खून में यूरिक एसिड बढ़ने की घटना को मेडिकल टर्म में हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है और यह स्वास्थ्य समस्या इन दिनों एक कॉमन प्रॉब्लम बन गयी है। यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने की वजह से आगे कई और तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे- गाउट (एक तरह का गठिया जो यूरिक एसिड के कण जमने से होता है), हृदय रोग और किडनी की बीमारी आदि। खून में यूरिक एसिड के स्तर का पता लगाने के लिए ब्लड यूरिक एसिड टेस्ट किया जाता है और एक नई स्टडी की मानें तो अगर खून में सीरम यूरिक एसिड की मात्रा बहुत अधिक हो जाए इससे मरीज के जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। 

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यूरोपियन जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में पब्लिश हुई स्टडी
इस स्टडी को आयरलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ लेमिरिक (यूएल) के स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसंधानकर्ताओं ने संपन्न किया है और उनकी मानें तो खून में यूरिक एसिड की उच्च मात्रा उस व्यक्ति की जीवन अवधि में करीब 11 साल की कमी कर सकती है। इस स्टडी को यूरोपियन जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। यह आयरलैंड में हुई अपने तरह की पहली और सबसे बड़ी स्टडीज में से एक है जिसमें अनुसंधानकर्ताओं ने खून में सीरम यूरिक एसिड (एसयूए) की अत्यधिक सघनता की वजह से मरीज के जीवित रहने की संभावनाओं में पर्याप्त कमी देखी और यह कमी, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए बराबर ही थी।

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यूरिक एसिड की उच्च मात्रा और जीवित रहने के आंकड़ों के बीच क्या संबंध है?
यूएल स्कूल ऑफ मेडिसिन में बायोस्टैटिस्टिक्स के सीनियर रिसर्च फेलो और पीएचडी डॉ लियोनार्ड ब्राउन जो इस स्टडी के लीड ऑथर भी हैं ने कहा, "यह पहली स्टडी है जिसमें आयरलैंड के पुरुषों और महिलाओं में सीरम यूरिक एसिड की सघनता और उनके जीवित रहने के आंकड़ों के बीच क्या संबंध है इस बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की गई है। यहां हमारा सबसे अहम सवाल इस बात को निर्धारित करना था कि बाकी सारी चीजों को एक समान रखने के बाद क्या सीरम यूरिक एसिड (एसयूए)- जो नियमित रूप से मापा गया ब्लड मार्कर है- वह मरीज के जीवन अवधि का पुर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है?"

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एसयूए की उच्च मात्रा हो तो 11.7 साल घट जाता है मरीज का जीवन
इस सवाल के जवाब के लिए रिसर्च टीम ने 1 जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2012 के बीच 26 हजार 525 उन मरीजों के आंकड़ों की जांच की जिनके खून में यूरिक एसिड की उच्च मात्रा थी। इस दौरान अनुसंधानकर्ताओं ने 31 दिसंबर 2013 तक इन मरीजों को फॉलो भी किया। स्टडी के लीड ऑथर डॉ ब्राउन ने कहा कि इसके नतीजे काफी हैरान करने वाले थे। डॉ ब्राउन ने बताया, "पुरुषों की बात करें तो जिन मरीजों के खून में सीरम यूरिक एसिड (एसयूए) का लेवल 357-416 μmol प्रति लीटर था उनकी तुलना में जिन पुरुषों के शरीर में एसयूए का लेवल कम था यानी 238 μmol प्रति लीटर से कम उनके जीवित रहने की औसत उम्र में 9.5 साल की कमी देखी गई जबकी जिन पुरुषों के खून में एसयूए का लेवल अधिक था 535 μmol प्रति लीटर से अधिक उनके जीवित रहने की औसत उम्र में 11.7 साल की कमी देखी गई।" 

यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से किडनी फेलियर, हृदय रोग जैसी बीमारियां  
वहीं, महिलाओं की बात करें सीरम यूरिक एसिड के सामान्य रेंज वाली महिलाओं की तुलना में जिनका एसयूए लेवल 416 μmol प्रति लीटर से अधिक था उन महिलाओं के जीवित रहने की औसत उम्र में 6 साल तक की कमी देखने को मिली। यूनिवर्सिटी लेमिरिक के स्कूल ऑफ मेडिसिन के फाउंडेशन चेयरमैन प्रफेसर ऑस्टिन स्टैक और इस स्टडी के सीनियर ऑथर ने बताया, "इस बात के अच्छे खासे सबूत मौजूद हैं कि अगर खून में सीरम यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाए तो इसका संबंध लंबे समय तक रहने वाली कई गंभीर बीमारियों से है जैसे- किडनी फेलियर, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज आदि। हमारी स्टडी में जिन मरीजों में एसयूए लेवल के बढ़ने की वजह से मरीजों की मृत्यु दर में जो बढ़ोतरी दिखी उसका कारण एसयूए का इन बीमारियों के साथ संबंध है।"     

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मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया का बाई-प्रॉडक्ट है यूरिक एसिड
तो आखिरकार यूरिक एसिड है क्या? यूरिक एसिड शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया का एक बाई-प्रॉडक्ट है यानी हम जो भोजन करते हैं और शरीर की कोशिकाओं के टूटने की जो प्रक्रिया है उससे ही यूरिक एसिड का निर्माण होता है। वैसे तो किडनी मूत्र के रास्ते खून में मौजूद यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकाल देती है और मल के द्वारा भी कई बार यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन अगर यूरिक एसिड का अधिक निर्माण होने लगे तो किडनी खून से इसे हटा नहीं पाती जिसकी वजह से इसका स्तर बढ़ जाता है।

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यूरिक एसिड में इन चीजों से करें परहेज
यूरिक एसिड को कम करने में आपका खानपान आपकी काफी मदद कर सकता है। लिहाजा अधिक प्रोटीन और फ्रक्टोज युक्त चीजें न खाएं। खास प्रकार के मीट जैसे- कलेजी, गुर्दा, भेजा आदि का सेवन न करें, ट्यूना, मैकेरल, ट्राउट आदि मछली भी न खाएं, सी फूड से भी परहेज करें, जिन फलों में चीनी की मात्रा अधिक होती है उनका जूस न पिएं और चीनी युक्त सोडा और सॉफ्ट ड्रिंक का भी सेवन न करें। इसके अतिरिक्त पालक, मशरूम, रेड मीट, टमाटर, मूंग दाल, सोयाबीन, कॉफी, शहद, खमीर वाली चीजें, सफेद ब्रेड, केक आदि का भी सेवन न करें। 

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