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  1. बर होल सर्जरी क्या होती है? - Burr Hole Surgery kya hai in hindi?
  2. बर होल सर्जरी क्यों की जाती है? - Burr Hole Surgery kab kiya jata hai?
  3. बर होल सर्जरी होने से पहले की तैयारी - Burr Hole Surgery ki taiyari
  4. बर होल सर्जरी कैसे किया जाता है? - Burr Hole Surgery kaise hota hai?
  5. बर होल सर्जरी के बाद देखभाल - Burr Hole Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. बर होल सर्जरी की जटिलताएं - Burr Hole Surgery me jatiltaye

न्यूरोसर्जन (Neurosurgeon; तंत्रिका-विज्ञान विशेषज्ञ) द्वारा मस्तिष्क की सर्जरी के लिए खोपड़ी (Skull; स्कल) में किये जाने वाले छोटे छेदों को बर होल्स (Burr Holes) कहते हैं। जब रक्त जैसे द्रव बढ़ने लगते हैं और मस्तिष्क के ऊतकों को संकुचित करने लगते हैं, तो बर होल्स की मदद से मस्तिष्क पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है। 

बर होल्स की ज़रुरत पड़ने की सबसे आम वजह है सबड्यूरल हिमाटोमा (Subdural Hematoma)। ऐसा तब होता है जब सिर की किसी मामूली चोट के बाद ड्यूरा परत (Dura Layer) के नीचे धीरे-धीरे रक्त बनने या बढ़ने लग जाए। यहाँ नसें नाज़ुक होती हैं और आसानी से टूट सकती हैं, खासकर वृद्ध लोगों में। इससे सिरदर्द, व्यवहार में बदलाव, मिर्गी और एक-तरफ की मांसपेशियों की कमजोरी जैसे लक्षण पाए जा सकते हैं। अगर रक्त बढ़ना बंद न हुआ तो इससे कोमा या मस्तिष्क की क्षति हो सकती है।

अन्य भी कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से आपको बर होल प्रक्रिया करवाने की ज़रुरत पड़ सकती है:

  1. अचानक से सबड्यूरल हिमाटोमा हो जाना 
  2. लम्बे समय से (बहुकालिक) सबड्यूरल हिमाटोमा होना 
  3. एपीड्यूरल हिमाटोमा (Epidural Hematona)
  4. मस्तिष्क के कई प्रकार के कैंसर (और पढ़ें – कैंसर के प्रकार)
  5. मेनिन्जेस (Meninges) के आसपास पस बनना 
  6. जलशीर्ष (Hydrocephalus; दिमाग के पर्दों में पानी आ जाना)
  7. मस्तिष्क से ही कई प्रकार के रक्तस्त्राव (यह एक दुर्लभ स्थिति है)

बड़े हिमाटोमा या ठोस थक्कों की स्थिति में, आपको चिकित्सक द्वारा मस्तिष्क के आसपास का पदार्थ को हटाने के लिए अन्य प्रक्रिया करवाने के लिए कहा जा सकता है। उदाहरणतः सर्जन मस्तिष्क का उपचार करने के लिए खोपड़ी से हड्डी का बड़ा टुकड़ा निकाल सकते हैं। इसे क्रेनियोटॉमी (Craniotomy; कपाल-उच्छेदन) कहते हैं। या, सर्जन हड्डी को वापिस उसकी ही जगह पर लगा सकते हैं , जिसे क्रेनियेक्टॉमी (Craniectomy) कहते हैं।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गई दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग/ खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

यह प्रक्रिया आम तौर न्यूरोसर्जन द्वारा की जाती है, जो विशेषज्ञताप्राप्त नर्सों की एक टीम के साथ काम करते हैं। प्रक्रिया निम्न क्रम में की जाती है:

  1. प्रक्रिया के पहले, सिर के बाल काट दिए जाते हैं। 
  2. एनेस्थीसिया का प्रभाव शुरू होते ही, प्रक्रिया शुरू की जाती है। 
  3. सिर की त्वचा पर चीरा काटा जाता है। 
  4. विशेष ड्रिल की मदद से, सर्जन खोपड़ी पर एक या दो छोटे छिद्र करते हैं जिससे ड्यूरा को देखा जा सके। 
  5. सर्जन ड्यूरा को खोलते हैं और खोपड़ी पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त द्रव को निकाल देते हैं। 
  6. सर्जन, फिर, द्रव को निकालने के लिए एक अस्थायी ड्रेन (Temperory Drain) लगा सकते हैं या ड्यूरा और सिर की त्वचा को बंद कर दिया जायेगा। 

आपको सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक अस्पताल में ही रहना होगा। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा आपकी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जायेगा। 

आपको चीरे के स्थान पर दर्द महसूस हो सकता है। अक्सर दर्द निवारक दवाओं से यह ठीक हो जाता है। 

आप सर्जरी के बाद सामान्य रूप से खा या पी सकते हैं। जैसे ही आप ठीक महसूस करने लगें और आप अधिकतर गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं। ऐसी कोई भी गतिविधियां न करें जिनसे सिर पर झटका या ज़ोर पड़े। जब तक चिकित्सक न कहे तब तक ड्राइविंग न करें। आपको घाव का ध्यान रखने के लिए डॉक्टर द्वारा निर्देश दिए जायेंगे। डॉक्टर द्वारा दी गयी हर सलाह का पालन करें।

निम्न परेशानियां होने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें:

  1. मिर्गी/ दौरे
  2. मांसपेशियों की कमज़ोरी
  3. भ्रमित होना
  4. बुखार या गर्दन में अकड़न (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)

ध्यान रखें कि आप डॉक्टर से नियमित रूप से चेक-अप करवाते रहें। डॉक्टर से फॉलो-अप करवाते रहना बहुत आवश्यक है।

इस सर्जरी से जुड़े जोखिम निम्न हैं:

  1. रक्तस्त्राव
  2. संक्रमण
  3. रक्त के थक्कों का गठन
  4. मस्तिष्क पर चोट लगना
  5. दिल का दौरा या स्ट्रोक (और पढ़ें – दिल का दौरा के लक्षण)
  6. एनेस्थीसिया के दुष्प्रभाव
  7. लक्षणों से निजात न पाना (जिससे किसी अन्य सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है)

उम्र, स्वास्थ्य और सामान्य स्वास्थ के अनुसार जोखिम और जटिलताएं अलग-अलग हो सकती हैं।

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