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जीभ पर सफेद परत कई वजहों से जमती है, जैसे मुंह से बदबू आना, मुंह का सूखना आदि। अगर कोई शराब और तम्बाकू खाता है, तो उसे यह समस्या होने की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा हृदय संबंधी समस्या और बुखार होने पर भी मुंह में सफ़ेद परत जम सकती है। इतना ही नहीं जीभ पर सफेद परत होना कई अन्य गंभीर समस्याओं की ओर भी इशारा करता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि जीभ में सफेद परत जमने पर किस तरह की बीमारी होने की आशंका बढ़ सकती है।

ओरल थ्रश

यह एक तरह का मुंह में होने वाला संक्रमण है, जो कैंडीडा फंगस के कारण होता है। स्वस्थ इंसान के मुंह, पाचन तंत्र और त्वचा में कम मात्रा में कैंडीडा मौजूद होता है। इसके अलावा शरीर में जो अन्य माइक्रोऑर्गनिज़म यानी सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, वे इसे बढ़ने से रोकते हैं। बहरहाल, बुखार, तनाव, दवाईयों के प्रभाव के कारण यह समस्या हो सकती है। इसके लक्षण के तौर पर मुंह में घाव हो जाता है। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। हालांकि ओरल थ्रश शिशु और बुजुर्गों में ज्यादा होता है। दरअसल जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उन्हें यह समस्या प्रभावित करती है। थ्रश की समस्या एंटीफंगल दवाओं की मदद से 10 से 14 दिनों में ठीक हो जाती है।

ल्यूकोप्लेकिया

यह समस्या होने पर मुंह में नीचे की और गाल में, मसूड़ों और जीभ पर सफेद निशान हो जाते हैं। अगर आप तंबाकू खाते हैं या धूम्रपान करते हैं, तो यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा बहुत ज्यादा शराब पीना भी इस समस्या की एक वजह है। हालांकि मुंह में हुए सफेद निशान किसी तरह का नुक्सान नहीं पहुंचाते। इसके बावजूद यह जरूरी है कि इस समस्या का निदान ढूंढ़ें। दरअसल कुछ मामलों में यानी रेयर मामलों में ल्यूकोप्लेकिया, ओरल कैंसर में बदल जाता है। यही वजह है कि इस समस्या को लेकर लापरवाही सही नहीं है। इससे बचने का आसान उपाय यही है कि आप नियमित डाक्टर के पास जाएं और अपने ओरल हाइजीन का ध्यान रखें। तंबाकू, गुटखा और शराब का सेवन बंद कर दें।

ओरल लाइकेन प्लेनस

जब किसी का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है, तब उसे लाइकेन प्लेनस की समस्या होती है। इसके तहत मुंह और जीभ पर सफेद दाने हो जाते हैं। इसके साथ मसूड़ों में सड़न होने लगती है। मुंह की कंडीशन ज्यादा खराब होने पर डाक्टर स्प्रे दे सकते हैं, जिसे मुंह में हुए सफेद दानों पर लगाया जाता है। इसके अलावा कुल्ला करने की पिल्स दे सकते हैं, जो पानी में घुलता है। इस पानी से डाक्टर के कहे मुताबिक कुल्ला करना होता है। इससे समस्या ठीक हो जाती है।

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जियोग्रेफिकल टंग

जियोग्रेफिकल टंग की समस्या तब होती है जब जीभ पर नई त्वचा आने लगती है। इसमें जीभ की ऊपर की परत इतनी तेजी से उभरती है कि इसकी वजह से जीभ की त्‍वचा लाल पड़ जाती है, जिससे संक्रमण होने का खतरा रहता है। त्वचा के अन्य हिस्‍से बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं और सफेद दिखाई देते हैं। ये समस्‍या अन्‍य अंगों को प्रभावित नहीं करती है।  

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सिफलिस

सिफलिस को उपदंश भी कहा जाता है। यह सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन की वजह से होता है। अगर सिफलिस का सही समय पर इलाज न किया गया मुंह में सफेद दाने हो जाते हैं, जिसे सिफलिटिक ल्यूकोप्लेकिया कहा जाता है। इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। अगर किसी को एक साल से ज्यादा समय से सिफलिस है, तो एंटीबायोटिक का डोज बढ़ा दिया जाता है। आपके लिए बेहतर यही है मुंह में सफेद दाने या परत होने पर बहुत दिनों तक इसके ठीक होने का इंतजार न करें। कुछ दिनों बाद ही डाक्टर से संपर्क करें। वह जांच कर पूरा इलाज करें।

मुंह और जीभ में सफेद परत होने पर लापरवाही करना सही नहीं है। मुंह और जीभ पर सफेद  परत जमने का साफ मतलब है कि आपका स्वास्थ्य सही नहीं है। इसलिए जैसे ही यह समस्या दिखे या इसके लक्षण नजर आने लगे, तो डाक्टर की सलाह लें।

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