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मौजूद वक्त में होने वाली आधे से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हमारी खराब दिनचर्या की वजह से हैं। लंबे समय तक लैपटॉप और फोन पर लगातार काम करने से शरीर की मुद्रा प्रभावित होती है, जो कई सारी समस्याओं को जन्म देती है। ऐसे में अधिकांश लोगों में गर्दन या पीठ में दर्द की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्दन, पीठ और कंधों में होने वाले दर्द की संभावित समस्याओं से बचने के लिए लोगों को हर आधे घंटे पर उठकर थोड़ा घूमना चाहिए। एक ही स्थिति में बैठकर लंबे समय तक काम करने वाले लोगों को इन समस्याओं से बचने के लिए नियमित व्यायाम की भी सलाह दी जाती है।

दैनिक रूप से व्यायाम करके आप शरीर की मांसपेशियों को विकसित करने के साथ ऊतकों और कमजोर मांसपेशियों को शक्तिशाली बना सकते हैं। अगर बात करें कंधों की, तो इससे संबंधित व्यायाम करके न सिर्फ आप कंधों के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं साथ ही मांसपेशियों को ऐसे विकसित कर सकते हैं, जिससे आपके व्यक्तित्व में अलग निखार आएगा।

शोल्डर प्रेस और लेटरल राइज जैसे कंधों के प्र​चलित व्यायामों के अलावा आप शोल्डर श्रग्स व्यायाम को भी प्रयोग में ला सकते हैं। यह व्यायाम कंधों की उन कमजोर मांसपेशियों के लिए वरदान साबित हो सकता है जिनमें चोट और पुराने दर्द का खतरा बना रहता है। इस व्यायाम के दौरान दोनों कंधे को गर्दन से थोड़ा ऊपर की ओर उठाना होता है। व्यायाम के दौरान हाथों में डंबल भी पकड़ा जा सकता है। अतिरिक्त भार के कारण कंधों और गर्दन की मांसपेशियां का तेजी से विकास होता है और वह मजबूत बनती हैं।

  1. शोल्डर श्रग्स व्यायाम के लाभ - Shoulder shrugs exercise ke fayde
  2. शोल्डर श्रग्स व्यायाम के प्रकार - Shoulder shrugs exercise ke types
  3. शोल्डर श्रग्स व्यायाम करने का सही तरीका - Shoulder shrugs exercise karne ka sahi tareeka

शोल्डर श्रग्स व्यायाम के दौरान गर्दन के मध्य भाग की ऊंचाई तक कंधों को ले जाते हुए गर्दन के पीछे की ट्रापेजियस मांसपेशियों को लक्षित किया जाता है। यह मांसपेशियां सिर और गर्दन को हर दिशा में मुड़ने में मदद करती हैं। कंधों की सहायता से हाथों को भी मोड़ने में इन्हीं मांसपेशियों का योगदान रहता है। गर्दन और कंधों को स्थिर करके इनकी मुद्रा को सही करने में भी ट्रापेज़ियस मांसपेशियों का योगदान होता है।

दिन के विभिन्न कार्यों जैसे किसी चीज को उठाने, हाथों को किसी चीज तक पहुंचाने, झुकने और बैठने के दौरान भी यही मांसपेशियां सक्रिय भूमिका निभाती हैं। शोल्डर श्रग्स इन कार्यों को आसानी से करने में सहायक सभी मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ भार को उठाने में भी मदद करता है। डेडलिफ्ट, शोल्डर या ओवरहेड प्रेस के दौरान भी भार उठाने में इन मांसपेशियों की भूमिका रहती है। साल 2011 में डेनमार्क में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को गर्दन में दर्द की समस्या है, उन्हे शोल्डर श्रग्स व्यायाम से काफी लाभ मिला है।

डंबल की मदद से शोल्डर श्रग्स व्यायाम को करना सबसे बेहतर माना जाता है। हालांकि, इस व्यायाम को निम्न तरीकों से भी किया जा सकता है।

  • शोल्डर श्रग्स मशीन
  • डम्बल या केटलबेल श्रग्स
  • बारबेल श्रग्स
  • बिहाइंड द बैक बारबेल श्रग्स

शोल्डर श्रग्स व्यायाम के दौरान अधिक वजन उठाने की स्वतंत्रता होती है, ऐसे में मांसपेशियों के विकास के लिए यह काफी बेहतर व्यायामों में से एक है। व्यायाम से पहले वार्मअप और बाद में वर्कआउट इंजरी से बचने के लिए स्ट्रेचिंग करना न भूलें।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

ट्रेपेजियस, गर्दन, कंधों, पीठ का ऊपरी हिस्सा

किन उपकरणों की होती है आवश्यकता

  • एक बारबेल/ एक जोड़ी डम्बल या केटलबेल्स
  • शोल्डर श्रग्स मशीन

कौन कर सकता है यह व्यायाम

इंटरमीडिएट (प्रशिक्षु) से लेकर अनुभवी तक

सेट और रैप

10-15 रैप के 3 सेट

डंबल से व्यायाम करने की तकनीक

  • सबसे पहले बिल्कुल सीधी अवस्था में खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों में क्षमतानुसार अधिकतम भार वाले डंबल ले लें। दोनों हथेलियां आमने सामने की ओर होनी चाहिए।
  • अब अपने घुटनों को थोड़ा सा मोड़ते हुए और अपने कंधों को कानों की तरफ उठाएं। इस दौरान दोनों हाथ सीधे होने चाहिए।
  • अधिकतम ऊंचाई पर पहुंचकर एक से दो सेकंड के लिए रुकें और फिर धीरे-धीरे कंधों को पूर्ववत स्थिति में नीचे लाएं। यह एक रैप है।

टिप्स : कंधे बिल्कुल सीध में ऊपर और नीचे की ओर बढ़ने चाहिए। किसी अन्य दिशा में कंधों को न घुमाएं। अपनी क्षमता के अनुसार इतना वजन लें, जिससे कंधों को उठाते समय मांसपेशियों में पर्याप्त मात्रा में तनाव उत्पन्न हो। यदि आपको गर्दन में पहले से दर्द जैसी समस्या है, तो इस व्यायाम को बिना किसी भार के कर सकते हैं।

निष्कर्ष

शोल्डर श्रग्स कंधों के साथ-साथ गर्दन के पीछे की मांसपेशियों के निर्माण और उन्हें मजबूती देने में बेहद प्रभावी व्यायाम है। जिन लोगों को गर्दन और कंधे में दर्द की समस्या है, यह व्यायाम उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस व्यायाम के जरिए संबंधित मांसपेशियों को मजबूती और स्थिरता प्राप्त होती है। लेकिन यहां ध्यान रखने की जरूरत है कि इस व्यायाम को सावधानी, सही तकनीक और प्रशिक्षित पेशेवर के मार्गदर्शन में करना चाहिए।

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