एसिड फास्ट बैक्टीरिया (Acid Fast Bacteria) कल्चर या माइकोबैक्टीरिया कल्चर का इस्तेमाल ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis/TB) की जांच करने के लिए किया जाता है, जो 'ट्यूबरकुलोसिस माइकोबैक्टीरिया' के कारण होता है। इस टेस्ट में आमतौर पर थूक का सैंपल लिया जाता है, जिसका लेबोरेट्री में परीक्षण किया जाता है। ट्यूबरकुलोसिस या किसी अन्य प्रकार के बैक्टीरिया संक्रमण की जांच करने के लिए डॉक्टर इस टेस्ट करवाने को कहते हैं।

इस टेस्ट के दौरान एक स्टेनिंग डाई (Staining Dye) को बैक्टीरियल कल्चर में मिलाया जाता है और फिर उसे एक अम्लीय घोल में धोया जाता है। अम्ल में धोने के बाद, कुछ प्रकार के बैक्टीरिया की कोशिकाएं डाई को बनाए रखती हैं। रंग को बनाएं रखने की क्षमता के कारण इस टेस्ट द्वारा उन बैक्टीरिया की अलग से पहचान कर ली जाती है।

जिन मरीजों में टी.बी टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव आता है, उनको एएफबी कल्चर टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा सकता है। इसके अलावा जिनका टीबी का उपचार चल रहा है, उनको बार-बार एएफबी टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है। क्योंकि एएफबी टेस्ट से यह निर्धारित किया जाता है, कि विशिष्ट थेरेपी का शरीर कितने अच्छे से प्रतिक्रिया दे रहा है।

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  1. एएफबी कल्चर टेस्ट क्या होता है? - What is AFB Culture Test in Hindi?
  2. एएफबी कल्चर टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of AFB Culture Test in Hindi
  3. एसिड फास्ट बेसिली कल्चर टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get AFB Culture Test in Hindi
  4. एएफबी कल्चर टेस्ट कैसे किया जाता है - How is Acid Fast Bacilli Culture Test in Hindi
  5. एएफबी कल्चर टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of AFB Culture Test in Hindi
  6. एएफबी कल्चर टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of AFB Culture Test mean in Hindi

एएफबी (एसिड फास्ट बेसिली कल्चर) टेस्ट क्या होता है?

एसिड फास्ट बेसिली (एएफबी) जांच के तहत एसिड फास्ट स्टेन (Ziehl-Neelsen stain) को संक्रमण की संदिग्ध जगह के एक नमूने पर इस्तेमाल किया जाता है। सैंपल को शीशे की एक स्लाइड पर फैलाकर पतला कर दिया जाता है, उसका उपचार स्पेशल स्टेनिंग तकनीकों से किया जाता है तथा माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। अगर संक्रमण का कारण एसिड फास्ट बेसिली में से कोई एक है (सबसे सामान्य कारण ट्यूबरकुलोसिस होता है), तो उसका पता लगाने की यह सबसे तेज तकनीक होती है। एएफबी स्मीयर (AFB smear) का रिजल्ट सैंपल लेने के कुछ ही घंटों के बाद आ जाता है, जबकि एएफबी कल्चर टेस्ट का रिजल्ट आने में कुछ दिन से हफ्ते भी लग सकते हैं।

एसिड फास्ट स्टेन एक लेबोरेटरी टेस्ट होता है, जिसको निम्न सैंपल के आधार पर किया जाता है:

  • रक्त
  • थूक
  • मूत्र
  • मल
  • मज्जा (bone marrow)
  • त्वचा के ऊतक

टीबी (एएफबी कल्चर) टेस्ट क्यों किया जाता है?

एएफबी टेस्ट को खून के सैंपल पर टेस्ट किया जाता है जिससे खून में एएफबी की मात्रा को मापा जाता है। ट्यूबरकुलोसिस की पुष्टि करने के लिए इस टेस्ट को किया जाता है। ट्यूबरकुलोसिस के उपचार के दौरान और उसके बाद भी एएफबी टेस्ट किया जाता है।

टीबी (एसिड फास्ट बेसिली कल्चर) टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अगर आपको फेफड़ों में संक्रमण के संकेद महसूस होने लगें हों, जैसे:

अगर आपके डॉक्टर को निम्न समस्याओं का शक होने लगे, जैसे:

  • सक्रिय टीबी संक्रमण,
  • अगर टीबी स्क्रीनिंग टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव हो,
  • अगर आप ऐसे समूह में हैं, जिसमें यह रोग विकसित होने के अत्याधिक जोखिम हों,
  • अगर आपको त्वचा या शरीर की किसी अन्य जगह में संक्रमण है, जिसका कारण माइकोबैक्टीरिया है। (और पढें - स्किन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट)
  • टीबी उपचार की प्रभावशीलता पर नजर रखने के लिए भी यह टेस्ट किया जा सकता है।

टीबी (एसिड फास्ट बेसिली कल्चर) टेस्ट कैसे किया जाता है?

  • अगर फेफड़े संबंधी टी.बी रोग के लिए एएफबी टेस्ट किया जाना है, तो एएफबी कल्चर टेस्ट के तहत गहराई से खांसकर निकाले गए बलगम या थूक के सैंपल लिया जाता है। मरीज को लगातार दो दिन तक सुबह जल्दी उठकर किटाणुरहित कप में थूक के सैंपल डालकर लेबोरेटरी में देना होता है। बलगम का एक अच्छा सैंपल लेने में डॉक्टर मरीज की मदद कर सकते हैं। इसके लिए मरीज को गहराई से खांसना पड़ता है और यह भी सुनिश्चित करना होता है कि कहीं वह बलगम रहित थूक या नाक से द्रव तो नहीं निकाल रहा?
  • अगर मरीज खुद से पूरी तरह से खांस नहीं पा रहा, तो उसे एक गर्म स्टेराइल सेलाइन सोलूशन (Sterile Saline Solution) को सांस द्वारा लेना पड़ता है, यह सोलूशन खांसी को शुरू करता है। अगर यह तकनीक भी काम ना करे तो मरीज को गैस्ट्रिक एस्पायरेशन (Gastric Aspiration) की जरूरत पड़ती है। इस प्रक्रिया में मुंह या नाक के द्वारा एक ट्यूब को पेट तक भेजा जाता है, जो खांसने के दौरान निगल लिए गए बलगम में से सैंपल एकत्रित कर लेती है।
  • अंतिम उपाय के रूप में, डॉक्टर ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में मुंह या नाक के अंदर से एक ब्रोंकोस्कोप पेट के अंदर डाला जाता है, जिससे थूक या ऊतक को सैंपल के रूप में निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया को बेहोशी के दौरान हॉस्पिटल में किया जाता है।
  • अगर डॉक्टर को शक होता है कि टीबी मरीज के फेफड़ों से बाहर हुआ है या अन्य माइकोबैक्टीरियल संक्रमण है तो डॉक्टर पेशाब, मस्तिष्क मेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid), और ऊतकों का सैंपल लेकर टेस्ट करते हैं। यह टेस्ट शरीर के अन्य द्रवों पर किया जा सकता है।  इसके साथ ही साथ बांह की नस से खून का सैंपल भी लिया जा सकता है। 

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टीबी (एसिड फास्ट बेसिली कल्चर) टेस्ट के क्या जोखिम हो सकते हैं?

कफ की जाँच (Phlegm Culture) किसी भी प्रकार के जोखिम को पैदा नहीं करती है। लेकिन अगर बलगम ब्रोन्कोस्कोप (Bronchoscope) की मदद से एकत्रित किया गया है तो उससे थोड़ी बेचैनी उत्पन्न हो सकती है और कुछ दिनों तक गले में दर्द भी हो सकता है।

उपरोक्त के अलावा इसके तहत खून के सैंपल की आवश्यकता हो सकती है। सुई के द्वारा खून का सैंपल लेने से रक्तस्राव, संक्रमण, निशान पड़ना (Bruising), या चक्कर आना जैसे जोखिम हो सकते हैं। जब सुई को बांह में लगाया जाता है, तो इस दौरान एक चुभन जैसी सनसनी या दर्द महसूस हो सकता है। उसके बाद सुई लगी हुई जगह में दर्द भी रह सकता है।

टीबी (एसिड फास्ट बेसिली कल्चर) टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

  • पॉजिटिव एएफबी, माइकोबैक्टीरियम के कारण होने वाले लक्षणों की पहचान करता है और पहचान किए गए जीवों (Organism) पर संवेदनशीलता संबंधी परीक्षण डॉक्टरों को इस बात की जानकारी देता है कि ये इलाज के लिए कितने प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • दवाओं के उपचार के कुछ हफ्ते बाद एएफबी स्मीयर या कल्चर टेस्ट का पॉजिटिव रिजल्ट आने का मतलब है कि उपचार प्रभावी नहीं है और इसे बदलने की जरूरत है। एक पॉजिटिव कल्चर रिजल्ट का मतलब होता है कि मरीज के अभी भी संक्रमित होने की संभावना है और वह अपने छींक तथा खांसी से दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है। (और पढ़ें - खांसी दूर के घरेलू उपाय)
  • कल्चर के नेगेटिव रिजल्ट का मतलब होता है कि एएफबी संक्रमण नहीं है या उस विशिष्ट जगह में जहां से सैंपल लिया गया था वहां अब माइकोबैक्टीरिया नहीं है। (इसी कारण से शरीर के कई हिस्सों से सैंपल लिया जाता है) कल्चर नेगेटिव सूचित होने के 6 से 8 हफ्तों तक भी जाँच होती है। अगर किसी को टी.बी है तो संक्रमण शरीर के किसी अन्य भाग में भी हो सकता है, जिसके लिए अलग प्रकार से सैंपल लेने की आवश्यकता होती है। उपचार के कुछ हफ्तों के बाद कल्चर का नेगेटिव रिजल्ट इस बात का संकेत देता है कि टी.बी संक्रमण उपचार पर प्रतिक्रिया दे रहा है या यह टेस्ट रिजल्ट यह संकेत देता है कि संबंधित व्यक्ति अब संक्रमित नहीं है।