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मोनोन्यूक्लियोसिस क्या है

संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस को किसिंग डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। मोनोन्यूक्लिओसिस पैदा करने वाला वायरस लार के जरिए फैलता है। ऐसे में जब मोनोन्यूक्लिओसिस रोग से ग्रस्त व्यक्ति किसी को चूमता है तो यह वायरस उस व्यक्ति के पार्टनर में फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकले कीटाणुओं के सम्पर्क में आने या उसके झूठे गिलास या बर्तन में पानी पीने या खाने से यह बीमारी फैलती है। हालांकि, मोनोन्यूक्लिओसिस अन्य कुछ संक्रमणों जैसे सर्दी-जुकाम की तरह संक्रामक नहीं है। ज्यादातर किशोर या युवा वयस्कों में मोनोन्यूक्लिओसिस से ग्रस्त होने की संभावना होती है। यदि कोई व्यक्ति मोनोन्यूक्लिओसिस से ग्रस्त है, तो उसे आराम करना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। 

मोनोन्यूक्लियोसिस के लक्षण

मोनोन्यूक्लिओसिस के निम्न लक्षण हो सकते हैं:

वायरस के लक्षण लगभग चार से छह सप्ताह में दिखने शुरू होते हैं, हालांकि छोटे बच्चों में यह अवधि कम हो सकती है। मोनोन्यूक्लिओसिस के संकेत और लक्षण आमतौर पर एक से दो महीने तक रहते हैं।

मोनोन्यूक्लिओसिस के कारण

मोनोन्यूक्लिओसिस का सबसे आम कारण एपस्टीन-बार वायरस (ईबीवी) है, लेकिन अन्य वायरस भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकते हैं। यह एक सामान्य वायरस है, लेकिन अगर आप ईबीवी से प्रभावित हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप मोनोन्यूक्लिओसिस की चपेट में ही आए हैं। मोनोन्यूक्लिओसिस के लक्षण लंबे समय तक के लिए कोई प्रभाव छोड़े बिना ही अपने आप ठीक हो जाते हैं। 

  • यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की लार या अन्य शारीरिक फ्लूइड जैसे कि खून के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह यौन संबंध और अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से भी फैलता है।
  • इसके अलावा यदि आप इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकले कीटाणुओं के संपर्क में आते हैं तो आप भी मोनोन्यूक्लिओसिस की चपेट में आ सकते हैं।
  • मोनोन्यूक्लिओसिस से ग्रस्त व्यक्ति के साथ भोजन या पेय पदार्थ साझा करने से भी ये बीमारी फैल सकती है। आमतौर पर संक्रमित होने के बाद इस बीमारी के लक्षणों को विकसित होने में 4 से 8 सप्ताह का समय लगता है।

मोनोन्यूक्लिओसिस का इलाज

संक्रमित व्यक्ति को घर पर ही ठीक किया जा सकता है। इसमें बुखार को कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर (डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना मिलने वाली दवा) दवाओं का उपयोग करना शामिल है और गले में खराश को ठीक करने के लिए नमक के पानी से गरारे करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लक्षणों को कम करने वाले अन्य घरेलू उपचारों में शामिल हैं:

  • पर्याप्त आराम करना 
  • खूब पानी पीना (हाइड्रेटेड रहना)
  • गर्म चिकन सूप पीना

मोनोन्यूक्लिओसिस के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है। ईबीवी से संक्रमित होने के बाद महीनों तक लार में यह वायरस रह सकता है, इसलिए भले ही इसके लक्षण दिखाई न दें या कोई बीमारी महसूस न हो, आपके जरिए किसी अन्य व्यक्ति में भी यह संक्रमण हो सकता है। इसलिए मोनोन्यूक्लिओसिस के प्रसार को रोकना कठिन होता है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि अपने हाथों को साफ रखें और कोशिश करें कि किसी का झूठा न खाएं।

  1. मोनोन्यूक्लिओसिस की दवा - Medicines for Mononucleosis in Hindi
  2. मोनोन्यूक्लिओसिस के डॉक्टर
Dr. Neha Gupta

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संक्रामक रोग

Dr. Lalit Shishara

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संक्रामक रोग

Dr. Alok Mishra

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मोनोन्यूक्लिओसिस की दवा - Medicines for Mononucleosis in Hindi

मोनोन्यूक्लिओसिस के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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