पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) - Stomach Infection in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

June 28, 2017

March 06, 2020

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पेट में इन्फेक्शन
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पेट में इन्फेक्शन​ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) क्या है?

गैस्ट्रोएन्टराइटिस को आमतौर पर "पेट का फ्लू" या "पेट में इन्फेक्शन​" या "जठरांत्र शोथ" कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पेट और आंतों (जठरांत्र संबंधी मार्ग) में जलन और सूजन हो जाती है।

पेट में इन्फेक्शन​ के सबसे सामान्य लक्षण हैं – दस्त, मतली, उल्टी और पेट में मरोड़ के साथ दर्द। बहुत से लोग इसे "पेट फ्लू" भी कहते हैं। यह नाम कभी-कभी गलतफहमी पैदा कर सकता है, क्योंकि इन्फ्लुएंजा (फ्लू) के लक्षण जठरांत्र शोथ से बिलकुल अलग होते हैं और गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट (जठरांत्र संबंधी मार्ग) से संबंधित नहीं होते हैं।

"पेट का फ्लू" नाम में "फ्लू" शब्द आने से ऐसा लगता है कि इसके होने का कारण एक वायरल संक्रमण है, जबकि संक्रमण के अन्य कारण  भी हो सकते हैं। हाँ, ऐसा ज़रूर है कि वायरल संक्रमण गैस्ट्रोएन्टराइटिस का सबसे आम कारण है, लेकिन यह बैक्टीरिया, परजीवी और दूषित भोजन से उत्पन्न बीमारियों के कारण भी हो सकता है। कई लोग जिन्हें इस प्रकार के संक्रमण से उल्टी और दस्त हो जाते हैं, वे सोचते हैं कि उन्हें फूड पॉइज़निंग हुई है, जबकि उन्हें वास्तव में दूषित भोजन खाने से होने वाली कोई बीमारी हो सकती है।

(और पढ़ें – फ़ूड पोइज़निंग से बचने के उपाय)

पेट में इन्फेक्शन​ या पेट फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। ऐसा मल त्यागने के बाद ठीक प्रकार से हाथ न धोने के कारण या गंदे डायपर को छूने से हो सकता है। 

वायरस के कारण होने वाला जठरांत्र शोथ एक से दो दिन तक रह सकता है। हालांकि, बैक्टीरिया से उत्पन्न कुछ स्थितियां कई महीनों तक जारी रह सकती हैं। अधिकांश लोग उल्टी और दस्त के एक छोटे से प्रकरण के बाद आसानी से ठीक हो जाते हैं। वे शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए स्वच्छ जल और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते हैं और फिर धीरे-धीरे सामान्य आहार लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेष रूप से शिशुओं और बुजुर्गों में गैस्ट्रोएन्टराइटिस के कारण शरीर में तरल की कमी होने से निर्जलीकरण हो सकता है। अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए और शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति न की जाये, तो यह गंभीर हो सकती है।

पेट में इन्फेक्शन के प्रकार - Types of Stomach Infection in Hindi

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) के प्रकार क्या हैं?

गैस्ट्रोएन्टराइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार के हैं –

  1. वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस अनेक प्रकार के वायरस के कारण पेट और आंतों में होने वाली सूजन है। इसे "पेट फ्लू" के रूप में भी जाना जाता है। यह अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से या दूषित भोजन अथवा पानी के माध्यम से फैलती है। 
  2. बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – बैक्टीरिया द्वारा आपकी आंत में होने वाले संक्रमण को बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस कहते हैं। गैस्ट्रोएन्टराइटिस के ज़्यादातर मामले वायरस संक्रमण के कारण होते हैं, लेकिन बैक्टीरियल संक्रमण भी सामान्य होते हैं। इस संक्रमण को लोग अक्सर फूड पोइज़निंग  (Food poisoning) समझ बैठते हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं। बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस उचित स्वच्छता पर ध्यान न देने के परिणामस्वरूप हो सकता है। जानवरों के निकट संपर्क में आने या बैक्टीरिया से दूषित भोजन या पानी का सेवन करने  के कारण भी संक्रमण हो सकता है।

अन्य प्रकार के गैस्ट्रोएन्टराइटिस भी हैं, जो परजीवियों (parasites) के कारण होते हैं, लेकिन वे बहुत आम नहीं हैं।

पेट में इन्फेक्शन के लक्षण - Gastroenteritis Symptoms in Hindi

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) के संकेत और लक्षण क्या हैं?

जठरांत्र शोथ में आमतौर पर दस्त और उल्टी दोनों होते हैं। सामान्यतः इन दोनो में से एक लक्षण के साथ यह बहुत कम देखा जाता है। जठरांत्र शोथ में पेट में मरोड़ भी हो सकती है। संकेत और लक्षण आमतौर पर संक्रामक पदार्थ के संपर्क में आने के 12-72 घंटे बाद शुरू होते हैं।

यदि यह वायरल होता है, तो हालत आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाती है। बुखार, थकान, सिर दर्द और मांसपेशियों में दर्द वायरल संक्रमण के आम लक्षण हैं। अगर मल में खून आता है, तो इसका कारण वायरल की तुलना में बैक्टीरियल होने की संभावना ज़्यादा है। कुछ बैक्टीरियल संक्रमण के कारण गंभीर पेट दर्द हो सकता है और कई सप्ताह तक जारी रह सकता है।

रोटावायरस से संक्रमित बच्चे आमतौर पर तीन से आठ दिनों के भीतर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि, गरीब देशों में गंभीर संक्रमण का उपचार अकसर पहुंच से बाहर होता है और लगातार दस्त होना सामान्य है। निर्जलीकरण दस्त के कारण होने वाली एक सामान्य जटिलता है। शरीर में तरल की अत्यधिक कमी होने से बच्चों में अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। आमतौर पर गंदे और अविकसित क्षेत्रों में बार-बार संक्रमण होता है। इसके कारण कुपोषण और शारीरिक व मानसिक विकास में कमी जैसी जटिलतायें हो सकती हैं।

डॉक्टर से सलाह लेना कब अत्यंत आवश्यक है?

यदि आपके लक्षणों में पांच दिनों के भीतर कोई सुधार नहीं होता है (बच्चों के लिए दो दिन) तो डॉक्टर से सम्पर्क करना अत्यंत आवश्यक है। यदि तीन माह से अधिक उम्र के बच्चे को 12 घंटे से लगातार उलटी हो रही है, तो डॉक्टर से परामर्श करें। यदि तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को दस्त या उल्टी हो रही हो, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें।

पेट में इन्फेक्शन के कारण और जोखिम कारक - Stomach Infection Causes & Risk Factors in Hindi

पेट में इन्फेक्शन​ क्यों होता है?

वायरस (विशेष रूप से रोटावायरस) और एस्चेरिचिया कोलाई (Escherichia coli) और कैम्पिलोबैक्टर (Campylobacterबैक्टीरिया प्रजातियां जठरांत्र शोथ के मुख्य कारण हैं।  गैर-संक्रामक कारणों के द्वारा भी ये बीमारी हो सकती है, लेकिन वायरल या बैक्टीरियल कारणों की तुलना में इनके होने की संभावना कम होती है। 

वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस

जब आप दूषित भोजन या पानी का सेवन करते हैं या यदि आप संक्रमित व्यक्तियों के साथ अपने बर्तन, तौलिये या भोजन को साझा करते हैं, तो आपके वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस से संक्रमित होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए कई प्रकार के वायरस उत्तरदायी होते हैं, जिनमें शामिल हैं –

  • नोरोवायरस (Norovirus) – बच्चे और वयस्क नोरोवायरस से प्रभावित होते हैं, जो खाद्यजनित बीमारी का सबसे आम कारण है। नोरोवायरस संक्रमण अगर एक व्यक्ति को हो जाए, तो उसके  परिवार या समुदाय के बाकी लोगों में भी तेज़ी से फैल सकता है। विशेष रूप से, छोटे घरों या कमरों में रहने वाले लोगों के बीच इस रोग के फैलने की संभावना अधिक होती है। ज्यादातर मामलों में, दूषित भोजन या पानी के माध्यम से वायरस आपके शरीर में प्रवेश करते हैं, हालांकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी इनका फैलना संभव है।
  • रोटावायरस (Rotavirus) – यह दुनिया भर में बच्चों में होने वाले वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस का सबसे आम कारण है। बच्चे आमतौर पर तब संक्रमित होते हैं, जब वे वायरस द्वारा दूषित अपनी उंगलियों या अन्य वस्तुओं को अपने मुंह में डालते हैं। शिशुओं और छोटे बच्चों में यह संक्रमण सबसे अधिक गंभीर होता है। रोटावायरस से संक्रमित वयस्कों में ऐसा हो सकता है कि कोई लक्षण न दिखें, लेकिन फिर भी वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं 

बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस

यदि भोजन बैक्टीरिया से दूषित हो जाता है और कई घंटों तक फ्रिज में नहीं रखा जाता है, तो उसमें बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है और उस भोजन को खाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।

आमतौर पर इन खाद्य पदार्थों की वजह से बीमारी होने की संभावना होती है –

विकासशील देशों में विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका और एशिया में, हैजा गैस्ट्रोएन्टराइटिस का एक सामान्य कारण है। यह संक्रमण आमतौर पर दूषित पानी या भोजन द्वारा फैलता है। 

पेट में इन्फेक्शन के जोखिम कारक क्या हैं?

जो लोग जठरांत्र शोथ से आसानी से प्रभावित हो सकते हैं, उनमें शामिल हैं –

  • छोटे बच्चे –
    बाल देखभाल केंद्र या प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों  को विशेष रूप से इस बीमारी के होने का ख़तरा होता है, क्योंकि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होने में समय लगता है।
     
  • अधेड़ उम्र के लोग – 
    प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ती उम्र के साथ-साथ कमज़ोर हो जाती है। नर्सिंग होम में भर्ती बुज़ुर्ग या बड़ी उम्र के लोग विशेष रूप से इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है और नर्सिंग होम में वे संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क में होते हैं। 
     
  • स्कूली बच्चे या छात्रावास में रहने वाले लोग आदि – 
    जो भी लोग ऐसी जगह आते-जाते हैं, जहाँ बहुत लोग छोटी सी जगह में एकत्रित होते हैं, उन्हे उस जगह पर संक्रमित होने का जोखिम होता है।
     
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति – 
    यदि संक्रमण के प्रति आपकी प्रतिरोधक क्षमता कम है, उदाहरण के लिए यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली एचआईवी / एड्स, कीमोथेरेपी या किसी अन्य चिकित्सा स्थिति के कारण कमज़ोर हो गयी  है, तो आपको विशेष रूप से संक्रमण का खतरा हो सकता है।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) से बचाव - Prevention of Gastroenteritis in Hindi

पेट में इन्फेक्शन​ होने से कैसे रोक सकते हैं?

आंत्र संबंधी संक्रमण के प्रसार को रोकने का सबसे अच्छा तरीका निम्न सावधानियों का पालन करना है –

  • बच्चे को टीका लगवाएं –
    रोटावायरस के कारण होने वाले गैस्ट्रोएन्टराइटिस से बचाव करने वाला एक टीका भारत में उपलब्ध है। एक साल की उम्र में बच्चे को यह टीका लगाया जाता है, जो इस बीमारी के गंभीर लक्षणों को रोकने में प्रभावी होता है।
     
  • हाथों को अच्छी तरह से धोएं –
    आप अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं और सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे भी ऐसा करते हैं। यदि आपके बच्चे बड़े हैं, तो उन्हें शौचालय जाने के बाद हाथों को धोना सिखाएं। गुनगुने पानी और साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ मलने चाहिये। हाथों को आगे और पीछे से तथा नाखूनों के नीचे से साफ़ करें। उसके बाद अच्छी तरह से धो लें। (और पढ़ें - बच्चों को सिखाएं अच्छी सेहत के लिए अच्छी आदतें)
     
  • घर में निजी वस्तुओं का उपयोग करें – 
    खाने के बर्तन, गिलास और प्लेटों को साझा करने से बचें। बाथरूम में अलग तौलिये का उपयोग करें।
     
  • संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें – 
    यदि संभव हो तो वायरस संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें, ताकि उनसे आप संक्रमित न हो जायें। ठोस सतह को कीटाणुरहित रखें। यदि आपके घर में किसी को वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस है, तो मेज़ व टेबल जैसी सतहों वाली चीज़ों, नल और दरवाज़ों के हैंडल को दो कप ब्लीच में चार लीटर पानी मिलाकर बने मिश्रण से साफ़ करें।
     
  • अपने बच्चे के देखभाल केंद्र का निरीक्षण करें – 
    सुनिश्चित करें कि केंद्र में डायपर बदलने और भोजन बनाने या परोसने के लिए अलग-अलग कमरे हैं या नहीं। कमरे में डायपर बदलने वाली मेज के साथ एक सिंक (हौदी) होना चाहिए और डायपर को कचरे के डिब्बे में डालें।

यात्रा करते समय ये सावधानियाँ बरतें​

दूसरे इलाकों में यात्रा करने के दौरान आप दूषित भोजन या पानी के कारण बीमार हो सकते हैं। आप इन युक्तियों का पालन करके संक्रमण का जोखिम कम कर सकते हैं –

  • केवल अच्छी तरह से सीलबंद बोतल का पानी पीएं।
  • बर्फ के सेवन से बचें, क्योंकि उसे बनाने में उपयोग किया गया पानी दूषित हो सकता है।
  • ब्रश करने के लिए बोतलबंद पानी का उपयोग करें।
  • बिना पका भोजन खाने से बचें। कटे हुए फल, कच्ची सब्जियां और सलाद, जो संभवतः गंदे हाथों से छुए गए हों।
  • अधपका मांस और मछली खाने से बचें।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) का परीक्षण - Diagnosis of Gastroenteritis in Hindi

पेट में इन्फेक्शन​ का निदान कैसे किया जाता है?

पेट में इन्फेक्शन अक्सर जल्द ठीक होता है और इसके इलाज का उद्देश्य लक्षणों और इस बीमारी से होने  वाले निर्जलीकरण को नियंत्रित करना होता है। ऐसा हो सकता है कि परीक्षणों की आवश्यकता न पड़े। डॉक्टर अक्सर लक्षणों के इतिहास और शारीरिक परीक्षण के आधार पर निदान करते हैं।

यदि लक्षण लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो उल्टी और दस्त का कारण निर्धारित करने के लिए रक्त और मल परीक्षण किये जा सकते हैं।

पेट में इन्फेक्शन का इलाज - Stomach Infection Treatment in Hindi

पेट में इन्फेक्शन​ का उपचार कैसे किया जाता है?

उपचार का मुख्य लक्ष्य तरल पदार्थो के सेवन द्वारा निर्जलीकरण को रोकना है। गंभीर मामलों में, अस्पताल में भर्ती कराना और अन्तःशिरा (इन्ट्रावेनस) तरल पदार्थ आवश्यक हो सकते हैं।

ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस; ORS) पेट ठीक करने के लिए पिलाया जाता है और यह विशेष रूप से बच्चों के पेट पर भारी नहीं होता। इसमें पानी और नमक का संतुलित मिश्रण होता है, जो आवश्यक तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है। ये घोल आपके किसी भी निकटतम केमिस्ट पर उपलब्ध हैं और इनके लिए डॉक्टर के पर्चे की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाना चाहिए।

पेट फ्लू (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए चिकित्सकीय उपचार

  • यदि मरीज उल्टी के कारण मुंह से तरल पदार्थ नहीं ले पा रहा है, तो डॉक्टर आईवी (IV; सीधा नस में नली लगाकर) द्वारा शरीर में तरल की पूर्ति (रिहाइड्रेशन) कर सकते हैँ।
  • शिशुओं को निर्जलीकरण के स्तर के आधार पर पहले मौखिक रिहाइड्रेशन थेरेपी देने का प्रयास करना चाहिए। यदि इससे कोई लाभ नहीं होता है, तो बाद में आईवी (IV) से तरल दिया जा सकता है। एक बार में कम से कम 5 मिलीमीटर घोल बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाएं। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है।

पेट फ्लू (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) की दवाएं 

संक्रमण के कारण के रूप में जब तक बैक्टीरिया या परजीवी की पहचान नहीं हो जाती, तब तक एंटीबायोटिक दवा नहीं दी जाती हैं। कुछ बैक्टीरिया, विशेष रूप से कैम्पिलोबैक्टर (Campylobacter), शिगेला (Shigella) और विब्रियो कॉलेरी (Vibrio Cholerae) के लिए एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा सकती हैं, अगर प्रयोगशाला परीक्षणों के द्वारा इनकी पहचान संक्रमण के कारण के रूप में की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त किसी भी एंटीबायोटिक या गलत एंटीबायोटिक का प्रयोग करने से कुछ संक्रमण गंभीर हो सकते हैं या लम्बे समय तक बने रह सकते हैं।

वायरल संक्रमण का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

एंटीबायोटिक वायरस पर कोई प्रभाव नहीं डालते है और इसलिए वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए इनका सुझाव नहीं दिया जाता है। किसी भी ओवर-द-काउंटर दवा को लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें। 

कुछ उपाय जो आप स्वयं कर सकते हैं –

यदि आपको जठरांत्र शोथ है, तो आप कुछ स्व-देखभाल उपाय अपना सकते हैं –

  • भोजन के साथ और बीच में अतिरिक्त तरल पदार्थ पीयें। यदि आपको पीने में कठिनाई हो रही है, तो बहुत कम मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें या बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े चूसें (लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बर्फ साफ़ पानी से बानी हो)।
  • फलों के जूस का सेवन न करें, क्योंकि ये शरीर में खनिजों की पूर्ति नहीं करते हैं और दस्त को बढ़ा सकते हैं।
  • शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बढ़ाने के लिए बच्चे और वयस्क स्पोर्ट्स ड्रिंक्स (जैसे पानी में मिला ग्लुकोन डी) का उपयोग कर सकते हैं। बच्चों के लिए निर्मित उत्पादों, जैसे – ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) को बच्चों और शिशुओं को पिलाना चाहिए। 
  • कम मात्रा में भोजन खाएं और अपने पेट को आराम दें।
  • अगर आप थकान या कमज़ोरी महसूस कर रहे हैं, तो खूब आराम करें। 
  • दवाएं लेने या अपने बच्चों को देने से पहले चिकित्सक से परामर्श करें। कभी भी वायरल बीमारी से  ग्रसित बच्चों या किशोरों को एस्पिरिन न दें। इससे रेये सिंड्रोम (Reye's syndrome) हो सकता है, जो आपके लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) की जटिलताएं - Gastroenteritis Complications in Hindi

पेट में इन्फेक्शन​ की जटिलताएं क्या हैं?

वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस की मुख्य जटिलता निर्जलीकरण है – शरीर से आवश्यक पानी और खनिज-लवण का गंभीर रूप से ह्रास होना। यदि आप स्वस्थ हैं और उल्टी व दस्त के कारण होने वाली पानी की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त तरल पीते हैं, तो निर्जलीकरण एक समस्या नहीं होनी चाहिए।

शिशु, वृद्ध और कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग गंभीर रूप से निर्जलीकरण का शिकार बन सकते हैं, जब वे उतने अधिक तरल का सेवन नहीं करते हैं, जितना शरीर से बाहर निकल रहा है। अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है, ताकि शरीर में होने वाली पानी की कमी को नस के माध्यम से तरल पदार्थ देकर पूरा किया जा सके। निर्जलीकरण बहुत कम मामलों में घातक हो सकता है।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) में परहेज़ - What to avoid during Gastroenteritis in Hindi?

पेट में इन्फेक्शन​ में क्या परहेज करना चाहिए?

आपके लक्षणों को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से बचें, जिनमें निम्न शामिल हैं –

  • डेयरी उत्पाद – यदि आपको गैस्ट्रोएन्टराइटिस है, तो आप कुछ समय तक दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन न करें, क्योंकि इन उत्पादों में लैक्टोज होता है, जिसे पचाने में आपको कठिनाई हो सकती है।
  • वसायुक्त खाद्य पदार्थ – चिकनाई वाला और वसायुक्त भोजन पेट के लिए नुकसानदायक होता है। फैटी मांस, वसायुक्त खाद्य पदार्थ और मेवे भी पाचन तंत्र को उत्तेजित कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपको दस्त हो सकते हैं।
  • मसालेदार भोजन – भोजन में अत्यधिक मिर्च, गर्म मसालों और लहसुन का प्रयोग आपके लक्षणों को बढ़ा सकता हैं और आपके पेट को खराब कर सकता है। (और पढ़ें - मसालेदार भोजन के नुकसान)
  • कैफीन – कैफीन युक्त पदार्थ, जैसे – कोल्ड ड्रिंक, चाय, कॉफ़ी आदि न पीएं। कैफीन एक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जिसके कारण आपको बार-बार शौचालय जाना पड़ सकता है और आप निर्जलीकरण की चपेट में आ सकते हैं। कैफीन के कारण दस्त भी हो सकते हैं। 
  • फाइबर – फाइबर युक्त फलों और सब्ज़ियों को खाने से बचें। ये आपको होने वाले दस्त का कारण बन सकते हैं। सेबनाशपाती, ब्रोकली, ओट्स, तिल के बीज, मक्का, मटर आदि फाइबर के कुछ मुख्य स्रोत हैं।       
  • शराब – शराब से दूर रहे। यह पेट की अंदरूनी सतह (जठरांत्र) और पाचन तंत्र में जलन और सूजन पैदा कर सकती है और गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकती है। (और पढ़ें - शराब की लत से छुटकारा पाने के तरीके)
  • चीनी – शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थों का सेवन करने से रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि हो सकती है। कुछ लोगों में यह मतली पैदा कर सकते हैं। 
  • साइट्रस फल – खट्टे फल, जैसे – नारंगी, अंगूर आदि, अनानास और टमाटर से बने उत्पादों में अत्यधिक मात्रा में एसिड होता है, जिससे पेट में गैस और जलन हो सकती है।  
  • प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थ – डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में वसा, शर्करा, परिरक्षक (preservatives) और कृत्रिम रंग होते हैं। इनका सेवन करने से स्थिति और ख़राब हो सकती है तथा गंभीर रूप से दस्त हो सकते हैं।
  • ग्लूटेन – यह गेहूं और अन्य अनाज, जैसे – जौ, राई और ओट्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है। यह दस्त, पेट में दर्द और सूजन पैदा कर सकता है। ग्लूटेन युक्त पदार्थॉं से दूर रहकर लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Gastroenteritis in Hindi?

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) के दौरान ये खाएं

  • सादा भोजन खाएं, जिसे आप आसानी से पचा सकें। यदि आपको उल्टी हो रही है, तो ब्रेड को सेककर खाएं जिससे वो आसानी से पच जाए।
  • दस्त से होने वाले निर्जलीकरण को दूर करने के लिए सब्ज़ियों का सूप बहुत अच्छा विकल्प है। यह पौष्टिक होता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। 
  • दूध और पनीर की जगह छाछ पीना फायदेमंद होता है। छाछ पाचन तंत्र को शांत करती है और निर्जलीकरण को रोकती है।
  • गैस्ट्रोएन्टराइटिस में उबला हुआ भोजन खाना चाहिए, क्योंकि यह हल्का होता है और आसानी से पच जाता है। आप उबले हुए आलू, बीन्स, गाजर और अजमोद खा सकते हैं। 
  • केले पेट के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। गैस्ट्रोएन्टराइटिस में कच्चे केले खाएं। सेब, नाशपाती और मौसमी का जूस पेट के फ्लू के लिए फायदेमंद होता है।
  • अत्यधिक मात्रा में पानी पीएं। दस्त के कारण शरीर से पानी का बहुत ह्रास हो जाता है, इसलिए तरल के स्तर को बढ़ाने और पेट को राहत देने के लिए तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।


संदर्भ

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Viral gastroenteritis (stomach flu)
  2. Department for Health and Wellbeing. Viral gastroenteritis - including symptoms, treatment and prevention. Government of South Australia; Viral gastroenteritis - including symptoms, treatment and prevention
  3. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Viral Gastroenteritis (“Stomach Flu”)
  4. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland, Ohio. Gastroenteritis
  5. National Health Service [Internet] NHS inform; Scottish Government; Gastroenteritis

पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के डॉक्टर

Dr. Abhay Singh Dr. Abhay Singh गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
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पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) की दवा - Medicines for Stomach Infection in Hindi

पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Stomach Infection in Hindi

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