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ऊंट के दूध का उपयोग घुमंतू लोगों द्वारा सदियों से औषधीय रूप में किया जाता रहा है। यह दूध इंसानी बच्चों के लिए मां के दूध का सबसे बेहतर विकल्प में से एक है। 

ऊंट का दूध सामान्य गाय के दूध की तुलना में स्वाद में थोड़ा नमकीन होता है। 24 मानव और पशु अध्ययनों की एक समीक्षा में पाया गया कि ऊंटनी का दूध मधुमेह, कैंसर, विभिन्न प्रकार के संक्रमण, भारी धातु विषाक्तता, कोलाइटिस और शराब से प्रेरित विषाक्तता सहित विभिन्न रोगों में लाभदायक होता है। 

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हम में से बहुत से लोगों ने ऊंटनी के दूध का सेवन कभी नहीं किया है। इसके गुणों को इसका नियमित सेवन करने वाले बहुत से लोगों द्वारा भी पूरी तरह से नहीं समझा गया है। बहुत से लोग गाय के दूध को अधिक पसंद करते हैं। यह उनके दिमाग में कभी आता ही नहीं है कि वे ऊंट से मिलने वाले इस उत्पाद का भी आनंद ले सकते हैं, जो कि गाय के दूध की तुलना में अलग-अलग तरीकों से अधिक फायदेमंद है। ऊंट के दूध में, अन्य पशुओं से अलग, विभिन्न तरह के पोषक तत्वों पाए जाते हैं और यह विभिन्न बीमारियों का इलाज कर सकता है।

इस लेख में ऊंटनी के दूध की जानकारी, ऊंटनी के दूध की विशेषता, ऊंट के दूध के लाभ, उपयोग, कैमल मिल्क के फायदे या ऊंटनी के दूध के लाभ अथवा फायदे, कैमल मिल्क पाउडर के फायदे, कैमल मिल्क पाउडर का उपयोग, ऊंट के दूध के साइड इफेक्ट आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। 

(और पढ़ें - माँ का दूध बढ़ाने के उपाय)

  1. ऊंट के दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व - camel milk me paye jane wale poshak tatv
  2. ऊंट के दूध के फायदे - Camel milk ke fayde in Hindi
  3. कैमल मिल्क के फायदे - Oont ke doodh ke fayde in Hindi
  4. ऊंटनी के दूध के लाभ - Camel milk pine ke fayde in Hindi
  5. कैमल मिल्क पाउडर - Camel milk powder in hindi
  6. ऊंट के दूध के साइड इफेक्ट - Camel milk ke nuksan in Hindi
  7. ऊंटनी के दूध की अन्य जानकारी - oontni ke doodh ki anya visheshtaye

ऊंट के दूध में गाय के दूध की तुलना में 10 गुना अधिक आयरन और तीन गुना अधिक विटामिन सी होता है। ऊंट के पास अद्वितीय शक्तिशाली प्रतिरक्षा प्रणाली घटक होते हैं, जो उनके दूध में भी पाए जाते हैं। 

ऊंट के एक कप दूध (244 ग्राम वजन) में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख पोषक तत्वों की मात्रा:

पोषक तत्व प्रति 244 ग्राम
ऊर्जा 107 कैलोरी
प्रोटीन 5.4 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 11 ग्राम
फाइबर 0.0 ग्राम
शुगर 8 ग्राम
वसा 0.140 ग्राम
खनिज प्रति 244 ग्राम
कैल्शियम 293 मिलीग्राम
आयरन 4 मिलीग्राम
सोडियम 150 मिलीग्राम
फास्फोरस 150 मिलीग्राम
विटामिन प्रति 244 ग्राम
विटामिन A 224.5 IU*
विटामिन C 7 मिलीग्राम
वसा/फैटी एसिड प्रति 244 ग्राम
कोलेस्ट्रॉल 17 ग्राम
ट्रांस फैटी एसिड 4.6 ग्राम
संतृप्त वसा 1.5 ग्राम
मोनो वसा 32.14 g
पॉली वसा 1 ग्राम

*IU एक अंतराष्ट्रीय मानक हैं, जो आमतौर पर फैट सॉल्युबल विटामिन्स जैसे A, D या E आदि को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।

ऊंट के दूध के लाभ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों में - Camel milk ke labh gastrointestinal disorders me

ऊंट के दूध में एंटी इंफ्लेमेटरी प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है, जो पेट और आंतों के विकारों पर स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक प्रभाव डालती है। इसमें पाए जाने वाले मोनो और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड तथा भरपूर विटामिन से हमारे कार्बोहाइड्रेट चयापचय में सुधार होता है। इसके अलावा, यह पाया गया कि फर्मेन्टेड (खमीरयुक्त) ऊंट के दूध में एक एंजाइम (एंजियोटेंसिन I-कंवर्टिंग एंजाइम, एसीई) होता है, जो दूध के प्रोटीन का पाचन सही से होने में मदद करता है।

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पाचन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए ऊंट के दूध के उपयोग पर हाल की रिपोर्टों से पता चला है कि ऊंट के दूध में एंटी-डायरिया गुण होते हैं। अध्ययन में शामिल वे सभी बच्चे, जिन्होंने ऊंटनी का दूध लिया और जिन्हें प्रति दिन 20 दस्त होते थे। इन बच्चों का मल त्याग सामान्य हो गया और वे ठीक हो गए। ऊंटनी के दूध का उपयोग उन छोटे बच्चों में भी किया जा सकता है जिन्हें रोटावायरस से दूषित खाने के कारण दस्त होती है, क्योंकि ऊंट का दूध एंटी-रोटावायरस एंटीबॉडी से समृद्ध होता है। 

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ऊंट के दूध का उपयोग है मधुमेह में लाभदायक - Camel milk ka upyog hai Diabetes me labhdayak

कम वसा वाले ऊंट के इस दूध में न केवल स्वस्थ विटामिन और खनिज होते हैं, बल्कि यह इंसुलिन का भी एक समृद्ध स्रोत है। इस दूध में कथित तौर पर प्रत्येक लीटर में एक चौथाई इंसुलिन की मात्रा होती है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए एक संभावित उपचार विकल्प बन जाता है।

राजस्थान राज्य में बीकानेर डायबिटीज केयर रिसर्च सेंटर के 2005 के एक अध्ययन में टाइप 1 डायबिटीज पर ऊंटनी के दूध के प्रभावों का अवलोकन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऊंट के दूध का सेवन करने से लंबे समय तक ग्लाइसेमिक या ब्लड शुगर पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए आवश्यक इंसुलिन की मात्रा लेने की जरुरत कम हो जाती है।

प्रमुख शोधकर्ता डॉ आरपी अग्रवाल के अनुसार, प्रतिदिन 500 मिलीलीटर कच्चे, ताजे ऊंट के दूध का सेवन करने से इंसुलिन जैसे प्रोटीन के कारण मधुमेह रोगियों के जीवन में सुधार होता है। यह प्रोटीन तेजी से हमारे खून में अवशोषित हो जाता है और जमाव नहीं करता है। हालांकि, डॉ अग्रवाल यह भी कहते हैं कि इंसुलिन मधुमेह के लिए सबसे प्रभावी उपचार है। यद्यपि यह शोध काफी आशाजनक प्रतीत होता है, लेकिन मधुमेह के उपचार के लिए ऊंटनी के दूध की प्रभावशीलता को साबित करने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। 

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कैमल मिल्क के फायदे बचाए फूड एलर्जी से - Camel milk ke fayde bachaye Food Allergy se

ऊंट के दूध में गाय के दूध में पाए जाने वाले दो शक्तिशाली एलर्जेंस की कमी होती है और इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली के घटक भी होते हैं। इसलिए यह दूध और अन्य खाद्य पदार्थों से एलर्जी वाले बच्चों को लाभ पहुंचा सकता है।

इजराइल मेडिकल एसोसिएशन जर्नल के दिसंबर 2005 के संस्करण में प्रकाशित एक अध्ययन में आठ बच्चों पर ऊंट के दूध के प्रभाव की जांच गयी, जिनको दूध और अन्य खाद्य से गंभीर एलर्जी थी। पारंपरिक उपचारों से इलाज में विफल रहने के बाद, अध्ययन के प्रतिभागियों ने शोधकर्ताओं के निर्देशन में ऊंट के दूध का सेवन किया। दैनिक प्रगति रिपोर्ट से संकेत मिला कि सभी आठ बच्चे बिना किसी दुष्प्रभाव के अपनी एलर्जी से पूरी तरह उबर गए। शोधकर्ताओं ने कहा कि पारंपरिक उपचारों की तुलना में परिणाम वास्तव में शानदार थे।

ऊंटनी के दूध में रोग से लड़ने वाले इम्युनोग्लोबुलिन पाए जाते हैं। इन इम्युनोग्लोबुलिन की एलर्जी के लक्षणों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। हालांकि, एलर्जी के इलाज में ऊंट के दूध की प्रभावशीलता को पर्याप्त रूप से साबित करने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है। 

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कैमल मिल्क के लाभ घटाए कोलेस्ट्रॉल - Camel milk pine ke fayde ghataye Cholesterol

रक्त में कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर को हृदय रोग के लिए एक बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। चूहों पर किये गए अध्ययन में यह प्रदर्शित किया गया है कि, खमीरयुक्त ऊंट के दूध का उपयोग उनमें हाइपोकोलेस्टेरोलेमिक (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला) प्रभाव पैदा करता है।

ऊंट के दूध का हाइपोकोलेस्ट्रोल तंत्र अभी भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस अध्ययन में विभिन्न परिकल्पनाओं पर चर्चा की गई है। एक परिकल्पना यह है कि ऊंट के दूध के बायोएक्टिव पेप्टाइड्स और कोलेस्ट्रॉल के स्तर के बीच प्रतिक्रिया होती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है। दूसरी परिकल्पना यह है कि ऊंट के दूध में ओरोटिक एसिड (न्यूक्लिक एसिड के चयापचय में एक मध्यवर्ती के रूप में काम करता है) होता है, जिसे चूहों में और मनुष्यों में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

(और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपचार)

ऊंटनी के दूध के लाभ इम्यून सिस्टम करें मजबूत - Camel milk pine se hota hai Immune System strong

ऊंट के दूध के शक्तिशाली प्रतिरक्षा प्रणाली घटक रोगों से लड़ने में मदद कर सकते हैं। कथित तौर पर, ऊंट के दूध में छोटी मात्रा में पाए जाने वाले इम्युनोग्लोबुलिन या एंटीबॉडी, रोग पैदा करने वाले एंटीजन नामक बाहरी पदार्थों को प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नष्ट करने के लिए आसान लक्ष्य बनाने में सक्षम बनाते हैं। ऊंट के दूध के घटक विभिन्न ऑटोइम्यून विकारों जैसे क्रोहन रोग और मल्टीपल स्केलेरोसिस पर काबू पाने में प्रभावी होते हैं। 

(और पढ़ें - प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने के लिए क्या खाएं)

ऊंटनी के दूध के फायदे हैं आटिज्म में लाभदायक - Utni ke doodh ke fayde kare Autism ka ilaj

कुछ अध्यनों में ऊंट के दूध से आटिज्म के कम होने और मिटने की पुष्टि की गई है। ऑटिस्टिक लोगों पर किये गए अध्ययन में यह पाया गया कि ऊंटनी के दूध के सेवन से वे धीरे-धीरे बेहतर हो जाते हैं। वे अधिक विनम्र, कम विनाशकारी और कम उग्र होते हैं। ऊंटनी के दूध के इन स्वास्थ्य लाभों पर प्रमाण के अभाव में इस विषय पर किए गए कुछ अध्ययन किसी निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन, ऑटिस्टिक लक्षणों को कम करने के लिए ऊंटनी के दूध के एंटीऑक्सीडेंट गुणों को जिम्मेदार ठहराया गया है। अभी भी ऊंटनी के दूध के इन सभी प्रभावशाली परिणामों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए शोध चल रहा है।

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ऊंटनी के दूध की विशेषता कम करे बढ़ती उम्र का असर - Camel milk powder benefits kam kare badati umr ka lakshan

ऊंटनी का दूध अल्फा-हाइड्रॉक्सिल एसिड यौगिक का निर्माण करता है, जो झुर्रियों को रोकने, चेहरे की लाइनों को दूर करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी करने में मदद करता है। ऊंटनी के दूध को विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों और लेखों में एंटी-एजिंग पदार्थ के रूप में प्रकाशित किया गया है। हालांकि, इस विषय पर अभी तक पर्याप्त शोध अध्ययन उपलब्ध नहीं है। 

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कैमल मिल्क पाउडर के फायदे - Camel milk powder ke benefits in hindi

हम एक उच्च रूढ़िवादी समाज में रहते हैं और हम कोई भी निर्णय लेने से पहले दो बार सोचते हैं। विशेष रूप से जब परिवार के स्वास्थ्य की बात आती है, तो हम यह सुनिश्चित करने के लिए दोहरा ध्यान रखते हैं कि हम सही उत्पाद खरीदें। यह बात कैमल मिल्क पाउडर पर भी लागू होती है। शायद, आप सोच सकते हैं कि क्या कैमल मिल्क पाउडर में उतने ही पोषक तत्व होते हैं जितने कैमल मिल्क में होते हैं? आइए हम कुछ तथ्यों को देखें जो यह साबित करते हैं कि कैमल मिल्क पाउडर में भी दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के समान स्तर को बनाए रखा जाता है।

  • कैमल मिल्क पाउडर के स्वास्थ्य लाभ दूध के समान ही होते हैं। कैमल मिल्क पाउडर कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए एक प्रत्यक्ष तरीके से काफी उपयोगी हैं।
  • फ्रिज में नहीं रखने पर भी कैमल मिल्क पाउडर खराब नहीं होता है। इसको स्टोर करना भी आसान है।
  • हाइजेनिक वैज्ञानिक प्रक्रिया की मदद से इसे दूध की अवस्था से पाउडर में बदलने के कारण इसके जीवन काल में वृद्धि हो जाती है, यानि आप लंबे समय तक इसका उपयोग कर सकते हैं।
  • ऊंट के दूध को कैमल मिल्क पाउडर में परिवर्तित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी न केवल इसके पोषण मूल्य को बनाए रखती है बल्कि स्वाद भी वही रहता है।
  • ऊंट के दूध का पाउडर किसी भी प्रकार की एलर्जी पैदा नहीं करता है और किसी भी आयु के लोगों द्वारा उपयोग करने के लिए बिल्कुल सुरक्षित प्रमाणित है। 

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कैमल मिल्क पाउडर का उपयोग कैसे करें - Camel milk powder use kaise kare

हमने ऊपर ऊंट के दूध के पाउडर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की गुणवत्ता के बारे में स्पष्ट जानकारी दी, आइए अब हम देखें कि कैमल मिल्क तैयार करना या इसका उपयोग करना कितना आसान है।

कैमल मिल्क पाउडर से कैमल मिल्क तैयार करने के लिए 2 टेबल स्पून कैमल मिल्क पाउडर और आधा गिलास गुनगुना पानी लें। कैमल मिल्क पाउडर को गुनगुने पानी में तब तक मिलाएं जब तक यह अच्छी तरह मिक्स न हो जाए। जब कैमल मिल्क पाउडर पूरी तरह से पानी में घुल जाता है, तो फिर आधा गिलास पानी और डालें। आप कैमल मिल्क पाउडर की मात्रा आप अपनी पसंद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं। 

(और पढ़ें - हल्दी दूध बनाने की विधि)

चलिए अब ऊंटनी के दूध के कुछ स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जानते हैं। प्राथमिक जोखिमों में से एक यह है कि इसका मुख्य रूप से बिना पाश्चराइज्ड रूप में सेवन किया जाता है। अमेरिका के सेंट लुइस इंस्टीट्यूट फॉर कंजर्वेशन मेडिसिन (ICM) ने अफ्रीकी देश उत्तरी केन्या में ऊंट के दूध की खपत का अध्ययन किया, जहां लगभग 10 प्रतिशत लोग बिना पाश्चराइज्ड किया हुआ ऊंट का दूध पीते हैं। इससे वे खुद को कई पशु-आधारित रोग जनकों के जोखिम में डाल देते हैं।

अध्ययन में ऊंट के दूध में भेड़ और अन्य मवेशियों के दूध की तुलना में रोगजनक बैक्टीरिया का अधिक प्रचलन पाया गया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि केन्या में, रोग जनकों का यह बढ़ा हुआ स्तर पालतू जानवरों के रूप में ऊंटों के बढ़ते उपयोग के साथ जुड़ा हुआ है।

साइंस पत्रिका में छपे एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि ऊंटनी के दूध में वो वायरस है, जो मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (MERS) का कारण बनता है। हालांकि, MERS के लिए बढ़ते जोखिम और कच्चे ऊंट के दूध के उपभोग के बीच कोई विशिष्ट संबंध नहीं मिला, लेकिन उन्होंने दूध को बिना पाश्चराइज्ड किए सेवन करने के खिलाफ चेतावनी दी है। 

(और पढ़ें - दूध के फायदे)

ऊंट के दूध का क्या बनता है? - Camel milk se kya kya banaya jata hai?

आप ऊंट के दूध से चाय या कॉफी बना सकते हैं या इसका आम दूध की तरह सेवन कर सकते हैं। परंपरागत रूप से ऊंट के दूध का उपयोग चीज, दही या बटर बनाने में नहीं किया जाता है क्योंकि ऐसा करना मुश्किल होता है। लेकिन आधुनिक तकनीक की मदद से वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिससे ये भी संभव हो जायेगा। कुछ कंपनियां ऊंट के दूध की चॉकलेट भी बनाती है। ऊंट के दूध का उपयोग कई देशों में वर्षों से क्रीम, साबुन और लोशन बनाने में भी किया जाता रहा है। 

(और पढ़ें - त्वचा पर दूध की मलाई लगाने के फायदे)

ऊंटनी का दूध पीने में कैसा लगता है? - Camel milk pine se kaisa lagata hai?

जब लोग पहली बार ऊंट का दूध पीते हैं, तो उन्हें कुछ भी असामान्य नहीं लगता है, लेकिन कुछ रिपोर्टों में देखा गया है कि लोगों को अधिक ऊर्जा महसूस होती है या मूड में सुधार होता है। जब ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे पहले ऊंटनी का दूध पीते हैं, तो कुछ माता-पिता का कहना हैं कि बच्चा बहुत जल्दी और बेहतर काम करता है। लेकिन हमारी सलाह हैं कि आपके बच्चे के आहार में कोई भी परिवर्तन किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही किए जाने चाहिए। 

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ऊंटनी के दूध की गुणवत्ता की क्या गारंटी है? - Camel milk ki quality ki kya guarantee hai?

भारत में 2016 में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के माध्यम से दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए निश्चित और मानकीकृत नियम तय किये गए हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के अनुसार, पूरे देश में ऊंट के दूध (कच्चा, पाश्चराइज्ड, उबला हुआ, फ्लेवर्ड और स्टर्लाइज्ड) का मिल्क फेट 3.0% और दूध के अन्य ठोस पदार्थों का न्यूनतम प्रतिशत 6.5 निर्धारित है। FSSAI द्वारा समय समय पर गुणवत्ता की जाँच की जाती है।

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कैमल मिल्क कहां मिलेगा? - Unt ka doodh kaha milta hai?

यदि आप भारत के ऐसे क्षेत्र में रहते हैं, जहां ऊंट पालन एक कृषि व्यवसाय है तो आप ऊंट का ताजा दूध आसानी से इसके विक्रेताओं से ले सकते हैं। लेकिन जिन क्षेत्रों में ऊंट नहीं होते उनके लिए ऊंट का ताजा दूध मिलना वर्तमान में थोड़ा मुश्किल है। कुछ ऑनलाइन विक्रेता भी इसकी बिक्री करते हैं। डेयरी ब्रांड अमूल के मालिक गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड ने जनवरी 2019 में गुजरात के चुनिंदा बाजारों में ऊंटनी का दूध लॉन्च किया है। यह दूध 'अमूल कैमल मिल्क' के नाम से अहमदाबाद, गांधीनगर और कच्छ में उपलब्ध होगा।

नोट: यह लेख ऊंट के दूध के बारे में केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है और ऊंट के दूध के पक्ष में कोई चिकित्सा दावा नहीं करता। इसे चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। इस लेख का उद्देश्य किसी भी बीमारी का निदान, उपचार या इलाज करना नहीं है।

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