myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

मक्खन दूध का ठोस रूप यानी दूध का वसा होता है और घी को दूध के वसा यानी मक्खन से तैयार किया जाता है। घी में मक्खन और पानी की मात्रा बिलकुल भी नहीं होती है। भारत में बड़े पैमाने पर घी का उपयोग किया जाता है और लगभग सभी भोजन में इसका उपयोग किया जाता है। इसके अलावा आयुर्वेद में हजारों वर्षों से घी का उपयोग दवाओं में किया जाता रहा है। गाय का घी स्वस्थ आहार है और इसमें सिर्फ 2 से 3% ट्रांस वसा होता है। गाय का घी, घी का सबसे शुद्ध रूप है इसलिए यह उपभोग करने में सुरक्षित है।

  1. मक्खन या घी खाने के फायदे कोलेस्ट्रॉल के लिए - Ghee vs butter cholesterol in hindi
  2. मक्खन या देशी घी के लाभ हृदय संबंधी रोगों में - Which is better ghee or butter for cardiovascular health in hindi
  3. घी या मक्खन के गुण एलर्जी के लिए - Ghee or butter which is good for lactose intolerance in hindi
  4. घी या मक्खन के फायदे लम्बे समय तक उपयोग करने के लिए - Difference between butter and ghee shelf life in hindi
  5. मक्खन या घी का उपयोग खाना पकाने में - Ghee vs butter for cooking in hindi

अनुसंधान में पाया गया है कि शुद्ध घी सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यदि आप अपने आहार में फैट के स्रोत का 10% घी का सेवन करते हैं तो यह LDL कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल), VLDL कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर सकता है। क्योंकि घी में कन्जुगाटेड लिनोलिक एसिड (Conjugated linoleic acid) पाया जाता है जो सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। इसके अलावा घी मलत्याग के माध्यम से पित्त घटकों (bile constituents) को हटाने में वृद्धि करता है जिसके कारण सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी होती है। 2000 में "जर्नल ऑफ़ पोषण बायोकैमिस्ट्री" में प्रकाशित एक अध्ययन में चूहों को उनके वजन का 2.5 प्रतिशत घी प्रतिदिन दिया गया था। आठ हफ्तों के बाद उनके सीरम कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो गया। इसपर वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि घी कोलेस्ट्रॉल चयापचय को प्रभावित करता है।

वहीँ अनुसंधान में यह पाया गया है कि मक्खन कुल कोलेस्ट्रॉल यानि की LDL कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। जर्नल ऑफ़ लिपिड रिसर्च में प्रकाशित 1993 के एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मक्खन खाते थे उनके एलडीएल के स्तर में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

इसलिए घी मोटे लोगों के लिए मक्खन की जगह एक स्वस्थ विकल्प है।

(और पढ़ें – कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए पियें ये जूस)

लगातार हृदय संबंधी रोगों की वजह से मौत की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसलिए हमें अस्वस्थ और हृदय को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों को नहीं खाना चाहिए।

कुछ छोटे प्रमाण बताते हैं कि मक्खन हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाता है। हृदय तथा रक्तवाहिकाओं के लिए ज्यादा कोलेस्ट्रॉल का स्तर खतरनाक होता है। मक्खन के सेवन से कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर और सूजन दोनों बढ़ते हैं जिसके कारण हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

घी हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। यदि आप अपने आहार में फैट का 10% घी का सेवन करते हैं तो घी ओलिक एसिड के सीरम स्तर को बढ़ाता है और LDL के ऑक्सीकरण को रोकता है जिसके कारण यह धमनियों में पट्टिका के गठन को रोकता है और धमनियों के सख्त होने के खतरे को कम करता है।

(और पढ़ें – हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खाएं ये आहार)

लैक्‍टोज असहिष्‍णुता यानी दूध की एलर्जी एक ऐसी चिकित्सा स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति लैक्टोज युक्त भोजन का सेवन नहीं कर पाता है। लैक्टोज एक प्रकार की चीनी है जो डेयरी उत्पादों में पाई जाती है।

जैसा कि हम जानते हैं मक्खन दूध का ठोस रूप है। इसलिए लैक्टोज एलर्जी वाले व्यक्ति मक्खन का सेवन नहीं कर सकते हैं।

जबकि घी में दूध का ठोस पदार्थ यानी मक्खन नहीं होता है क्योंकि घी बनाते समय दूध के ठोस का अंश घी से पूरी तरह निकल जाता है। इसलिए घी लैक्टोज एलर्जी वाले लोगों के सेवन के लिए सुरक्षित है।

यदि लैक्टोज एलर्जी किसी व्यक्ति में बेहद संवेदनशील है तो घी उसके लिए काम नहीं करता है। हालांकि अगर घी का सेवन करने के बाद कोई एलर्जी के लक्षण दिखे तो कृपया अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

(और पढ़ें – बदलते मौसम में हो रही एलर्जी का आयुर्वेदिक उपचार)

घी को मक्खन की तुलना में लम्बे समय तक उपयोग किया जा सकता है क्योंकि घी में पानी की मात्रा बिलकुल नहीं होती है और इसे आसानी से एक वायुरोधी कंटेनर में संग्रहित किया जा सकता है।

मक्खन के विपरीत घी को रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता नहीं होती है। घी को बिना उसके स्वाद और रंग को गवाए परिवेश तापमान में 6-8 महीनों तक सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है।

घी में पानी की मात्रा नहीं होने के साथ फॉस्फोलिपिड्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और अम्लता का स्तर कम होता है जो इसे लम्बे समय तक उपयोगी बनाता है।

इसके अलावा मक्खन की तुलना में घी उच्च तापमान पर बना है इसलिए इसमें बैक्टीरिया और माइक्रो ऑर्गनिज़म (microorganisms) नहीं होते हैं।

(और पढ़ें – गाय के घी के फायदे और नुकसान)

मक्खन 325-375 डिग्री फारेनहाइट के बीच जलने लगता है और घी 375-485 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच जलता है। इस प्रकार मक्खन की तुलना में घी को जलने के लिए उच्च तापमान की जरूरत होती है। इसलिए उच्च तापमान पर खाना पकाने के लिए घी का उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार, घी की तुलना में मक्खन एक उच्च धूम्रपान बिंदु है, जिसका मतलब है कि उच्च तापमान पर खाना पकाने के लिए घी का उपयोग किया जा सकता है।

(और पढ़ें – देसी घी और वनस्पति घी में से सेहत के लिए क्या है अधिक फायदेमंद?)

हालांकि घी मक्खन की तुलना में स्वस्थ है फिर भी मक्खन इतना बुरा नहीं है। ध्यान रखें कि कोलेस्ट्रॉल का स्तर केवल आहार के सेवन से ही कम नहीं होता है। धूम्रपान नहीं करने और नियमित रूप से कसरत करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वास्तव में, 2010 में अमेरिकन जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल न्यूट्रिशन (American Journal of Clinical Nutrition) में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि संतृप्त वसा सीधे हृदय रोग के खतरे को बढ़ाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कहा है कि संतृप्त वसा जो मक्खन में पाया जाता है, स्वस्थ कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखने के लिए आपके दैनिक कैलोरी सेवन का 7 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि आपको पूरी तरह से मक्खन को छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। बस आप इसका सेवन संतुलित मात्रा में करें।

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें