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काला गेंहू !! शायद सुनने में थोड़ा अजीब लगता हो कि गेहूं का रंग काला कैसे हो सकता है? यही नहीं, यदि यह काला है तो क्या इसे खा सकते हैं? क्या यह सामान्य गेहूं की तरह ही होता है या इससे अलग? ऐसे सवाल मन में आना सामान्य है, क्योंकि दुनियाभर में अधिकतर भूरे रंग के गेंहू का ही प्रयोग किया जाता है। भूरे गेहूं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के बारे में भी आप जानते ही हैं, शुगर और हृदय रोग इसमें प्रमुख हैं। दूसरी तरफ काला गेहूं पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही कई बीमारियों से लड़ने में भी हमारी मदद करता है। 

भारत में काले गेहूं की खेती पिछले तीन वर्ष से पंजाब में की जा रही है और अब इसे उत्तर प्रदेश में उगाने की तैयारी भी सरकार ने कर ली है। तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है, काला गेहूं?

काला गेहूं क्या है?
काला गेहूं या ब्लैक वीट गेहूं की एक विशेष प्रजाति है। इसमें एंथोसियानिन की मात्रा बहुत अधिक होती है जो कि अनाज के विकास के दौरान विकसित होती है। एंथोसियानिन प्राकृतिक रूप से बनने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट हैं, जो काले गेहूं को फलों जैसी गुणवत्ता प्रदान करते हैं। एंथोसियानिन सामान्य गेहूं में बहुत ही कम मात्रा में पाए जाते हैं। काले गेहूं में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक होती है, इसीलिए इसे हर मौसम में खाया जा सकता है।

काले गेहूं में मौजूद पोषक तत्व

  • अनसेचुरेटेड फैटी एसिड - काले गेहूं में मौजूद इस पोषक तत्व से हृदय रोगों के बचाव में मदद मिलती है।
  • विटामिन - काले गेहूं में विशेषकर विटामिन बी की अधिकता होती है। जिसमें बी1, बी2, बी3, बी5, बी6 और बी9 मुख्य तौर से शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें विटामिन के भी पाया जाता है।
  • खनिज - काले गेहूं में मुख्य तौर पर सेलेनियम, मैग्नीशियम, जिंक, कैल्शियम, आयरन, कॉपर, पोटैशियम और फॉस्फोरस खनिजों की अधिकता होती है।
  • एमिनो एसिड - ब्लैक वीट या काले गेहूं में सभी जरूरी एमिनो अम्ल पाए जाते हैं।

इसके अलावा काले गेहूं में प्रोटीन, फैट, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते हैं।

काले गेहूं से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी फायदे
काले गेहूं में मौजूद पोषक तत्वों के कारण यह कई स्वास्थ्य स्थितियों को दूर रखने में हमारे शरीर की मदद करता है। सामान्य तौर पर प्रयोग किए जाने वाले भूरे गेहूं में ग्लूटेन की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसके अलावा यह मधुमेह, कैंसर और हृदय रोगों में नुकसानदायक होता है। वहीं काला गेहूं इन सभी रोगों के इलाज में सहायक होता है। काला गेहूं पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट भी है। 

काला गेहूं मुख्य तौर पर निम्न स्थितियों में लाभदायी होता है -

हृदय रोग - काले गेहूं में ट्राइग्लिसराइड नामक तत्व होने के कारण यह हृदय रोगों को दूर रखने में मदद करता है। इसके अलावा मैग्नीशियम की प्रचूरता होने के कारण यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सामान्य रखने में सहायक होता है। 

कब्ज - काला गेहूं फाइबर का अच्छा स्रोत है, इसीलिए यह कब्ज को दूर रखने में हमारे शरीर की मदद करता है। फाइबर एसिड रिफ्लेक्स के प्रभावों को कम करके उनकी मात्रा को भी घटाते है। 

हाई कोलेस्ट्रॉल - फाइबर और फैटी एसिड की प्रचुरता के कारण काले गेहूं का लगातार सेवन उच्च कोलेस्ट्रॉल को सामान्य करने में सहायक होता है। इसके अलावा यह वसा की अधिकता के कारण होने वाले हृदय रोगों को दूर करने में भी मदद करता है। 

उच्च रक्त चाप - हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के साथ ही काला गेहूं उच्च रक्त चाप को ठीक करने में भी मदद करता है, क्योंकि हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक सभी पोषकतत्व इसमें पाए जाते हैं। उच्च रक्तचाप में ग्लूटेन युक्त आहार नहीं खाया जा सकता है, ऐसे में ग्लूटेन फ्री काला गेहूं एक बेहतरीन विकल्प है।

मोटापा - अध्ययनों के अनुसार वजन कम करने में प्रोटीन युक्त आहार बहुत सहायक होते हैं। ऐसे में मोटापे को नियंत्रित करने के लिए काला गेहूं बेहद लाभदायी होता है। इसमें अन्य किसी भी मोटे अनाज की तुलना में सबसे कम कैलोरी होती है। 

मधुमेह - काले गेंहू में काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की अधिकता होती है। यह कार्बोहाइड्रेट शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। सामान्य कार्बोहाइड्रेट की तुलना में काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट के पाचन में अधिक समय लगता है, जिससे शरीर में शुगर का स्तर अधिक समय तक स्थिर रहता है। 

मल्टी ग्रेन आटा बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली रागी और जौ में भी काले गेहूं की ही तरह कुछ गुण पाए जाते हैं। काला गेहूं या ब्लैक वीट पोषक तत्वों से भरपूर एक उत्तम आहार है। यह एजिंग की प्रक्रिया को भी धीरे करता है, यानि आप बुढापे को कुछ और समय के लिए टाल सकते हैं। 

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