब्जियों को खुद अच्छे पानी में धोएं और फिर छील लें
  • टीकाकरण की मदद से भी हेपेटाइटिस संक्रमण की रोकथाम की जा सकती है। 
  • अपने टूथब्रश और रेजर किसी के साथ शेयर ना करें
  • सेक्स करने के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें
  • अपने यौन साथी की पिछली सेक्सुअल स्थिति के बारे में जानें। यदि आपको लगता है कि आपका यौन साथी संक्रमित है तो जल्द से जल्द उनको टेस्ट करवा लेना चाहिए।

हेपेटाइटिस का परीक्षण - Diagnosis of Hepatitis in Hindi

हेपेटाइटिस का परीक्षण कैसे किया जाता है?

हेपेटाइटिस का परीक्षण करने के दौरान, डॉक्टर सबसे पहले आपकी पिछली मेडिकल स्थिति के बारे में आपसे पूछेंगे, जिसकी मदद से वे हेपेटाइटिस के लिए संभावित जोखिम कारकों को निर्धारित करते हैं। 

हेपेटाइटिस की जांच के दौरान शारीरिक परीक्षण किया जाता है। यदि आपके लिवर का आकार बढ़ गया है या लिवर के क्षेत्र को स्पर्श करने से दर्द महसूस हो रहा है, तो शारीरिक परीक्षण की मदद से इस स्थिति का पता लगाया जा सकता है। कुछ लोगों में क्रॉनिक हेपेटाइटिस होता है, जो धीरे-धीरे लिवर को क्षतिग्रस्त करता है। ऐसे में कुछ सालों बाद लिवर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। 

हेपेटाइटिस का परीक्षण करने के लिए निम्न प्रकार के टेस्ट किये जा सकते हैं:

  • लिवर बायोप्सी - इस टेस्ट की मदद से यह अंदाजा लाया जाता है कि लिवर कितना क्षतिग्रस्त हुआ है और लिवर में कैंसर विकसित होने की संभावना कितनी है। 
  • पैरासेन्टेसिस (Paracentesis) - इस टेस्ट में पेट में जमा द्रव में से सेंपल निकाला जाता है और फिर उसका टेस्ट किया जाता है। टेस्ट की मदद से पेट में द्रव जमा होने के कारण का पता लगाया जाता है। 
     
  • अल्ट्रासाउंड - इस टेस्ट में ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करके पेट के अंदर के अंगों की तस्वीरें बनाई जाती हैं। इस टेस्ट की मदद से डॉक्टर लिवर व पेट के अंदर के अन्य अंगों को काफी नज़दीकी से देख पाते हैं। अल्ट्रासाउंड टेस्ट की मदद से निम्न जानकारियां मिल जाती हैं: 
    • पेट के अंदर द्रव जमा होना
    • लिवर क्षतिग्रस्त होना या लिवर का आकार बढ़ना
    • लिवर में ट्यूमर बनना
       
  • लिवर फंक्शन टेस्ट - इस टेस्ट की मदद से यह पता लगाया जाता है, कि आपका लिवर कितनी कुशलता पूर्वक काम कर पा रहा है। जिससे निम्न जानकारियां मिलती हैं:
    • सीरम टोटल प्रोटीन (Serum total protein)
    • सीरम एल्बुमिन (Serum albumin)
    • सीरम बिलीरुबिन (Serum bilirubin)
    • सीरम अल्कालीन फॉसफेट (Serum alkaline phosphatase)
    • अलानीन अमीनोट्रांसफरस (Alanine Aminotransferase)
    • एस्पर्टेट अमीनोट्रांसफरस (Aspartate AminoTransferase)
       
  • ये टेस्ट यह संकेत देते हैं कि आपका लिवर कितने अच्छे से काम कर पा रहा है और यदि आपका लिवर क्षतिग्रस्त हो गया है, तो इन टेस्टों की मदद से डॉक्टर को इस बारे में पता चल जाता है। 
    • लिवर बायोप्सी - यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें लिवर एक अंदर एक सुई भेजी जाती है और उसके साथ लिवर के मांस से एक छोटा टुकड़ा निकाला जाता है। इस टुकड़े की माइक्रोस्कोप के द्वारा जांच की जाती है। 
    • न्यूक्लिक एसिड परीक्षण (Nucleic acid tests) - इस टेस्ट का उपयोग हेपेटाइटिस B और C के लिए किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से यह पता लगाया जाता है कि लिवर में वायरस कितनी तेजी से दोबारा उत्पन्न हो रहा है, जिससे यह पता लग जाता है कि रोग कितना सक्रिय है। 

हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) का इलाज - Hepatitis Treatment in Hindi

लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस) का इलाज कैसे किया जाता है?

हेपेटाइटिस का इलाज हेपेटाइटिस के प्रकार और उसकी गंभीरता के आधार पर किया जाता है। 

हेपेटाइटिस ए और ई से ग्रस्त ज्यादातर लोग कुछ हफ्तों के बाद अपने आप ठीक होने लगते हैं। 

हेपेटाइटिस ए:

हेपेटाइटिस ए के लिए कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। इसके इलाज के दौरान डॉक्टर मरीज को शराब और अन्य ड्रग्स आदि से पूरी तरह से परहेज करने की सलाह देते हैं। हेपेटाइटिस ए से ग्रस्त ज्यादातर लोग बिना किसी परेशानी के ठीक हो जाते हैं। 

अन्य आत्म-देखभाल के उपाय:

  • जब तक शरीर अपनी सारी ऊर्जा को वापस प्राप्त नहीं कर लेता तब तक रोजाना कि गतिविधियों को कम करें। जैसे ही आपको अच्छा महसूस होने लगे तो आप धीरे-धीरे अपनी रोजाना की गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। हालांकि यदि आप बीमारी से उबरने के दौरान तुरंत ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां शुरू कर देते हैं, तो आप फिर से बीमार पड़ सकते हैं। 
  • हेल्थी खाना खाएं - भले ही ऐसे खाद्य पदार्थ आपको आकर्षक ना लगें, लेकिन अच्छा पोषण प्राप्त करने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जरूरी होता है। 
  • खूब पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी ना होने दें। 

हेपेटाइटिस बी:

यदि आपको पता है कि आप हेपेटाइटिस बी वायरस के संपर्क में आ चुके हैं और लेकिन आपको यह याद नहीं है कि आपको टीका लगा हुआ है या नहीं तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। यदि इम्युनोग्लोबुलिन (Immunoglobulin) का इंजेक्शन वायरस के संपर्क में आने के 12 घंटे के भीतर दे दिया जाए तो हेपेटाइटिस बी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

  • एक्युट (तीव्र) हेपेटाइटिस बी का उपचार - 
    एक्युट (तीव्र) हेपेटाइटिस बी का इलाज करने के लिए किसी विशेष प्रकार के इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। जब आपका शरीर इस संक्रमण के खिलाफ लड़ रहा होता है, तो डॉक्टर आपको उस समय खूब आराम करने, उचित पोषण प्राप्त करने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने का सुझाव देते हैं।
  • क्रोनिक (पुराने) हेपेटाइटिस बी का उपचार - 
    • कुछ मरीज़ों में क्रोनिक हेपेटाइटिस बी का उपचार “पेगीलेटेड इंटरफेरॉन-अल्फा” नामक दवा के (Pegylated interferon-alpha) साथ किया जाता है। इस इंजेक्शन को हर सप्ताह में एक बार लगातार छह महीने तक लगाया जाता है। 
    • इलाज के लिए एंटीवायरल दवाएं जैसे लैमिवुडाइन (lamivudine), एडेफोविर (adefovir) और टेल्बिवुडिन (telbivudine) आदि का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं लिवर में हो रही लगातार क्षति की गति को धीमा कर देती हैं। 
    • यदि आपका लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है, तो ऐसे में लिवर प्रत्यारोपण ही एक मात्र विकल्प बचता है। लिवर प्रत्यारोपण के दौरान सर्जन आपके क्षतिग्रस्त लिवर को निकाल देते हैं और उसकी जगह पर नया और स्वस्थ लिवर प्रत्यारोपित कर देते हैं। 

हेपेटाइटिस सी:

  • हेपेटाइटिस के दोनों रूपों (एक्युट और क्रोनिक) का इलाज करने के लिए एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। 
  • वर्तमान में, हेपेटाइटिस सी के लिए सबसे प्रभावी थेरेपी कुछ प्रकार की दवाओं का संयोजन है, जिसमें पेजिलेटेड इंटरफेरॉन (Pegylated iterferon) और रिबावायरिन (Ribavirin) शामिल हैं। पेजिलेटेड इंटरफेरॉन को हर हफ्ते इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है और रिबावायरिन को टेबलेट के रूप में दिया जाता है, एक दिन में इसकी दो टेबलेट दी जाती हैं। 
  • हेपेटाइटिस सी के कारण जिन लोगों को सिरोसिस (लीवर में स्कार ऊतक विकसित हो जाना) या लीवर संबंधी अन्य कोई रोग हो गया है, तो उनको लीवर प्रत्यारोपण भी करवाना पड़ सकता है।

हेपेटाइटिस डी:

  • हेपेटाइटिस डी का इलाज करने के लिए इस समय किसी प्रकार की एंटीवायरल दवाएं नहीं हैं। 
  • हेपेटाइटिस बी के खिलाफ होने वाला टीकाकरण करवाकर हेपेटाइटिस डी की रोकथाम की जा सकती है। क्योंकि हेपेटाइटिस बी का संक्रमण विकसित होने पर ही व्यक्ति हेपेटाइटिस डी की  चपेट में आता है। 

हेपेटाइटिस ई:

  • वर्तमान में हेपेटाइटिस ई के उपचार के लिए कोई विशेष थेरेपी उपलब्ध नहीं है। आमतौर पर यह अपने आप ही ठीक होता है। 
  • जिन लोगों को हेपेटाइटिस ई का संक्रमण होता है, उनको अक्सर पर्याप्त आराम करना, खूब मात्रा में तरल पदार्थ पीना, पर्याप्त मात्रा में पोषण प्राप्त करना और शराब का सेवन बंद करना आदि जैसे सुझाव दिये जाते हैं। 
  • हालांकि अगर गर्भवती महिलाओं को हेपेटाइटिस ई हो गया है तो उनकी काफी बारीकी से देखभाल की जाती है। 

गैर संक्रामक कारणों से होने वाला हेपेटाइटिस:

  • हेपेटाइटिस को पैदा करने वाले कारण का इलाज करना भी बहुत जरूरी होता है। 
  • शराब के कारण होने वाले हेपेटाइटिस का इलाज करने के लिए वे दवाएँ दी जाती हैं, जो लिवर की सूजन और जलन को कम करती हैं और लिवर के कार्यों में सुधार करती हैं। 
  • इलाज शुरू होने के बाद जब आप ठीक हो रहे होते हैं, तो उस दौरान डॉक्टर कुछ विटामिन और अन्य पोषक तत्वों के सप्लीमेंट्स भी लिख सकते हैं।

हेपेटाइटिस की जटिलताएं - Hepatitis Complications in Hindi

हेपेटाइटिस से क्या अन्य परेशानियां हो सकती हैं?

क्रोनिक हेपेटाइटिस लगातार 20 सालों तक ऐसा कोई भी लक्षण या संकेत दिखाए बिना रह सकता है जो लिवर की क्षति का संकेत देते हैं, जैसे लिवर कैंसर या लिवर सिरोसिस आदि ये लक्षण मरीज की मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं। 

हेपेटाइटिस बी के कारण गुर्दे संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। संक्रमित वयस्कों में बच्चों के मुकाबले किडनी खराब होने के जोखिम अधिक होते हैं। 

अन्य संभावित जटिलताएं - 

  • भोजन नली और पेट में रक्त वाहिकाओं का आकार बढ़ना (Varices) जिसके कारण खून बहने लग सकता है।
  • जलोदार (एसाइटिस- Ascites) - पेट में द्रव बनना जिसके परिणामस्वरूप पेट फूलने लगता है। 
  • एडिमा (Edema) - इसमें पैर, टखने या टांग में द्रव बनने लग जाता है जिससे प्रभावित क्षेत्र में सूजन आने लगती है। 
  • तिल्ली बढ़ना (Enlarged spleen)
  • हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (Hepatic encephalopathy) - मस्तिष्क में विषाक्त पदार्थ बनना जिसके परिणामस्वरूप मानसिक कार्य कम हो जाते हैं और कोमा भी हो सकता है। 
Dr. Mahesh Kumar Gupta

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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Raajeev Hingorani

Dr. Raajeev Hingorani

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Vineet Mishra

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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

हेपेटाइटिस की दवा - Medicines for Hepatitis in Hindi

हेपेटाइटिस के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
AdeseraAdesera 10 Mg Tablet673.0
AdfovirAdfovir 10 Mg Tablet270.0
AdhebAdheb 10 Mg Tablet680.0
TaspianceTaspiance 180 Mg Injection9175.0

हेपेटाइटिस की दवा - OTC medicines for Hepatitis in Hindi

हेपेटाइटिस के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Zandu Livotrit SyrupZandu Livotrit Syrup70.0
Dabur HepanoDabur Hepano90.0
Himalaya Liv 52 SyrupHimalaya Liv 52 Syp 200 Ml95.0
Himalaya Liv 52Himalaya Liv 52 Syrup110.0
Zandu Livotrit ForteZandu Livotrit Forte110.0
Divya Liv D 38 TabletDivya Liv D 38 Tablet70.0
Baidyanath LiverexBaidyanath Liverex Syrup85.0
Zandu Arogyavardhani GutikaZandu Arogyavardhani Gutika Tablet50.0

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