भारत में खाना पकाने में गाय के घी या देसी घी का सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया जाता है। खाने के अलावा गाय के घी को पोषक और स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक फायदों के लिए भी जाना जाता है। आयुर्वेद में गाय के घी की पहचान रसायन के रूप में की गई है।

आयुर्वेद के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक चरक संहिता में भी गाय के घी का उल्‍लेख मिलता है। यहां तक कि संस्‍कृत में गाय के घी को घृत के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है “उजला” या “उज्‍जवल करने वाला”। दुर्भाग्‍यवश, गाय के घी के फायदों को लेकर बहुत ही कम वैज्ञानिक शोध किए गए हैं।

गाय का घी क्‍या है?

भारत के खाद्य सुरक्षा और नियामक प्राधिकरण के अनुसार घी दूध या मिल्‍क क्रीम से बना एक फैट है जिसमें किसी भी तरह का कोई रंग और प्रिजर्वेटिव (डिब्‍बाबंद खाद्य पदार्थों में इस्‍तेमाल होने वाले) मौजूद नहीं होता है।

क्‍या आप जानते हैं?

हिंदू धर्म में गाय का घी अत्‍यंत धार्मिक और आध्‍यात्मिक महत्‍व रखता है। ये वैदिक कार्यों में इस्‍तेमाल होने वाले सबसे प्रमुख घटकों में से एक है। हिंदू रीति-रिवाजों में भगवान को गाय का घी अर्पित किया जाता है। 

  1. गाय के घी के फायदे - Cow ghee ke fayde in Hindi
  2. गाय के घी के नुकसान - Cow ghee ke nuksan in Hindi
  3. गाय का घी कैसे खाएँ - How to consume cow ghee in Hindi
  4. अधिक घी खाने पर क्या करें - How to manage over usage of ghee in Hindi

गाय के घी के लाभ पाचन के लिए - Ghee good for digestion in Hindi

अच्छा पाचन अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है और घी आपके पेट की परत को ठीक करके पाचन को स्वस्थ बना सकता है।

ब्यूटिरिक एसिड एक शॉर्ट-चेन फैटी (short-chain fatty) एसिड में समृद्ध होने के कारण, यह आंतों की कोशिकाओं को पोषण देता है। यह सूजन को कम करता है, अपरिवर्तित खाद्य कणों का रिसाव कम करता है और म्यूकोसॉल की दीवार (mucosal wall) की रिपेयर में सहायक है।

एप्लाइड और एंटरप्राइजल माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित एक 2000 के अध्ययन से पता चलता है कि अस्वस्थ पाचन तंत्र वाले लोग ब्यूटिरिक एसिड उत्पन्न नहीं करते हैं। इससे यह पता चलता है कि आपको पाचन की सहायता के लिए ब्यूटिरिक एसिड से समृद्ध पदार्थ खाने की ज़रूरत है।

गाय के घी के गुण वजन बढ़ाने में - Cow ghee for weight gain in Hindi

नियमित रूप से उन लोगों को आहार के रूप में घी लेने की सलाह दी जाती है जो वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। घी शारीरिक दुर्बलता, दुबले शरीर और सूखी त्वचा वाले लोगों के लिए उपयोगी है।

(और पढ़ें – वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए)

गाय के घी के फायदे सेक्स में - Ghee for sex in Hindi

घी शुक्र धातु (पुरुष और महिला प्रजनन प्रणाली) की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए उपयोगी है। यह अपने विशाल पौष्टिक स्वास्थ्य लाभों के साथ, उन लोगो के लिए फायदेमंद है, जो दैनिक रूप से सेक्स में लिप्त होना चाहते हैं।

(और पढ़ें - sex kaise kare और sex position in hindi)

गाय के घी से मालिश त्वचा के लिए - Clarified butter for skin in Hindi

घी सर्दियों के मौसम में उन लोगों के लिए लाभदायक है जो शुष्क त्वचा और शरीर के समग्र सूखेपन से पीड़ित हैं। घी के साथ दूध का उपयोग भी सूखेपन से राहत देने में मदद करता है। शल्य चिकित्सा (post surgical care) में भी घी एक आहार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया गया है। घी एक उत्कृष्ट मॉइस्चराइजर है और जब पूरे शरीर की मालिश के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तब एक सुखद और शीतलक प्रभाव देता है। पूरे शरीर पर इसे लगा कर हल्के दबाव के साथ शरीर की मालिश की जाती है। 

(और पढ़ें – रूखी त्वचा के लिए क्रीम)

घी खाने के फायदे बुखार के बाद - Ghee in fever in Hindi

घी का सेवन बुखार के बाद उत्तेजना से राहत देने में मदद करता है। लेकिन ध्यान दें, जिस व्यक्ति को बुखार चल रहा हो उसको घी नहीं दिया जाता है। बुखार पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद, ताकत और प्रतिरक्षा शक्ति हासिल करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। 

(और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)

देशी गाय के घी के फायदे नवजात शिशु के लिए - Cow ghee for infants in Hindi

2 - 5 घी की बूँदें नवजात को देने की सलाह दी जाती है। गाय का घी और दूध जन्म से ही बच्चों के लिए अनुकूल होता है। स्तनपान कराने वाली मां को भी इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है। यह मां के दूध को पौष्टिक गुणों से भर देता है।

गाय के घी का लाभ नेत्र विकारों के लिए - Cow ghee for eyesight in Hindi

कई नेत्र विकारों के लिए, घी एक तर्पणा नामक प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है। यहां आटे के पेस्ट का मिश्रण आंख के क्षेत्र के चारों और लगाया जाता है जिसको हर्बल घी से भरा जाता है। इसमें व्यक्ति को आँखें खोलने और बंद करने के लिए कहा जाता है। आयुर्वेद का कहना है कि यह प्रक्रिया नेत्र शक्ति को मजबूत करती है और उसमें सुधार लाती है। विशेष रूप से, त्रिफला के साथ प्रसंस्कृत घी इसी उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है। त्रिफला और शहद के साथ घी नेत्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक उपाय के रूप में बताया गया है।

(और पढ़ें – आँखों की रौशनी कैसे बढ़ायें)

घी दृष्टि में सुधार लाने के लिए आंखों पर इस्तेमाल किया जाता है। घी से आँखें धोने से आंखों को ठंडक मिलती है जिससे आँखों की थकान मिटती है।

देसी गाय घी गठिया में उपयोगी - Desi ghee for arthritis in Hindi

क्लेरफाइड बटर में ब्यूटिरिक एसिड सबसे लाभकारी शॉर्ट-चेन फैटी एसिड में से एक है जिसकी शरीर को सूजन से लड़ने के लिए जरूरत होती है।

ब्यूटिरिक एसिड वास्तव में शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन को कम कर सकता है, खासकर जठरांत्र संबंधी मार्ग में। यही कारण है कि अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित रोगी, क्रोहन रोग या अन्य सूजन रोगों में अपने भोजन में घी को शामिल करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, सख्त जोड़ों पर घी की मालिश मदद कर सकती है जिससे सूजन, जोड़ों को चिकनाई और गठिया की कठोरता से बचाया जा सकता है।

एनीमा के माध्यम से घी प्रशासित किए जाने पर वात संतुलित हो जाता है जो हड्डी के ऊतकों के समुचित पोषण के लिए अग्रणी हैं (अस्थि और वात जुड़े हुए हैं)। इसलिए, घी एनीमा गठिया जैसे मामलों में उपयोगी है।

(और पढ़ें – गठिया रोग का इलाज हैं यह 10 जड़ीबूटियां)

गाय घी के गुण मौखिक अल्सर में प्रभावी - Desi ghee for mouth ulcer in Hindi

आयल पुलिंग विधि में (तेल या घी द्वारा गला साफ करना), तिल के तेल के स्थान पर गाय का घी प्रयोग किया जाता है। यह मौखिक अल्सर को ठीक करने और जलन से राहत देने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह पित्त असंतुलन मौखिक विकारों में भी प्रभावी है। 

(और पढ़ें – मुंह के छालों का घरेलू इलाज)

गाय के घी के लाभ हर्बल धूम्रपान में - Ghee usage in herbal smoking in Hindi

आयुर्वेद दैनिक दिनचर्या में हर्बल धूम्रपान की सलाह देता है। घी बड़े पैमाने पर आयुर्वेद हर्बल धूम्रपान प्रक्रिया में एक घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हर्बल धूम्रपान, वात और कफ दोष को संतुलित करने में मदद करता है। यह दोनों निवारक और उपचारात्मक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

गाय के घी के औषधीय गुण करते हैं घाव का इलाज - Pure Ghee for healing wounds in Hindi

जात्यादि घृत, जो एक प्रकार का हर्बल घी है, बाहरी घाव के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। आधा कप घी, एक चम्मच हल्दी पाउडर और 2 चम्मच नीम के साथ एक पेस्ट बनाएँ - इस पेस्ट को घावों और फोड़ों के तुरंत उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।

गाय के घी के फायदे खून बहने में - Clarified Butter for bleeding in Hindi

लीच थेरेपी में घी जलन कम करने के लिए संबंधित क्षेत्र पर लगाया जाता है। घाव, जिससे खून बह रहा है, उसे तुरंत भरने और शीतलता देने के लिए घी को घाव पर लगाने की सलाह दी जाती है।

गाय का घी खाने के फायदे जलन और उत्तेजना में - Ghee for burning sensation in Hindi

आयुर्वेद अभ्यास में फिस्टुला और बवासीर के इलाज के लिए घी का उपयोग किया जाता है, इस विशेष तैयारी को क्षरा (Kshara) कहा जाता है। घी इस विधि के बाद जलन और उत्तेजना से राहत देने के लिए लगाया जाता है। बच्चों का जब कान छेदा जाता है, तब दर्द और जलन को कम करने और पियर्सिंग की प्रक्रिया को आसान करने के लिए घी सबसे पहले लगाया जाता है। घी फटे होंठ, फटी एड़ियों के ऊपर लगाया जाता है, जो त्वचा के रूखेपन को जल्दी भर देता है और त्वचा को मुलायम कर देता है।

घी है दिमाग़ और शांत मन के लिए फायदेमंद - Ghee psychological benefits in Hindi

यह सबसे अच्छा स्मृति और बुद्धिमत्ता के लिए है। सिर में घी का इस्तेमाल मन को शांत करने में मदद करता है।

घी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए - Pure ghee for immunity in Hindi

घी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। दूध के साथ घी सबसे अच्छे बुढ़ापा विरोधी आहार संयोजन के रूप में माना जाता है। ब्यूटिरिक एसिड घी में एक महत्वपूर्ण तत्व होता है जो टी सेल (T-cell) उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद करता है, जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए ठीक से काम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, विटामिन ए की मौजूदगी के कारण घी की एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि शरीर में मुक्त कणों को नष्ट करने में सहायक है। विटामिन ए भी पूरे शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करा है जो अन्यथा प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती है।

विटामिन ए भी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कैंसर की रोकथाम के लिए विशेष रूप से अल्सरेटिव बृहदांत्रशोथ (ulcerative colitis) के मामलों में मदद कर सकता है जो अन्यथा कोलन कैंसर का कारण हो सकता है।

(और पढ़ें – रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ायें – बताएंगे बाबा रामदेव)

घी का प्रयोग माना जाता है शुभ - Ghee for spiritual purposes in Hindi

घी बहुत शुद्ध और शुभ माना जाता है। इसलिए हिंदू रीति में जब भोजन परोसा जाता है, तब घी भोजन पर छिड़का जाता है। यह भोजन के शुद्ध होने का प्रतीक होता है। इस प्रक्रिया को "अभिघार"(Abhighara) के रूप में जाना जाता है।

घी आध्यात्मिक प्रथा होमा में प्रयोग किया जाता है, जहां घी आग में अर्पित किया जाता है। वो सभी स्रोत जो आग के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग किए जाते हैं - घी उनमें से एक है। सुबह जागने के बाद, घी में चेहरा देखना एक शुभ रस्म माना जाता है।

घी का उपयोग घरेलू उपचारों में - Ghee home remedy in Hindi

  • सुबह भोजन से पहले घी का एक चम्मच लेने से मूत्राशय क्षेत्र में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।

  • लंबे समय से चले आ रहे ज्वर में, घी के साथ-साथ लहसुन आहार के रूप में लेने की सलाह दी जाती है। (और पढ़ें - लहसुन खाने का फायदा)

  • तालू और मौखिक गुहा के सूखेपन से राहत देने के लिए, आंवला पाउडर और किशमिश को घी के साथ मिलाकर कुछ मिनट के लिए मुंह के अंदर रखा जाता है।

  • हरीतकी पाउडर का घी के साथ मिलाकर सेवन करना, जलन में राहत के लिए उपयोगी है।

  • त्रिफला का काढ़ा, घी और चीनी के साथ, एनीमिया के उपचार में उपयोगी है। 

(और पढ़ें - एनीमिया के कारण)

घी का सेवन देता है धूल एलर्जी से राहत - Cow ghee for allergy in Hindi

इससे पहले कि आप काम के लिए अपने घर से बाहर जाएं, नथुने (नाक) की भीतरी दीवार पर घी की एक पतली परत लगा लें। यह वास्तव में धूल एलर्जी से बचने में मदद करता है।

गर्भावस्था में घी है लाभदायक - Ghee for pregnancy in Hindi

आयुर्वेद में गर्भावस्था में घी एक आवश्यक आहार घटक के रूप में बताया गया है। क्योंकि घी एक मीठा पदार्थ है जो जन्म के बाद से किसी भी व्यक्ति के लिए अनुकूल है। घी गर्भावस्था को स्थिर करने के लिए नाल क्षेत्र (umbilical region) के नीचे भी लगाया जाता है। 

(और पढ़ें – प्रेगनेंट करने का तरीका और गर्भावस्था में पेट में दर्द)

गाय का घी नाक में - Cow ghee nasal drops benefits in Hindi

घी के 2 बूँदें भोजन से 30 मिनट पहले, सुबह के समय दोनों नाक में डालें। इस अभ्यास को नस्य कर्म  (Nasya Karma) के रूप में जाना जाता है।

सफेद बाल, बाल गिरने, माइग्रेनसिरदर्द, टिनीटिस, सुनने की समस्या, दृष्टि समस्या, स्मृति और एकाग्रता की कमी आदि के लिए नस्य कर्म 2 से 6 सप्ताह के लिए किया जा सकता है।

ध्यान रखें कि इन परिस्थितियों में नाक में घी डालना उचित नहीं है -

नाक में घी डालने के लिए घी का उपयोग उचित नहीं है जब आकाश बादलों से भरा हो, बरसात का मौसम हो या अधिक सर्दी के दौरान जब व्यक्ति को ठंड, साइनसाइटिस, खांसी और बुखार हो। साइनसाइटिस, सर्दी और खांसी के मामलों में (जो वात और कफ के कारण होते हैं), घी हालत और भी खराब कर सकता है। लेकिन  सिर और गर्दन सहित वात और पित्त की सभी परिस्थितियों में घी उपयोगी है।  

(और पढ़ें - खांसी का इलाज)

देसी घी के फायदे बनाएँ हड्डियों को मजबूत - Desi ghee for bones in Hindi

घी उन खाद्य पदार्थों में से एक है जो विटामिन के (Vitamin K) विशेष रूप से विटामिन के 2 में समृद्ध है।

विटामिन के 2 (K2) कैल्शियम सहित खनिजों का उपयोग करने में मदद करने के लिए शरीर के लिए जरूरी है। वास्तव में, यह विटामिन कैल्शियम की तुलना में बेहतर हड्डियों बनाता है औरइस विटामिन की दाँत क्षय के विरुद्ध रक्षा के लिए उचित स्तर की आवश्यकता होती है। घी भी जोड़ों और संयोजी ऊतकों के लचीलेपन को बढ़ावा देता है।

न्यूट्रीशन रिपोर्ट में प्रकाशित एक 2001 का अध्ययन है कि विटामिन के हड्डी के चयापचय को नियंत्रित कर सकता है। ओस्टोकैल्सीन (एक प्रोटीन जो अस्थि खनिज में शामिल होना माना जाता है) के गामा कार्बोक्जिलेशन के अलावा, साक्ष्य बढ़ने से यह भी संकेत मिलता है कि विटामिन के कैल्शियम संतुलन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

ऊर्जा स्तर बढ़ाने के लिए खाएँ घी - Ghee for energy in Hindi

घी आपके चयापचय के साथ-साथ ऊर्जा स्तर को बढ़ावा दे सकता है। इसमें मध्यम-श्रृंखला फैटी एसिड आपके ऊर्जा स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। ये फैटी एसिड जल्दी लिवर द्वारा संसाधित होते हैं और इसे ऊर्जा के रूप में जला देते हैं। वे वसा ऊतकों में नहीं जाते हैं जिससे वजन में योगदान दे सकते हैं।

इसी समय घी ए, डी, ई और के जैसे वसा-घुलनशील विटामिनों के अवशोषण में सहायता करता है, जो बेहतर ऊर्जा और सहनशक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एथलीट घी को लगातार ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल करें।

गाए के घी का हायर स्मोकिंग पॉइंट बचाता है मुक्त कणों से - High smoking point of Cow Ghee prevents free radicals in Hindi

नारियल तेल या जैतून के तेल जैसे अन्य तेलों की तुलना में घी का हायर स्मोकिंग पॉइंट है। इसका कारण यह है कि दूध जैसे गर्मी के प्रति संवेदनशील घटक घी से निकल जाते हैं।

इसका मतलब यह है कि 250 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक यह मुक्त कणों में नहीं टूटता है और एक्रोलिन रिलीज करता है, जो भोजन को गंध और तीखा स्वाद प्रदान करते हैं।

मुक्त कण अस्थिर अणु (unstable molecules) है जो सभी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, समय से पहले बुढ़ापे से लेकर कैंसर तक। इसलिए घी से आपको उन हानिकारक अस्थिर अणुओं को ग्रहण करने का खतरा कम हैं।

गाय के घी के नुकसान इस प्रकार है -

  • पीलिया, हेपेटाइटिस, फैटी लीवर परिवर्तन के दौरान घी के इस्तेमाल से बचना सबसे अच्छा होता है।
  • ज़्यादा घी अपच और दस्त का कारण बन सकता है। (और पढ़ें - अपच का घरेलू इलाज)
  • घी वजन बढ़ाता है इसलिए एक मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को प्रतिदिन 3 से 5 ग्राम घी तक का ही सेवन करना चाहिए और उसके बाद एक कप गर्म पानी पीना चाहिए। यदि घी को भोजन के साथ लेना है, तो घी के बेहतर पाचन के लिए भोजन गर्म होना चाहिए।
  • सर्दी और कफ के दौरान घी का उपयोग करने से हालत और भी खराब हो सकती है।
  • अमिश्रित घी पित्त की स्थिति में नहीं लिया जाना चाहिए, ख़ासतौर से जब पित्त अमा से जुड़ा हो। इस हालत में लिया गया घी पीलिया उत्पन्न करता है और घातक साबित हो सकता है।
  • जब गर्भवती महिलाएं ठंड या अपच से पीड़ित हों, तब घी लेने से बचें।
  • अगर घी खाने के बाद अपच या पेट का भारीपन लगे, तो एक कप गर्म पेय या कम वसा वाली छाछ का सेवन किया जा सकता है।

गाय का घी इन बातों का ध्यान रखते हुए खाएं -

  • हालांकि घी के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, अधिक घी का सेवन शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। बिना किसी क्लीनिकल कंडीशन के एक स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन सामान्य है, उसे एक चम्मच तेल या मक्खन के बजाय एक चम्मच घी भोजन में शामिल करना चाहिए। घी की अधिकतम दैनिक खपत प्रतिदिन 7 से 10 ग्राम (2 छोटा चम्मच)से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • भोजन लेते समय घी के साथ पहले सख़्त खाद्य सामग्री का सेवन किया जाना चाहिए, फिर नर्म खाद्य पदार्थ और अंत में दही।
  • आमतौर पर घी की खपत के बाद एक गर्म पेय लेना अच्छा होता है। उदाहरण के लिए, सुबह आधा या एक चम्मच घी एक कप चाय/कॉफी से पहले लिया जा सकता है।
  • सुबह आधा चम्मच घी नाश्ते में शामिल कर अपने दिन की शुरुआत आप शानदार तरीके से कर सकते हैं।
  • अपने दाल और चावल में आप एक छोटा चम्मच घी शामिल कर सकते हैं।
  • चपाती या पराठे पर घी डालकर खा सकते हैं।
  • लहसुन और कुछ मसालों को तलने के लिए भी घी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मसाले और जड़ी बूटियों को घी में मिलाया जा सकता है और चिकन और मछली पर डाला जा सकता है।
  • इसे दलिये में मिलाया जा सकता है।
  • पिघले घी को ताजे पॉपकॉर्न में डाला जा सकता है।
  • कुछ पश्चिमी जड़ी बूटियों के साथ घी मिलाकर पिटा ब्रेड पर लगाया जा सकता है।
  • कुछ घी को गर्म सूप में डाला जा सकता है।
  • घी का उपयोग विभिन्न बेकरी उत्पादों की तैयारी में भी किया जा सकता है।

अधिक घी खाने पर इन बातों का ध्यान रखें - 

  • अगर आपको लगता है कि आपने अधिक घी खा लिया है, तो तब तक खाना ना खाएं जब तक घी पूरी तरह से पच ना जाए।
  • हर आधे घंटे में गर्म पानी पिएं।
  • यदि आप भूख महसूस करने लगें, तो गर्म तरल खाद्य पदार्थों को ही खाने की कोशिश करें जैसे वेज सूप।
  • जब आप पेट और शरीर में हल्कापन महसूस करने लगें, तो आप अपनी आहार दिनचर्या को फिर से शुरू कर सकते हैं।
  • बिना फैट वाली छाछ घी के गलत उपयोग के बुरे प्रभावों का मुकाबला करने के लिए, एक विशेष उपाय के रूप में बताई जाती है। यह पाचन में सुधार करने में मदद करती है।
Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Herbal Hills Vitomanhills CapsuleHerbal Hills Vitomanhills Capsule320.0
Organic India GheeOrganic India Organic Ghee 625.0
Kerala Ayurveda Aswagandhadi LehyamKerala Ayurveda Aswagandhadi Lehyam225.0
Kerala Ayurveda Brahmi GhrithamKerala Ayurveda Brahmi Ghritham190.0
Kerala Ayurveda Dadimadi GhrithamKerala Ayurveda Dadimadi Ghritham200.0
Kerala Ayurveda Indukantha Ghritham KwathKerala Ayurveda Indukantha Ghritham180.0
Kerala Ayurveda Jathyadi GhrithamKerala Ayurveda Jathyadi Ghritham40.0
Kerala Ayurveda Kottamchukkadi KuzhambuKerala Ayurveda Kottamchukkadi Kuzhambu120.0
Kerala Ayurveda Saraswatha GhrithamKerala Ayurveda Saraswatha Ghritham200.0
Kerala Ayurveda Thikthaka GhrithamKerala Ayurveda Thikthaka Ghritham240.0
Herbal Hills Femohills CapsuleHerbal Hills Femohills Capsule295.0
Arya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakaraja RasayanamArya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakaraja Rasayanam330.0
Arya Vaidya Sala Kottakkal Panchagavya GhritamArya Vaidya Sala Kottakkal Panchagavya Ghritam145.0
Arya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakarasayanam 7 CapsuleArya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakarasayanam 7 Capsule55.0
Arya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakarasayanam 21 Capsule Arya Vaidya Sala Kottakkal Gandhakarasayanam 21 Capsule60.0
Nagarjuna Brahmi Ghrutham Nagarjuna Brahmi Ghrutham 100 ml0.0
Vaidyaratnam Bruhath Pinda ThailamVaidyaratnam Bruhath Pinda Thailam 167.0
Vaidyaratnam Chiruvilwadi Ghrutham Vaidyaratnam Chiruvilwadi Ghrutham168.0
Vaidyaratnam Dhanwantharam Kuzhampu Vaidyaratnam Dhanwantharam Kuzhampu199.5
Vaidyaratnam Dhathryadi GhruthamDhathryadi Ghrutham 188.0
Vaidyaratnam Durva GhruthamVaidyaratnam Durvaghrutham 170.0
Vaidyaratnam Gulguluthikthakam GhruthamVaidyaratnam Gulguluthikthakam Ghrutham 225.0
Vaidyaratnam Indukantham Ghrutham Indukantham Ghrutham 158.0
Vaidyaratnam MahasnehamVaidyaratnam Mahasneham 189.0
Vaidyaratnam Misrakasneham Vaidyaratnam Misrakasneham 215.0
Vaidyaratnam Panchagavya GhruthamVaidyaratnam Panchagavya Ghrutham148.0
Vaidyaratnam Sathadhautha Ghrutham OintmentVaidyaratnam Sathadhautha Ghrutham Ointment 70.0
Vaidyaratnam Shatpalam GhruthamVaidyaratnam Shatpalam Ghrutham141.0
Vaidyaratnam Thikthakam Ghrutham Vaidyaratnam Thikthakam Ghrutham 183.0
Vaidyaratnam Urvaruka GhruthamVaidyaratnam Urvaruka Ghrutham199.0
Nagarjuna Jeevanthyaadi Yamakam Nagarjuna Jeevanthyaadi Yamakam248.0
Nagarjuna Galacto PlusNagarjuna Galacto Plus210.0
Nagarjuna Kerapookkvladi LehyamNagarjuna Kerapookkvladi Lehyam212.0
Baidyanath Chyawan Vit SugarfreeBaidyanath Chyawan Vit Sugarfree190.0
Baidyanath Ashwagandhadi GhrithaBaidyanath Ashwagandhadi Ghrita124.45
Baidyanath Badam PakBaidyanath Badam Pak127.3
Baidyanath Brahmi GhritaBaidyanath Brahmi Ghrita275.5
Baidyanath Haridra Khand (Br)Baidyanath Haridra Khand (Br)85.5
Baidyanath VasavalehaBaidyanath Vasavaleha86.45
Baidyanath Triphala GhritaBaidyanath Triphala Ghrita218.5
Baidyanath Erand PakBaidyanath Erand Pak137.75
Baidyanath Kesari Kalp Royal ChyawanprashBaidyanath Kesari Kalp Royal Chyawanprash374.3
Baidyanath Phalkalyan GhritaBaidyanath Phalkalyan Ghrita218.5
Unjha Saptamrit Loha (40 Tablets) Saptamrit Loha (40 Tablets) 68.0
Zandu ChyavanprashadZandu Chyavanprashad310.26
Zandu Kesari JivanZandu Kesari Jivan Chyawanprash648.0
Dabur ChyawanprashDabur Chocolate Chyawanprash171.0
Dabur VasavalehaDabur Vasavaleha172.9
Dabur Supari PakDabur Supari Pak114.0
Vaidyaratnam Vajitone GranulesVaidyaratnam Vajitone Granules 235.0
Nagarjuna Ajamaamsa RasayanamNagarjuna Ajamaamsa Rasayanam240.0
Nagarjuna Vidaaryaadi LehyamNagarjuna Vidaaryaadi Lehyam 226.0
Nagarjuna Sukumaara GhruthamNagarjuna Sukumaara Ghrutham 310.0
Nagarjuna Mahaathikthaka Ghrutham Nagarjuna Mahaathikthaka Ghrutham250.0
Nagarjuna Daadimaadi GhruthamNagarjuna Daadimaadi Ghrutham138.0
Nagarjuna Mahaapaisaachika Ghrutham Nagarjuna Mahaapaisaachika Ghrutham 155.0
Nagarjuna Panchagavya Ghrutham Nagarjuna Panchagavya Ghrutham253.0
Nagarjuna Phalasarpis Nagarjuna Phalasarpis275.0
Patanjali ChyawanprashPatanjali Chyawanprash190.0
Patanjali Badam Pak Patanjali Badam Pak175.0
Hamdard Majun Supari PakHamdard Majun Supari Pak85.5
Patanjali Divya Mahayograj GuggulPatanjali Divya Mahayograj Guggul110.0
Hamdard Safi Natural Blood PurifierHamdard Safi Syrup57.0
Kairali ChyawanprasamKairali Chyawanprasam210.0
Kairali Breast Enhancement Kairbossom OilKairali Kairbossom Oil2100.0
Kairali Lakshadi KuzhambuKairali Lakshadi Kuzhambu165.0
Kairali Pinda ThailamKairali Pinda Thailam130.0
Kairali prabhanjanavimardanam kuzhambuKairali Prabhanjana vimardanam Kuzhambu145.0
Sri Sri Tattva Trayodashanga Guggulu TabletSri Sri Tattva Trayodashanga Guggulu80.0
Zandu Triphala GhritaZandu Triphala Ghrita50.0
Dabur Kaishore Guggulu Dabur Kaishore Guggulu85.5
Planet Ayurveda Brahmi ChyawanprashPlanet Ayurveda Brahmi Chyawanprash540.0
Patanjali Divya Phal GhritPatanjali Divya Phal Ghrit309.0
Swadeshi Cow GheeSwadeshi Cow Ghee760.0
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Birla Ayurveda Indukanta GhritamBirla Ayurveda Indukanta Ghritam365.0
SK Aloewin GelSK Aloewin Gel115.0
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संदर्भ

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