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प्यार और सेक्स दोनों ही हमारे जीवन के महत्वपूर्ण अंग है। दोनों को ही जीवन के लिए जरूरी माना जाता है। लेकिन, 'क्या प्यार ही सेक्स हैं' के विषय पर कई तरह के विवाद हैं। एक वर्ग कहता है कि यह दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जबकि दूसरा वर्ग इन दोनों को अलग-अलग बताता है।

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 प्यार में हमारी भावनाएं जुड़ी होती है, जबकि सेक्स हमारे शरीर की जरूरत होती है। यह दोनों ही हमें मानसिक शांति और पूर्णता की ओर ले जाते हैं। प्यार और सेक्स के बिना हर व्यक्ति अधूरा है। लेकिन फिर भी लोगों के मन में प्यार और सेक्स को लेकर कई तरह के सवाल हैं।

तो चलिए जानते हैं कि क्या प्यार ही सेक्स है?

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  1. किस तरह पहचाने सेक्सुअल आर्कषण को - Kis tsrah pehchane sexual akarshan ko
  2. खुद से सवाल करें कि क्या आपको प्यार है - Khud se sawal kare ki kya apko pyar hai
  3. अपनी जरूरतों को महसूस करें - Apni jaruraton ko mahsoos kare
  4. साथी के साथ मिलकर करें कोई काम - Saathi ke sath milkar kare koi kaam
  5. एक दूसरे के विचारों को जानें - Ek doosre ke vichar jane
  6. प्यार और सेक्स के अंतर को पहचानने के लिए यह बातें याद रखें - Pyar or sex ke antar ko pahchanane ke liye yah baate yaad rakhe
  7. क्या सेक्स का मतलब प्यार है? के डॉक्टर

इस तरह के रिलेशनशिप में व्यक्ति का आर्कषण सेक्स की तरफ ज्यादा रहता है। इतना ही नहीं सेक्स के प्रभाव से कायम हुए रिश्ते में व्यक्ति अपना पूरा रिश्ता भावनाओं के आदान-प्रदान से ज्यादा सेक्सुअल जिदंगी पर केंद्रित करता है। इस तरह के रिश्ते में यदि एक साथी प्यार में भावनात्मक रूप से एवं दूसरा सिर्फ सेक्स के लिए जुड़ा हो, तो कुछ समय बाद कई सारी परेशानियां आने लगती हैं। सेक्सुअल आर्कषण के लिए जुड़ा व्यक्ति हर समय बस केवल सेक्स से जुड़ी कल्पनाएं ही करता रहता है।

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सेक्सुअली आर्कषण सिर्फ कुछ ही समय के लिए रहता है, जबकि प्यार काफी गहरा होता है। आपके रिश्ते में प्यार है या नहीं, इसके लिए आपको खुद से ही यह सवाल करना होगा। इसके लिए आप दोनों को साथ में बैठकर रिश्ते पर बातें कर, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। इसके अलावा आपको सामने वाले व्यक्ति के साथ रोमांटिक जुड़ाव को महसूस करना होगा और उसके साथ बिताए पलों को याद करना होगा।

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एक अच्छे साथी में निम्न गुण होने चाहिए -

  • अपनी उन्नती के लिए सजग हो और एक अच्छा इंसान हो।
  • अपनी कमजोरियों को पहचाने और उनको दूर करें।
  • भावनात्मक रूप से जुड़ने वाला हो।
  • जिम्मेदारी को समझने और सम्मान पाने का हकदार हो।
  • आपके साथ विश्वास कायम रखें और रिश्ते में सामने वाले की भावनाओं की कद्र करने वाला हो।
  • अपने बारे में न सोचकर आपकी खुशी को महत्व देना वाला हो।

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प्यार और सेक्स ये दोनों ही विचार व्यक्ति के दिमाग में रहते हैं और यह ही समाज को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। सेक्सुअल आकर्षण, रोमांस और प्यार की भावनाओं का तालमेल ही आपके रिश्ते में प्यार को बनाए रखता है।

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आपको अपने बीच प्यार को बढ़ाने के लिए एक दूसरे के साथ रहना होगा। आप इस तरह के खेल व काम में हिस्सा ले सकते हैं जिन्हे आप दोनों साथ में कर सकें। जब आप दोनों ही किसी एक काम को करने में साथ रहेंगे, तो इससे आपके प्यार में इजाफा होगा। यदि आप साथ में रहने के बावजूद भी प्यार को महसूस नहीं कर पा रहें हैं, तो इस तरह का रिलेशनशिप सेक्सुअल आकर्षण के कारण ही जुड़ा होता है।

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अगर आपको अपने रिश्ते के बारे में गहराई से जानना है, तो आप दोनों को ही आपस में इस बारे में बात करनी चाहिए। विचारों के आदान-प्रदान से ही आप यह समझ पाएंगे कि सामने वाला आपसे क्या चाहता है। अगर उनके विचारों के केंद्र में केवल और केवल सेक्स ही हो और वह प्यार को कोई तवोज्जो नहीं देते हैं तो समझें कि आपका यह रिश्ता सेक्सुअल आकर्षण की वजह से ही चल रहा है। वहीं, अगर सामने वाला रिश्ते में प्यार को भी महत्व देता है तो उसके लिए इस रिश्ते का नजरिया दूसरा हो सकता है।

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  • सेक्स एक ऐसा विषय है, जिस पर कोई भी विचार विमर्श करना अच्छा नहीं मानता। (और पढ़ें - महिलाओं की यौन समस्या)
  • कई लोगों मानते हैं कि सेक्स करने के लिए प्यार करना जरूरी नहीं है।
  • जबकि भारत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि जब तक वह किसी से प्यार नहीं करते, तब तक वो किसी के साथ सेक्स नहीं कर सकते। यानि की प्यार के रिश्ते के बाद सेक्स होना किसी तरह की बुराई नहीं है। (और पढ़ें - सेक्स से जुड़े सच)
  • जबकि कई लोग सिर्फ अपनी शरीर की भूख को शांत करने के लिए सेक्स करते हैं। इस तरह के लोगों का प्यार से कोई लेना देना नहीं होता है।
  • कुछ भावनात्मक और संवदेनशील लोग भी मौजूद हैं जो मानते हैं कि प्यार के आभाव में सेक्स करना संभव नहीं है। ये लोग मानते हैं कि जब आप किसी के साथ सेक्स करते हैं, तो उनके साथ प्यार का भावनात्मक रिश्ता जरूर होना चाहिए। वहीं अगर आप किसी भी व्यक्ति के साथ प्यार की भावना के साथ जुड़ गए हैं, तो आपको उसके साथ शारीरिक क्रिया करना जरूरी नहीं रह जाता है। (और पढ़ें - यौन सहमति क्या है)
  • कई लोग मानते हैं कि जब दो प्रेम करने वाले एक दूसरे से भावनात्मक और मानसिक तौर पर जुड़ते हैं, तो शारीरिक संबंध रखना या बनाना केवल औपचारिकता ही रह जाती है। वहीं इसके विपरीत कुछ लोग सेक्स को आपसी रिश्ते को करीब लाने के लिए मददगार मानते हैं।
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  • समाज में कई लोग प्यार और शारीरिक संबंध को अलग ही मानते हैं।

कई सारी रिसर्च बताती है कि कुछ दंपत्तियों के बीच शारीरिक संबंध न होने पर उनका रिश्ता तलाक तक पहुंच गया। शारीरिक संबंध पति-पत्नी के बीच के रिश्ते को मजबूत करने वाली क्रिया मानी जाती है। लेकिन यह प्रश्न इसीलिए पेचीदा हो जाता है, क्योंकि हर व्यक्ति इस प्रश्न को लेकर अपनी सोच के अनुसार ही जवाब देता है। कुछ इसको अलग-अलग मानते हैं तो कुछ इसको एक दूसरे का पूरक।

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