एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में भोजन से शुगर तुरंत ही छोटी आंत द्वारा अवशोषित कर ली जाती है। हालांकि, जिन लोगों को मेटाबॉलिक विकार होते हैं जैसे कार्बोहाइड्रेट मलअब्सॉर्प्शन और कुछ शुगर का बिना अवशोषित हुए रह जाना। इससे ओसमॉटिक दबाव बनने लगता है और इससे द्रवों व इलेक्ट्रोलाइट की गतिशीलता रक्त से आंत में हो जाती है। द्रवों की अधिकता से मल स्वयं ही पतला हो जाता है और इस स्थिति को दस्त या डायरिया कहा जाता है। मल में बिना अवशोषित हुई शुगर को स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस कहा जाता है।

स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट आपके मल में बिना अवशोषित हुई शुगर की मात्रा का पता लगाता है। फ्रुक्टोज, ग्लूकोज, लैक्टोस, पेंटोस और गलैक्टोस कुछ रिड्यूसिंग शुगर हैं जो कि स्टूल सैंपल में देखे जा सकते हैं।

  1. स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट क्यों किया जाता है - Stool reducing substances test Kyu Kiya Jata Hai
  2. स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट से पहले - Stool reducing substances test Se Pahle
  3. स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट के दौरान - How is a Stool Reducing Substances test performed?
  4. स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Stool reducing substances test ke parinam ka kya matlab hai

यदि आपको दस्त होने के साथ-साथ पेट दर्द या पेट फूलना जैसी समस्याएं होती हैं और ये निम्न स्थितियों से जुड़े होते हैं तो डॉक्टर आपको इस टेस्ट को करवाने के लिए कह सकते हैं।

  • एंजाइम डिसएक्रिडेस की कमी - डिसएक्रिडेस एंजाइम डिसक्रीड शुगर मोलेक्यूल्स को आंत में मिलाने के लिए तोड़ता है। इस एंजाइम की कमी से आंत में कार्बोहाइड्रेट का जमाव होने लगेगा, जिसके कारण दस्त, पेट दर्द और डिसपेप्सिया नामक स्थितियां पैदा हो जाएंगी।
  • कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण में असामान्यता, जिससे सीलिएक रोग, स्प्रू या वायरल गैस्ट्रोएंट्राइटिस जैसी स्थितियां हो जाती हैं।
  • शार्ट बोवेल सिंड्रोम - यह लक्षणों का एक समूह है जो कि छोटी आंत में विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक तत्वों के ठीक से अवशोषित न होने के कारण दिखाई देते हैं। शार्ट बोवेल सिंड्रोम में पतले और पानी जैसे दस्त के लक्षण दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर ऐसी सर्जरी के बाद होता है, जिसमें किसी ट्रीटमेंट के लिए छोटी आंत का कुछ भाग निकाला जाता है। इनमें जन्मजात विकार, चोट और आंतों से संबंधित ट्रीटमेंट आते हैं।
  • नेक्रोटाइजिंग एन्टेरोकोलाइटिस - यह एक लगातार बढ़ने वाला जीवन घातक रोग है जो कि अधिकतर नवजात शिशुओं को प्रभावित करता है। यह छोटी आंत के ऊतकों में संक्रमण या चोट के कारण होता है, जिसमें बाद में ऊतक नष्ट (मृत) होने लगते हैं। इस स्थिति के लक्षणों में जैसे थकान, दस्त, भूख न लगना और उदर के आकार का बढ़ना शामिल होते हैं।
  • लैक्टेज की कमी - लैक्टेज एक एंजाइम है जो कि शरीर में लैक्टोस शुगर को तोड़ता है। जिन लोगों में लैक्टेज की कमी होती है उनमें लैक्टोस शुगर का पाचन नहीं हो पाता है। आमतौर पर लाक्टोस की कमी का कारण लैक्टोस इन्टोलेरेंस होता है जो कि अन्य किसी स्थिति के कारण हो सकता है। जिन लोगों को लैक्टोस की कमी होती है, उनमें लैक्टोस लेने के बाद पेट फूलना, पेट में दर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

इस टेस्ट की मदद से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि यह दस्त वायरल या परजीवी संक्रमण के कारण हुआ है या फिर मल में असाधारण रूप से शुगर शामिल होने के कारण हुआ है।

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स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

कुछ विशेष दवाएं जैसे सेलिसिलेट्स, नियोमायसिन, केनामाइसीन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, मेथोट्रेक्सट, सेफालोस्पोरिन्स, पेनिसिलिन या अब्सोर्बिक एसिड से टेस्ट के परिणाम गलत तरह से पॉजिटिव आ सकते हैं और ये दवाएं टेस्ट के परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं। इसीलिए इस तरह की दवा ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें।

स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट कैसे किया जाता है?

लैब से आपको सैंपल लेने के लिए विशेष कंटेनर दिया जाएगा। सैंपल लेने के चार घंटे के भीतर ही उसे लैब में भेज देना चाहिए, यदि ऐसा नहीं किया जाता तो उसमें बैक्टीरियल फर्मेंटेशन हो सकता है। बैक्टीरियल फर्मेंटेशन से परिणाम गलत आ सकते हैं। यदि किसी कारण से आप सैंपल को दिए गए समय में नहीं पहुचा सकते हैं तो आप इसे किसी ठंडी जगह या फ्रिज में रखें। सैंपल डायपर में न लें क्योंकि यह मल के द्रविय भाग को सोख लेता है, जो टेस्ट के लिए जरूरी होता है।

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स्टूल रिड्यूसिंग सब्सटांस टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम -

  • मल से निकलने वाले पदार्थों की <0.25 ग्राम प्रति डेसीलिटर (g/dL) या <13.9 मिलीमॉल्स प्रति लीटर मात्रा को सामान्य माना जाता है।

असामान्य परिणाम - 

  • मल से निकलने वाले पदार्थों की 0.25-0.50 g/dL या 13.9-27.8 mmol/L मात्रा आंत द्वारा शुगर का अवशोषण न हो पाने की तरफ संकेत कर सकती है।
  • स्टूल रिड्यूसिंग पदार्थों की >0.50 g/dL या >2.78 mmol/L मात्रा का मतलब है कि परिणाम असामान्य है।

रिड्यूसिंग पदार्थों की मल में अधिक मात्रा लैक्टेज की कमी, लैक्टोस इन्टोलेरेंस, कार्बोहाइड्रेट की कुअवशोषण से जुड़ी स्थितियों, शार्ट बाउल सिंड्रोम, डिसएक्रिडेस की कमी और नेक्रोटाइजिंग एन्टेरोकोलाइटिस जैसी स्थितियों की उपस्थिति की तरफ संकेत कर सकती है।

नवजात शिशुओं के मल में भी रिड्यूसिंग पदार्थों की अधिक मात्रा पाई जा सकती है।

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