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एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी रक्त वाहिकाओं से संबंधित दो अलग-अलग चिकित्सा प्रक्रियाएं हैं। संभावित हृदय की समस्या के लिए आपकी रक्त वाहिकाओं की जांच या परीक्षण करने के लिए एंजियोग्राफी का उपयोग किया जाता है, जबकि एंजियोप्लास्टी में समस्या का इलाज करने के लिए संकुचित धमनियों को चौड़ा किया जाता है।

एंजियोग्राफी क्या है? 

रक्त संचार में रुकावट का पता लगाने के लिए धमनी संबंधी रक्त वाहिकाओं की जांच करने की प्रक्रिया को एंजियोग्राफी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में मिलने वाले चित्र या परिणाम को एंजियोग्राम कहा जाता है। एंजियोग्राफी के दौरान, एक विशेष डाई (जिसे कॉन्ट्रास्ट मीडियम' कहा जाता है) को एक महीन ट्यूब या कैथेटर के जरिए कमर या बांह की धमनी में इंजेक्ट किया जाता है। यह रक्त वाहिकाओं में होने वाली किसी भी संभावित समस्या का पता लगाती है और डॉक्टरों द्वारा आगे की कार्रवाई तथा कोर्स निर्धारित करने के लिए तुरंत एक्स-रे करवाया जाता है।

आमतौर पर एंजियोग्राफी की प्रक्रिया सुरक्षित और दर्द रहित होती है जिसमें लगभग 30 मिनट से दो घंटे तक का समय लग सकता है। इस प्रक्रिया से कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। एंजियोग्राफी के बाद एक या दो सप्ताह के लिए कोई चोट या त्वचा छीलना आम बात है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में डाई से गंभीर एलर्जी होने, चक्कर आने या सांस की कमी, स्ट्रोक अथवा अंदरूनी रक्तस्राव के कारण किडनी को नुकसान पहुंचने की शिकायत हो सकती है। हालांकि, ये दुष्प्रभाव केवल कुछ समय के लिए रहते हैं और इनका इलाज किया जा सकता है।

निम्नलिखित स्थितियों के दौरान एंजियोग्राफी करवाने की सलाह दी जा सकती है:

  • जब आपको हृदय में रक्त प्रवाह कम होने के कारण एनजाइना या छाती में दर्द महसूस हो
  • एथेरोस्क्लेरोसिस या धमनियों के संकुचित होने का पता लगाने के लिए, जिससे स्ट्रोक या हार्ट अटैक पड़ने खतरा रहता है
  • अवरुद्ध रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो
  • पैरों में रक्त की आपूर्ति रोकने वाले परिधीय धमनी रोग की पहचान करने के लिए 
  • किडनी या फेफड़ों (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) में रक्त की आपूर्ति में आ रही रुकावट की जांच करने के लिए

एंजियोप्लास्टी क्या है?

धमनी में अवरूद्ध आने की स्थिति में, डॉक्टर बड़ी सर्जरी से बचने के लिए एंजियोप्लास्टी का सुझाव दे सकते हैं। जैसा की ऊपर बताया गया है कि इस प्रक्रिया में कैथेटर या छोटे ट्यूब को धमनी में रुकावट वाली जगह पर डाला जाता है। कैथेटर पर एक विशेष गुब्‍बारे को पानी के प्रेशर से धमनी में रुकावट वाली जगह पर फुलाया जाता है।

पानी का यह दबाव खून के दबाव (ब्लड प्रेशर) से अधिक होता है एवं इस प्रकार धमनी में आ रही रुकावट से राहत मिलती है तथा रक्त प्रवाह सुचारु होता है। इसके बाद गुब्बारे से पानी निकाल कर उसे वापस निकाल लिया जाता है। इसे आमतौर पर बैलून एंजियोप्लास्टी के नाम से जाना जाता है।

जब तक कि धमनी में आ रही रुकावट खुल नहीं जाती तब तक डॉक्टर या रेडियोलॉजिस्ट को ये प्रक्रिया कई बार दोहरानी पड़ सकती है। यदि इस स्तर पर भी धमनी में आ रही रुकावट दूर नहीं होती है, तो चिकित्सक धमनी की दीवारों को अलग करने और रक्त प्रवाह में सुधार लाने के लिए धमनी के अंदर एक स्टेंट लगा सकते हैं। ये स्टेंट वायर धातु मेष से बना होता है जिस पर धमनी को खुला रखने के लिए कभी-कभी दवा लगाई जाती है।

एक से ज्‍यादा धमनियों में अवरोध होने या मधुमेह जैसी अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर कोरोनरी धमनी बाईपास सर्जरी करवाने की सलाह दी जा सकती है। इसमें शरीर के दूसरे हिस्से से रक्त वाहिका लेकर अवरुद्ध धमनियों में बाईपास किया जाता है।

एंजियोग्राफी की तरह ही, एंजियोप्लास्टी भी एक सुरक्षित प्रक्रिया है और इसके कम से कम दुष्प्रभाव होते हैं, लेकिन इसमें रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसके अलावा कुछ निम्न जटिलताएं भी आ सकती हैं:

  • गंभीर रूप से संकीर्ण वाहिका जिसे गुब्बारा फुलाए जाने के कई प्रयासों के बावजूद ठीक करना असंभव हो
  • स्टेंट का उपयोग ना किए जाने की स्थिति में धमनी का फिर से संकुचित हो जाना
  • एंजियोग्राफी की तुलना में खून बहने का ज्‍यादा खतरा रहता है
  • एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया असफल होने पर तत्काल सर्जरी करने की जरूरत पड़ सकती है

एंजियोग्राफी की तरह ही, एंजियोप्लास्टी के दौरान भी कुछ मरीज़ों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा, कोरोनरी धमनी को नुकसान, किडनी से संबंधित समस्याएं, स्ट्रोक या अनियमित दिल की धड़कन होने का खतरा रहता है। इस स्थिति में पेसमेकर की आवश्यकता पड़ सकती है।

एंजियोप्लास्टी सर्जरी के सफल होने के बाद मरीज़ एक सप्ताह के अंदर ठीक होकर अपने घर जा सकता है। मरीज़ को कुछ समय के लिए खून पतला करने वाली दवा भी दी जाती है।

शरीर से डाई को बाहर निकालने के लिए अत्‍यधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा डॉक्टर मरीज़ को रिकवरी के दौरान भारी वजन न उठाने और किसी भी तरह की मुश्किल से बचने के लिए धूम्रपान एवं शराब छोड़ने की सलाह देते हैं। अपने डॉक्टर को अपनी रिकवरी के बारे में बताते रहें। यदि कैथेटर लगाने वाली जगह पर सूजन, खून बहने या रंग में बदलाव आ रहा है तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। इसके अलावा आपको कमजोरी, बेहोशी या छाती में दर्द महसूस हो रहा है तो भी अपने डॉक्‍टर से इस बारे में बात करें।

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