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कंपाउंड व्यायामों के जरिए एक ही गतिविधि से कई मांसपेशियों के समूह को ट्रेन किया जाता है और साथ ही इनसे कोर भी मजबूत होती है। इसके अलावा इन व्यायामों के जरिए व्यक्ति अधिक कैलोरी भी बर्न कर पाता है। इसमें मुख्य रूप से स्क्वाट, बेंच प्रेस और शोल्डर प्रेस जैसी एक्सरसाइज शामिल होती हैं। यदि आप अपने शरीर की क्षमता और मजबूती दोनों को एक साथ बढ़ाना चाहते हैं तो इस प्रकर के व्यायाम सबसे ज्याद लाभदायी होते हैं।

कंपाउंड व्यायाम की सबसे मुश्किल और प्रबल एक्सरसाइज होती है डेडलिफ्ट। इस एक्सरसाइज को हर कोई नहीं कर पाता है। इसके अभ्यास के लिए व्यक्ति को कड़ी मेहनत और अनुभव की जरूरत होती है।

डेडलिफ्ट व्यायाम का मतलब ही प्रबल वजन उठाना है। इस गतिविधि में कई लोग अपनी रीढ़ की हड्डी को क्षति पहुंचा देते हैं, इसीलिए इसे बिना किसी अनुभव के करना बेहद खतरनाक हो सकता है। इस कसरत को लेग डे (टांगों के व्यायाम) या बैक डे (पीठ/कमर के व्यायाम) में शामिल किया जा सकता है। 

इस कसरत से कोर में अत्यधिक मजबूती आती है। तो अगर आप कोई ऐसी कसरत करने की सोच रहे हैं, जिससे आप अपनी कई मांसपेशियों के समूह को मजबूत और प्रबल बना सकें तो डेडलिफ्ट एक बेहतरीन विकल्प है।

  1. डेडलिफ्ट क्या है? - What is Deadlift?
  2. डेडलिफ्ट के प्रकार - Types of Deadlift
  3. डेडलिफ्ट से प्रभावित मांसपेशियां - Muscle Targeted by Deadlift
  4. डेडलिफ्ट करने के फायदे - Benefits of Deadlift
  5. डेडलिफ्ट करने का सही तरीका - Deadlift Proper Form
  6. डेडलिफ्ट की सामान्य गलतियां और सुझाव - Common Mistakes and Tips for Deadlift

डेडलिफ्ट एक वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज है जिसमें कई मांसपेशियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यायाम को करने के लिए छह फुट की बारबेल रॉड में वजन वाली प्लेट लगाई जाती हैं जिसे हाथों, कमर, कूल्हों और कंधों के बल से उठाया जाता है। इस व्यायाम से शक्ति, मजबूती, स्थिरता और मसल ग्रोथ में बढ़ोतरी होती है।

डेडलिफ्ट एक ऐसा व्यायाम है, जिसमें आपको सभी रैप शुरुआत से शुरू करने होते हैं। एक रैप पूरा होते ही रॉड को नीचे रख देना होता है और उसके बाद उसे फिर से उठाना होता है। इसमें पिछेल रैप की गतिविधि की कोई मदद नहीं मिलती है। इसलिए इसे डेड लिफ्ट कहा जाता है।

इस कसरत को करने के लिए अधिक उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है, इसके लिए आपको केवल एक बारबेल रॉड और प्लेट्स की जरूरत होती है। इस व्यायाम को आमतौर पर किसी भी वर्कआउट डे में शामिल किया जा सकता है, लेकिन ग्लूट्स और लोअर बैक मुख्य मसल टारगेट होने के कारण अधिकतर लोग इसे या तो लेग डे या बैक डे में शामिल करते हैं।

डेडलिफ्ट को करने के कई तरीके हैं और हर एक प्रकार की गतिविधि का शरीर पर अलग प्रभाव पड़ता है। जैसे कि सामान्य डेडलिफ्ट कूल्हों, ग्लूट्स और कमर को टारगेट करती है, वैसे ही थोड़े से बदलावों के साथ इस गतिविधि से अन्य मांसपेशियों के समूहों को भी ट्रेन किया जाता है जैसे, कंधे, हैमस्ट्रिंग और बांह आदि। हालांकि, डेडलिफ्ट के ज्यादातर प्रकार खासतौर से टांगों को ही ट्रेन करने के लिए किए जाते हैं।

  • सूमो डेडलिफ्ट
  • हेक्स या ट्रैप बार डेडलिफ्ट्स
  • वाइड ग्रिप/स्नैच ग्रिप डेडलिफ्ट
  • स्ट्रेट लेग डेडलिफ्ट/स्टिफ लैग्ड डेडलिफ्ट
  • डेफिसिट डेडलिफ्ट/रैक पुल्लस
  • ब्लॉक डेडलिफ्ट
  • डंबल डेडलिफ्ट
  • सिंगल लेग डेडलिफ्ट
  • हैक डेडलिफ्ट

डेडलिफ्ट के यह सभी प्रकार मुख्य रूप से टांगों की अलग-अलग मांसपेशियों को टारगेट करते हैं। इसलिए इनमें से कोई भी व्यायाम अपनाने से पहले एक बार अपने ट्रेनर से सलाह ले लें।

डेडलिफ्ट कूल्हे या ग्लूट्स की वृद्धि के लिए इतनी महत्वपूर्ण होती है कि यह ग्लूटियस मैक्सिमस की मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव बनाती हैं। ग्लूटियस मैक्सिमस हमारे कूल्हों के ठीक नीचे स्थित होता है। हालांकि, डेडलिफ्ट केवल ग्लूट्स को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि कई अन्य मांसपेशियों को भी ट्रेन करने में मदद करती है। इस व्यायाम की संपूर्ण गतिविधि में चार मांसपेशियों का समूह शामिल होता है। 

  • क्वाड्रीसेप्स - टांगों के सामने की इन मांसपेशियों को अक्सर क्वाड भी कहा जाता है। यह मांसपेशियां कूल्हों के नीचे से लेकर घुटनों के ठीक ऊपर तक स्थित होती हैं।
  • थाई के अंदर का अडक्टर मैग्नस - यह जांघ की अंदरूनी मांसपेशियों का एक प्रकार होता है, जो दोनों टांगों के ग्रोइन भाग के ठीक नीचे स्थित होता है।
  • हैमस्ट्रिंग - जांघ के पीछे का हिस्सा, यह ग्लूट्स के नीचे से लेकर घुटने के जोड़ तक होता है (डेडलिफ्ट के दौरान हैमस्ट्रिंग का केवल निचला हिस्सा ही सक्रिय होता है)।
  • सोलियस - यह एक प्रकार की मांसपेशियां होती हैं जो पिंडली के बीच के भाग में स्थित होती हैं।

डेडलिफ्ट में घुटनों को मोड़ते या सीधे करने से क्वाड्स पर प्रभाव पड़ता है, सोलियस टखने को झुकने और पिंडली को शुरुआती अवस्था पर आने में मदद करते हैं।

डेडलिफ्ट जितनी अधिक मुश्किल होती है उतनी ही अधिक लाभदायी भी होती है। इस कसरत में शरीर की लगभग सभी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जैसे की पीठ, टांगें और कोर। यदि इसको सही गतिविधि के साथ किया जाए तो यह फैट बर्न करने और अन्य व्यायामों के लिए शरीर को तैयार करने में मददगार हो सकती है।

  • फैट कम करने में अत्यधिक प्रभावशाली होती है डेडलिफ्ट -
    • केवल डाइटिंग या डाइटिंग के साथ कार्डियो व्यायाम करने से अधिक फैट बर्न डेडलिफ्ट या अन्य वेट लिफ्टिंग कसरत करने से होता है।
  • डेडलिफ्ट से बेहतर होता है पोस्चर -
    • डेडलिफ्टिंग कोर की मजबूती और स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद करती है। इस कसरत में वह सभी मांसपेशियां इस्तेमाल होती हैं, जिनपर हमारा पोस्चर निर्भर करता है। इसके साथ ही यह रोजाना की गतिविधियों के दौरान कमर को सीधे रखने में मदद करती है।
  • डेडलिफ्ट से रोजाना की गतिविधियों में मिलती है मदद -
    • अन्य व्यायामों जैसे बेंच प्रेस के मुकाबले आप रोजाना के कार्य या वजन उठाने में डेडलिफ्ट की गतिविधियों का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए डेडलिफ्ट करने से अन्य कार्यों जैसे सिलिंडर उठाना या घर में किसी सामान को एक जगह से दूसरी जगह लगाने में आसानी होती है।
  • डेडलिफ्ट कसरत से होती है हार्मोन्स में बढ़ोतरी -
    • डेडलिफ्ट के 8 से 10 रैप शरीर में टेस्टोस्टीरोन और ग्रोथ हार्मोन के स्तर को बढ़ाते हैं। टेस्टोस्टीरोन मसल ग्रोथ और मांसपेशियों को रिपेयर करने की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं जबकि, ग्रोथ हार्मोन ऊतकों को ठीक करने, हड्डियों को मजबूत बनाने और वसा को कम करने में मदद करते हैं।

मजबूती और प्रबलता के अलावा डेडलिफ्ट टांगों और ग्लूट्स की मासंपेशियों को बढ़ाने में मदद करती हैं और कूल्हों के आसपास जमा वसा को कम करती है।

अनुभव (एक्सपीरियंस लेवल)
पेशेवर

आवश्यक उपकरण
बारबेल रॉड (छह फुट लंबी)
वजन (वेटेड प्लेट्स), क्षमता अनुसार

सेट और रैप
10 से 15 रैप के 3 सेट

कैसे करें

  1. डेडलिफ्ट करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बॉडी पोस्चर होता है, इसीलिए पोजीशन का खास ध्यान रखें
  2. शुरुआत में बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं
  3. पैरों के बीच आधा फुट गैप बनाएं और घुटनों को हल्का मोड़ लें
  4. कूल्हों को जितना हो सके उतना पीछे की ओर खींचे
  5. टांगों के सामने की बजाय बारबेल को बाहर से पकड़े
  6. अपनी एड़ियों को फर्श की ओर दबाएं और वजन उठाते समय सामने की ओर देखते रहें
  7. अब रॉड समेत सीधे खड़े हो जाएं
  8. ध्यान रहे कि गतिविधि के दौरान रीढ़ की हड्डी मुड़े या झुके नहीं
  9. इस अवस्था में कूल्हों को रॉड की तरफ धकेलें
  10. अब रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए समान गतिविधि के साथ शुरुआती पोजीशन में आ जाएं, यह एक रैप है

व्यायाम को करने का मुख्य लक्ष्य मांसपेशियों को ट्रेन करना होता है। इस दौरन किसी भी प्रकार की गलती शरीर को लाभ पहुंचाने की बजाय उसपर दुष्प्रभाव डाल सकती है। डेडलिफ्ट करते समय छोटी सी चूक के कारण कई लोग जीवन भर के लिए अपनी रीढ़ की हड्डी गवा चुके हैं। इसलिए इस व्यायाम को करते समय निम्न गलतियां न करें -

  • अक्सर लोग डेडलिफ्ट करते समय सही पोजीशन नहीं बना पाते हैं जिसके कारण चोट लगने का खतरा रहता है। चोट या स्लिप डिस्क से बचने के लिए पूरी गतिविधि के दौरान शरीर को बिल्कुल सीधा रखें। परफेक्ट पोजीशन पाने के लिए खाली या बिना रॉड के अभ्यास करें। पोजीशन में महारत हासिल करने के बाद आपकी वजन उठाने की क्षमता तेजी से बढ़ने लगेगी।
  • अधिकतर लोग जिम में दूसरों की मदद लेना पसंद नहीं करते हैं। लोगों को लगता है कि वह किसी अन्य व्यक्ति से पूछते हुए मूर्ख लगेंगे, जबकि असल में वह गलत गतिविधि करते समय ज्यादा मूर्ख लग सकते हैं। यहां तक कि डेडलिफ्ट जैसी कठिन कसरत के दौरान अच्छे से अच्छे पहलवान को भी मदद की जरूरत पड़ जाती है। तो अपनी गलतियों और कमियों को पहचानने के लिए किसी व्यक्ति की मदद ले लें या फिर अपने फोन या कैमरा में खुद की गतिविधि को रिकार्ड करके देखें और उसे ठीक करने की कोशिश करें।
  • रॉड को नीचे रखते समय अधिक सावधानी बरतें, क्योंकि यह रॉड को ऊपर उठाने से अधिक कठिन और जोखिम भरा होता है। यदि आप रॉड को नीचे रखने में गलती करते हैं तो इसके कारण व्यायाम के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। रॉड को एकदम से न छोड़ें, उसे धीरे-धीरे जमीन पर रखने की कोशिश करें। इसके अलावा रॉड को नीचे रखने की गतिविधि का अलग से अभ्यास करें।
  • पिंडली को रॉड से चिपका कर या बहुत पास न रखें। ऐसा करने से आप अपने ग्लूटेस और हैम्स्ट्रिंग को सही तरीके से ट्रेन नहीं कर पाएंगे।
  • धड़ को अत्यधिक ऊपर न करें। कई व्यक्ति कमर को सीधा रखने का मतलब धड़ को ऊंचा उठाना समझ लेते हैं, जबकि ऐसा करने पर कमर में दर्द की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। डेडलिफ्ट को स्क्वाट न समझें इसमें आपके धड़ का सीधा होना आवश्यक है न कि ऊंचा उठा होना।
  • कमर को गतिविधि के दौरान बिल्कुल न मुड़ने दें। ऐसा करने से स्लिप डिस्क, मोच, दर्द व अन्य कमर की समस्याएं विकसित हो सकती हैं। वजन उठाने से पहले लंबी सांस पेट में भर लें और रॉड के ऊपर आने पर छोड़ें। सांस को पेट में भर लेने से रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाती है जिससे पीठ संबंधी समस्याओं की आशंका कम हो जाती है।

वैकल्पिक व्यायाम

  • बारबेल रैक पुल्ड डेडलिफ्ट
  • फार्मर्स वॉक
  • बारबेल हिप थ्रस्ट
  • सिंगल लेग डेडलिफ्ट
और पढ़ें ...

References

  1. Camara, Kevin D. et al. An Examination Of Muscle Activation And Power Characteristics While Performing The Deadlift Exercise With Straight And Hexagonal Barbells. The Journal of Strength and Conditioning Research. 2016 May; 30(5):1183-1188.
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  3. Cholewa, Jason M. et al. Anthropometrical Determinants of Deadlift Variant Performance. J Sports Sci Med. 2019 Sep; 18(3): 448–453. PMID: 31427866.
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