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पुरुषों के शरीर को आकर्षक बनाने में कंधों का विशेष योगदान होता है। फिटनेस सेंटरों में शोल्डर लाइक बोल्डर टर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। शरीर की दूसरी मांसपेशियों की तुलना में कंधों को मजबूत करना कठिन होता है। कंधों के माध्यम से कई अन्य हड्डियां भी जुड़ी रहती हैं जो हाथों को उठाने और उनके कार्यों आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा लुक के हिसाब से देखें तो भी कंधों का विकसित होना काफी आवश्यक होता है। जिन पुरुषों के कंधे पूर्ण विकसित और गोल होते हैं, उसका व्यक्तित्व स्वत: आकर्षक नजर आता है।

शरीर के संपूर्ण विकास के लिए सभी अंगों को लक्षित करके उनका व्यायाम करना आवश्यक होता है। इसके अलावा कंधों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्योंकि उनसे कई मांसपेशियां और हड्डियां आपस में जुड़ी होती हैं। आप बाइसेप्स, एब्स और चेस्ट को मजबूत और विकसित करके शरीर के ऊपरी हिस्से को आकर्षक बना सकते हैं, लेकिन अगर आपके कंधे चौड़े और अच्छी तरह विकसित नहीं हैं तो सारी मेहनत बेकार हो सकती है। आपकी इसी समस्या को लेटरल रेज एक्सरसाइज के माध्यम से दूर किया जा सकता है।

लेटरल रेज एक्सरसाइज को विशेष रूप से कंधों और लेटरल मांसपेशियों को विकसित करने के लिए बनाया गया है। शरीर के बगल की लेटरल मांसपेशियां भी आकर्षण बढ़ाती हैं। एक ओर जहां ओवरहेड या शोल्डर प्रेस व्यायाम सीधे तौर पर कंधे की मांसपेशियों को विकसित करने में मदद करते हैं, वहीं लेटरल रेज एक्सरसाइज कंधे के चारों ओर की मांसपेशियों को विकसित कर उन्हें गोल और आकर्षक बनाती हैं। इतना ही नहीं यह कोर मांसपेशियों को भी मजबूती देने वाला व्यायाम है। इस व्यायाम के दौरान जब आप अपनी बाहों को सामने या बगल की ओर से उठाते हैं तो इस दौरान कोर मांसपेशियां भी सक्रिय हो जाती हैं।

लेटरल रेज मुख्य रूप से तीन प्रकार से किए जाते हैं- फ्रंट, साइड और बेंट ओवर। इनकी मदद से लेटरल, फ्रंट और पीठ की मांसपेशियों के साथ छाती के किनारे की मांसपेशियों का भी व्यायाम हो जाता है। व्यायाम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आप अल्टरनेट रेज और सिंगल आर्म लेटरल रेज जैसे अभ्यासों को भी शामिल कर सकते हैं। सामने के अभ्यास के दौरान आप बारबेल का उपयोग करके दोनों ओर की मांसपेशियों को भी आसानी से लक्षित कर सकते हैं।

  1. लेटरल रेज एक्सरसाइज कितने प्रकार से होता है? - Lateral raise exercise kitne types ka hota hai?
  2. लेटरल रेज एक्सरसाइज के फायदे - Lateral raise exercise ke fayde
  3. लेटरल रेज एक्सरसाइज कैसे करें - Lateral raise exercise Kaise karein
  4. लेटरल फ्रंट रेज एक्सरसाइज करने का सही तरीका - Lateral Front raise exercise karne ka sahi tareeka
  5. लेटरल साइड रेज एक्सरसाइज करने का सही तरीका - Lateral Side raise exercise karne ka sahi tareeka
  6. बेंट ओवर लेटरल रेज एक्सरसाइज करने का सही तरीका - Bent-over lateral raise karne ka sahi tareeka
  7. लेटरल रेज के वैकल्पिक व्यायाम - Lateral raise ke Alternative exercises
  8. निष्कर्ष - Takeaways

जैसा कि ऊपर की पंक्तियों में उल्लेख किया गया है कि लेटरल एक्सरसाइज तीन अलग-अलग व्यायामों से मिलकर बनी होती है। जिन्हें कंधे के व्यायाम के दौरान अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। व्यायाम निम्नलिखित हैं।

  • लेटरल फ्रंट रेज
  • लेटरल साइड रेज
  • बेंट-ओवर लेटरल रेज

लेटरल रेज एक्सरसाइज आम तौर पर दिखने में बड़ी सामान्य होती है, हालांकि कंधे के आसपास की मांसपेशियों को मजबूती देने में यह काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस व्यायाम से न केवल कंधों को शक्ति मिलती है साथ ही इसमें चोट लगने का जोखिम भी कम होता है। कंधे की मांसपेशियों को बेहतर आकार देने के साथ, लेटरल रेज रोटेटर कफ वाले हिस्से को भी शक्तिशाली बनाता है।

जैसा कि ऊपर आपको बताया गया कि इसे फ्रंट और साइड दोनों ओर से किया जा सकता है। लेटरल फ्रंट रेज कंधे की मांसपेशियों के कमजोर हिस्सों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यदि आपकी छाती और पीठ अच्छी तरह से विकसित हैं, लेकिन उसकी अपेक्षा कंधों का विकास सही से नहीं हुआ है तो आपके लिए लेटरल रेज जैसे कंधों के लिए विशेष रूप से बनाए गए व्यायामों को करना चाहिए। छोटी-बड़ी सभी प्रकार की मांसपेशियों के विकास में ये लाभदायक हो सकते हैं।

वैसे तो मुख्य रूप से लेटरल रेज एक्सरसाइज को कंधों की मांसपेशियों के विकास को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। हालांकि, यदि आप इसे सही तकनीक के साथ करते हैं तो यह छाती के ऊपरी हिस्से और बाहों के साथ-साथ पीठ की मांसपेशियों के निर्माण में भी मदद कर सकता है।

किसी भी वर्कआउट को शुरू करने से पहले, वर्कआउट इंजरी से बचने के लिए शरीर को अच्छी तरह से वार्म-अप करें।

लेटरल फ्रंट रेज एक्सरसाइज को डंबल और बारबेल दोनों के साथ किया जा सकता है। इसी तकनीक के साथ आप और अन्य रेज के एक्सरसाइज भी कर सकते हैं।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

फ्रंट डेल्टोइड्स

कौन इस व्यायाम को कर सकता है

  • इंटरमीडिएट (प्रशिक्षु) लोग इसे कर सकते हैं।

किन उपकरणों की आवश्यकता होती है

  • बारबेल या एक जोड़ी डंबल

सेट और रैप

  • 10-15 रैप के तीन सेट।

व्यायाम करने की तकनीक

  • सबसे पहले अपने हाथों को जांघों के सामने लाते हुए दोनों हाथों में ओवरहैंड ग्रिप के साथ डम्बल पकड़ें।
  • अपने धड़ को सीधा रखें और पैरों की कूल्हों की चौड़ाई से थोड़ा खोल कर रखें।
  • अब बिना अपनी कोहनी को मोड़े, डंबल को अपने कंधे के स्तर तक उठाएं और ऐसे ही एक से दो सेकंड के लिए पकड़े रहें।
  • अब डम्बल को प्रारंभिक स्थिति में वापस लाएं। यह एक रैप है।

टिप्स :

पूरे अभ्यास के दौरान अपनी बाहों को सीधा रखें। यदि आप दोनों डम्बलों को एक साथ उठाने में असमर्थ हैं तो उन्हें एक-एक करके उठाएं। पूरे अभ्यास के दौरान पीठ को सीधा रखते हुए कोर मांसपेशियों पर जोर लगाएं। किसी भी समय अतिरिक्त तनाव के लिए धड़ को बाहर की ओर धकेलें नहीं।

लेटरल फ्रंट रेज एक्सरसाइज की तरह ही साइड रेज एक्सरसाइज भी कई प्रकार से फायदेमंद होते हैं। अपेक्षाकृत यह व्यायाम ​कठिन जरूर होते हैं पर कई सारी मांसपेशियों के विकास में यह महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

  • लेटरल और एंटीरियर डेल्टोइड्स

कौन इस व्यायाम को कर सकता है

  • इंटरमीडिएट (प्रशिक्षु) लोग इसे कर सकते हैं।

किन उपकरणों की आवश्यकता होती है

  • एक जोड़ी डंबल

सेट और रैप

  • 10-15 रैप के तीन सेट।

व्यायाम करने की सही तकनीक

  • सबसे पहले हाथों को अपने बगल में लाते हुए दोनों हाथों में डंबल पकड़ें। हथेलियां एक-दूसरे के आमने-सामने की ओर हों।
  • अपने धड़ को सीधा रखते हुए कोर मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न करें।
  • अब अपनी कोहनी को बिना मोड़े डम्बल को एक साथ उठाएं। हाथों की स्थिति ऐसी हो, जिससे पूरा शरीर 'टी' के आकार का बनता हो।
  • डंबलों को कंधे के स्तर तक ले जाएं और वहां कुछ सेकंड के लिए रोकें।
  • डम्बलों को प्रारंभिक स्थिति में वापस लाएं। यह एक रैप है।

टिप्स :

पूरे अभ्यास के दौरान अपनी बाहों को सीधा रखें। वजन उठाते समय अपनी कोहनी को बाहर की ओर न निकालें।

लेटरल रेज व्यायामों का सबसे कठिन और प्रभावी रूप से बेंट-ओवर लेटरल रेज। इस व्यायाम के दौरान आपको पीछे के डेल्टोइड्स को लक्षित करने के लिए धड़ को मोड़ने की आवश्यकता होती है। इस व्यायाम से कंधों के पीछे की मांसपेशियों को विकसित करने में मदद मिलती है, ताकि कंधों को अधिक गोल रूप दिया जा सके। इस अभ्यास को रिवर्स लेटरल रेज के रूप में भी जाना जाता है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

रियर डेल्टोइड्स

कौन इस व्यायाम को कर सकता है

हाई (प्रशिक्षु-पेशेवर) लोग इसे कर सकते हैं।

किन उपकरणों की आवश्यकता होती है

एक जोड़ी डंबल

सेट और रैप

10-15 रैप के तीन सेट।

व्यायाम की सही तकनीक

  • सबसे पहले ओवरहैंड ग्रिप के साथ दोनों हाथों में डम्बल पकड़ें।
  • डंबलों को अपने बगल की ओर लेकर आएं। इस दौरान दोनों हथेलियां एक-दूसरे के आमने-सामने होनी चाहिए।
  • अब शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुकाएं, लगभग जमीन के समानांतर।
  • अपनी बाहों को सीधा और फैलाकर रखें। कोहनी बिना मोड़े दोनों तरफ कंधे के स्तर तक वजन उठाएं।
  • कुछ सेकंड के लिए ऐसे ही रहें और फिर शुरुआती स्थिति में वजन को नीचे लाएं। यह एक रैप है।

टिप्स :

सामने की ओर झुकते समय अपनी पीठ को सीधा रखें और यह सुनिश्चित करें कि डम्बल आपके पिंडलियों के सामने हों। इस अभ्यास को करते समय डंबल्स को उठाने या नीचे की ओर करने के लिए किन्ही अन्य मांसपेशियों का प्रयोग न करें।

कई ऐसे व्यायाम हैं, जिन्हें विशेष रूप से कंधों में मांसपेशियों को लक्षित करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। लेटरल रेज व्यायामों के विकल्प के तौर पर या साथ में आप इन्हें प्रयोग में ला सकते हैं। निम्न व्यायामों का असर कंधों की मांसपेशियों पर होता है।

फिटनेस को लेकर सक्रिय रहने वालों और बॉडीबिल्डरों के बीच लेटरेल रेज व्यायाम काफी पसंद किया जाता है। चूंकि, इस व्यायाम के दौरान आप कुछ मांसपेशियों को लक्षित ​कर सकते हैं ऐसे में इसके फायदों को देखते हुए इसे जिम सेंटरों में अक्सर प्रयोग में लाया जाता रहा है। कंधों के चारों तरफ की मांसपेशियों के निर्माण के लिए - फ्रंट, साइड और बेंट ओवर लेटरल रेज व्यायामों को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करें। कंधों के चौड़े होने के कारण धड़ स्लिम और आकर्षक दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं यह शरीर के अन्य दूसरे हिस्सों के लिए काफी लाभकारी व्यायामों में से एक है।

लेटरल रेज व्यायामों को अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल करके कई प्रकार की मांसपेशियों का निर्माण और कंधों को मजबूत बनाया जा सकता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि पुरुषों की शारीरिक बनावट को आकर्षक बनाने में लेटरेल रेज व्यायामों का विशेष महत्व हो सकता है।

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References

  1. Jakobsen MD et al. Evaluation of muscle activity during a standardized shoulder resistance training bout in novice individuals. Journal of Strength and Conditioning Research. 2012 Sep;26(9):2515-2522. PMID: 22067242.
  2. Andersen LL et al. Muscle Activation During Selected Strength Exercises in Women With Chronic Neck Muscle Pain. Physical Therapy. 2008 Jun; 88(6): 703–711.
  3. Cao L et al. Effects of Force Load, Muscle Fatigue, and Magnetic Stimulation on Surface Electromyography during Side Arm Lateral Raise Task: A Preliminary Study with Healthy Subjects. BioMed Research International. 2017 Apr; 2017(4): 8943850.
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