बर होल सर्जरी मेनिंजस (ऊतकों से बनी मस्तिष्क के चारों ओर मौजूद एक परत) से जमा हुआ रक्त या द्रव निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी है। बर होल खोपड़ी में बनाए जाते हैं। द्रव ड्यूरा परत के ऊपर जम सकता है जो मेनिंजस की सबसे बाहरी परत होती है, इसे सबड्यूरल हिमाटोमा कहा जाता है। बर होल मस्तिष्क पर पड़ा दबाव कम होता है।

आपको सर्जरी के दौरान सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाना है। इस सर्जरी के दौरान न्यूरोसर्जन आपकी खोपड़ी में एक विशेष उपकरण की मदद से छेद करेंगे। इसके बाद इस द्रव को निकाल लिया जाएगा। प्रक्रिया के बाद आपको घाव को सूखा और साफ रखने के लिए कहा जाएगा। आपसे ऐसी क्रियाएं करने से मना किया जाएगा, जिनसे मस्तिष्क पर दबाव पड़े।

बर होल सर्जरी से मस्तिष्क में रक्तजमाव जैसे लक्षणों से आराम मिलता है।

  1. बर होल सर्जरी क्या होती है? - Burr Hole Surgery kya hai in hindi?
  2. बर होल सर्जरी क्यों की जाती है? - Burr Hole Surgery kab kiya jata hai?
  3. बर होल सर्जरी होने से पहले की तैयारी - Burr Hole Surgery ki taiyari
  4. बर होल सर्जरी कैसे की जाती है? - Burr Hole Surgery kaise hoti hai?
  5. बर होल सर्जरी के बाद देखभाल - Burr Hole Surgery hone ke baad dekhbhal

हमारा मस्तिष्क खोपड़ी के अंदर होता है और मेनिंजस नामक एक परत से सुरक्षित होता है। मेनिंजस में कई सारी रक्त  वाहिकाएं होती हैं, जो कि मस्तिष्क से रक्त को ले जाती हैं और मस्तिष्क तक रक्त को लाती हैं। मस्तिष्क में किसी चोट के कारण किसी रक्त वाहिका के फटने से रक्तस्त्राव हो सकता है और मेनिंजस के नीचे ड्यूरा परत में रक्त जम सकता है। रक्त के इस जमाव को सब ड्यूरल हिमेटोमा कहा जाता है। आमतौर पर हिमेटोमा रक्त का ऐसा जमाव होता है, जिससे सूजन आ जाती है। यदि चोट या चीरा काफी बड़ा है तो रक्त का जमाव अधिक तेजी से होगा और इसे एक्यूट हिमेटोमा कहा जाएगा। यदि रक्त ड्यूरा परत के ऊपर जम जाता है तो इसे एपीड्यूरल हिमेटोमा कहा जाता है। रक्त का यह जमाव खोपड़ी की तरफ स्वयं को धकेल सकता है और मस्तिष्क पर दबाव बना सकता है।

बर होल सर्जरी मेनिंजस में जमे इसी अतिरिक्त रक्त को निकालने के लिए की जाती है, ताकि मस्तिष्क से दबाव को कम किया जा सके। सर्जरी के दौरान मस्तिष्क में छोटे छेद बनाए जाते हैं ताकि अतिरिक्त द्रव को निकाला जा सके।

बर होल सर्जरी की जरूरत पड़ने की सबसे आम वजह है सबड्यूरल हिमाटोमा। ऐसा तब होता है जब सिर की किसी मामूली चोट के बाद ड्यूरा परत के नीचे धीरे-धीरे रक्त बनने या बढ़ने लग जाए। यहां नसें नाज़ुक होती हैं और आसानी से टूट सकती हैं, खासकर वृद्ध लोगों में। इससे सिरदर्द, व्यवहार में बदलाव, मिर्गी और एक-तरफ की मांसपेशियों की कमजोरी जैसे लक्षण पाए जा सकते हैं। अगर रक्त बढ़ना बंद न हुआ तो इससे कोमा या मस्तिष्क की क्षति हो सकती है।

अन्य भी कारण हो सकते हैं, जिनकी वजह से आपको बर होल प्रक्रिया करवाने की जरूरत पड़ सकती है :

  1. अचानक से सबड्यूरल हिमाटोमा हो जाना
  2. लम्बे समय से (बहुकालिक) सबड्यूरल हिमाटोमा होना
  3. एपीड्यूरल हिमाटोमा
  4. मस्तिष्क के कई प्रकार के कैंसर
  5. मेनिंजस के आसपास पस बनना
  6. जलशीर्ष (दिमाग के पर्दों में पानी आ जाना)
  7. मस्तिष्क से ही कई प्रकार के रक्तस्त्राव (यह एक दुर्लभ स्थिति है)

बड़े हिमाटोमा या ठोस थक्कों की स्थिति में, आपको चिकित्सक द्वारा मस्तिष्क के आसपास का पदार्थ को हटाने के लिए अन्य प्रक्रिया करवाने के लिए कहा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर सर्जन मस्तिष्क का उपचार करने के लिए खोपड़ी से हड्डी का बड़ा टुकड़ा निकाल सकते हैं। इसे क्रेनियोटॉमी कहते हैं या सर्जन हड्डी को वापिस उसकी ही जगह पर लगा सकते हैं , जिसे क्रेनियेक्टॉमी कहते हैं।

यह सर्जरी आपातकालीन स्थिति में की जा सकती है या फिर यह योजना के साथ की जा सकती है। इस सर्जरी के लिए निम्न तैयारी करने की जरूरत होती है -

  • डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहेंगे जैसे सिटी स्कैन। ताकि आपके मस्तिष्क में भरे द्रव के बारे में पता लगाया जा सके
  • आप जो भी दवाएं ले रहे हैं उनके बारे में डॉक्टर को बता दें। चाहे उनकी सलाह डॉक्टर द्वारा दी गयी हो अथवा नहीं जैसे एस्पिरिन
  • आपसे रक्त को पतला करने वाली दवाओं को न लेने के लिए कहा जाएगा 
  • धूम्रपान से ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इसीलिए आपसे धूम्रपान छोड़ने को कहा जाएगा
  • आपको प्रक्रिया के पहले की मध्यरात्रि से भूखे रहने को कहा जाएगा 
  • यदि आपको किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं तो इनके बारे में डॉक्टर को बता दें जैसे बुखार 

यह प्रक्रिया आम तौर न्यूरोसर्जन द्वारा की जाती है, जो विशेषज्ञता प्राप्त नर्सों की एक टीम के साथ काम करते हैं। प्रक्रिया निम्न क्रम में की जाती है :

  • प्रक्रिया के पहले, सिर के बाल काट दिए जाते हैं
  • एनेस्थीसिया का प्रभाव शुरू होते ही, प्रक्रिया शुरू की जाती है
  • सिर की त्वचा पर चीरा लगाया जाता है
  • विशेष ड्रिल की मदद से, सर्जन खोपड़ी पर एक या दो छोटे छिद्र करते हैं, जिससे ड्यूरा को देखा जा सके
  • सर्जन ड्यूरा को खोलते हैं और खोपड़ी पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त द्रव को निकाल देते हैं
  • सर्जन, फिर, द्रव को निकालने के लिए एक अस्थायी ड्रेन लगा सकते हैं या ड्यूरा और सिर की त्वचा को बंद कर दिया जाएगा

सर्जरी के बाद आपको कुछ दिनों के लिए अस्पताल में रहने को कहा जाएगा। आपको खोपड़ी में चीरा लगे स्थान पर हल्का सा दर्द भी हो सकता है। ओटीसी दवाओं को लेने से दर्द कम हो सकता है।

आपको सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक अस्पताल में ही रहना होगा। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा आपकी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाएगा।

आपको चीरे के स्थान पर दर्द महसूस हो सकता है। अक्सर दर्द निवारक दवाओं से यह ठीक हो जाता है।

आप सर्जरी के बाद सामान्य रूप से खा या पी सकते हैं। जैसे ही आप ठीक महसूस करने लगें और आप अधिकतर गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं। ऐसी कोई भी गतिविधियां न करें, जिनसे सिर पर झटका या जोर पड़े। जब तक चिकित्सक न कहें तब तक ड्राइविंग न करें। आपको घाव का ध्यान रखने के लिए डॉक्टर द्वारा निर्देश दिए जाएंगे। डॉक्टर द्वारा दी गयी हर सलाह का पालन करें।

निम्न परेशानियां होने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें -

  1. मिर्गी/ दौरे
  2. मांसपेशियों की कमज़ोरी
  3. भ्रमित होना
  4. बुखार या गर्दन में अकड़न

ध्यान रखें कि आप डॉक्टर से नियमित रूप से चेक-अप करवाते रहें। डॉक्टर से फॉलो-अप करवाते रहना बहुत आवश्यक है।

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संदर्भ

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