आयुर्वेद में शरीर की अंदरूनी समस्याओं को दूर करने के लिए क्षीरा धूमम आयुर्वेदिक थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है. इसे कई समस्याओं का इलाज करने में प्रभावी माना गया है. वात दोष असंतुलन, फेशियल पैरालिसिस, बंद जबड़े, सिर और गर्दन के विकार जैसी समस्याओं में को दूर करने में क्षीरा धूमम थेरेपी काफी फायदेमंद मानी जाती है.

आज हम इस लेख में क्षीरा धूमम का अर्थ, प्रक्रिया, लाभ, नुकसान, सावधानियां व कीमत के बारे में विस्तार से जानेंगे -

(और पढ़ें - धन्याम्ला धारा के लाभ)

  1. क्या है क्षीरा धूमम?
  2. क्षीरा धूमम प्रक्रिया
  3. क्षीरा धूमम के लाभ
  4. क्षीरा धूमम के नुकसान
  5. क्षीरा धूमम में सावधानियां
  6. क्षीरा धूमम की कीमत
  7. सारांश
क्षीरा धूम के डॉक्टर

क्षीरा धूमम उपचार का मुख्य घटक गाय का दूध होता है. यह आयुर्वेदिक थेरेपी गाय के दूध पर आधारित है और इसलिए कई लोग इसे मिल्क थेरेपी के रूप में भी जानते हैं. इस थेरेपी में गाय के दूध के साथ मिश्रित कई जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जिसे बाद में गर्म किया जाता है और इसके भाप को एक ट्यूब की मदद से व्यक्ति के शरीर पर लगाया जाता है. इस थेरेपी की मदद से शरीर की कई समस्याएं, जैसे - वात दोष, फेशियल पैरालिसिस व बंद जबड़े को ठीक किया जा सकता है.

इस थेरेपी के अधिकतर मामलों में आयुर्वेदिक चिकित्सक पूरे शरीर में भाप का उपयोग करते हैं. वहीं, कुछ मामलों में इसे केवल रोगी के शरीर के प्रभावित हिस्से पर ही लगाया जाता है. सामान्य तौर पर इस थेरेपी की अवधि 45 मिनट की होती है.

क्षीरा धूमम थेरेपी का उपयोग वात दोष को दूर करने के अलावा शरीर में अकड़न, स्पास्टिक डिसऑर्डर, सिरदर्द इत्यादि को दूर करने के लिए किया जाता है. क्षीरा धूमम को एक प्रकार का स्वेदन उपचार माना जाता है, लेकिन इसे धूमम कहा जाता है, क्योंकि इस थेरेपी में भाप को मुंह से अंदर लिया जाता है.

क्षीरा धूमम प्रक्रिया निम्न प्रकार से है-

  • क्षीरा धूमम थेरेपी प्रक्रिया में सबसे पहले रोगी की आंखें कमल की पंखुड़ियों से ढकी जाती हैं. इसके बाद सिर के पिछले हिस्से को एक हल्के कपड़े से बांधा जाता है.
  • क्षीरा धूमम की दवा विशेष जड़ी-बूटियों और गाय के शुद्ध दूध से तैयार किया जाता है, जिसे एक संकीर्ण बर्तन में रखा जाता है. इस बर्तन के मुंह को एक कपड़े से ढका जाता है, जिससे एक ट्यूब जुड़ी हुई होती है. बर्तन से निकलने वाली भाप का उपयोग स्वेदन के लिए किया जाता है. रोगी को सलाह दी जाती है कि वह अपना मुंह खुला रखते हुए धीरे-धीरे भाप को अंदर लें.
  • जब तक यह थेरेपी दी जाती है, तब तक शरीर के बाकी हिस्सों को एक कंबल में ढक दिया जाता है. आमतौर पर इस थेरेपी की अवधि 30 से 45 मिनट तक होती है. थेरेपी खत्म होने पर चेहरे को स्टेराइल कपड़े या टिश्यू पेपर से साफ किया जाता है. यह थेरेपी चिकित्सक के निर्देश या रोगियों की स्थिति के अनुसार करीब सात से 14 दिन तक दी जा सकती है. कुछ मामलों में थेरेपी का दिन घट या बढ़ भी सकता है.

(और पढ़ें - शिरोधारा के फायदे)

क्षीरा धूमम थेरेपी से शरीर की कई परेशानियों को दूर किया जा सकता है. खासतौर पर यह वात दोष व फेशियल पैरालिसिस जैसी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी माना जाता है. इसके अलावा, यह जोड़ों में दर्द, सिर में दर्द, शरीर में ऐंठन और मांसपेशियों की जकड़न को दूर करने में भी असरकारी माना जाता है. इसके अलावा, इससे शरीर को कई अन्य लाभ हो सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में -

  • स्ट्रेस से प्रभावित लोगों के लिए यह थेरेपी काफी मददगार हो सकती है. इस थेरेपी की मदद से आप तनाव को दूर कर सकते हैं. क्षीरा धूमम थेरेपी से स्पीच डिसऑर्डर को दूर करने में मदद मिल सकती है.
  • यह थेरेपी सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से प्रभावित रोगियों के लिए भी लाभकारी हो सकती है.
  • इतना ही नहीं, यह थरेपी मन को शांत करने में भी आपकी मदद कर सकती है.
  • क्षीरा धूमम जैसी आयुर्वेदिक थेरेपी लेने से आपके पूरे शरीर को ताजगी मिलती है. इससे आप काफी लंबे समय तक फ्रेश महसूस कर सकते हैं.

क्षीरा धूमम थेरेपी में प्राकृतिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नुकसान होने का खतरा काफी कम है. हालांकि, कुछ अपवाद और गंभीर परिस्थितियों से प्रभावित लोगों को इससे कुछ नुकसान पहुंच सकता है. जैसे-

(और पढ़ें - पोडिकिजी के फायदे)

क्षीरा धूमम थेरेपी लेने वाले व्यक्तियों को कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है, जिससे उनके शरीर को कोई नुकसान न पहुंच सकें. क्षीरा धूमम में निम्न सावधानियों को बरतने की जरूरत होती है-

  • क्षीरा धूमम थेरेपी करवाते समय शरीर के संवेदनशील अंगों को ठीक से ढकना चाहिए, जिससे स्किन पर जलन की समस्या न हो.
  • इस थेरेपी को लेने से पहले किसी तरह की शारीरिक हैवी गतिविधि न करें. इससे आपको परेशानी हो सकती है.  
  • क्षीरा धूमम थेरेपी लेने के बाद पर्याप्त रूप से आराम करें, ताकि आप अधिक थकान महसूस न करें.
  • इस प्रक्रिया में भाप लेते समय अपने मुंह को अच्छे से खोलकर रखें, ताकि आपके शरीर को पूर्ण लाभ हो सके.

क्षीरा धूमम थेरेपी को सरकारी और प्राइवेट आयुर्वेदिक केंद्रों में लिया जा सकता है. सरकारी केंद्रों पर इसकी शुरुआती कीमत 400 रुपये प्रति सेशन हो सकती है. वहीं, प्राइवेट केंद्रों पर इसकी शुरुआती कीमत 600 रुपये प्रति सेशन हो सकती है. इस थेरेपी की कीमत हर राज्य और केंद्र पर अलग-अलग हो सकती है. इसलिए, इस थेरेपी की सही कीमत क्या है, इसके बारे में आपको केंद्रों पर ही पता चल सकता है.

(और पढ़ें - पंचकर्म के फायदे)

क्षीरा धूमम एक विशेष आयुर्वेदिक थेरेपी है, जिसके माध्यम से शरीर की कई समस्याएं, जैसे- सिर दर्द, बंद जबड़े, स्पीच डिसऑर्डर व तनाव जैसी कई तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है. इस थेरेपी की पूर्ण प्रक्रिया को नियमित अवधि तक लेने से मानसिक और शारीरिक समस्याएं दूर हो सकती हैं. हालांकि, यह आयुर्वेद की विशेष थेरेपी है, इसलिए इसको लेने से पहले अपनी प्राथमिक जांच करवाएं. साथ ही अगर आपको पहले से ही कोई समस्या है, तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक को इसके बारे में बताएं, ताकि आपको उचित सलाह मिल सके.

Dr. Anil Sharma

Dr. Anil Sharma

आयुर्वेद
8 वर्षों का अनुभव

Dr. Prerna Choudhary

Dr. Prerna Choudhary

आयुर्वेद
6 वर्षों का अनुभव

Dr. pawan kumar

Dr. pawan kumar

आयुर्वेद
17 वर्षों का अनुभव

Dr. Shubhi Goel

Dr. Shubhi Goel

आयुर्वेद
6 वर्षों का अनुभव

सम्बंधित लेख

पिचू

Dr. Laxmidutta Shukla
BAMS,MD
46 वर्षों का अनुभव

नस्य चिकित्सा

Dr. Laxmidutta Shukla
BAMS,MD
46 वर्षों का अनुभव

नेत्र तर्पण

Dr. Laxmidutta Shukla
BAMS,MD
46 वर्षों का अनुभव
ऐप पर पढ़ें