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कभी-कभी किसी चीज या जगह से डरना या चिंतित होना एक आम बात होती है। लेकिन जब आप डर के कारण बाहर की दुनिया में निकलना या किसी विशेष जगह पर जाना बंद कर देते हैं, क्योंकि आपको लगता है कि आप वहां फंस सकते हैं या वहां आपको किसी प्रकार की मदद नहीं मिल सकती तो यह “एगोराफोबिया” के लक्षण हो सकते हैं।

एगोराफोबिया का मतलब है “भीड़ से डर लगना” जो एक प्रकार का “चिंता विकार” होता है। इस विकार से ग्रस्त लोगों को अत्यधिक डर लगता है। एगोराफोबिया विकार से ग्रस्त लोगों को घर से बाहर निकलने से डर लगता है। हालांकि कुछ प्रकार की दवाएं व थेरेपी हैं जिनकी मदद से इस स्थिति का इलाज किया जा सकता है।

  1. एगोराफोबिया के लक्षण - Agoraphobia Symptoms in Hindi
  2. एगोराफोबिया के कारण - Agoraphobia Causes in Hindi
  3. एगोराफोबिया से बचाव - Prevention of Agoraphobia in Hindi
  4. एगोराफोबिया का परीक्षण - Diagnosis of Agoraphobia in Hindi
  5. एगोराफोबिया का इलाज - Agoraphobia Treatment in Hindi
  6. एगोराफोबिया की जटिलताएं - Agoraphobia Complication in Hindi
  7. एगोराफोबिया क्या है - What is Agoraphobia in Hindi
  8. एगोराफोबिया के डॉक्टर

भीड़ से डर लगने के लक्षण क्या हैं?

एगोराफोबिया से ग्रस्त लोग जब किसी विशेष स्थान के बारे में सोचते हैं या वहां पर जाते हैं, तो उनको चिंता व तनाव महसूस होता है, खासकर ऐसे स्थान के बारे में जहां जाने के लिए वे शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार ना हों। घर से बाहर निकलना उनके लिए काफी कठिन होता है और डर भी लगता है।

एगोराफोबिया से कुछ अन्य शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जो पेनिक विकार से संबंधित होते हैं, जैसे:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

एगोराफोबिया में आपको घर के बाहर निकलने, काम करने या शादी-पार्टी जैसे किसी फंक्शन में जाने से शर्म या डर लगने लगता है। इतना ही नहीं आपका सामान्य जीवन भी एगोराफोबिया से काफी प्रभावित हो जाता है। यदि आपको ऐसी किसी भी प्रकार की समस्या हो रही है, तो अपने डॉक्टर से जल्द से जल्द इस बारे में बात कर लेनी चाहिए।

भीड़ से डर क्यों लगता है?

एगोराफोबिया क्यों होता है, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं, कि मस्तिष्क का जो क्षेत्र भय को कंट्रोल करता है, उससे संबंधित किसी प्रकार की समस्या होने पर एगोराफोबिया हो सकता है। हालांकि कुछ कारक हैं, जो एगोराफोबिया होने के जोखिम बढ़ाने वाले कारकों के रूप में जाने जाते हैं। इनमें निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • डिप्रेशन
  • अन्य प्रकार के फोबिया जैसे क्लस्ट्रोफोबिया (तंग स्थान से डरना) और सोशल फोबिया (समाजिक गतिविधियों से डरना)
  • कुछ अन्य प्रकार के चिंता विकार जैसे ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) और सामान्य चिंता विकार।
  • पहले कभी शारीरिक या यौन उत्पीड़न का शिकार होना
  • परिवार में पहले किसी को एगोराफोबिया होना
  • महिलाएं (पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में एगोराफोबिया की समस्या देखी जाती है)

एगोराफोबिया से बचाव कैसे करें?

भीड़ से डर लगने के विकार की हर बार रोकथाम करना संभव नहीं है। हालांकि यदि चिंता और पैनिक विकार का समय पर परीक्षण व इलाज कर दिया जाए, तो कुछ मामलों में एगोराफोबिया होने से बचाव किया जा सकता है। यदि इलाज को समय पर शुरू कर दिया जाए, तो यह आसान रहता है और जल्दी काम करता है और स्थिति को बदतर होने से रोका जा सकता है।  

यदि आपको किसी सुरक्षित स्थान पर जाने से भी डर लगता है, ऐसे में यदि संभव हो तो उस स्थान पर बार-बार जाने की कोशिश करें। यदि आप अकेले उस जगह पर नहीं जा सकते, तो अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र को अपने साथ ले जा सकते हैं। 

 

एगोराफोबिया का परीक्षण कैसे किया जाता है?

निम्न के आधार पर भीड़ से डरने के विकार का परीक्षण किया जाता है:

  • एगोराफोबिया के संकेत व लक्षणों के आधार पर
  • डॉक्टर द्वारा मरीज से कुछ गहराई से सवाल पूछना
  • शारीरिक परीक्षण करके, ताकि अन्य किसी समस्या का पता लगाया जा सके जिससे एगोराफोबिया जैसे लक्षण हो रहे हों

यदि मरीज को निम्न में से किसी भी परिस्थिति के दौरान गंभीर डर या चिंता महसूस हो रही है, तो ऐसे में डॉक्टर एगोराफोबिया निर्धारित कर सकते हैं:

  • सार्वजनिक ट्रेन या बस आदि में यात्रा करना
  • किसी खुले स्थान में होना जैसे किसी स्टोर या पार्किंग आदि
  • किसी तंग स्थान पर होना जैसे कार या लिफ्ट
  • भीड़-भाड़ वाले स्थान पर होना
  • अकेले घर से दूर होना

 

भीड़ से डर लगने का उपचार कैसे करें?

एगोराफोबिया विकार का इलाज आमतौर पर दवाओं या साइकोथेरेपी (मनोचिकित्सा) के द्वारा किया जाता है या फिर दोनों का एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि मरीज जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाएं, तो एगोराफोबिया का इलाज प्रभावी रूप से किया जा सकता है।

  • दवाएं:
    ऐसी बहुत सारी दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल डॉक्टर एगोराफोबिया का इलाज करने के लिए कर सकते हैं। ज्यादातर मामलों में छोटे बच्चों को एंटीडिप्रेसेन्ट्स (डिप्रेशन की दवा) और एंटी एंग्जायटी (चिंता की दवा) दवाएं दी जाती हैं। डॉक्टर कम खुराक के साथ इन दवाओं की शुरुआत करते हैं और जो धीरे-धीरे मस्तिष्क में “सेरोटोनिन” नाम के एक केमिकल का स्तर बढ़ा देती हैं। जब मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, तो आपको अच्छा महसूस होने लग जाता है। सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाने वाली दवाओं में सेलेक्सा, अफेक्सर, जोलोफ्ट, लेक्साप्रो और प्रोजैक् आदि शामिल हैं।
    एगोराफोबिया का इलाज करने के लिए आमतौर पर 6 महीने से 1 साल तक दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। यदि आपको अच्छा महसूस हो रहा है और आपको बाहर निकलने में डर या शर्म महसूस नहीं होती है, तो ऐसे में डॉक्टर धीरे-धीरे दवाओं को कम करके अंत में बंद कर देते हैं।
     
  • थेरेपी:
    एगोराफोबिया का उपचार करने के लिए डॉक्टर कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी या साइकोथेरेपी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से डॉक्टर आपको उन स्थितियों से निपटने के वे तरीके बताते हैं, जिसके कारण आपको डर महसूस होता है। ये तरीके आपके डर को कम करने में मदद करेंगे। इस दौरान मरीज को रिलेक्सेशन और ब्रिथिंग एक्सरसाइज करने का सही तरीका सिखाया जाता है। कई बार थेरेपिस्ट एक्सरपोजर थेरेपी अपनाते हैं, जिसमें मरीज को धीरे-धीरे उन गतिविधियों की आदत डाली जाती है, जिनसे उन्हें डर लगता है।

 

एगोराफोबिया से क्या जटिलताएं होती हैं?

यदि आपको भीड़ में जाने से डर लगता है, तो इससे आपके जीवन की कई सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती है। यदि एगोराफोबिया काफी गंभीर है, तो आपको घर से निकलने में भी डर लग सकता है। इलाज ना करवाने के कारण कुछ मरीज सालों तक घर के अंदर ही रहते हैं। एगोराफोबिया विकार से ग्रस्त व्यक्ति अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के घर नहीं जा सकते, काम पर या स्कूल नहीं जा सकते हैं और ठीक से अन्य लोगों के जीवन का हिस्सा भी नहीं बन पाते हैं। इस विकार से ग्रस्त लोग दूसरों की मदद पर निर्भर हो जाते हैं।

 

एगोराफोबिया क्या है?

एगोराफोबिया शब्द प्राचीन ग्रीक भाषा के शब्द “एगोरा” से आया है, जिसका मतलब भीड़-भाड़ वाली जगह से संबंधित होता है। इस स्थिति को अक्सर खुली जगह से लगने वाला सामान्य डर समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में यह अत्यधिक जटिल स्थिति होती है। इस विकार से ग्रस्त लोग ऐसी जगहों पर जाने या ऐसी स्थितियों से बचने की कोशिश करते हैं, जिनसे उन्हें असहाय, शर्मिंदा या डर महसूस होता है।

Dr. Saurabh Mehrotra

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