नूनन सिंड्रोम क्या है? 

नूनन सिंड्रोम एक आनुवांशिक विकार है, जो शरीर के कई हिस्सों के सामान्य विकास में बाधा उत्पन्न करता है। व्यक्ति कई तरह से नूनन सिंड्रोम से प्रभावित हो सकता है। जिसमें चेहरे की बनावट में विकृति, लंबाई का न बढ़ना, दिल की बीमारी, अन्य शारीरिक समस्या व शरीर के विकास में देरी को शामिल किया जाता है।

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नूनन सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?

नूनन सिंड्रोम के संकेत और लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके हल्के व गंभीर लक्षण जीन के दोष पर निर्भर होते है। नूनन सिंड्रोम के लक्षणों में आंखों के बीच की दूरियां बढ़ना, पलकों का ढीला होना, आंखों की पुतलियों का रंग पीला होना, सिर का आकार बढ़ना, माथा चौड़ा होना, नाक छोटी और मोटी होना, जबड़े छोटे होना, जन्म के समय सामान्य वजन होने पर भी शारीरिक विकास में देरी होना, ग्रोथ हार्मोन का कम स्तर व कुछ हृदय संबंधी समस्याओं को शामिल किया जाता है।

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नूनन सिंड्रोम क्यों होता है?

नूनन सिंड्रोम व्यक्ति के जीन में होने वाले किसी प्रकार के बदलाव के कारण होता है। यह बदलाव अधिकतर जीन में होता है। जीन में दोष के कारण लगातार सक्रिय होने वाली प्रोटीन का उत्पादन होने लगता है। शरीर में ऊतकों को बनाने में जीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन सक्रिय प्रोटीन कोशिकाओं के बनने की सामान्य प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं। यह सिंड्रोम आनुवांशिक या बच्चे के शरीर में होने वाले नए बदलावों के कारण भी हो सकता है।

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नूनन सिंड्रोम​​ का इलाज कैसे होता है?

नूनन सिंड्रोम में जीन के बदलावों को ठीक नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसके इलाज में सिंड्रोम के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाता है। इसके इलाज में हृदय, लंबाई, सीखने की क्षमताओं, देखने और सुनने की क्षमता व जननांग समस्याओं का इलाज किया जाता है। रोगी के दुष्प्रभावों के आधार पर सर्जरी या दवाओं के माध्यम से इलाज किया जाता है। 
 

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