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हेपेटाइटिस सी एक प्रकार का वायरस होता है, जो लिवर को संक्रमित करता है। हेपेटाइटिस सी को साइलेंट रोग (Silent disease) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हो जाते हैं और उनको पता भी नहीं चलता। हेपेटाइटिस सी से संक्रमित होने वाले लोगों में से कुछ ही लोग वायरस से जल्दी ही छुटकारा पाने में सक्षम हो पाते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों में यह एक दीर्घकालिक या आजीवन संक्रमण समस्या के रूप में विकसित हो जाती है। समय के साथ-साथ हेपेटाइटिस सी कुछ चिंताजनक समस्याएं पैदा कर देता है, जैसे लिवर क्षतिग्रस्त होना, लिवर खराब होना, यहां तक की लिवर कैंसर की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। अगर हेपेटाइटिस सी का इलाज ना किया जाए तो यह कुछ सालों में लिवर को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर सकता है, जो काफी गंभीर और जीवन के लिए हानिकारक स्थिति होती है। अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति या खून के संपर्क में आते हैं, तो आप हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हो सकते हैं।

(और पढें - लिवर को साफ रखने के लिए आहार)

  1. हेपेटाइटिस सी टेस्ट क्या होता है? - What is Hepatitis C Test in Hindi?
  2. हेपेटाइटिस सी टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Hepatitis C Test in Hindi
  3. हेपेटाइटिस सी टेस्ट से पहले - Before Hepatitis C Test in Hindi
  4. हेपेटाइटिस सी टेस्ट के दौरान - During Hepatitis C Test in Hindi
  5. हेपेटाइटिस सी टेस्ट के बाद - After Hepatitis C Test in Hindi
  6. हेपेटाइटिस सी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Hepatitis C Test in Hindi
  7. हेपेटाइटिस सी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Hepatitis C Test mean in Hindi
  8. हेपेटाइटिस सी टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with Hepatitis C in Hindi

हेपेटाइटिस सी टेस्ट क्या होता है?

हेपेटाइटिस सी का जल्दी परीक्षण व उपचार कर लेना, आपके लिवर में नुकसान की रोकथाम करने या नुकसान को कुछ हद तक कम करने में मदद करता है।

(और पढ़ें -  हेपेटाइटिस बी के लक्षण)

अगर आपके डॉक्टरों को लगता है कि आपको हेपेटाइटिस सी हो सकता है, तो वे निम्न टेस्ट करवाने के निर्देश दे सकते हैं:

(और पढ़ें - हेपेटाइटिस ए का इलाज)

  • हेपेटाइटिस सी वायरस टेस्ट,  यह एक ब्लड टेस्ट होता है, जो शरीर द्वारा हेपेटाइटिस सी वायरस के खिलाफ बनाई गई एंटीबॉडीज (Antibodies) की खोज करता है। इससे पता चल जाता है कि आप हेपेटाइटिस सी वायरस के संपर्क में आए हैं या नहीं। यह एक रेपिड (तीव्र) टेस्ट होता है, जो 20 मिनट में रिजल्ट दे देता है। (और पढ़ें - एचपीवी का इलाज)
  • एक ब्लड टेस्ट जो हेपेटाइटिस सी के वायरस की जेनेटिक आनुवंशिक सामग्री (RNA) की खोज करता है। इस टेस्ट की मदद से यह पता लगाया जाता है कि अब आप वायरस से संक्रमित हैं या नहीं। (और पढ़ें - स्वाइन फ्लू का इलाज)
  • एक ब्लड टेस्ट जिसकी मदद से आपको संक्रमित करने वाले हेपेटाइटिस सी वायरस के प्रकार की पहचान की जाती है। इसके बारे में जानना आपके डॉक्टर को यह तय करने में मदद करता है कि अगर इलाज किया जा सकता है, तो कैसे किया जाना चाहिए।

(और पढ़ें - सीआरपी ब्लड टेस्ट क्या है)

हेपेटाइटिस सी टेस्ट क्यों किया जाता है?

हेपेटाइटिस सी टेस्ट करवाने के उद्देश्य निम्न हो सकते हैं:

(और पढ़ें - बिलीरुबिन टेस्ट क्या है)

  • एक सक्रिय या गुप्त संक्रमण की जांच करने के लिए। (और पढ़ें - गुप्त रोगों का इलाज)
  • उपचार की प्रतिक्रिया की जांच करने के लिए।
  • हेपेटाइटिस सी वायरस से दूषित खून की जाँच करने के लिए। (और पढ़ें - किडनी फंक्शन टेस्ट)
  • यह पता लगाने के लिए कि लिवर फंक्शन टेस्ट का रिजल्ट असामान्य आने का कारण हेपेटाइटिस सी संक्रमण तो नहीं।
  • उन लोगों पर नजर रखने के लिए जिनमें हेपेटाइटिस सी संक्रमण फैलने के अधिक जोखिम होते हैं, जैसे डॉक्टर, दांतों के डॉक्टर और नर्स आदि। (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)
  • हेपेटाइटिस सी के फैलने से रोकने के लिए संभावित रूप से खून देने वाले और अंगदान करने वाले लोगों में हेपेटाइटिस सी संक्रमण की जांच करने के लिए।
  • संक्रमण का कारण बनने वाले हेपेटाइटिस सी वायरस के प्रकार की पहचान करने के लिए।

(और पढ़ें - फेफड़े में संक्रमण का इलाज)

हेपेटाइटिस सी टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

(और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन टेस्ट)

टेस्ट करवाने से पहले आपको कोई विशेष तैयारी करने की जरूरत नहीं होती। टेस्ट करवाने जाने से पहले आधी बाजू की टीशर्ट या शर्ट पहन लें।

(और पढ़ें - इको टेस्ट)

अगर आपको टेस्ट से जुड़ी किसी भी प्रकार की चिंता है, तो टेस्ट होने से पहले ही डॉक्टर से उस बारे में बात कर लें, जैसे टेस्ट के जोखिम, इसको कैसे किया जाता है और इसके रिजल्ट का क्या मतलब होता है।

(और पढ़ें - ईईजी टेस्ट)

हेपेटाइटिस सी टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

इस टेस्ट को करने के लिए डॉक्टर खून का सैंपल लेते हैं, टेस्ट के दौरान:

(और पढ़ें - प्लेटलेट्स काउंट)

  • सबसे पहले आपकी जिस बाजू से खून का सैंपल निकालना होता है, उसके ऊपरी हिस्से में एक इलास्टिक बैंड बांधा जाता है, जिससे नसों में खून का बहाव रोक दिया जाता है। जिससे नसें स्पष्ट दिखने लग जाती हैं और उनमें सुई लगाने में आसानी होती है।
  • जहां पर सुई लगानी होती है, उस जगह को अल्कोहल के साथ साफ किया जाता है। (और पढ़ें - एलर्जी टेस्ट कैसे होता है)
  • उसके बाद सुई को नस में लगा दिया जाता है।
  • सुई के साथ जुड़ी ट्यूब, सीरिंज या शीशी में खून के सैंपल को इकट्ठा किया जाता है। (और पढ़ें - स्टूल टेस्ट)
  • पर्याप्त मात्रा में खून निकलने के बाद, बाजू से बैंड हटा दिया जाता है और सुई को निकाल लिया जाता है।

(और पढ़ें - एंडोस्कोपी)

हेपेटाइटिस सी टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

(और पढ़ें - बायोप्सी)

टेस्ट के बाद सुई वाली जगह पर थोड़ा टाइट महसूस होता है। सुई वाली जगह पर आपको चुभन व दर्द महसूस हो सकता है और हो सकता है कि कुछ भी महसूस ना हो।

(और पढ़ें - पैप स्मीयर टेस्ट)

टेस्ट का रिजल्ट आने में कुछ दिन से लेकर कुछ सप्ताह तक का समय लग सकता है। रेपिड कार्ड टेस्ट के रिजल्ट को सिर्फ 15 मिनट में भी प्राप्त किया जा सकता है।

(और पढ़ें - एचआईवी की जांच कैसे करें)

हेपेटाइटिस सी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं?

हेपेटाइटिस सी टेस्ट के लिए खून निकालने के दौरान किसी प्रकार की समस्या होने की संभावनाएं कम ही होती हैं, जिनमें निम्न शामिल हो सकती हैं:

(और पढ़ें - एचबीए1सी टेस्ट)

  • जहां पर सुई लगाई जाती है, उस जगह पर निशान पड़ सकता है। सुई निकालते ही उस जगह पर थोड़ा दबाव रखने से निशान पड़ने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है।
  • कुछ दुर्लभ मामलों में सैंपल लेने के बाद नस में सूजन आ जाती है। दिन में कई बार किसी गर्म कपड़े आदि से सेकनें से सूजन का उपचार किया जा सकता है।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)

हेपेटाइटिस टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

नॉन-रिएक्टिव या नेगेटिव हेपेटाइटिस सी एंटीबॉडी टेस्ट –

(और पढ़ें - फंगल संक्रमण का इलाज)

एक नॉन-रिएक्टिवियर नेगेटिव एंटीबॉडी टेस्ट का मतलब होता है कि व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से संक्रमित नहीं है।

(और पढ़ें - किडनी इन्फेक्शन का इलाज)

हालांकि, अगर कोई व्यक्ति पिछले 6 महीनों में कभी हैपेटाइटिस सी वायरस के संपर्क में आया है, तो उसे फिर से टेस्ट करवाने की आवश्यकता है।

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रिएक्टिव या पॉजिटिव हेपेटाइटिस सी एंटीबॉडी टेस्ट –

रिएक्टिवियर पॉजिटिव एंटीबॉडी टेस्ट का मतलब होता है कि खून में हेपेटाइटिस सी एंटीबॉडीज पाए गए हैं और व्यक्ति पहले कभी ना कभी हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित रह चुका है।

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जब लोग एक बार इससे संक्रमित हो जाते हैं, तो उनके खून में एंटीबॉडीज हमेशा मौजूद रहती है। भले ही उनके शरीर से हेपेटाइटिस सी वायरस खत्म हो जाए।

(और पढ़ें - चिकन पॉक्स का उपचार)

लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर बार रिएक्टिव एंटीबॉडी टेस्ट का मतलब यहीं होता है कि आप हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं। पुष्टी करने के लिए मरीज को कुछ अन्य टेस्ट करवा लेने चाहिए।

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हेपेटाइटिस सी टेस्ट कब करवाना चाहिए?

क्योंकि काफी सारे लोगों में हेपेटाइटिस सी के लक्षण दिखाई नहीं देते। 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में हेपेटाइटिस सी होना सामान्य होता है। ज्यादतर लोगों को वायरस से संक्रमित होने का तब पता चलता है, जब वे किसी कारणवश टेस्ट करवाते हैं, जैसे खून देने के लिए टेस्ट करवाना।

(और पढ़ें - ईसीजी टेस्ट)

हालांकि, हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण की शुरूआत में ही कुछ लक्षण महसूस होने लगते हैं, जैसे:

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ज्यादातर लोग जो हेपेटाइटिस सी से संक्रमित होते हैं, जब तक उनका लिवर क्षतिग्रस्त ना हो तब तक उनके लंबे समय तक संक्रमित रहने के बाद भी उनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।

वायरस के संपर्क में आने से पहले लक्षण दिखाई देने के बीच के समय की अवधि को ऊष्मायन अवधि (Incubation period) के नाम से जाना जाता है। हेपेटाइटिस सी के लिए ऊष्मायन अवधि 2 सप्ताह से 6 महीने तक हो सकती है। हालांकि, लगभग 6 से 7 सप्ताह के बाद लक्षण सामने आने लगते हैं।

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निम्न के लिए भी हेपेटाइटिस सी करवाने का सुझाव दिया जा सकता है।

  • हेपेटाइटिस सी का सुझाव उनके लिए दिया जाता है जो:
    • वर्तमान में ड्रग्स वाले इंजेक्शन लेते हैं।
    • जिसने कभी ड्रग वाले इंजेक्शन लिए हों।
    • कुछ निश्चित प्रकार की मेडिकल समस्याएं, जिनमें निम्न लोग शामिल हैं:
      • जो लंबे समय से डायलिसिस पर थे।
      • जिनके लिवर फंक्शन टेस्ट का रिजल्ट लगातार असामान्य आ रहा है।
      • जिसको एचआईवी संक्रमण हुआ है।
    • जिनको पहले कभी खून चढ़ाया गया है, या उनमें कोई अंग प्रत्यारोपित किया गया है। इसमें निम्न लोग शामिल हैं:
      • अगर किसी को खून चढ़ाया गया हो और बाद में कभी रक्तदान करने वाले का हेपेटाइटिस सी टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आया हो।
      • अगर खून, खून के घटक या अंग प्राप्त किया गया हो।
  •  निम्न के लिए हेपेटाइटिस सी को करवाने का सुझाव दिया जाता है:
    • हेपेटाइटिस सी से संक्रमिक खून के संपर्क में आने, संक्रमित सुई लगने या श्लैष्मिक संपर्क में आने के बाद हेल्थकेयर, आपातकालीन चिकित्सा और सार्वजनिक सुरक्षाकर्मी को हेपेटाइटिस सी टेस्ट करवाने का सुझाव दिया जाता है।
    • हेपेटाइटिस सी से संक्रमित महिला से जन्म लेने वाले बच्चे के लिए भी यह टेस्ट करवाने का सुझाव दिया जाता है।
  • इंट्रानेजल कोकीन और नोन-इंजेक्टिंग (बिना इंजेक्शन) गैर-कानूनी ड्रग का सेवन करने वाले लोगों को भी हेपेटाइटिस सी टेस्ट करवाने का सुझाव दिया जाता है। 
  • वह व्यक्ति जिसने पहले कभी अपने शरीर पर टैटू, या शरीर में छेद करवाए हैं।
  • वह व्यक्ति जिसके कई यौन साथी रह चुके हैं या जिसे पहले कभी यौन संचारित रोग हो चुके हैं।
  • लंबे समय से हेपेटाइटिस सी से संक्रमित स्थिर सेक्स पार्टनर रहना। 

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